भारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ भाषाई विविधता के बावजूद प्रशासनिक कार्यों के संचालन हेतु एक साझा भाषा व्यवस्था की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
प्रतियोगी परीक्षाओं में राजभाषा हिंदी से जुड़े प्रश्न संविधान, अनुच्छेद, आयोग और अधिनियम के रूप में बार-बार पूछे जाते हैं।

Table of Contents
राजभाषा (Official Language): संवैधानिक प्रावधान एवं महत्वपूर्ण तथ्य
भारतीय संविधान के भाग XVII (17) में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। भारत की कोई ‘राष्ट्रभाषा’ (National Language) नहीं है; हिंदी भारत की राजभाषा (Official Language) है।
संघ की राजभाषा (Official Language) – अनुच्छेद 343
- अनुच्छेद 343(1): संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
- अंकों का रूप: भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (1, 2, 3…) प्रयोग में लाया जाएगा।
राजभाषा आयोग और समिति – अनुच्छेद 344
- आयोग: राष्ट्रपति द्वारा संविधान लागू होने के 5 वर्ष बाद और फिर प्रत्येक 10 वर्ष बाद राजभाषा आयोग का गठन किया जाएगा।
- प्रथम आयोग: 1955 में बी.जी. खेर की अध्यक्षता में प्रथम राजभाषा आयोग गठित हुआ था।
- संसदीय समिति: इसमें 30 सदस्य होते हैं (20 लोकसभा + 10 राज्यसभा), जो आयोग की सिफारिशों की जाँच करते हैं।
अनुच्छेद 344 – राजभाषा आयोग एवं समिति
- राजभाषा आयोग
- अध्यक्ष: राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त
- गठन: संविधान लागू होने के 5 वर्ष बाद
- संसदीय राजभाषा समिति
- अध्यक्ष: गृह मंत्री
- सदस्य: 30 (20 लोकसभा + 10 राज्यसभा)
अंग्रेज़ी भाषा का प्रावधान
- प्रारंभिक अवधि: 15 वर्ष (1950–1965)
- इसके बाद संसद को अंग्रेज़ी के प्रयोग को जारी रखने की शक्ति
- इसी के आधार पर राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित किया गया
विशेष निर्देश (अनुच्छेद 350-351)
अनुच्छेद 351: केंद्र सरकार का कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार और विकास करे।
- संघ का कर्तव्य:
- हिंदी का विकास करना
- अन्य भारतीय भाषाओं से शब्द ग्रहण करना
- हिंदी को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनाना
अनुच्छेद 350A: प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने का निर्देश।
अनुच्छेद 350B: भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति।
राजभाषा अधिनियम, 1963
- उद्देश्य: संघ के शासकीय कार्यों में हिंदी के साथ अंग्रेज़ी के प्रयोग को जारी रखना
राजभाषा अधिनियम- 1963 के प्रमुख तथ्य:
- उद्देश्य: संविधान के अनुच्छेद 343(3) के तहत संसद को दी गई शक्ति का उपयोग करते हुए यह अधिनियम बनाया गया।
- अनिवार्य द्विभाषी प्रयोग: 1967 के संशोधन के बाद संकल्प (Resolutions), सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचनाएं, प्रशासनिक रिपोर्ट और संविदाएं अनिवार्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी दोनों में जारी की जानी चाहिए।
- राजभाषा संसदीय समिति: अधिनियम की धारा 4 के तहत राजभाषा के प्रयोग की समीक्षा के लिए 30 सदस्यीय संसदीय समिति का प्रावधान है।
- राजभाषा नियम, 1976: इसी अधिनियम की शक्तियों का प्रयोग करते हुए 1976 में नियम बनाए गए, जिसके तहत देश को ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्रों में बांटा गया।
- अहिन्दी भाषियों का संरक्षण: 1967 के संशोधन ने यह सुनिश्चित किया कि जब तक सभी अहिन्दी भाषी राज्य अंग्रेजी को समाप्त करने के लिए सहमत नहीं हो जाते, तब तक अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा।
न्यायपालिका और विधियों की भाषा (अनुच्छेद 348-349)
उच्च और उच्चतम न्यायालय और राजभाषा
- उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की भाषा: अंग्रेज़ी
