फ्रांसीसी और कर्नाटक युद्ध (1746–1763): कारण, तीनों युद्ध, परिणाम एवं परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

🇫🇷 फ्रांसीसी और कर्नाटक युद्ध (1746–1763)

भारत में यूरोपीय शक्तियों के आगमन के बाद व्यापारिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई। 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के आगमन के बाद डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी भी भारत पहुँचे। प्रारम्भ में इन सभी का उद्देश्य केवल व्यापार करना था, लेकिन समय के साथ व्यापारिक हित राजनीतिक महत्वाकांक्षा में बदल गए। विशेष रूप से अंग्रेज और फ्रांसीसी भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते थे। इसी प्रतिस्पर्धा का परिणाम कर्नाटक युद्ध (Carnatic Wars) के रूप में सामने आया।

कर्नाटक युद्ध भारतीय इतिहास की ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव मजबूत की। UPSC, SSC, Railway, State PCS, CDS, NDA एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

MODERN HISTORY

European Colonial History

फ्रांसीसी और कर्नाटक युद्ध (1746–1763)

1746 से 1763 ई. के बीच अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य दक्षिण भारत में लड़े गए तीन प्रमुख युद्धों को कर्नाटक युद्ध (Carnatic Wars) कहा जाता है। इन युद्धों ने भारत में अंग्रेजी सत्ता की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया और फ्रांसीसी राजनीतिक प्रभाव को लगभग समाप्त कर दिया।

3 कुल युद्ध
18 वर्षों का संघर्ष
1763 अंग्रेजों की विजय

कर्नाटक युद्ध क्या थे?

1746 ई. से 1763 ई. के बीच अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच दक्षिण भारत के कर्नाटक क्षेत्र में लड़े गए तीन प्रमुख युद्धों को कर्नाटक युद्ध कहा जाता है।

यद्यपि इन युद्धों का मुख्य क्षेत्र दक्षिण भारत था, लेकिन इनकी पृष्ठभूमि यूरोप में चल रहे युद्धों से जुड़ी हुई थी। भारत में दोनों देशों की ईस्ट इंडिया कंपनियाँ व्यापारिक हितों की रक्षा के नाम पर सैन्य संघर्ष में उतर आईं।

फ्रांसीसियों का भारत में आगमन

फ्रांस ने भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से 1664 ई. में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी (French East India Company) की स्थापना की। इसका गठन फ्रांस के राजा लुई चौदहवें (Louis XIV) के शासनकाल में उनके वित्त मंत्री जीन बैप्टिस्ट कोलबर्ट (Jean-Baptiste Colbert) की पहल पर किया गया।

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फ्रांसीसियों का भारत में आगमन

फ्रांस ने भारत के साथ व्यापार करने के उद्देश्य से 1664 ई. में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। धीरे-धीरे फ्रांसीसियों ने भारत में अनेक व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए और दक्षिण भारत में अपना प्रभाव बढ़ाना प्रारम्भ किया।

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स्थापना

फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी

स्थापना वर्ष : 1664 ई.

संस्थापक : जीन बैप्टिस्ट कोलबर्ट

शासनकाल : राजा लुई XIV

प्रमुख व्यापारिक केन्द्र

📍 भारत में फ्रांसीसियों के प्रमुख केन्द्र

फ्रांसीसियों ने भारत के विभिन्न तटीय क्षेत्रों में व्यापारिक केन्द्र स्थापित किए। बाद में यही केन्द्र उनके राजनीतिक प्रभाव का आधार बने।

1668

सूरत

भारत में फ्रांसीसियों का पहला व्यापारिक केन्द्र।

1669

मछलीपट्टनम

दक्षिण भारत के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र।

1673

पांडिचेरी

फ्रांसीसी शक्ति का सबसे बड़ा केन्द्र, बाद में राजधानी बना।

1690

चंद्रनगर

बंगाल में फ्रांसीसी व्यापार का प्रमुख केन्द्र।

1725

माहे

मालाबार तट पर स्थित महत्वपूर्ण बन्दरगाह।

1739

करैकल

कावेरी डेल्टा क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र।

कर्नाटक युद्धों के प्रमुख कारण

कर्नाटक युद्ध (1746–1763)

