अंग्रेजों की बंगाल विजय
अंग्रेजों की बंगाल विजय भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। 18वीं शताब्दी के मध्य तक मुगल साम्राज्य कमजोर हो चुका था और विभिन्न प्रांतों के नवाब लगभग स्वतंत्र रूप से शासन कर रहे थे। बंगाल उस समय भारत का सबसे समृद्ध प्रांत था, इसलिए अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहाँ अपना राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव स्थापित करने की योजना बनाई।
अंग्रेजों की बंगाल विजय
1757 से 1765 तक की घटनाओं ने भारत में ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव रखी। प्लासी का युद्ध, बक्सर का युद्ध और इलाहाबाद की संधि ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एक व्यापारिक संस्था से भारत की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बना दिया।
प्लासी का युद्ध
23 जून 1757 को प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला की पराजय हुई तथा मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया गया।
बक्सर का युद्ध
22 अक्टूबर 1764 को अंग्रेजों ने मीर क़ासिम, शुजाउद्दौला तथा शाह आलम द्वितीय के संयुक्त गठबंधन को पराजित किया।
इलाहाबाद की संधि
12 अगस्त 1765 को हुई संधि के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई।
राजनीतिक नियंत्रण
बंगाल की वास्तविक सत्ता अंग्रेजों के हाथों में आ गई।
आर्थिक शक्ति
दीवानी अधिकार मिलने के बाद कंपनी भारत की सबसे धनी संस्था बन गई।
प्रशासनिक अधिकार
राजस्व वसूली और प्रशासन पर अंग्रेजों का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया।
सैन्य श्रेष्ठता
भारतीय राज्यों की तुलना में अंग्रेजों की सैन्य शक्ति अधिक मजबूत हो गई।
ब्रिटिश साम्राज्य
भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की वास्तविक स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
ऐतिहासिक महत्व
अंग्रेजों की बंगाल विजय ने पूरे भारत पर ब्रिटिश शासन की नींव रखी।
Quick Revision
1757→ प्लासी का युद्ध
1764→ बक्सर का युद्ध
1765→ इलाहाबाद की संधि
परिणाम :अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई तथा भारत में ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव रखी गई।
इस प्रक्रिया की शुरुआत 23 जून 1757 को हुए प्लासी के युद्ध से हुई। इस युद्ध में अंग्रेज़ों ने नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया और मीर जाफ़र को बंगाल का नवाब बनाया। यद्यपि मीर जाफ़र नवाब थे, लेकिन वास्तविक सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों में चली गई। इस प्रकार अंग्रेज़ों को पहली बार किसी भारतीय राज्य के प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करने का अवसर मिला।
इसके बाद कंपनी ने अपने हितों के अनुसार कार्य करने वाले शासकों को स्थापित करने की नीति अपनाई। जब मीर जाफ़र कंपनी की बढ़ती माँगों को पूरा नहीं कर सके, तो उन्हें हटाकर मीर क़ासिम को नवाब बनाया गया। मीर क़ासिम ने प्रशासनिक सुधार किए और अंग्रेज़ों के विशेष व्यापारिक अधिकारों का विरोध किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच संघर्ष बढ़ गया।
इस संघर्ष का परिणाम 22 अक्टूबर 1764 को हुए बक्सर के युद्ध के रूप में सामने आया। इस युद्ध में अंग्रेज़ों ने मीर क़ासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के संयुक्त गठबंधन को पराजित कर दिया। यह विजय प्लासी की तुलना में अधिक निर्णायक सिद्ध हुई क्योंकि इससे अंग्रेज़ों की शक्ति केवल बंगाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे उत्तर भारत में स्थापित हो गई।
