राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) – संरचना, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित एक प्रमुख वैधानिक (Statutory) निकाय है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में केवल अधिकारों का उल्लेख पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है कि राज्य की सभी संस्थाएँ नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े अधिकारों का सम्मान करें। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC): मानवाधिकारों का संरक्षक

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई थी। यह एक स्वतंत्र सांविधिक निकाय है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

आयोग की संरचना (Structure)

2019 के संशोधन के बाद, आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अध्यक्ष: भारत का कोई सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश
  • सदस्य: 1. एक सदस्य जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश है या रहा है। 2. एक सदस्य जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश है या रहा है। 3. तीन सदस्य (जिनमें कम से कम एक महिला हो) जिन्हें मानवाधिकारों का व्यावहारिक अनुभव हो।
  • पदेन सदस्य (Ex-officio Members): इसमें 7 राष्ट्रीय आयोगों (SC, ST, OBC, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बाल अधिकार और दिव्यांगों) के अध्यक्ष शामिल होते हैं।

नियुक्ति और कार्यकाल

NHRC चयन समिति (Appointment Committee) राष्ट्रपति को नियुक्ति की सिफारिश करने वाली 6 सदस्यीय टीम प्रधानमंत्री (समिति के अध्यक्ष) लोकसभा अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री राज्यसभा उप-सभापति लोकसभा विपक्ष का नेता राज्यसभा विपक्ष का नेता महत्वपूर्ण: राष्ट्रपति इस समिति की सिफारिश मानने के लिए बाध्य होते हैं। संविधान में उपराष्ट्रपति (सभापति) का इस समिति में कोई स्थान नहीं है।Human Rights Governance Model | vikas singh | pdfnotes.in
  • नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक 6 सदस्यीय समिति की सिफारिश पर की जाती है।समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उप-सभापति, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता और केंद्रीय गृह मंत्री।
  • कार्यकाल: इनका कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है। ये पुनर्नियुक्ति के पात्र होते हैं।

आयोग के मुख्य कार्य और शक्तियाँ

  1. जाँच: मानवाधिकारों के उल्लंघन या सरकारी कर्मचारी द्वारा इसके प्रति लापरवाही की शिकायत मिलने पर स्वयं (Suo-motu) या शिकायत के आधार पर जाँच करना।
  2. हस्तक्षेप: न्यायालय में लंबित मानवाधिकारों से संबंधित किसी भी मामले में हस्तक्षेप करना।
  3. निरीक्षण: जेलों और हिरासत केंद्रों का दौरा कर कैदियों की स्थिति का अध्ययन करना।
  4. समीक्षा: मानवाधिकारों के संरक्षण से संबंधित संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना।
  5. न्यायिक शक्ति: जाँच के दौरान आयोग को ‘सिविल न्यायालय’ (Civil Court) की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

स्थापना और संरचना

  1. NHRC की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी।
  2. इसकी स्थापना ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई थी।
  3. यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है।
  4. संरचना: इसमें एक अध्यक्ष और 5 पूर्णकालिक सदस्य होते हैं।
  5. अध्यक्ष: वह व्यक्ति जो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) रहा हो या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
  6. सदस्य: (1) सुप्रीम कोर्ट का कार्यरत या सेवानिवृत्त जज, (2) हाई कोर्ट का कार्यरत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, और (3) मानवाधिकारों का ज्ञान रखने वाले 3 व्यक्ति (जिनमें कम से कम एक महिला हो)।
  7. पदेन सदस्य (Ex-officio Members): इसमें 7 राष्ट्रीय आयोगों (SC, ST, OBC, महिला, अल्पसंख्यक, बाल अधिकार और दिव्यांगजन) के अध्यक्ष शामिल होते हैं।
  8. नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक 6-सदस्यीय समिति की सिफारिश पर की जाती है।
  9. समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा का उप-सभापति, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता और केंद्रीय गृह मंत्री।

कार्यकाल और निष्कासन

  1. कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है। (2019 संशोधन के बाद)।
  2. वे पुनर्नियुक्ति के पात्र होते हैं।
  3. पद छोड़ने के बाद, वे भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के पात्र नहीं होते।
  4. निष्कासन: राष्ट्रपति उन्हें दिवालियापन, मानसिक अक्षमता या सवैतनिक नियोजन के आधार पर हटा सकता है।
  5. ‘कदाचार’ के मामले में राष्ट्रपति मामला सुप्रीम कोर्ट को भेजता है, जिसकी सलाह बाध्यकारी होती है।

