भारत में पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों का आगमन: इतिहास, तुलना, महत्वपूर्ण तथ्य एवं PDF Notes

पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों का भारत आगमन

15वीं शताब्दी के अंत तक भारत अपने मसालों (Spices), रेशम (Silk), सूती वस्त्र (Cotton Textiles), नील (Indigo) तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के कारण विश्व व्यापार का प्रमुख केंद्र बन चुका था। उस समय यूरोप के देशों को इन वस्तुओं की भारी आवश्यकता थी, लेकिन भारत और यूरोप के बीच होने वाला अधिकांश व्यापार अरब और वेनिस (Venice) के व्यापारियों के नियंत्रण में था। परिणामस्वरूप यूरोपीय देशों को भारतीय वस्तुएँ अत्यधिक महंगी कीमत पर प्राप्त होती थीं।

भारत में पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों का आगमन European Trading Companies in India EUROPE INDIA PORTUGUESE DUTCH BRITISH PDFNOTES.INStudy2Study

इसी समस्या के समाधान के लिए नए समुद्री मार्ग (Sea Route to India) की खोज प्रारम्भ हुई। 1498 ई. में पुर्तगाली नाविक वास्को-डि-गामा (Vasco da Gama) ने अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) को पार करके कालीकट (वर्तमान कोझिकोड, केरल) पहुँचने में सफलता प्राप्त की। यही घटना भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन का प्रारंभिक बिंदु मानी जाती है।

पुर्तगालियों की सफलता के बाद अन्य यूरोपीय शक्तियाँ भी भारत पहुँचीं। सबसे पहले पुर्तगाली, उसके बाद डच, और फिर अंग्रेज भारत में व्यापार करने आए। प्रारंभ में इनका उद्देश्य केवल व्यापार था, लेकिन समय के साथ इन कंपनियों ने अपनी सैन्य शक्ति, कूटनीति तथा राजनीतिक हस्तक्षेप के माध्यम से भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव स्थापित करना शुरू कर दिया। अंततः अंग्रेजों ने भारत में अपना सबसे मजबूत शासन स्थापित किया, जिसने लगभग दो शताब्दियों तक भारतीय इतिहास को प्रभावित किया।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, State PCS, SSC, Railway, NDA, CDS, CUET एवं अन्य एकदिवसीय परीक्षाओं में यूरोपीय कंपनियों के आगमन से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इस अध्याय में हम पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों के भारत आगमन, उनके प्रमुख व्यापारिक केंद्रों, महत्वपूर्ण घटनाओं, उपलब्धियों, असफलताओं तथा तीनों कंपनियों के तुलनात्मक अध्ययन को सरल भाषा में समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?

  • भारत में यूरोपीय कंपनियों के आगमन के प्रमुख कारण।
  • समुद्री मार्ग की खोज और वास्को-डि-गामा का योगदान।
  • पुर्तगालियों, डचों और अंग्रेजों के भारत आगमन का क्रम।
  • तीनों कंपनियों के प्रमुख व्यापारिक केंद्र (Factories) एवं गतिविधियाँ।
  • भारतीय इतिहास पर इन कंपनियों का प्रभाव।
  • परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य, One-Liners और PYQs।

यूरोप से भारत आने के कारण

EUROPEAN ARRIVAL

यूरोप से भारत आने के कारण

15वीं–16वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों ने भारत के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज क्यों की?

🌍

यूरोप

भारत के साथ सीधे व्यापार की इच्छा

💰

आर्थिक कारण

  • मसाले
  • रेशम
  • सूती वस्त्र
  • नील
  • सीधा व्यापार
🕌

अरब एवं वेनिस

  • व्यापार पर एकाधिकार
  • महँगी वस्तुएँ
  • यूरोप को नुकसान
  • मध्यस्थ हटाना

1453 ई.

