परिचय
18वीं शताब्दी के मध्य तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत में व्यापार करना था। लेकिन 1757 के प्लासी के युद्ध और 1764 के बक्सर के युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद कंपनी ने धीरे-धीरे भारत में अपना राजनीतिक और सैन्य विस्तार प्रारम्भ कर दिया। अगले लगभग सौ वर्षों में अंग्रेज़ों ने युद्ध, संधियों, कूटनीति और विभिन्न औपनिवेशिक नीतियों के माध्यम से अधिकांश भारतीय राज्यों को अपने अधीन कर लिया।
भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार किसी एक नीति या युद्ध का परिणाम नहीं था। अंग्रेज़ों ने परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग भारतीय राज्यों का ब्रिटिश विलय के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ अपनाईं। कहीं सहायक संधि (Subsidiary Alliance) लागू की गई, कहीं व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) का प्रयोग हुआ, तो कहीं कुशासन (Misgovernment) का आरोप लगाकर राज्य का विलय कर लिया गया। कुछ राज्यों को सीधे युद्ध में हराकर अंग्रेज़ी साम्राज्य में मिला लिया गया।
इसी विस्तारवादी नीति के अंतर्गत सिंध, पंजाब और अवध जैसे शक्तिशाली राज्यों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय हुआ। दूसरी ओर हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा देशी राज्य होने के बावजूद ब्रिटिश भारत में प्रत्यक्ष रूप से विलय नहीं किया गया, बल्कि उसे सहायक संधि के माध्यम से अंग्रेज़ी प्रभाव में रखा गया। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में “ब्रिटिश विलय” के संदर्भ में हैदराबाद का अध्ययन विशेष महत्व रखता है।
ब्रिटिश विस्तारवाद की पृष्ठभूमि
1757 से पहले अंग्रेज़ों की भूमिका मुख्यतः एक व्यापारिक कंपनी की थी। लेकिन बंगाल की आर्थिक समृद्धि पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद उनकी महत्वाकांक्षा बढ़ने लगी।
ब्रिटिश विस्तार के प्रमुख उद्देश्य थे—
- भारत के संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना।
- व्यापारिक एकाधिकार बनाए रखना।
- फ्रांसीसी और अन्य यूरोपीय शक्तियों को भारत से बाहर करना।
- भारतीय राज्यों को कमजोर करके राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करना।
- साम्राज्य के लिए सुरक्षित सीमाएँ बनाना।
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अंग्रेज़ों ने केवल सैन्य शक्ति पर ही निर्भर नहीं किया, बल्कि राजनीतिक चालाकी, कूटनीति और कानूनी प्रावधानों का भी व्यापक उपयोग किया।
भारतीय राज्यों के विलय के प्रमुख साधन
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने विभिन्न भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने के लिए अनेक नीतियाँ अपनाईं। प्रत्येक नीति का उद्देश्य अलग था, लेकिन अंतिम परिणाम एक ही था—ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार।
सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
इस नीति का प्रारम्भ लॉर्ड वेलेजली (1798–1805) ने किया।
इसके अंतर्गत—
- भारतीय राज्य में अंग्रेज़ी सेना रखी जाती थी।
- सेना का खर्च संबंधित राज्य को उठाना पड़ता था।
- राज्य किसी अन्य शक्ति से अंग्रेज़ों की अनुमति के बिना संधि नहीं कर सकता था।
- विदेश नीति पर अंग्रेज़ों का नियंत्रण स्थापित हो जाता था।
इस नीति के कारण कई भारतीय राज्य बिना युद्ध के ही अंग्रेज़ों के प्रभाव में आ गए।
व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
इस नीति को लॉर्ड डलहौज़ी (1848–1856) ने लागू किया।
यदि किसी देशी राज्य का शासक बिना प्राकृतिक उत्तराधिकारी (जैविक पुत्र) के मर जाता था, तो उसका राज्य अंग्रेज़ी शासन में मिला लिया जाता था। दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता नहीं दी जाती थी।
इसी नीति के आधार पर—
- सतारा
- झाँसी
- नागपुर
- संभलपुर
- जैतपुर
आदि राज्यों का विलय किया गया।
कुशासन का सिद्धांत (Doctrine of Misgovernment)
यदि अंग्रेज़ किसी राज्य के प्रशासन को अयोग्य या भ्रष्ट घोषित कर देते थे, तो वे उसे अपने अधीन कर लेते थे।
इस नीति का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण अवध (1856) है।
प्रत्यक्ष युद्ध (Direct Conquest)
कई राज्यों को सीधे युद्ध में पराजित करके ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल किया गया।
उदाहरण—
- सिंध
- पंजाब
- मैसूर (आंशिक नियंत्रण)
- मराठा राज्य
किन राज्यों का अध्ययन इस अध्याय में करेंगे?