बक्सर के युद्ध के बाद 1765 में इलाहाबाद की संधि हुई। इस संधि के अंतर्गत मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्रदान की। दीवानी अधिकार मिलने के बाद कंपनी को इन क्षेत्रों से राजस्व (लगान) वसूलने का अधिकार प्राप्त हो गया। इससे कंपनी आर्थिक रूप से अत्यंत सशक्त हो गई और भारत में उसके राजनीतिक शासन की वास्तविक शुरुआत हुई।
अंग्रेज़ों ने इसके बाद द्वैध शासन (Dual Government) की व्यवस्था लागू की, जिसमें राजस्व संग्रह का अधिकार कंपनी के पास था, जबकि प्रशासन की औपचारिक जिम्मेदारी नवाब के पास बनी रही। इस व्यवस्था से बंगाल का प्रशासन कमजोर हुआ और अंग्रेज़ों का नियंत्रण लगातार बढ़ता गया।
अंग्रेजों की बंगाल विजय का महत्व
- बंगाल में अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक सत्ता स्थापित हुई।
- भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की मजबूत नींव पड़ी।
- कंपनी को अपार आर्थिक संसाधन और राजस्व प्राप्त हुआ।
- मुगल सम्राट का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया।
- अंग्रेज़ों का उत्तर भारत में विस्तार तेज़ी से बढ़ा।
- आगे चलकर भारत के अधिकांश भाग पर ब्रिटिश शासन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
अंग्रेजों की बंगाल विजय का महत्व
बंगाल विजय ने भारत के राजनीतिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक इतिहास को पूरी तरह बदल दिया। इस विजय के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी एक व्यापारिक संस्था से भारत की सबसे शक्तिशाली शासक शक्ति बन गई।
राजनीतिक प्रभुत्व
बंगाल पर अधिकार मिलने के बाद अंग्रेज़ों की राजनीतिक शक्ति तेजी से बढ़ी और भारतीय शासकों का प्रभाव कमजोर पड़ने लगा।
आर्थिक समृद्धि
बंगाल, बिहार और उड़ीसा से प्राप्त राजस्व ने ईस्ट इंडिया कंपनी को आर्थिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली बना दिया।
प्रशासनिक नियंत्रण
दीवानी अधिकार प्राप्त होने के बाद प्रशासन और कर व्यवस्था पर अंग्रेज़ों का प्रभाव स्थापित हो गया।
सैन्य श्रेष्ठता
बंगाल की आय से अंग्रेज़ों ने अपनी सेना को सुदृढ़ बनाया और अन्य भारतीय राज्यों पर विजय प्राप्त की।
ब्रिटिश साम्राज्य की नींव
बंगाल विजय ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थायी स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
ऐतिहासिक महत्व
आधुनिक भारतीय इतिहास में बंगाल विजय को ब्रिटिश शासन की वास्तविक शुरुआत माना जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्लासी (1757) ने अंग्रेज़ों को राजनीतिक प्रवेश दिलाया, जबकि बक्सर (1764) और इलाहाबाद की संधि (1765) ने उन्हें वैधानिक एवं आर्थिक अधिकार प्रदान किए। यही घटनाएँ अंग्रेज़ों की बंगाल विजय को पूर्ण बनाती हैं।
ब्लैक होल की घटना एवं अलीनगर की संधि
बंगाल में अंग्रेज़ों और सिराजुद्दौला के बीच बढ़ते संघर्ष के दौरान ब्लैक होल की घटना तथा अलीनगर की संधि दो महत्वपूर्ण घटनाएँ थीं, जिन्होंने अंततः प्लासी के युद्ध (1757) का मार्ग प्रशस्त किया।
ब्लैक होल की घटना
- 20 जून 1756 को सिराजुद्दौला ने फोर्ट विलियम (कलकत्ता) पर अधिकार कर लिया।
- अंग्रेज़ों के अनुसार लगभग 146 लोगों को एक छोटे कमरे में बंद किया गया।
- कई कैदियों की दम घुटने से मृत्यु होने का दावा किया गया।
- आधुनिक इतिहासकार इस घटना के विवरण को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया मानते हैं।