  • कॉन्स्टेंटिनोपल
  • उस्मानी तुर्क
  • स्थल मार्ग बाधित
  • समुद्री मार्ग की आवश्यकता
🧭

Age of Discovery

  • Compass
  • Ships
  • Maps
  • Navigation
📈

Mercantilism

  • नए व्यापारिक मार्ग
  • उपनिवेश
  • अधिक सोना-चाँदी
  • प्रतिस्पर्धा

धार्मिक कारण

  • ईसाई धर्म का प्रचार
  • Missionaries
  • व्यापार + धर्म
🚢 समुद्री मार्ग की खोज
1498 ई. : वास्को-डि-गामा
भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन

15वीं शताब्दी तक भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था। यहाँ के मसाले, रेशमी वस्त्र, सूती कपड़े, नील, बहुमूल्य रत्न तथा अन्य विलासिता की वस्तुओं की यूरोप में अत्यधिक मांग थी। लेकिन भारत और यूरोप के बीच सीधा समुद्री मार्ग उपलब्ध नहीं था। अधिकांश व्यापार अरब व्यापारियों तथा वेनिस (Venice) के व्यापारियों के माध्यम से होता था, जिसके कारण यूरोपीय देशों को भारतीय वस्तुएँ बहुत अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती थीं।

इसी समस्या से बचने और एशिया के साथ सीधे व्यापार स्थापित करने के उद्देश्य से यूरोपीय देशों ने नए समुद्री मार्गों की खोज प्रारम्भ की। यही खोज आगे चलकर भारत में यूरोपीय कंपनियों के आगमन का प्रमुख कारण बनी।

आर्थिक (Economic) कारण

यूरोप में भारतीय मसालों जैसे काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, इलायची तथा जायफल की अत्यधिक मांग थी। इनके अलावा भारत के सूती एवं रेशमी वस्त्र, नील, चीनी, चाय तथा बहुमूल्य पत्थरों का भी यूरोपीय बाजारों में विशेष महत्व था।

अरब व्यापारियों के माध्यम से व्यापार होने के कारण इन वस्तुओं की कीमत कई गुना बढ़ जाती थी। इसलिए यूरोपीय देशों ने भारत के साथ सीधा व्यापार (Direct Trade) स्थापित करने का निर्णय लिया ताकि उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके।

अरब एवं वेनिस व्यापारियों का एकाधिकार

मध्यकाल में भारत और यूरोप के बीच व्यापार का अधिकांश नियंत्रण अरब व्यापारियों और इटली के वेनिस नगर के व्यापारियों के हाथों में था। वे भारत से वस्तुएँ खरीदकर यूरोप में ऊँचे दामों पर बेचते थे।

यूरोप के देशों को यह व्यवस्था आर्थिक रूप से नुकसानदायक लगती थी। इसलिए वे ऐसे समुद्री मार्ग की तलाश में थे जिससे वे किसी मध्यस्थ के बिना सीधे भारत पहुँच सकें।

कॉन्स्टेंटिनोपल (Constantinople) पर तुर्कों का अधिकार

1453 ई. में उस्मानी तुर्कों (Ottoman Turks) ने कॉन्स्टेंटिनोपल (वर्तमान इस्तांबुल) पर अधिकार कर लिया। इसके बाद यूरोप और एशिया के बीच का पारंपरिक स्थल मार्ग (Land Route) तुर्कों के नियंत्रण में आ गया।

तुर्कों द्वारा भारी कर (Taxes) लगाए जाने तथा व्यापारिक कठिनाइयों के कारण यूरोपीय देशों के लिए पुराने मार्ग से व्यापार करना कठिन हो गया। परिणामस्वरूप समुद्री मार्ग की खोज की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई।

भौगोलिक खोजों का युग (Age of Discovery)

15वीं और 16वीं शताब्दी को “भौगोलिक खोजों का युग” कहा जाता है। इस काल में नौवहन (Navigation) तकनीक में उल्लेखनीय सुधार हुए।

  • बेहतर जहाजों का निर्माण हुआ।
  • दिशा ज्ञात करने के लिए कम्पास (Compass) का उपयोग बढ़ा।
  • समुद्री मानचित्र (Maps) अधिक सटीक बनाए जाने लगे।
  • खगोलीय उपकरणों की सहायता से लंबी समुद्री यात्राएँ संभव हुईं।

इन तकनीकी प्रगतियों ने समुद्री खोजों को गति प्रदान की और यूरोपीय नाविक दूर-दराज़ के देशों तक पहुँचने में सफल हुए।

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा (Mercantilism)

उस समय यूरोप में वाणिज्यवाद (Mercantilism) की नीति प्रचलित थी। इस नीति के अनुसार किसी भी राष्ट्र की समृद्धि उसके सोने-चाँदी के भंडार और विदेशी व्यापार पर निर्भर मानी जाती थी।

इसी कारण पुर्तगाल, स्पेन, नीदरलैंड (डच), इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देश नए व्यापारिक मार्गों और उपनिवेशों की खोज में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगे।

