राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): नियुक्ति, संरचना और शक्तियाँ Notes in hindi

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) राज्य स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार निकाय है। यह काफी हद तक NHRC के समान है, लेकिन इसके अधिकार क्षेत्र और नियुक्ति समिति में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): संरचना और शक्तियाँ मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्य मानवाधिकार आयोग के … Read more

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) – संरचना, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित एक प्रमुख वैधानिक (Statutory) निकाय है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में केवल अधिकारों का उल्लेख पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है कि राज्य की सभी संस्थाएँ नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े अधिकारों का … Read more

नीति आयोग (NITI Aayog) – उद्देश्य, संरचना, कार्य और भूमिका | Indian Polity Notes

नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीति-निर्माण एवं रणनीतिक थिंक-टैंक (Think Tank) है, जिसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग (Planning Commission) के स्थान पर की गई। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, वैश्वीकरण और राज्यों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए एक ऐसे संस्थागत ढाँचे की आवश्यकता महसूस की गई, जो केंद्र-राज्य सहयोग, नीति नवाचार और … Read more

राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) – अनुच्छेद 165, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार का मुख्य विधि अधिकारी (Chief Legal Advisor) होता है, जो राज्य से संबंधित संवैधानिक, वैधानिक और कानूनी मामलों में सरकार को परामर्श देता है तथा उच्च न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है। जिस प्रकार केंद्र सरकार के लिए भारत का महान्यायवादी (Attorney General) होता है, उसी प्रकार राज्य सरकार … Read more

भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) – अनुच्छेद 76, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

भारत के महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानून अधिकारी (Chief Legal Advisor) होता है, जो केंद्र सरकार को संवैधानिक, वैधानिक और कानूनी मामलों में परामर्श देता है। संसदीय लोकतंत्र में जहाँ सरकार के प्रत्येक निर्णय का संवैधानिक परीक्षण आवश्यक होता है, वहाँ महान्यायवादी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। वह सरकार और न्यायपालिका के … Read more

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) – अनुच्छेद 148–151, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भारतीय लोकतंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है, जिसे सार्वजनिक धन के उपयोग पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। संसदीय लोकतंत्र में कार्यपालिका जनता के धन का उपयोग करती है, लेकिन यह देखना कि यह धन कानून, संसद की स्वीकृति और वित्तीय नियमों … Read more

भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी – अनुच्छेद 350B, कार्य और भूमिका | Indian Polity Notes

भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी भारतीय संविधान द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्राधिकारी है, जिसका उद्देश्य भारत में भाषाई अल्पसंख्यकों को प्रदान किए गए संवैधानिक संरक्षणों की निगरानी करना है। भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहाँ विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि … Read more

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग आयोग

I. संवैधानिक प्रावधान और विकास II. संरचना और सेवा शर्तें III. कार्य और शक्तियाँ तुलनात्मक तालिका (Comparison Table) आधार SC आयोग (NCSC) ST आयोग (NCST) OBC आयोग (NCBC) अनुच्छेद 338 338-A 338-B संशोधन 65वां (1990) 89वां (2003) 102वां (2018) स्थापना वर्ष 2004 (पृथक रूप में) 2004 2018 (संवैधानिक रूप में) संरचना 1 अध्यक्ष + 1 … Read more

वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council) – अनुच्छेद 279A, संरचना, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

वस्तु एवं सेवा कर परिषद भारत की कर-प्रणाली में सहकारी संघवाद (Co-operative Federalism) का सबसे प्रमुख उदाहरण है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे एकीकृत अप्रत्यक्ष कर को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर समन्वय, परामर्श और सहमति आवश्यक थी। इसी उद्देश्य से भारतीय संविधान में GST परिषद की स्थापना … Read more

वित्त आयोग (Finance Commission) – अनुच्छेद 280, संरचना, कार्य और भूमिका | Indian Polity Notes

वित्त आयोग भारतीय संविधान के अंतर्गत गठित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है। भारत जैसे संघीय देश में जहाँ केंद्र और राज्यों के बीच कार्यों एवं दायित्वों का स्पष्ट विभाजन है, वहाँ वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक … Read more