⚔️ कर्नाटक युद्धों के प्रमुख कारण

कर्नाटक युद्ध केवल भारत का क्षेत्रीय संघर्ष नहीं था, बल्कि यूरोप की प्रतिद्वंद्विता का भारतीय विस्तार था। इसके पीछे राजनीतिक, आर्थिक तथा सामरिक कारण प्रमुख थे।

01

यूरोप की प्रतिद्वंद्विता

इंग्लैंड और फ्रांस यूरोप में लंबे समय से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी थे। इसी प्रतिस्पर्धा का प्रभाव भारत में भी दिखाई दिया।

02

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा

दोनों ईस्ट इंडिया कंपनियाँ भारतीय व्यापार, मसालों, वस्त्रों तथा समुद्री मार्गों पर नियंत्रण चाहती थीं।

03

मुगल साम्राज्य का पतन

मुगल शक्ति कमजोर होने से भारतीय राज्यों में अस्थिरता बढ़ी, जिसका लाभ यूरोपीय शक्तियों ने उठाया।

04

उत्तराधिकार के विवाद

हैदराबाद और कर्नाटक में उत्तराधिकार संघर्ष में अंग्रेज़ों और फ्रांसीसियों ने अलग-अलग दावेदारों का समर्थन किया।

05

राजनीतिक प्रभुत्व की इच्छा

व्यापारिक कंपनियाँ धीरे-धीरे केवल व्यापार तक सीमित न रहकर भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने लगीं।

06

दक्षिण भारत का सामरिक महत्व

कर्नाटक एवं कोरोमंडल तट के बन्दरगाह समुद्री व्यापार तथा सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थे।

प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748)

प्रथम कर्नाटक युद्ध का संबंध यूरोप में चल रहे ऑस्ट्रियन उत्तराधिकार युद्ध (War of Austrian Succession) से था।

1746 ई. में फ्रांसीसी गवर्नर जोसेफ फ्राँस्वा डुप्ले (Joseph François Dupleix) के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना ने मद्रास पर अधिकार कर लिया। यह अंग्रेजों के लिए बड़ा झटका था।

कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन ने फ्रांसीसियों को मद्रास लौटाने का आदेश दिया, लेकिन सेंट थोमे (Battle of St. Thomé) के युद्ध में फ्रांसीसियों ने नवाब की सेना को पराजित कर दिया। इस युद्ध ने भारतीय शासकों को पहली बार यह अनुभव कराया कि यूरोपीय सेनाएँ आधुनिक हथियारों और सैन्य संगठन के कारण अधिक शक्तिशाली थीं।

1748 ई. में यूरोप में एक्स-ला-शापेल की संधि (Treaty of Aix-la-Chapelle) हुई, जिसके बाद मद्रास अंग्रेजों को वापस कर दिया गया और प्रथम कर्नाटक युद्ध समाप्त हो गया।

द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754)

द्वितीय कर्नाटक युद्ध का मुख्य कारण हैदराबाद और कर्नाटक का उत्तराधिकार विवाद था।

फ्रांसीसियों ने मुजफ्फर जंग और चाँदा साहब का समर्थन किया, जबकि अंग्रेजों ने नासिर जंग और मुहम्मद अली का साथ दिया।

इसी युद्ध के दौरान अंग्रेज अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव ने 1751 ई. में आर्कोट (Arcot) पर कब्ज़ा कर अंग्रेजों की प्रतिष्ठा को अत्यधिक बढ़ा दिया। यह युद्ध अंग्रेजों की रणनीतिक सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।

लगातार असफलताओं के कारण फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले को 1754 ई. में फ्रांस वापस बुला लिया गया। इसके साथ ही द्वितीय कर्नाटक युद्ध समाप्त हो गया।

तृतीय कर्नाटक युद्ध (1756–1763)