धार्मिक कारण

आर्थिक हितों के साथ-साथ धार्मिक कारण भी महत्वपूर्ण थे। कई यूरोपीय शासक और मिशनरी ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार (Spread of Christianity) को अपना महत्वपूर्ण उद्देश्य मानते थे। विशेष रूप से पुर्तगाली शासकों ने व्यापार के साथ-साथ मिशनरियों को भी भारत भेजा।

⭐ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य📅 1453 ई. — उस्मानी तुर्कों ने कॉन्स्टेंटिनोपल पर अधिकार किया।🚢 1498 ई. — वास्को-डि-गामा समुद्री मार्ग से कालीकट पहुँचा।भारत आने वाली पहली यूरोपीय शक्ति — पुर्तगाल💰 समुद्री मार्ग की खोज का मुख्य उद्देश्य — भारत के साथ सीधा एवं लाभदायक व्यापार 🌶️ यूरोप में सबसे अधिक मांग —भारतीय मसाले, सूती वस्त्र, रेशम और नीलPDFNOTES.INStudy2Study

समुद्री मार्ग की खोज और वास्को-डि-गामा का भारत आगमन

भारत और यूरोप के बीच प्राचीन काल से ही व्यापारिक संबंध स्थापित थे, लेकिन यह व्यापार मुख्यतः स्थल मार्ग (Land Route) तथा अरब सागर और लाल सागर (Red Sea) के माध्यम से होता था। 1453 ई. में कॉन्स्टेंटिनोपल पर उस्मानी तुर्कों के अधिकार के बाद यह मार्ग कठिन और महंगा हो गया। इसलिए यूरोपीय देशों ने भारत तक पहुँचने के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज प्रारम्भ की।

इस खोज में सबसे अधिक सफलता पुर्तगाल को मिली। पुर्तगाल के राजकुमार प्रिंस हेनरी द नेविगेटर (Prince Henry the Navigator) ने समुद्री अभियानों को प्रोत्साहित किया। उनके प्रयासों से पुर्तगाली नाविक अफ्रीका के पश्चिमी तट का अन्वेषण करने लगे।

🚢 वास्को-डि-गामा यात्रा : प्रमुख घटनाएँवर्षघटना1488 ई.बार्थोलोम्यू डियाज़ ने केप ऑफ गुड होप तक पहुँचने का मार्ग खोजा।8 जुलाई 1497 ई.वास्को-डि-गामा पुर्तगाल के लिस्बन बंदरगाह से रवाना हुआ।20 मई 1498 ई.वास्को-डि-गामा कालीकट (भारत) पहुँचा।1499 ई.पुर्तगाल वापस लौटा और उसकी यात्रा सफल घोषित हुई।PDFNOTES.INStudy2Study

1488 ई. में बार्थोलोम्यू डियाज़ (Bartholomew Diaz) अफ्रीका के दक्षिणी सिरे तक पहुँचने में सफल हुआ। उसने इस स्थान का नाम केप ऑफ स्टॉर्म्स (Cape of Storms) रखा, जिसे बाद में पुर्तगाल के राजा ने केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) नाम दिया। इस उपलब्धि ने भारत तक समुद्री मार्ग खोजने की संभावना को और मजबूत कर दिया।

अंततः 8 जुलाई 1497 ई. को पुर्तगाली नाविक वास्को-डि-गामा (Vasco da Gama) लिस्बन (Portugal) से चार जहाजों के साथ भारत की यात्रा पर निकला। अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित मालिंदी (Malindi) बंदरगाह से उसे एक अनुभवी अरब नाविक (Pilot) का मार्गदर्शन मिला, जिसकी सहायता से वह हिंद महासागर पार कर भारत की ओर बढ़ा।

लगभग दस महीने की कठिन समुद्री यात्रा के बाद 20 मई 1498 ई. को वास्को-डि-गामा भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट (वर्तमान कोझिकोड, केरल) पहुँचा। उस समय कालीकट पर जमोरिन (Zamorin) नामक स्थानीय शासक का शासन था। जमोरिन ने प्रारम्भ में पुर्तगालियों का स्वागत किया और उन्हें व्यापार करने की अनुमति प्रदान की।

वास्को-डि-गामा का भारत पहुँचना विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना के बाद यूरोप और भारत के बीच प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार (Direct Sea Trade) प्रारम्भ हुआ। इसके साथ ही भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा तथा आगे चलकर औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) की नींव भी पड़ गई।

वास्को-डि-गामा की यात्रा का महत्व

  • भारत और यूरोप के बीच पहला सफल प्रत्यक्ष समुद्री मार्ग स्थापित हुआ।
  • अरब और वेनिस व्यापारियों के व्यापारिक एकाधिकार को चुनौती मिली।
  • भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • पुर्तगाल हिंद महासागर में एक प्रमुख समुद्री शक्ति बन गया।
  • आगे चलकर डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी भी भारत पहुँचे और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा शुरू हुई।

✨ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

भारत आने वाला पहला यूरोपीय नाविक – वास्को-डि-गामा

भारत पहुँचने वाली पहली यूरोपीय शक्ति – पुर्तगाल

भारत में पहला आगमन – 20 मई 1498 ई.