- अंग्रेज़ों ने इसी घटना को बंगाल पर आक्रमण का प्रमुख बहाना बनाया।
अलीनगर की संधि
- 9 फ़रवरी 1757 को सिराजुद्दौला और अंग्रेज़ों के बीच यह संधि हुई।
- कलकत्ता का नाम पुनः अंग्रेज़ों को वापस मिला।
- मुगल सम्राट द्वारा दिए गए व्यापारिक अधिकार स्वीकार किए गए।
- अंग्रेज़ों को किलेबंदी (Fortification) की अनुमति दी गई।
- यह संधि कुछ ही महीनों बाद प्लासी के युद्ध का आधार बनी।
Exam Point
ब्लैक होल की घटना (1756) को अंग्रेज़ों ने सैन्य कार्रवाई का आधार बनाया, जबकि अलीनगर की संधि (1757) ने अस्थायी शांति स्थापित की। लेकिन दोनों घटनाओं के कुछ ही महीनों बाद 23 जून 1757 को प्लासी का युद्ध हुआ।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
I. बंगाल के नवाब और प्रारंभिक संघर्ष
- औरंगजेब ने 1700 ई. में बंगाल का दीवान किसे नियुक्त किया था? – मुर्शिद कुली खान।
- बंगाल का वह नवाब कौन था जिसने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद बनाई? – मुर्शिद कुली खान।
- मुर्शिद कुली खान के बाद बंगाल का नवाब कौन बना? – सुजाउद्दीन (उसका दामाद)।
- गिरिया का युद्ध (1740) किनके बीच हुआ था? – अलीवर्दी खान और सरफराज खान।
- किस नवाब ने मुगलों को राजस्व (कर) देना बंद कर दिया था? – अलीवर्दी खान।
- “यूरोपीय लोग मधुमक्खियों के समान हैं” – यह प्रसिद्ध कथन किसका है? – अलीवर्दी खान।
- सिराजुद्दौला बंगाल का नवाब कब बना? – 1756 ई.।
- सिराजुद्दौला की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी कौन थी? – घसीटी बेगम (उसकी मौसी)।
- अंग्रेजों ने सिराजुद्दौला की अनुमति के बिना कहाँ किलेबंदी शुरू की? – फोर्ट विलियम (कलकत्ता)।
- सिराजुद्दौला ने कलकत्ता पर आक्रमण कर उसे कब जीता? – 15 जून 1756।
II. ब्लैक होल और अलीनगर की संधि
- ‘ब्लैक होल’ की घटना किस तारीख को हुई थी? – 20 जून 1756।
- ब्लैक होल घटना का प्रमुख चश्मदीद गवाह कौन था? – जे. जेड. हॉलवेल।
- हॉलवेल के अनुसार कालकोठरी में कितने लोगों की दम घुटने से मौत हुई थी? – 123 लोग।
- कलकत्ता की हार की खबर मिलने पर मद्रास से किसे भेजा गया? – रॉबर्ट क्लाइव और एडमिरल वॉटसन।
- क्लाइव ने कलकत्ता पर दोबारा अधिकार कब किया? – जनवरी 1757।
- अलीनगर की संधि कब हुई थी? – 9 फरवरी 1757।
- अलीनगर की संधि किसके बीच हुई? – सिराजुद्दौला और रॉबर्ट क्लाइव।
- किस संधि ने अंग्रेजों को कलकत्ता की किलेबंदी और सिक्के ढालने का अधिकार दिया? – अलीनगर की संधि।
- सिराजुद्दौला ने अलीनगर नाम किसका रखा था? – कलकत्ता का।
- क्लाइव ने सिराजुद्दौला के विरुद्ध साजिश रचने के लिए किससे हाथ मिलाया? – मीर जाफर, जगत सेठ और राय दुर्लभ।
III. प्लासी का युद्ध (23 जून 1757)
- प्लासी का युद्ध किस नदी के किनारे लड़ा गया? – भागीरथी नदी।
- प्लासी का मैदान पश्चिम बंगाल के किस जिले में स्थित है? – नदिया जिला।
- प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला का प्रधान सेनापति कौन था? – मीर जाफर।
- सिराजुद्दौला के वे दो वफादार सेनापति कौन थे जो युद्ध में मारे गए? – मीर मदान और मोहन लाल।
- प्लासी के युद्ध के दौरान मुगल सम्राट कौन था? – आलमगीर द्वितीय।
- प्लासी के युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव की सेना में कुल कितने सैनिक थे? – लगभग 3,200।
- सिराजुद्दौला की हार के बाद उसे किसने पकड़ा था? – मोहम्मद अली बेग ने।
- सिराजुद्दौला की हत्या किसने की? – मीर जाफर के पुत्र मीरन ने।
- किस युद्ध ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की “नींव” रखी? – प्लासी का युद्ध।