तृतीय कर्नाटक युद्ध सात वर्षीय युद्ध (Seven Years’ War) का भारतीय भाग था।

फ्रांस ने काउंट डी लैली (Count de Lally) को भारत भेजा, लेकिन वह अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति को रोकने में असफल रहा।

1760 ई. में वांडीवाश (Battle of Wandiwash) का युद्ध हुआ, जिसमें अंग्रेज सेनापति सर आयर कूट (Sir Eyre Coote) ने फ्रांसीसी सेना को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया।

इसके बाद 1761 ई. में अंग्रेजों ने पांडिचेरी पर अधिकार कर लिया, जो भारत में फ्रांसीसी शक्ति का सबसे बड़ा केन्द्र था।

1763 ई. में पेरिस की संधि (Treaty of Paris) के साथ तृतीय कर्नाटक युद्ध समाप्त हुआ। संधि के बाद फ्रांसीसियों को भारत में कुछ व्यापारिक केन्द्र रखने की अनुमति तो मिली, लेकिन उन्हें किलेबंदी और सैन्य गतिविधियों की अनुमति नहीं दी गई। इससे भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का अंत हो गया।

कर्नाटक युद्धों के परिणाम

कर्नाटक युद्धों के परिणाम भारतीय इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे।

  • भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक प्रभाव लगभग समाप्त हो गया।
  • अंग्रेज भारत की सबसे शक्तिशाली यूरोपीय शक्ति बनकर उभरे।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी का राजनीतिक हस्तक्षेप तेजी से बढ़ा।
  • दक्षिण भारत में अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया।
  • प्लासी (1757) और बक्सर (1764) जैसी निर्णायक विजयों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की मजबूत नींव रखी गई।

⚔️ तीनों कर्नाटक युद्धों का सारांश (1746–1763)


🟥 प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748)

🔹 कारण
यूरोप में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध (War of Austrian Succession) का प्रभाव भारत तक पहुँचा। अंग्रेज़ और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच संघर्ष।
🔹 प्रमुख घटनाएँ
फ्रांसीसी सेनापति ला बॉर्डोनै (La Bourdonnais) ने मद्रास (1746) पर कब्ज़ा किया। सेंट थॉमे (Battle of St. Thomé) में फ्रांसीसियों की जीत।
🔹 परिणाम
1748 की एक्स-ला-शापेल (Treaty of Aix-la-Chapelle) संधि के तहत मद्रास अंग्रेजों को वापस मिला। दोनों पक्षों की स्थिति लगभग पहले जैसी रही।

🟨 द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754)

🔹 कारण
हैदराबाद और कर्नाटक के उत्तराधिकार विवाद। अंग्रेज़ और फ्रांसीसी अलग-अलग दावेदारों के समर्थक बने।
🔹 प्रमुख घटनाएँ
डुप्ले (Dupleix) ने फ्रांसीसी प्रभाव बढ़ाने का प्रयास किया। रॉबर्ट क्लाइव ने आर्कोट (Arcot) पर कब्ज़ा कर अंग्रेज़ों की स्थिति मजबूत की।
🔹 परिणाम
1754 की पांडिचेरी संधि। डुप्ले को फ्रांस वापस बुला लिया गया। दक्षिण भारत में अंग्रेज़ों का प्रभाव बढ़ा।

🟥 तृतीय कर्नाटक युद्ध (1758–1763)