कार्य और शक्तियाँ

  1. मुख्य कार्य: मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच करना (स्वप्रेरणा या शिकायत पर)।
  2. जेलों और बंदी गृहों का दौरा करना और वहां की स्थितियों का अध्ययन करना।
  3. मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना।
  4. यह केवल उन्हीं मामलों की जांच कर सकता है जो एक वर्ष के भीतर घटित हुए हों (पुराने मामलों में हस्तक्षेप नहीं)।
  5. न्यायिक शक्ति: जांच के दौरान आयोग को सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
  6. सीमा: आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं; यह न तो सजा दे सकता है और न ही मुआवजा।
  7. सशस्त्र बलों (Armed Forces) के मामले में आयोग की शक्तियाँ बहुत सीमित हैं।
  8. रिपोर्ट: आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकार को सौंपता है।
  9. NHRC को ‘दंतविहीन बाघ’ (Toothless Tiger) भी कहा जाता है क्योंकि इसके पास दंड देने की शक्ति नहीं है।

NHRC vs SHRC

आधारराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC)
कानूनी आधारमानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
प्रकृतिवैधानिक (Statutory) निकायवैधानिक (Statutory) निकाय
क्षेत्राधिकारपूरे भारत में मानवाधिकार मामलेराज्य स्तर तक सीमित
अध्यक्षसेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, भारतसेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय
सदस्यों की संरचनान्यायिक + गैर-न्यायिक सदस्य; राष्ट्रीय आयोगों के प्रमुख ex-officioअध्यक्ष + सदस्य (संख्या/प्रकृति राज्य अधिनियम/नियमों पर निर्भर)
नियुक्तिराष्ट्रपति (केंद्र सरकार की सिफारिश पर)राज्यपाल (राज्य सरकार की सिफारिश पर)
रिपोर्ट किसेराष्ट्रपति → संसदराज्यपाल → राज्य विधानमंडल
शक्तियाँजाँच, सिफारिश, अध्ययन, जागरूकताजाँच और सिफारिश (राज्य मामलों तक)
बाध्यकारी प्रकृतिसिफारिशें बाध्यकारी नहींसिफारिशें बाध्यकारी नहीं
पुलिस/हिरासत मामलेजाँच/सिफारिश; अभियोजन नहींजाँच/सिफारिश; अभियोजन नहीं
ओवरलैपSHRC मामलों पर मार्गदर्शन/समीक्षा संभवNHRC के अधीन/समन्वय

📌 Prelims Tip:

NHRC = National jurisdiction, SHRC = State jurisdiction (दोनों Statutory, न कि Constitutional)

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)

1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति करने वाली समिति में कौन शामिल नहीं होता? (UPSC/UPPSC)

  • (A) लोकसभा अध्यक्ष
  • (B) राज्यसभा का उप-सभापति
  • (C) केंद्रीय गृह मंत्री
  • (D) राज्यसभा का सभापति

उत्तर: (D) राज्यसभा का सभापति (उपराष्ट्रपति) इसमें शामिल नहीं होते।

2. NHRC का अध्यक्ष किसे नियुक्त किया जा सकता है? (SSC/BPSC)

उत्तर: उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश (2019 के बाद)।

3. NHRC अपनी वार्षिक रिपोर्ट किसे प्रस्तुत करता है?

उत्तर: केंद्र सरकार को (जिसे संसद के समक्ष रखा जाता है)।

FAQs

1. NHRC क्या है?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन हेतु गठित वैधानिक निकाय है।

2. NHRC का गठन किस अधिनियम के तहत हुआ?

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993

3. SHRC क्या है?

राज्य मानवाधिकार आयोग राज्यों में मानवाधिकार मामलों की जाँच हेतु गठित वैधानिक आयोग है।

4. NHRC और SHRC में मुख्य अंतर क्या है?

NHRC का क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय, जबकि SHRC का राज्य स्तर तक सीमित है।

5. NHRC के अध्यक्ष की योग्यता क्या होती है?

सेवानिवृत्त भारत के मुख्य न्यायाधीश

6. SHRC के अध्यक्ष की योग्यता क्या होती है?

सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

7. क्या NHRC/SHRC की सिफारिशें बाध्यकारी होती हैं?

नहीं, दोनों की सिफारिशें सलाहकारी होती हैं।

8. NHRC अपनी रिपोर्ट किसे देता है?

राष्ट्रपति को; रिपोर्ट संसद में रखी जाती है।

9. SHRC अपनी रिपोर्ट किसे देता है?

राज्यपाल को; रिपोर्ट राज्य विधानमंडल में रखी जाती है।

10. क्या NHRC सीधे सज़ा दे सकता है?

नहीं, यह जाँच और सिफारिश तक सीमित है।

11. पुलिस/हिरासत मामलों में NHRC की भूमिका क्या है?

जाँच, मुआवज़े/सुधार की सिफारिश; अभियोजन नहीं।

12. क्या NHRC संवैधानिक निकाय है?

नहीं, यह वैधानिक (Statutory) निकाय है।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।