- राष्ट्रपति की अनुमति से राज्य उच्च न्यायालय में हिंदी का प्रयोग संभव
- अनुच्छेद 348: जब तक संसद कानून बनाकर अन्यथा प्रावधान न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय (SC) और उच्च न्यायालयों (HC) की कार्यवाही अंग्रेजी में होगी।
प्रादेशिक भाषाएँ – अनुच्छेद 345-347
- अनुच्छेद 345: राज्य विधानमंडल को यह अधिकार है कि वह उस राज्य में प्रयोग होने वाली एक या अधिक भाषाओं को राजभाषा के रूप में चुन सके।
- अनुच्छेद 346: एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच, या राज्य और संघ के बीच पत्राचार की भाषा राजभाषा होगी।
राज्यों की राजभाषा (Article 345)
- प्रत्येक राज्य को यह अधिकार है कि वह:
- हिंदी
- अंग्रेज़ी
- या कोई अन्य क्षेत्रीय भाषा
को अपनी राजभाषा घोषित कर सकता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- हिंदी को राजभाषा के रूप में 14 सितंबर 1949 को स्वीकार किया गया।
- इसीलिए प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है।
- ‘विश्व हिंदी दिवस’ हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है।
- राजभाषा का उल्लेख संविधान के भाग 17 में है।
- अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के प्रावधान हैं।
- भारत की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है।
- संविधान की 8वीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएँ शामिल हैं।
- मूल संविधान की 8वीं अनुसूची में केवल 14 भाषाएँ थीं।
- 21वें संशोधन (1967) द्वारा ‘सिंधी’ भाषा को जोड़ा गया।
- 71वें संशोधन (1992) द्वारा कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली (KMN) को जोड़ा गया।
- 92वें संशोधन (2003) द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली (BDMS) जोड़ी गईं।
- शास्त्रीय भाषाएँ (Classical Languages): वर्तमान में तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया शास्त्रीय भाषाएँ हैं।
- राजभाषा अधिनियम 1963 में पारित किया गया था।
- अनुच्छेद 351 हिंदी के विकास के लिए केंद्र को निर्देश देता है।
- राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- संसद की राजभाषा समिति के अध्यक्ष आमतौर पर केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं।
- अंग्रेजी भारत की 8वीं अनुसूची की 22 भाषाओं में शामिल नहीं है।
- नागालैंड और मिजोरम की राजभाषा अंग्रेजी है।
- अनुच्छेद 348 न्यायालयों की भाषा से संबंधित है।
- हिंदी भाषी क्षेत्रों को ‘क’ क्षेत्र (Region A) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- राजभाषा संकल्प 1968 में स्वीकार किया गया था।
- राष्ट्रपति द्वारा गठित राजभाषा आयोग में 8वीं अनुसूची की भाषाओं के प्रतिनिधि होते हैं।
- ‘मुंशी-आयंगर फॉर्मूला’ राजभाषा के चयन से संबंधित था।
- प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 1975 में नागपुर में हुआ था।
- मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 350A में है।
- भाषाई अल्पसंख्यक अधिकारी का पद 7वें संशोधन (1956) द्वारा जोड़ा गया।
- हिंदी को संघ की भाषा बनाने का प्रस्ताव गोपालस्वामी आयंगर ने रखा था।
- सरकारी कामकाज में अंग्रेजी का प्रयोग 1965 के बाद भी जारी रखने के लिए 1963 का अधिनियम बना।
- राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ हर मंत्रालय में गठित की जाती हैं।
Quick Revision Table
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संघ की राजभाषा | हिंदी |
| लिपि | देवनागरी |
| संविधान का भाग | भाग XVII |
| अनुच्छेद | 343–351 |
| राजभाषा अधिनियम | 1963 |
| संशोधन वर्ष | 1967 |
| राजभाषा आयोग | अनुच्छेद 344 |
| न्यायपालिका की भाषा | अंग्रेज़ी |
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