🔹 कारण
यूरोप के सप्तवर्षीय युद्ध (Seven Years’ War) का प्रभाव भारत में पहुँचा।
🔹 प्रमुख घटनाएँ
1760 का वांडीवाश (Battle of Wandiwash) — अंग्रेज़ों ने फ्रांसीसियों को निर्णायक रूप से हराया। 1761 में पांडिचेरी अंग्रेज़ों के अधीन आ गया।
🔹 परिणाम
1763 की पेरिस संधि (Treaty of Paris)। फ्रांसीसियों को केवल व्यापार की अनुमति मिली, किलेबंदी और राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक लग गई। भारत में अंग्रेज़ी प्रभुत्व स्थापित हो गया।
युद्धअवधिप्रमुख कारणपरिणाम
प्रथम कर्नाटक युद्ध1746–1748ऑस्ट्रियन उत्तराधिकार युद्धमद्रास अंग्रेजों को वापस मिला
द्वितीय कर्नाटक युद्ध1749–1754हैदराबाद एवं कर्नाटक का उत्तराधिकार विवादअंग्रेजों की स्थिति मजबूत हुई
तृतीय कर्नाटक युद्ध1756–1763सात वर्षीय युद्धफ्रांसीसी शक्ति का पतन एवं अंग्रेजों की निर्णायक विजय

प्रमुख व्यक्तित्व

व्यक्तित्वयोगदान
जोसेफ फ्राँस्वा डुप्लेफ्रांसीसी गवर्नर, प्रथम एवं द्वितीय युद्ध में प्रमुख भूमिका
रॉबर्ट क्लाइवआर्कोट विजय के माध्यम से अंग्रेजों की स्थिति मजबूत की
सर आयर कूटवांडीवाश के युद्ध में अंग्रेजों का नेतृत्व किया
काउंट डी लैलीतृतीय कर्नाटक युद्ध में फ्रांसीसी सेनापति
चाँदा साहबफ्रांसीसी समर्थित कर्नाटक का दावेदार
मुहम्मद अलीअंग्रेज समर्थित कर्नाटक का दावेदार

निष्कर्ष

कर्नाटक युद्ध भारतीय आधुनिक इतिहास की निर्णायक घटनाओं में से एक हैं। इन युद्धों ने भारत में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच शक्ति संतुलन को हमेशा के लिए बदल दिया। जहाँ फ्रांसीसी केवल व्यापारिक शक्ति बनकर रह गए, वहीं अंग्रेजों ने सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक कौशल के आधार पर भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार किया। यही कारण है कि कर्नाटक युद्धों को भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व की शुरुआत का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

I. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी (The French)

  1. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना किस वर्ष हुई थी? – 1664 ई.
  2. फ्रांसीसी कंपनी की स्थापना किसके प्रयासों से हुई? – कोलबर्ट (लुई चौदहवें का मंत्री)
  3. फ्रांसीसी कंपनी का वास्तविक नाम क्या था? – कंपनी द इंड ओरिएंटल
  4. भारत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री कहाँ स्थापित की गई? – सूरत (1668)
  5. सूरत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री किसने स्थापित की? – फ्रांस्वा कैरों
  6. फ्रांसीसियों ने अपनी दूसरी फैक्ट्री कहाँ खोली थी? – मछलीपट्टनम (1669)
  7. पांडिचेरी शहर की स्थापना किसने की थी? – फ्रांस्वा मार्टिन (1673)
  8. पांडिचेरी का पहला फ्रांसीसी गवर्नर कौन था? – फ्रांस्वा मार्टिन
  9. फ्रांसीसियों को पांडिचेरी के लिए भूमि किसने दी थी? – शेर खान लोदी (वलीकोंडापुरम का शासक)
  10. बंगाल में फ्रांसीसियों की सबसे प्रसिद्ध बस्ती कौन सी थी? – चंद्रनगर
  11. मुगल सूबेदार शाइस्ता खान ने फ्रांसीसियों को कहाँ फैक्ट्री बनाने की जगह दी थी? – चंद्रनगर
  12. फ्रांसीसियों ने ‘मॉरीशस’ पर किस वर्ष अधिकार किया? – 1721 ई.
  13. फ्रांसीसी गवर्नर डूपले भारत किस वर्ष आया? – 1742 ई.
  14. वह पहला यूरोपीय कौन था जिसने भारतीय राजाओं के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप शुरू किया? – डूपले
  15. डूपले को भारत में ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) का अग्रदूत क्यों माना जाता है? – क्योंकि उसने भारतीय राजाओं को फ्रांसीसी सेना किराए पर देना शुरू किया था