भारत का पहला बंदरगाह – कालीकट (कोझिकोड, केरल)

कालीकट का शासक – जमोरिन (Zamorin)

समुद्री मार्ग की खोज में महत्वपूर्ण नाविक – बार्थोलोम्यू डियाज़ एवं वास्को-डि-गामा

Exam Trick 💡
डियाज़ (1488) ने मार्ग खोजा, जबकि वास्को-डि-गामा (1498) उस मार्ग से भारत पहुँचा
1488 → मार्ग मिला1498 → भारत मिला

I. पुर्तगाली (The Portuguese)

  1. भारत के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज किसने की थी? – वास्कोडिगामा
  2. वास्कोडिगामा किस वर्ष भारत पहुँचा? – 1498 ई.
  3. वास्कोडिगामा भारत के किस बंदरगाह पर उतरा था? – कालीकट (केरल)
  4. कालीकट के किस स्थानीय राजा ने वास्कोडिगामा का स्वागत किया? – जमोरिन
  5. वास्कोडिगामा की सहायता करने वाला गुजराती पथ-प्रदर्शक कौन था? – अब्दुल मजीद
  6. भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय कौन बनकर आया? – फ्रांसिस्को डी अल्मीडा
  7. ‘शांत जल की नीति’ (Blue Water Policy) किसने लागू की थी? – अल्मीडा
  8. भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है? – अल्फांसो डी अल्बुकर्क
  9. अल्बुकर्क ने किस सुल्तान से गोवा को छीना था? – बीजापुर के यूसुफ आदिल शाह
  10. पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किस वर्ष किया? – 1510 ई.
  11. पुर्तगालियों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) कहाँ खोली? – कोचीन (1503)
  12. पुर्तगालियों ने अपनी दूसरी फैक्ट्री कहाँ स्थापित की? – कन्ननूर (1505)
  13. भारत में प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत करने का श्रेय किसे जाता है? – पुर्तगालियों को (1556)
  14. भारत में तंबाकू, लाल मिर्च और मक्का की खेती किसने शुरू की? – पुर्तगाली
  15. भारत में ‘गोथिक स्थापत्य कला’ की शुरुआत किसके द्वारा की गई? – पुर्तगाली
  16. पुर्तगालियों ने हुगली को किसका केंद्र बनाया था? – समुद्री लूटपाट का
  17. पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा का जहाज किस नाम से जाना जाता था? – साओ गेब्रियल
  18. अल्फांसो डी अल्बुकर्क की मजार (कब्र) भारत में कहाँ स्थित है? – गोवा
  19. किस पुर्तगाली गवर्नर ने राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया? – नीनो डी कुन्हा
  20. पुर्तगालियों ने दमन पर किस वर्ष अधिकार किया? – 1559 ई.
  21. ‘कार्टाज-अर्मेडा’ पद्धति का संबंध किससे था? – समुद्री व्यापार के लाइसेंस से
  22. कार्टाज पद्धति के तहत जहाजों को किससे अनुमति लेनी पड़ती थी? – पुर्तगालियों से
  23. पुर्तगाली भारत में सबसे पहले आए और सबसे बाद में कब गए? – 1961 में
  24. किस ऑपरेशन के तहत गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया? – ऑपरेशन विजय
  25. जापान के साथ व्यापार शुरू करने का श्रेय किस यूरोपीय शक्ति को है? – पुर्तगाली
  26. पुर्तगालियों ने बंगाल में अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ स्थापित की थी? – बैंडेल में
  27. पुर्तगालियों का धार्मिक उद्देश्य क्या था? – ईसाई धर्म का प्रचार करना
  28. पुर्तगालियों के साथ भारत आने वाला प्रसिद्ध ईसाई संत कौन था? – सेंट फ्रांसिस जेवियर
  29. ‘काजू और अनानास’ भारत में किनके द्वारा लाए गए? – पुर्तगाली
  30. पुर्तगालियों ने किस मुगल सम्राट की अनुमति से हुगली में बसने का अधिकार पाया? – अकबर
  31. पुर्तगालियों ने चटगांव के बंदरगाह को क्या नाम दिया था? – पोर्टो ग्रांडे (महान बंदरगाह)
  32. पुर्तगाली प्रभाव के कारण भारत के किस क्षेत्र में ईसाई धर्म का अधिक विस्तार हुआ? – कोंकण और मालाबार तट
  33. पुर्तगालियों ने श्रीलंका पर किस वर्ष कब्जा किया? – 1505 ई.