- प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों ने किसे बंगाल का नवाब बनाया? – मीर जाफर (1757-1760)।
IV. मीर जाफर और मीर कासिम का शासन
- मीर जाफर ने अंग्रेजों को भेंट स्वरूप क्या दिया? – 24 परगना की जमींदारी।
- ‘क्लाइव का गीदड़’ (Jackal of Clive) किसे कहा जाता था? – मीर जाफर को।
- मीर जाफर को हटाकर अंग्रेजों ने किसे नवाब बनाया? – मीर कासिम (1760)।
- मीर कासिम ने अंग्रेजों को किन तीन जिलों की दीवानी दी? – बर्दवान, मिदनापुर और चटगांव।
- मीर कासिम ने अपनी राजधानी कहाँ बदली? – मुर्शिदाबाद से मुंगेर।
- मुंगेर में तोप और बंदूकों का कारखाना किसने लगाया? – मीर कासिम।
- मीर कासिम ने अपनी सेना को किस पद्धति पर ढाला? – यूरोपीय/आर्मीनियाई पद्धति।
- मीर कासिम और अंग्रेजों के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या थी? – दस्तक का दुरुपयोग।
- मीर कासिम ने सभी व्यापारियों के लिए आंतरिक शुल्क कब समाप्त किया? – 1762 ई.।
- अंग्रेजों ने जुलाई 1763 में मीर कासिम को हटाकर दोबारा किसे नवाब बनाया? – मीर जाफर।
V. बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764)
- बक्सर के युद्ध के समय बंगाल का नवाब कौन था? – मीर जाफर।
- बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों का मुकाबला किस “त्रिगुट” से था? – मीर कासिम, शुजाउद्दौला (अवध) और शाह आलम द्वितीय (मुगल सम्राट)।
- बक्सर के युद्ध में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया? – हेक्टर मुनरो।
- बक्सर वर्तमान में किस राज्य में स्थित है? – बिहार।
- किस युद्ध ने भारत में ब्रिटिश सत्ता को “निर्णायक” रूप से स्थापित किया? – बक्सर का युद्ध।
- बक्सर के युद्ध में त्रिगुट सेना की संख्या कितनी थी? – लगभग 40,000 से 50,000।
- बक्सर के युद्ध के समय दिल्ली का शासक कौन था? – शाह आलम द्वितीय।
- हार के बाद मीर कासिम कहाँ भाग गया? – उत्तर-पश्चिम सीमा की ओर (जहाँ उसकी 1777 में मृत्यु हुई)।
- बक्सर के युद्ध के समय कंपनी का गवर्नर कौन था? – वेन्सिटार्ट।
- किस इतिहासकार ने कहा कि ‘प्लासी की तुलना में बक्सर का युद्ध अधिक महत्वपूर्ण था’? – सर जेम्स स्टीफन।
VI. इलाहाबाद की संधियाँ और दीवानी अधिकार
- इलाहाबाद की पहली संधि कब हुई? – 12 अगस्त 1765।
- पहली संधि किनके बीच हुई? – रॉबर्ट क्लाइव और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय।
- किस संधि के द्वारा कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा के दीवानी अधिकार मिले? – इलाहाबाद की पहली संधि।
- शाह आलम द्वितीय को वार्षिक कितनी पेंशन दी गई? – 26 लाख रुपये।
- इलाहाबाद की दूसरी संधि कब हुई? – 16 अगस्त 1765।
- दूसरी संधि किनके बीच हुई? – क्लाइव और अवध के नवाब शुजाउद्दौला।
- अवध के नवाब ने कंपनी को हर्जाने के तौर पर कितने रुपये दिए? – 50 लाख रुपये।
- अंग्रेजों ने शाह आलम को अवध के कौन से दो जिले दिए? – कड़ा और इलाहाबाद।
- इलाहाबाद की संधि के बाद बंगाल का शासन किसने संभाला? – रॉबर्ट क्लाइव।
- दीवानी अधिकार मिलने का अर्थ क्या था? – राजस्व वसूलने का कानूनी अधिकार।
VII. बंगाल में द्वैध शासन (1765-1772)
- बंगाल में द्वैध शासन की शुरुआत किसने की? – रॉबर्ट क्लाइव।
- द्वैध शासन में ‘दीवानी’ अधिकार किसके पास थे? – ईस्ट इंडिया कंपनी।
- द्वैध शासन में ‘निजामत’ (प्रशासन) किसके पास था? – बंगाल के नवाब के पास।
- क्लाइव ने बंगाल का उप-दीवान किसे बनाया? – मुहम्मद रज़ा खान।
- बिहार का उप-दीवान किसे नियुक्त किया गया? – राजा शिताब राय।
- उड़ीसा का उप-दीवान कौन था? – राय दुर्लभ।