II. प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746 – 1748)

  1. प्रथम कर्नाटक युद्ध का मुख्य कारण क्या था? – ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार का युद्ध
  2. प्रथम कर्नाटक युद्ध के समय कर्नाटक का नवाब कौन था? – अनवरुद्दीन
  3. सेंट थोमे (St. Thome) का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया? – 1746 ई.
  4. सेंट थोमे का युद्ध किनके बीच हुआ था? – फ्रांसीसी सेना और नवाब अनवरुद्दीन की सेना
  5. प्रथम कर्नाटक युद्ध की समाप्ति किस संधि से हुई? – ए-ला-शापेल की संधि (1748)
  6. ए-ला-शापेल की संधि के बाद अंग्रेजों को क्या वापस मिला? – मद्रास
  7. डूपले ने मद्रास पर कब्जा करने के लिए किसकी मदद ली थी? – ला बुर्डोने (मॉरीशस का गवर्नर)

III. द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749 – 1754)

  1. द्वितीय कर्नाटक युद्ध का मुख्य कारण क्या था? – हैदराबाद और कर्नाटक के उत्तराधिकार का विवाद
  2. डूपले ने हैदराबाद में किसका समर्थन किया? – मुजफ्फर जंग
  3. डूपले ने कर्नाटक में किसका समर्थन किया? – चांदा साहब
  4. अंग्रेजों ने हैदराबाद में किसका साथ दिया? – नासिर जंग
  5. अंग्रेजों ने कर्नाटक में किसका साथ दिया? – अनवरुद्दीन (बाद में मोहम्मद अली)
  6. अम्बुर का युद्ध किस वर्ष हुआ था? – 1749 ई.
  7. अम्बुर के युद्ध में कौन मारा गया था? – नवाब अनवरुद्दीन
  8. रॉबर्ट क्लाइव ने किस घटना के बाद अपनी पहचान बनायी? – आर्काट का घेरा (1751)
  9. ‘आर्काट के घेरे’ में क्लाइव ने कितने सैनिकों के साथ सफलता पायी थी? – मात्र 500 सैनिक (210 अंग्रेज + 290 भारतीय)
  10. द्वितीय कर्नाटक युद्ध की समाप्ति किस संधि से हुई? – पांडिचेरी की संधि (1755)
  11. डूपले को वापस फ्रांस किस वर्ष बुलाया गया? – 1754 ई.
  12. डूपले के स्थान पर नया फ्रांसीसी गवर्नर कौन बनकर आया? – गोदेहू

IV. तृतीय कर्नाटक युद्ध (1758 – 1763)

  1. तृतीय कर्नाटक युद्ध का कारण क्या था? – यूरोप का ‘सप्तवर्षीय युद्ध’ (Seven Years War)
  2. तृतीय कर्नाटक युद्ध के समय फ्रांसीसी सेना का नेतृत्व किसने किया? – काउंट डी लाली
  3. वांडिवाश का युद्ध (Battle of Wandiwash) किस वर्ष लड़ा गया? – 22 जनवरी 1760
  4. वांडिवाश का युद्ध किनके बीच हुआ? – अंग्रेज और फ्रांसीसी
  5. वांडिवाश में अंग्रेजी सेना का नेतृत्व किसने किया? – सर आयर कूट
  6. वांडिवाश में फ्रांसीसी सेना का नेतृत्व किसने किया? – काउंट डी लाली
  7. किस युद्ध ने भारत में फ्रांसीसियों के भाग्य का फैसला कर दिया? – वांडिवाश का युद्ध
  8. तृतीय कर्नाटक युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ? – पेरिस की संधि (1763)
  9. पेरिस की संधि के बाद फ्रांसीसियों को क्या वापस मिला? – पांडिचेरी और चंद्रनगर (सिर्फ व्यापार के लिए)
  10. पेरिस की संधि के बाद फ्रांसीसियों पर क्या पाबंदी लगायी गई? – वे अपनी फैक्ट्रियों की किलेबंदी नहीं कर सकते थे