II. डच (The Dutch)

  1. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) की स्थापना किस वर्ष हुई? – 1602 ई.
  2. भारत आने वाला पहला डच नागरिक कौन था? – कार्र्नेलियस डी हस्तमान
  3. डचों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी कहाँ स्थापित की? – मछलीपट्टनम (1605)
  4. डचों द्वारा पुलिकट में स्थापित किले का नाम क्या था? – गेल्ड्रिया का किला
  5. डचों ने अपने स्वर्ण सिक्के ‘पैगोडा’ कहाँ ढाले थे? – पुलिकट
  6. डचों ने भारत में मसालों के स्थान पर किसके निर्यात को प्राथमिकता दी? – सूती वस्त्र
  7. भारतीय वस्त्रों को निर्यात की मुख्य वस्तु बनाने का श्रेय किसे है? – डच
  8. डचों ने बंगाल में अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ खोली थी? – पिपली (1627)
  9. डचों का मुख्य व्यापारिक केंद्र इंडोनेशिया में कहाँ था? – बटाविया
  10. डचों ने पुर्तगालियों को हराकर कोचीन पर कब अधिकार किया? – 1663 ई.
  11. बेदरा का युद्ध (Battle of Bedara) किनके बीच हुआ था? – अंग्रेज और डच
  12. बेदरा का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया? – 1759 ई.
  13. किस युद्ध के बाद डचों की भारत में शक्ति पूरी तरह समाप्त हो गई? – बेदरा का युद्ध
  14. डचों ने चिनसुरा में किस किले का निर्माण कराया था? – गुस्तावस फोर्ट
  15. डचों का भारत में अंतिम रूप से पतन किसके द्वारा हुआ? – अंग्रेजों द्वारा
  16. डचों ने व्यापार में किस पद्धति को अपनाया था? – सहकारिता (Cartel)
  17. डच ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों को क्या कहा जाता था? – सज्जन सत्रह (Gentlemen XVII)

