भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: स्थापना, उदारवादी और उग्रवादी चरण – 100 One-liners

I. कांग्रेस की स्थापना (Foundation) II. उदारवादी चरण (Moderate Phase: 1885-1905) III. उग्रवादी चरण (Extremist Phase: 1905-1919) IV. महत्वपूर्ण अधिवेशन और घटनाएं V. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य कांग्रेस के अन्य महत्वपूर्ण अधिवेशन और महिला योगदान क्रांतिकारी विचारधारा और संगठन 📖 मास्टर पेज (Modern History) ← पिछला पेज (सुधार आंदोलन) अगला पेज (गांधीवादी युग) → 🏠 Home … Read more

सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन: राजा राममोहन राय, आर्य समाज और प्रमुख संस्थाएं – 100 One-liners

I. राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज II. स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज III. स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन IV. प्रार्थना समाज और ज्योतिबा फुले V. थियोसोफिकल सोसाइटी और एनी बेसेंट VI. मुस्लिम सुधार आंदोलन VII. अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएं और समाज सुधारक 📖 मास्टर पेज (Modern History) ← पिछला पेज (1857 का महान विद्रोह) … Read more

1857 का महान विद्रोह: कारण, केंद्र, नेता व परिणाम | 100 One Liner Notes

1857 का महान विद्रोह 1857 का महान विद्रोह भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इसे विभिन्न इतिहासकारों ने सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny), 1857 का विद्रोह, प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (First War of Independence) तथा महान राष्ट्रीय विद्रोह (Great Revolt) जैसे नामों से संबोधित किया है। यह विद्रोह 10 मई 1857 को … Read more

भारतीय राज्यों का ब्रिटिश विलय: अवध, सिंध, पंजाब और हैदराबाद – 100 One-liners

परिचय 18वीं शताब्दी के मध्य तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत में व्यापार करना था। लेकिन 1757 के प्लासी के युद्ध और 1764 के बक्सर के युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद कंपनी ने धीरे-धीरे भारत में अपना राजनीतिक और सैन्य विस्तार प्रारम्भ कर दिया। अगले लगभग सौ वर्षों में अंग्रेज़ों … Read more

आंग्ल-मैसूर और आंग्ल-मराठा युद्ध | प्रमुख युद्ध, संधियाँ और परिणाम UPSC PDFNOTES

आंग्ल-मैसूर और आंग्ल-मराठा युद्ध: महत्वपूर्ण युद्ध एवं संधियाँ भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार का इतिहास केवल व्यापार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अनेक युद्धों, राजनीतिक संघर्षों और संधियों से होकर गुजरा। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब मुगल साम्राज्य का पतन प्रारम्भ हुआ, तब भारत में कई क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरकर सामने आईं। इनमें … Read more

ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था: स्थायी, रैयतवाड़ी और महलवाड़ी बंदोबस्त – UPSC, SCC, Notes

ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की कृषि व्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन भू-राजस्व व्यवस्था (Land Revenue System) के माध्यम से किया गया। ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारतीय किसानों का विकास करना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक भूमि कर (लगान) वसूलकर अपने राजस्व में वृद्धि करना था। इसी उद्देश्य से अंग्रेज़ों … Read more

अंग्रेजों की बंगाल विजय | प्लासी एवं बक्सर का युद्ध | PDF Notes

अंग्रेजों की बंगाल विजय अंग्रेजों की बंगाल विजय भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। 18वीं शताब्दी के मध्य तक मुगल साम्राज्य कमजोर हो चुका था और विभिन्न प्रांतों के नवाब लगभग स्वतंत्र रूप से शासन कर रहे थे। बंगाल उस समय भारत का सबसे समृद्ध प्रांत था, इसलिए अंग्रेज़ी … Read more

प्लासी और बक्सर का युद्ध (1757–1764): कारण, घटनाएँ, परिणाम | UPSC, SSC Notes

परिचय 18वीं शताब्दी के मध्य तक भारत में मुगल साम्राज्य का प्रभाव तेजी से कमजोर हो चुका था। विभिन्न प्रांतों के नवाब और शासक लगभग स्वतंत्र रूप से शासन करने लगे थे। इसी समय अंग्रेज़ी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनियाँ भारत में व्यापार के साथ-साथ राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रही थीं। बंगाल उस … Read more

फ्रांसीसी और कर्नाटक युद्ध (1746–1763): कारण, तीनों युद्ध, परिणाम एवं परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

🇫🇷 फ्रांसीसी और कर्नाटक युद्ध (1746–1763) भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन के बाद व्यापारिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई। 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के आगमन के बाद डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी भी भारत पहुँचे। प्रारम्भ में इन सभी का उद्देश्य केवल व्यापार करना था, लेकिन समय के साथ व्यापारिक हित राजनीतिक महत्वाकांक्षा में बदल गए। … Read more

भारत में पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों का आगमन: इतिहास, तुलना, महत्वपूर्ण तथ्य एवं PDF Notes

पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों का भारत आगमन 15वीं शताब्दी के अंत तक भारत अपने मसालों (Spices), रेशम (Silk), सूती वस्त्र (Cotton Textiles), नील (Indigo) तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के कारण विश्व व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका था। उस समय यूरोप के देशों को इन वस्तुओं की भारी आवश्यकता थी, लेकिन भारत और यूरोप के … Read more