इस अध्याय में हम चार महत्वपूर्ण राज्यों का विस्तृत अध्ययन करेंगे—
सिंध
- अंग्रेज़ों की रुचि क्यों बढ़ी?
- चार्ल्स नेपियर का अभियान
- मियानी और डब्बा का युद्ध
- सिंध का विलय (1843)
पंजाब
- महाराजा रणजीत सिंह का शासन
- रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद की स्थिति
- प्रथम एवं द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध
- पंजाब का विलय (1849)
अवध
- अवध का महत्व
- नवाब वाजिद अली शाह
- कुशासन का आरोप
- 1856 में अवध का विलय
- 1857 की क्रांति पर प्रभाव
हैदराबाद
- निज़ाम राज्य का इतिहास
- सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला प्रमुख राज्य
- अंग्रेज़ों के साथ संबंध
- हैदराबाद का विशेष स्थान
- ब्रिटिश काल में हैदराबाद की राजनीतिक स्थिति
परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय का महत्व
भारतीय राज्यों का ब्रिटिश विलय आधुनिक भारतीय इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। UPSC, SSC, Railway, State PCS, CDS, NDA तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।
विशेष रूप से निम्न विषय बार-बार पूछे जाते हैं—
- सिंध का विलय किसने किया?
- पंजाब कब ब्रिटिश साम्राज्य में मिला?
- अवध का विलय किस गवर्नर-जनरल ने किया?
- व्यपगत सिद्धांत किसने लागू किया?
- सहायक संधि का प्रवर्तक कौन था?
- हैदराबाद ने सहायक संधि कब स्वीकार की?
- 1857 की क्रांति में अवध की क्या भूमिका थी?
इस लेख में आप क्या सीखेंगे?
इस विस्तृत लेख में हम क्रमशः समझेंगे—
- ब्रिटिश विस्तारवाद की नीति
- सिंध का विलय (1843)
- पंजाब का विलय (1849)
- अवध का विलय (1856)
- हैदराबाद और सहायक संधि
- चारों राज्यों की तुलना
- महत्वपूर्ण युद्ध एवं संधियाँ
- परीक्षा के लिए One Page Revision
- Previous Year Questions (PYQ)
- Frequently Asked Questions (FAQ)
- निष्कर्ष
I. सहायक संधि और विलय की शुरुआत (Policy of Annexation)
- भारत में ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) का व्यापक प्रयोग किसने किया? – लॉर्ड वेलेजली।
- सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला भारतीय राज्य कौन सा था? – हैदराबाद (1798)।
- अवध ने अंग्रेजों के साथ सहायक संधि पर हस्ताक्षर कब किए? – 1801 ई.।
- मैसूर और तंजौर ने सहायक संधि कब स्वीकार की? – 1799 ई.।
- पेशवा बाजीराव द्वितीय ने किस संधि के तहत सहायक संधि स्वीकार की? – बेसिन की संधि (1802)।
- सहायक संधि स्वीकार करने वाले अन्य प्रमुख राज्य कौन थे? – भोंसले (1803), सिंधिया (1804), जोधपुर, जयपुर और भरतपुर।
- सहायक संधि का मुख्य प्रावधान क्या था? – राज्य के खर्च पर ब्रिटिश सेना रखना और विदेश नीति अंग्रेजों को सौंपना।
II. अवध का विलय (Annexation of Awadh)
- अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में कब मिलाया गया? – 1856 ई.।
- अवध के विलय के समय वहाँ का नवाब कौन था? – वाजिद अली शाह।
- अवध का विलय किस आधार पर किया गया था? – कुशासन (Mis-governance) का आरोप लगाकर।
- किस अंग्रेज अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अवध का विलय हुआ? – आउट्रम (Outram)।
- अवध के विलय के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड डलहौजी।
- डलहौजी ने अवध के बारे में क्या कहा था? – “यह चेरी (फल) एक दिन हमारे ही मुँह में गिरेगी”।
- अवध को किस रूप में जाना जाता था? – ‘नर्सरी ऑफ बंगाल आर्मी’ (क्योंकि यहाँ के सैनिक ब्रिटिश सेना में अधिक थे)।
- अवध के विलय ने 1857 के विद्रोह की नींव कैसे रखी? – सैनिकों और तालुकेदारों में भारी असंतोष पैदा करके।
III. सिंध का विलय (Annexation of Sindh)