V. महत्वपूर्ण युद्ध और संधियाँ (Revision List)

  1. कर्नाटक युद्धों को अन्य किस नाम से जाना जाता है? – आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष
  2. प्रथम कर्नाटक युद्ध की अवधि क्या थी? – 1746 से 1748
  3. द्वितीय कर्नाटक युद्ध की अवधि क्या थी? – 1749 से 1754
  4. तृतीय कर्नाटक युद्ध की अवधि क्या थी? – 1758 से 1763
  5. पांडिचेरी का किला किसने बनवाया था? – फ्रांस्वा मार्टिन (फोर्ट लुई)
  6. कलकत्ता के फोर्ट विलियम के जवाब में फ्रांसीसियों ने क्या बनाया था? – फोर्ट ओरली (पांडिचेरी)
  7. कर्नाटक युद्धों के दौरान किस फ्रांसीसी गवर्नर ने ‘कूटनीति’ का सबसे अधिक परिचय दिया? – डूपले
  8. डूपले की हार का सबसे बड़ा कारण क्या था? – फ्रांसीसी सरकार का असहयोग
  9. अंग्रेजों की जीत का मुख्य कारण क्या था? – उनकी शक्तिशाली नौसेना और बंगाल की दौलत
  10. ‘लाली’ ने किस किले को जीतने का प्रयास किया जो उसकी सबसे बड़ी भूल थी? – मद्रास
  11. बुस्सी (Bussy) कौन था? – एक कुशल फ्रांसीसी सेनापति जो हैदराबाद दरबार में नियुक्त था
  12. कर्नाटक का युद्ध किस क्षेत्र में लड़ा गया था? – कोरोमंडल तट
  13. प्रथम कर्नाटक युद्ध में फ्रांसीसियों ने अंग्रेजों के किस जहाज को पकड़ा था? – बार्नेट के नेतृत्व वाले जहाज
  14. अड्यार नदी के किनारे कौन सा युद्ध हुआ था? – सेंट थोमे का युद्ध
  15. मुजफ्फर जंग की मृत्यु के बाद हैदराबाद का निजाम कौन बना? – सलाबत जंग
  16. सलाबत जंग ने फ्रांसीसियों को कौन सा क्षेत्र दिया था? – उत्तरी सरकार (Northern Circars)
  17. मद्रास की रक्षा के लिए अंग्रेजों ने किस गवर्नर को नियुक्त किया था? – सॉन्डर्स
  18. रॉबर्ट क्लाइव भारत में सबसे पहले किस पद पर आया था? – क्लर्क (राइटर)
  19. किस युद्ध ने यह सिद्ध कर दिया कि एक छोटी अनुशासित यूरोपीय सेना बड़ी भारतीय सेना को हरा सकती है? – सेंट थोमे का युद्ध
  20. फ्रांसीसी कंपनी सरकारी कंपनी थी या निजी? – पूर्णतः सरकारी (State Controlled)
  21. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी कैसी कंपनी थी? – निजी व्यापारिक संस्था (Joint Stock Company)
  22. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में वित्तीय सहायता कौन प्रदान करता था? – फ्रांस का राजा
  23. वांडिवाश वर्तमान में किस राज्य में स्थित है? – तमिलनाडु
  24. ‘Count de Lally’ को फ्रांस लौटने पर क्या सजा दी गई? – उसे फांसी दे दी गई
  25. पेरिस की संधि के समय फ्रांस का राजा कौन था? – लुई पंद्रहवां
  26. कर्नाटक युद्ध के बाद अंग्रेजों का भारत में अंतिम यूरोपीय प्रतिद्वंदी कौन बचा था? – कोई नहीं (मैदान साफ हो गया था)
  27. पांडिचेरी का पुराना नाम क्या था? – पुदुचेरी (Phulcheri)
  28. ‘फोर्ट सेंट डेविड’ पर फ्रांसीसियों ने कब कब्जा किया था? – 1758 ई.
  29. द्वितीय कर्नाटक युद्ध में ‘मुजफ्फर जंग’ की हत्या किसने की थी? – कर्नूल और कड़प्पा के नवाबों ने
