लोकपाल एवं लोकायुक्त : संरचना और नियुक्ति, क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ

लोकपाल एवं लोकायुक्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच माना जाता है। यह संस्था ‘ओम्बुड्समैन’ (Ombudsman) की अवधारणा पर आधारित है, जिसकी मांग भारत में दशकों तक की गई थी।

लोकपाल एवं लोकायुक्त

लोकपाल एवं लोकायुक्त: भ्रष्टाचार विरोधी ओम्बुड्समैन

‘लोकपाल’ शब्द का अर्थ है—लोगों का रक्षक। भारत में लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के माध्यम से केंद्र के लिए लोकपाल और राज्यों के लिए लोकायुक्त की स्थापना की गई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • स्वीडन (1809): ओम्बुड्समैन संस्था की शुरुआत सबसे पहले स्वीडन में हुई थी।
  • भारत में प्रथम चर्चा: 1960 के दशक में कानून मंत्री एम.सी. सीतलवाड़ ने संसद में इसकी आवश्यकता बताई।
  • नामकरण: ‘लोकपाल’ शब्द का सुझाव डॉ. एल.एम. सिंघवी ने दिया था।
  • प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966): मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में इस आयोग ने केंद्र और राज्यों के लिए दो स्वतंत्र अधिकारियों की सिफारिश की थी।

लोकपाल की संरचना और नियुक्ति

लोकपाल एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होते हैं।

लोकपाल चयन समिति (Selection Committee) लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अनुसार 1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष) 2. लोकसभा अध्यक्ष 3. विपक्ष का नेता (LS) 4. CJI या मनोनीत जज 5. प्रख्यात न्यायविद् नोट: लोकपाल का कार्यपालिका से स्वतंत्र होना ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।Anti-Corruption Framework India | vikas singh | pdfnotes.in
  • अध्यक्ष: भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश या कोई प्रख्यात व्यक्ति।
  • सदस्य: 50% सदस्य न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए और 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए।
  • चयन समिति: नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है:
    1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
    2. लोकसभा अध्यक्ष
    3. लोकसभा में विपक्ष का नेता
    4. भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामित जज)
    5. राष्ट्रपति द्वारा नामित एक प्रख्यात न्यायविद्।

क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ

लोकपाल का क्षेत्राधिकार अत्यंत विस्तृत है, इसमें शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री: (कुछ सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े अपवादों को छोड़कर)।
  • केंद्रीय मंत्री और सांसद: (संसद में दिए गए भाषण या वोट को छोड़कर)।
  • समूह A, B, C, D के अधिकारी: केंद्र सरकार के सभी स्तर के कर्मचारी।
  • शक्तियाँ: लोकपाल को CBI जैसी संस्थाओं को जाँच का निर्देश देने और उनकी निगरानी करने की शक्ति प्राप्त है। इसके पास सिविल न्यायालय की शक्तियाँ होती हैं और यह भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को कुर्क (Seize) कर सकता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गठन

  1. ‘ओम्बुड्समैन’ संस्था की शुरुआत सबसे पहले 1809 में स्वीडन में हुई थी।
  2. भारत में ‘लोकपाल’ शब्द का प्रतिपादन डॉ. एल.एम. सिंघवी ने 1963 में किया था।
  3. प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) ने लोकपाल और लोकायुक्त की स्थापना की सिफारिश की थी।
  4. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013: इसी कानून के माध्यम से केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का प्रावधान किया गया।
  5. यह अधिनियम 16 जनवरी 2014 से प्रभावी हुआ।
  6. लोकपाल एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।

लोकपाल की संरचना और नियुक्ति

  1. संरचना: लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होते हैं।
  2. इन 8 सदस्यों में से 50% न्यायिक सदस्य होने चाहिए।
  3. साथ ही, कुल सदस्यों में से 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक और महिला वर्ग से होने चाहिए।
  4. अध्यक्ष की योग्यता: वह भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त जज या कोई विशिष्ट व्यक्ति होना चाहिए।
  5. चयन समिति: लोकपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।
  6. समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष का नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामित जज) और एक प्रतिष्ठित न्यायविद।
  7. कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है।

अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ

  1. अधिकार क्षेत्र: लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और केंद्र सरकार के समूह A, B, C, D के अधिकारी शामिल हैं।
  2. प्रधानमंत्री पर सीमा: प्रधानमंत्री के विरुद्ध जांच के लिए लोकपाल की पूर्ण पीठ के 2/3 सदस्यों की सहमति अनिवार्य है और यह जांच बंद कमरे में होनी चाहिए।
  3. लोकपाल को भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की शक्ति प्राप्त है।
  4. इसके पास CBI और अन्य जांच एजेंसियों को निर्देश देने और उनके ऊपर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति है।
  5. लोकपाल के पास अपनी एक ‘जांच शाखा’ (Inquiry Wing) और ‘अभियोजन शाखा’ (Prosecution Wing) होती है।
  6. लोकायुक्त: अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य को अपने यहाँ एक वर्ष के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करना अनिवार्य है।
  7. महाराष्ट्र (1971) लोकायुक्त की स्थापना करने वाला भारत का पहला राज्य था।
  8. लोकपाल की सफलता इसके राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होने पर निर्भर करती है।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)

1. भारत में ‘लोकपाल’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था? (UPSC/SSC)

उत्तर: डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी (एल.एम. सिंघवी)।

2. लोकायुक्त संस्था स्थापित करने वाला भारत का प्रथम राज्य कौन सा है? (UPPSC/BPSC)

उत्तर: महाराष्ट्र (1971)।

3. लोकपाल की चयन समिति में कौन शामिल नहीं होता?

  • (A) प्रधानमंत्री
  • (B) लोकसभा अध्यक्ष
  • (C) उपराष्ट्रपति
  • (D) मुख्य न्यायाधीश

उत्तर: (C) उपराष्ट्रपति इसमें शामिल नहीं होते।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।