- सिंध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किस वर्ष हुआ? – 1843 ई.।
- सिंध विजय के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड एलेनबरो।
- सिंध विजय का श्रेय किस ब्रिटिश सेनापति को दिया जाता है? – चार्ल्स नेपियर।
- चार्ल्स नेपियर ने सिंध विजय के बाद क्या कहा था? – “हमें सिंध (पाप) करने का कोई अधिकार नहीं था, फिर भी हमने किया”।
- सिंध के शासकों को क्या कहा जाता था? – अमीर।
- अंग्रेजों ने सिंध पर अधिकार किस डर से किया था? – रूस के बढ़ते प्रभाव और अफगान युद्ध की सुरक्षा के कारण।
IV. पंजाब का विलय (Annexation of Punjab)
- पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किस वर्ष हुआ? – 1849 ई.।
- पंजाब विलय के समय गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड डलहौजी।
- पंजाब के किस सिख महाराजा के समय विलय हुआ? – महाराजा दलीप सिंह।
- प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46) किस संधि से समाप्त हुआ? – लाहौर की संधि।
- द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49) में सिखों की निर्णायक हार कहाँ हुई? – गुजरात का युद्ध (चिनयावाला के पास)।
- पंजाब के विलय के बाद वहाँ के शासन के लिए कितने सदस्यों की परिषद बनी? – तीन सदस्य (लॉरेंस भाई और चार्ल्स मानसेल)।
- प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा दलीप सिंह से लेकर किसे भेजा गया? – महारानी विक्टोरिया को।
- महाराजा दलीप सिंह को पेंशन देकर कहाँ भेज दिया गया? – इंग्लैंड।
V. व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
- ‘व्यपगत का सिद्धांत’ या हड़प नीति किसने शुरू की थी? – लॉर्ड डलहौजी।
- इस नीति के तहत सबसे पहले किस राज्य का विलय हुआ? – सतारा (1848)।
- जैतपुर और संबलपुर का विलय कब हुआ? – 1849 ई.।
- बघाट (हिमाचल प्रदेश) का विलय कब किया गया? – 1850 ई.।
- उदयपुर का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कब हुआ? – 1852 ई.।
- झांसी का विलय डलहौजी ने कब किया? – 1853 ई.।
- नागपुर का विलय किस वर्ष हुआ? – 1854 ई.।
- करौली के विलय को किसने रद्द कर दिया था? – कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने।
- व्यपगत के सिद्धांत का मुख्य तर्क क्या था? – दत्तक पुत्र (Adopted son) को उत्तराधिकारी न मानना।
VI. अन्य राज्यों का विलय और नियंत्रण
- नेपाल (गोरखा) युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ? – सुगौली की संधि (1816)।
- इस संधि के बाद अंग्रेजों को कौन से पर्वतीय क्षेत्र मिले? – गढ़वाल, कुमाऊँ और शिमला।
- प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के बाद कौन सी संधि हुई? – याण्डबू की संधि (1826)।
- लॉर्ड विलियम बेंटिक ने मैसूर का प्रशासन अपने हाथ में कब लिया? – 1831 (कुशासन के आधार पर)।
- बेंटिक ने कूर्ग और कछार का विलय कब किया? – 1834 ई.।
- अंग्रेजों ने सिक्किम का कुछ हिस्सा कब हड़पा? – 1850 ई.।
- बरार का क्षेत्र हैदराबाद के निजाम से क्यों छीना गया? – सैन्य खर्च का कर्ज न चुका पाने के कारण (1853)।
VII. विलय की नीतियों का प्रभाव
- डलहौजी की विस्तारवादी नीति का अंतिम परिणाम क्या था? – 1857 का महाविद्रोह।
- देशी रियासतों के विलय से कौन सा वर्ग सबसे अधिक बेरोजगार हुआ? – सैनिक और दरबारी कर्मचारी।
- किस एक्ट के बाद अंग्रेजों ने रियासतों के विलय की नीति छोड़ दी? – 1858 का भारत सरकार अधिनियम।
- 1858 के बाद ब्रिटिश नीति क्या बनी? – रियासतों को “अधीनस्थ संघ” बनाना (Annexation बंद किया गया)।
- भारतीय राजाओं को ‘गोद लेने का अधिकार’ दोबारा कब मिला? – महारानी की उद्घोषणा (1858) के बाद।