  30. डूपले को ‘नवाब’ की उपाधि किसने दी थी? – मुजफ्फर जंग ने
  31. अंग्रेजों ने ‘उत्तरी सरकार’ क्षेत्र पर कब कब्जा किया? – 1759 (मछलीपट्टनम की जीत के बाद)
  32. कर्नाटक की राजधानी क्या थी? – आर्काट
  33. ‘चिनसुरा’ किनका प्रमुख केंद्र था? – डचों का
  34. किस संधि ने फ्रांसीसियों को भारत में केवल एक व्यापारी बनाकर छोड़ दिया? – पेरिस की संधि
  35. डूपले के उत्तराधिकारी गोदेहू ने अंग्रेजों के साथ कैसी नीति अपनाई? – शांतिपूर्ण और समझौते की नीति
  36. वांडिवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने किसे बंदी बनाया था? – बुस्सी को
  37. ‘सप्तवर्षीय युद्ध’ कहाँ शुरू हुआ था? – यूरोप और अमेरिका में
  38. कर्नाटक युद्ध के दौरान तंजौर के उत्तराधिकार में किसने हस्तक्षेप किया था? – अंग्रेजों ने
  39. डूपले के पतन के बाद फ्रांसीसी कंपनी की स्थिति कैसी हो गई? – अत्यंत कमजोर और ऋणग्रस्त
  40. अंग्रेजों की ‘सूरत’ और ‘मद्रास’ की फैक्ट्रियों की तुलना में पांडिचेरी की क्या स्थिति थी? – पांडिचेरी अधिक सुव्यवस्थित थी
  41. पांडिचेरी को डचों ने फ्रांसीसियों से कब छीना था? – 1693 में (बाद में 1697 में रिजविक की संधि से वापस मिला)
  42. ‘रिजविक की संधि’ (Treaty of Ryswick) किनके बीच हुई थी? – फ्रांसीसी और डच
  43. फ्रांसीसियों ने माहे (Mahé) पर कब कब्जा किया? – 1725 ई.
  44. फ्रांसीसियों ने कराइकल (Karaikal) पर कब कब्जा किया? – 1739 ई.
  45. डूपले से पहले पांडिचेरी का गवर्नर कौन था? – डूमा
  46. डूपले ने किस मुगल बादशाह से ‘जफर जंग’ की उपाधि प्राप्त की थी? – आलमगीर द्वितीय
  47. कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन की हत्या किस युद्ध में हुई? – अम्बुर का युद्ध
  48. ‘त्रिचनापल्ली का घेरा’ किस युद्ध का हिस्सा था? – द्वितीय कर्नाटक युद्ध
  49. अंग्रेजों ने फ्रांसीसी जहाजों को पकड़ने के लिए कौन सी नीति अपनाई? – समुद्री नाकेबंदी
  50. मद्रास की घेराबंदी (1758) में फ्रांसीसियों की विफलता का मुख्य कारण क्या था? – नौसेना का समय पर न पहुंचना
  51. किस इतिहासकार ने कहा कि ‘डूपले ने भारत की चाबी मद्रास में खोजी, जबकि क्लाइव ने इसे बंगाल में ढूंढ लिया’? – जे.आर. सीले
  52. फ्रांसीसी कंपनी का पतन किस वर्ष हुआ? – 1769 (कंपनी को निलंबित कर दिया गया)
  53. 18वीं सदी के अंत तक भारत में फ्रांसीसियों के पास क्या बचा था? – केवल पांच व्यापारिक केंद्र (बिना सेना के)
  54. कर्नाटक युद्धों ने किस भारतीय साम्राज्य के पतन को स्पष्ट कर दिया? – मुगल साम्राज्य का कमजोर होना
  55. डूपले के बाद फ्रांसीसी भारत में दोबारा क्यों नहीं उठ पाए? – योग्य नेतृत्व की कमी के कारण
  56. आधुनिक भारत के इतिहास में कर्नाटक युद्धों का क्या महत्व है? – इन्होंने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को पक्का कर दिया

Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।