राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): नियुक्ति, संरचना और शक्तियाँ Notes in hindi

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) राज्य स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार निकाय है। यह काफी हद तक NHRC के समान है, लेकिन इसके अधिकार क्षेत्र और नियुक्ति समिति में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) notes hindi

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): संरचना और शक्तियाँ

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन का प्रावधान है। यह केवल उन्हीं विषयों पर मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच कर सकता है जो संविधान की राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) में आते हैं।

आयोग की संरचना (2019 संशोधन के बाद)

  • अध्यक्ष: किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश
  • सदस्य: 1. एक सदस्य जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है। 2. एक सदस्य जो जिला न्यायाधीश है या रहा है (कम से कम 7 वर्ष का अनुभव)। 3. एक सदस्य जिसे मानवाधिकारों का व्यावहारिक अनुभव हो।

नियुक्ति और निष्कासन

SHRC चयन समिति (State Appointment Committee) राज्यपाल को नियुक्ति की सिफारिश करने वाली टीम मुख्यमंत्री (समिति के अध्यक्ष) विधानसभा अध्यक्ष राज्य गृह मंत्री विधानसभा विपक्ष का नेता विधान परिषद के सभापति और विपक्ष का नेता (यदि परिषद हो तो) नोट: नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन हटा केवल राष्ट्रपति सकता है।State Human Rights Framework | vikas singh | pdfnotes.in
  • नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।चयन समिति: मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, राज्य गृह मंत्री और विधानसभा में विपक्ष का नेता। (यदि राज्य में विधान परिषद है, तो उसके सभापति और विपक्ष के नेता भी शामिल होते हैं)।
  • निष्कासन (Removal): यहाँ एक बड़ा अंतर है—यद्यपि नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन उन्हें पद से केवल राष्ट्रपति ही हटा सकता है (NHRC के सदस्यों की तरह)।

आयोग के कार्य और शक्तियाँ

  1. स्वप्रेरणा (Suo-motu): मानवाधिकार उल्लंघन की खबरों पर स्वयं संज्ञान लेकर जाँच शुरू करना।
  2. निरीक्षण: राज्य सरकार के नियंत्रण वाली जेलों और सुधार गृहों का दौरा करना।
  3. सिफारिशी प्रकृति: आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं होतीं। यह न तो सजा दे सकता है और न ही स्वयं मुआवजा प्रदान कर सकता है।
  4. समय सीमा: आयोग 1 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की जाँच नहीं कर सकता।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गठन और संरचना

  1. राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) की स्थापना ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई है।
  2. यह केवल राज्य सूची (List-II) और समवर्ती सूची (List-III) के विषयों पर मानवाधिकार उल्लंघन की जांच कर सकता है।
  3. अपवाद: यदि किसी मामले की जांच NHRC या कोई अन्य वैधानिक आयोग पहले से कर रहा है, तो SHRC उसकी जांच नहीं करेगा।
  4. संरचना: यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्यक्ष और 2 अन्य सदस्य होते हैं।
  5. अध्यक्ष: वह व्यक्ति जो किसी उच्च न्यायालय (High Court) का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो।
  6. सदस्य: (1) हाई कोर्ट का कार्यरत या सेवानिवृत्त जज या जिला जज (7 वर्ष अनुभव), और (2) मानवाधिकारों का व्यावहारिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति।
  7. नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक विशेष समिति की सिफारिश पर की जाती है।
  8. नियुक्ति समिति: मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, राज्य गृह मंत्री और विधानसभा में विपक्ष का नेता।
  9. यदि राज्य में विधान परिषद है, तो परिषद के सभापति और विपक्ष के नेता भी समिति के सदस्य होते हैं।

कार्यकाल और निष्कासन

  1. कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
  2. वे पुनर्नियुक्ति के पात्र होते हैं।
  3. निष्कासन (Removal): यहाँ एक महत्वपूर्ण पेंच है—SHRC के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है।
  4. राष्ट्रपति उन्हें उसी आधार पर हटा सकता है जैसे NHRC के सदस्यों को (दिवालियापन, अक्षमता या कदाचार)।
  5. कदाचार के मामले में राष्ट्रपति मामला उच्चतम न्यायालय को भेजता है।

कार्य और शक्तियाँ

  1. मुख्य कार्य: राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच करना।
  2. राज्य के नियंत्रण वाली जेलों और सुधार गृहों का निरीक्षण करना।
  3. मानवाधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) को प्रोत्साहित करना।
  4. न्यायिक शक्ति: इसे सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त हैं और यह किसी भी राज्य के दस्तावेज को मंगवा सकता है।
  5. आयोग केवल उन्हीं मामलों की जांच कर सकता है जिन्हें घटित हुए एक वर्ष से कम समय हुआ हो।
  6. सीमा: आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं। यह न तो किसी को सजा दे सकता है और न ही स्वयं मुआवजा दे सकता है।
  7. यह अपनी रिपोर्ट संबंधित राज्य सरकार को सौंपता है, जिसे विधानमंडल के समक्ष रखा जाता है।
  8. SHRC राज्य में नागरिक स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण प्रहरी है।

NHRC VS SHRC:

विशेषता / आधारराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC)
गठनमानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
क्षेत्राधिकारपूरे भारत में (संघ और समवर्ती सूची)।संबंधित राज्य में (राज्य और समवर्ती सूची)।
संरचना1 अध्यक्ष + 5 सदस्य (+ 7 पदेन सदस्य)।1 अध्यक्ष + 2 सदस्य।
अध्यक्ष की योग्यतासेवानिवृत्त CJI या SC का सेवानिवृत्त जज।सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (HC) या सेवानिवृत्त जज (HC)।
नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा (6-सदस्यीय समिति की सलाह पर)।राज्यपाल द्वारा (4 या 6 सदस्यीय समिति की सलाह पर)।
कार्यकाल3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक।3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक।
निष्कासन (Removal)केवल राष्ट्रपति द्वारा।केवल राष्ट्रपति द्वारा (राज्यपाल नहीं)।
शक्तिसिविल कोर्ट की शक्तियां (अर्द्ध-न्यायिक)।सिविल कोर्ट की शक्तियां (अर्द्ध-न्यायिक)।
सीमा1 साल से पुराने मामलों की जांच नहीं कर सकता।1 साल से पुराने मामलों की जांच नहीं कर सकता।
रिपोर्टकेंद्र सरकार को सौंपी जाती है।संबंधित राज्य सरकार को सौंपी जाती है।

 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तो राज्यपाल करता है, लेकिन उन्हें हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। यह UPSC और अन्य परीक्षाओं का पसंदीदा सवाल है।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)

1. राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है? (UPPSC/BPSC)

उत्तर: संबंधित राज्य के राज्यपाल।

2. SHRC के सदस्यों को पद से हटाने की शक्ति किसके पास है? (SSC/UPSC)

उत्तर: भारत के राष्ट्रपति के पास (राज्यपाल के पास नहीं)।

3. राज्य मानवाधिकार आयोग किस सूची के विषयों पर जाँच कर सकता है?

उत्तर: राज्य सूची और समवर्ती सूची।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।