- द्वैध शासन के दौरान बंगाल की जनता की स्थिति कैसी थी? – अत्यंत दयनीय (लूट का काल)।
- द्वैध शासन को ‘डाकुओं का राज्य’ किसने कहा? – के. एम. पणिक्कर।
- द्वैध शासन को किसने समाप्त किया? – वॉरन हेस्टिंग्स (1772)।
- वॉरन हेस्टिंग्स ने सत्ता संभालते ही नवाब के साथ क्या किया? – नवाब की पेंशन बंद कर दी और शासन अपने हाथ में ले लिया।
VIII. प्रशासनिक विजय और संस्थागत विकास
- अंग्रेजों ने बंगाल में पहली बार टकसाल (Mint) कहाँ स्थापित की? – कलकत्ता (1757)।
- किस नवाब ने अंग्रेजों को दस्तक का अधिकार देने से इनकार कर दिया था? – मीर कासिम।
- बंगाल के अंतिम नवाब का नाम क्या था? – मुबारकउद्दौला।
- मुबारकउद्दौला को ‘छाया मात्र नवाब’ (Phantom Nawab) किसने कहा था? – वॉरन हेस्टिंग्स।
- बंगाल में ‘दीवानी’ और ‘निजामत’ को अलग करने वाली व्यवस्था क्या कहलाती थी? – द्वैध शासन।
- रॉबर्ट क्लाइव ने किस वर्ष आत्महत्या की थी? – 1774 ई.।
- बंगाल के किस नवाब ने यूरोपीय शक्तियों की तुलना ‘मधुमक्खी’ से की? – अलीवर्दी खान।
- ‘स्वर्ग से उतरा सेनापति’ किसे कहा जाता है? – रॉबर्ट क्लाइव।
- अंग्रेजों ने मुर्शिदाबाद से सरकारी खजाना कहाँ शिफ्ट किया? – कलकत्ता।
- 1770 के बंगाल के भीषण अकाल के समय गवर्नर कौन था? – कार्टियर।
IX. युद्धों का परिणाम और प्रभाव
- प्लासी के युद्ध ने अंग्रेजों को किस रूप में स्थापित किया? – बंगाल के किंग-मेकर के रूप में।
- बक्सर के युद्ध ने अंग्रेजों को किस रूप में स्थापित किया? – उत्तर भारत की सर्वोच्च शक्ति के रूप में।
- दीवानी मिलने के बाद कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी? – भारतीय धन से भारतीय माल खरीदना शुरू करना।
- अंग्रेजों ने बंगाल विजय के बाद किस भारतीय राज्य को “बफर स्टेट” बनाया? – अवध को।
- बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी का मुख्य केंद्र कौन सा शहर बन गया? – कलकत्ता।
- मीर जाफर की मृत्यु किस वर्ष हुई थी? – 1765 ई.।
- क्लाइव ने बंगाल में ‘सफेद विद्रोह’ (White Mutiny) का सामना कब किया? – 1766 में (दोहरा भत्ता बंद करने पर)।
- बंगाल के नवाबों का सही कालानुक्रम क्या है? – मुर्शिद कुली > सुजाउद्दीन > सरफराज > अलीवर्दी > सिराजुद्दौला > मीर जाफर > मीर कासिम।
- ‘1760 की क्रांति’ का श्रेय किसे दिया जाता है? – वेन्सिटार्ट को (मीर जाफर की जगह मीर कासिम को लाने के लिए)।
- मीर कासिम ने किस विदेशी सेनापति को मुंगेर में नियुक्त किया था? – समरू (वॉल्टर रेनहार्ट)।
X. महत्वपूर्ण विविध तथ्य
- किस मुगल सम्राट ने क्लाइव को ‘सईफ जंग’ की उपाधि दी थी? – शाह आलम द्वितीय।
- अंग्रेजों को दीवानी अधिकार दिलाने में किस फारसी लेखक ने मुख्य भूमिका निभाई? – ऐतमादुद्दौला।
- 1765 की संधि के समय क्लाइव के साथ कौन सा प्रसिद्ध अनुवादक था? – इतशामुद्दीन।
- प्लासी के युद्ध के समय बंगाल का दीवान कौन था? – राय दुर्लभ।
- सिराजुद्दौला के विरुद्ध ‘जगत सेठ’ कौन था? – एक प्रभावशाली जैन बैंकर।
- अंग्रेजों ने मीर जाफर को दोबारा नवाब बनाने के लिए कितनी रिश्वत ली थी? – भारी भरकम राशि (लाखों पाउंड)।
- बक्सर के युद्ध के बाद मुगल सम्राट अंग्रेजों का क्या बन गया? – आश्रित या कैदी।
- बंगाल की विजय ने अंग्रेजों को दक्षिण भारत के युद्धों (मैसूर और मराठा) के लिए क्या प्रदान किया? – अपार धन और संसाधन।
- रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का गवर्नर दूसरी बार कब बना? – 1765 से 1767 तक।
- अंग्रेजों की बंगाल विजय का अंतिम उद्देश्य क्या था? – भारत के संसाधनों का अधिकतम दोहन।
