लोक सेवाएँ (Public Services) – संवैधानिक ढांचा,अखिल भारतीय सेवाओं का वर्गीकरण

भारतीय शासन व्यवस्था में लोक सेवाएँ (Public Services) देश की ‘स्टील फ्रेम’ मानी जाती हैं।इस अध्याय में अखिल भारतीय सेवाएँ, केंद्रीय व राज्य सेवाएँ, तथा संविधान के भाग-XIV के अंतर्गत लोक सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। लोक सेवाएँ (Public Services): संवैधानिक ढांचा एवं वर्गीकरण भारतीय संविधान के भाग XIV (14) में अनुच्छेद 308 … Read more

राजभाषा (Official Language of India) – संवैधानिक प्रावधान एवं महत्वपूर्ण तथ्य

भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ भाषाई विविधता के बावजूद प्रशासनिक कार्यों के संचालन हेतु एक साझा भाषा व्यवस्था की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई।प्रतियोगी परीक्षाओं में राजभाषा हिंदी से जुड़े प्रश्न संविधान, अनुच्छेद, आयोग और अधिनियम के रूप में बार-बार पूछे … Read more

सहकारी समितियाँ (Co-operative Societies) – महत्वपूर्ण तथ्य और संवैधानिक प्रावधान

सहकारी समितियाँ (Co-operative Societies) भारतीय लोकतंत्र में जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक हैं। ‘सहकार’ का अर्थ है मिलकर काम करना। ये संस्थाएँ आपसी सहयोग और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित होती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC) के दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। सहकारी समितियाँ: महत्वपूर्ण तथ्य एवं संवैधानिक प्रावधान … Read more

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) भारत में आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए सर्वोच्च निकाय है। यह आपदा आने से पहले की तैयारी और आपदा के बाद के राहत कार्यों के लिए नीति निर्माण का कार्य करता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA): आपदा प्रबंधन का शीर्ष निकाय NDMA की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 … Read more

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) : शक्तियाँ और विशेष अधिकार

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) भारत की केंद्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी है। इसकी स्थापना 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के बाद देश की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए की गई थी। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA): भारत का आतंक-रोधी रक्षक NIA का गठन 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा … Read more

लोकपाल एवं लोकायुक्त : संरचना और नियुक्ति, क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ

लोकपाल एवं लोकायुक्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच माना जाता है। यह संस्था ‘ओम्बुड्समैन’ (Ombudsman) की अवधारणा पर आधारित है, जिसकी मांग भारत में दशकों तक की गई थी। लोकपाल एवं लोकायुक्त: भ्रष्टाचार विरोधी ओम्बुड्समैन ‘लोकपाल’ शब्द का अर्थ है—लोगों का रक्षक। भारत में लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के … Read more

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI): कार्य, शक्तियाँ, संरचना और नियुक्ति

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) भारत की प्रमुख जाँच एजेंसी है। यह न तो एक संवैधानिक निकाय है और न ही एक वैधानिक निकाय, बल्कि यह अपनी शक्तियाँ एक पुराने कानून ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946’ से प्राप्त करती है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI): भारत की प्रमुख जाँच एजेंसी CBI का गठन 1963 में गृह … Read more

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) संवैधानिक स्थिति, नियुक्ति, एवं शक्तियाँ

केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भारत सरकार में भ्रष्टाचार रोकने वाली मुख्य संस्था है। यह एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है जो केंद्र सरकार के तहत सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी करता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC): भ्रष्टाचार विरोधी प्रहरी केंद्रीय सतर्कता आयोग का गठन 1964 में संथानम समिति (1962-64) की सिफारिशों पर किया गया था। … Read more

केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोग (CIC & SIC)

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और राज्य सूचना आयोग (SIC) को एक साथ पढ़ना सबसे बेहतर है क्योंकि ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ के तहत इन दोनों की कार्यप्रणाली लगभग समान है। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) राज्य सूचना आयोग (SIC) सूचना आयोग: केंद्र बनाम राज्य RTI अधिनियम, 2005 के तहत तुलनात्मक संरचना विशेषता केंद्रीय आयोग (CIC) … Read more

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): नियुक्ति, संरचना और शक्तियाँ Notes in hindi

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) राज्य स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार निकाय है। यह काफी हद तक NHRC के समान है, लेकिन इसके अधिकार क्षेत्र और नियुक्ति समिति में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC): संरचना और शक्तियाँ मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत प्रत्येक राज्य में राज्य मानवाधिकार आयोग के … Read more