III. अंग्रेज (The English)

  1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई? – 31 दिसंबर 1600
  2. कंपनी की स्थापना के समय ब्रिटेन की महारानी कौन थी? – एलिजाबेथ प्रथम
  3. ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रारंभिक नाम क्या था? – द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन…
  4. कंपनी के गठन के समय भारत का मुगल शासक कौन था? – अकबर
  5. जहांगीर के दरबार में आने वाला पहला अंग्रेज दूत कौन था? – कैप्टन विलियम हॉकिंस (1608)
  6. हॉकिंस किस समुद्री जहाज से भारत पहुँचा था? – हेक्टर
  7. जहांगीर ने हॉकिंस को कौन सी उपाधि दी थी? – इंग्लिश खान
  8. अंग्रेजों ने अपनी पहली अस्थायी फैक्ट्री कहाँ खोली? – मछलीपट्टनम (1611)
  9. अंग्रेजों की पहली स्थायी फैक्ट्री कहाँ स्थापित हुई? – सूरत (1613)
  10. सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में किस वर्ष पहुँचा? – 1615 ई.
  11. थॉमस रो को किस ब्रिटिश राजा ने अपना दूत बनाकर भेजा था? – जेम्स प्रथम
  12. अंग्रेजों को गोलकुंडा के सुल्तान से ‘सुनहरा फरमान’ कब मिला? – 1632 ई.
  13. अंग्रेजों ने मद्रास को पट्टे पर किस वर्ष लिया? – 1639 ई.
  14. मद्रास शहर की स्थापना किसने की थी? – फ्रांसिस डे
  15. अंग्रेजों द्वारा मद्रास में निर्मित किले का नाम क्या है? – फोर्ट सेंट जॉर्ज
  16. अंग्रेजों ने बंगाल में अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ स्थापित की? – हुगली (1651)
  17. बॉम्बे का द्वीप ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय को कैसे प्राप्त हुआ? – पुर्तगालियों से दहेज में
  18. चार्ल्स द्वितीय ने बॉम्बे को कंपनी को कितने किराये पर दिया? – 10 पाउंड वार्षिक
  19. बॉम्बे शहर का वास्तविक संस्थापक किसे माना जाता है? – जेराल्ड ओंगियर
  20. कलकत्ता (कोलकाता) शहर की नींव किसने रखी थी? – जॉब चारनॉक
  21. जॉब चारनॉक ने किन तीन गांवों को मिलाकर कलकत्ता बसाया? – सुतानाती, कोलीकाता, गोविंदपुर
  22. कलकत्ता में निर्मित किले का नाम क्या था? – फोर्ट विलियम (1700)
  23. फोर्ट विलियम का पहला अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) कौन बना? – सर चार्ल्स आयर
  24. मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने अंग्रेजों को शाही फरमान कब जारी किया? – 1717 ई.
  25. 1717 के फरमान को कंपनी का क्या कहा जाता है? – मैग्ना कार्टा (महाअधिकार पत्र)
  26. ‘जॉन सुरमन मिशन’ का संबंध किस मुगल बादशाह से था? – फर्रुखसियर
  27. अंग्रेजों ने अपनी टंकशाला (Mint) कहाँ स्थापित की थी? – बॉम्बे
  28. किस अंग्रेज अधिकारी ने औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह किया और उसे देश निकाला दिया गया? – सर जॉन चाइल्ड
  29. इंटरलोपर (Interlopers) किसे कहा जाता था? – बिना लाइसेंस व्यापार करने वाले अंग्रेज व्यापारियों को
  30. बंगाल का पहला ब्रिटिश गवर्नर कौन था? – रॉबर्ट क्लाइव
  31. ‘न्यू कंपनी’ और ‘ओल्ड कंपनी’ का विलय किस वर्ष हुआ? – 1708 ई.
  32. विलय के बाद कंपनी का नया नाम क्या पड़ा? – द यूनाइटेड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ इंग्लैंड…
  33. पूर्व में अंग्रेजों का सबसे पहला व्यापारिक केंद्र कौन सा था? – मछलीपट्टनम
  34. अंग्रेजों ने उड़ीसा में अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ खोली? – हरिहरपुर और बालासोर (1633)
  35. फोर्ट सेंट डेविड किला अंग्रेजों का कहाँ स्थित था? – कुड्डलोर (मद्रास के पास)
  36. किस युद्ध ने अंग्रेजों को बंगाल का स्वामी बना दिया? – बक्सर का युद्ध (1764)
  37. प्लासी के युद्ध (1757) के समय अंग्रेजों का नेतृत्व किसने किया? – रॉबर्ट क्लाइव
  38. अंग्रेजों ने बिहार और बंगाल में नील की खेती को किस पद्धति से बढ़ावा दिया? – तिनकठिया पद्धति
  39. ‘ब्लैक होल’ त्रासदी की घटना कहाँ हुई थी? – कलकत्ता
  40. अंग्रेजों ने सेंट थॉमस का युद्ध किसके खिलाफ लड़ा था? – कर्नाटक के नवाब
  41. स्वाली (Swally) के युद्ध में अंग्रेजों ने किसे हराया? – पुर्तगालियों को
  42. अंग्रेजों ने किस वर्ष पांडिचेरी पर अधिकार किया था? – 1761 ई.
  43. भारत में ब्रिटिश सत्ता का मुख्य आधार क्या था? – मजबूत नौसेना (Navy)
  44. अंग्रेजों ने किस अधिनियम द्वारा कंपनी के व्यापारिक अधिकार समाप्त किए? – 1813 और 1833 का चार्टर एक्ट
  45. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का कौन सा क्षेत्र अफीम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था? – बिहार
  46. अंग्रेजों ने अपनी पहली फैक्ट्री दक्षिण भारत में कहाँ खोली थी? – मछलीपट्टनम
  47. सम्राट अकबर के समय भारत में कौन सा अंग्रेज आया था? – रॉल्फ फिच (1585)
  48. अंग्रेजों ने डचों के साथ कौन सा समझौता किया था? – इंडोनेशिया डचों का और भारत अंग्रेजों का
  49. सर थॉमस रो ने जहांगीर से किस शहर में मुलाकात की थी? – अजमेर
  50. अंग्रेजों ने भारत में अपनी राजनीतिक सत्ता की शुरुआत किस राज्य से की? – बंगाल
Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।