राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए गठित एक प्रमुख वैधानिक (Statutory) निकाय है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में केवल अधिकारों का उल्लेख पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है कि राज्य की सभी संस्थाएँ नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से जुड़े अधिकारों का सम्मान करें। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया। यह आयोग मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की जाँच करता है, सरकारी तंत्र को सुधारात्मक सुझाव देता है और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देता है। यद्यपि NHRC की सिफारिशें कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होतीं, फिर भी नैतिक दबाव और सार्वजनिक महत्व के कारण इनका प्रशासनिक प्रभाव काफ़ी व्यापक होता है।
I. स्थापना और संरचना
- NHRC की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी।
- इसकी स्थापना ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ के तहत की गई थी।
- यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है।
- संरचना: इसमें एक अध्यक्ष और 5 पूर्णकालिक सदस्य होते हैं।
- अध्यक्ष: वह व्यक्ति जो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) रहा हो या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
- सदस्य: (1) सुप्रीम कोर्ट का कार्यरत या सेवानिवृत्त जज, (2) हाई कोर्ट का कार्यरत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, और (3) मानवाधिकारों का ज्ञान रखने वाले 3 व्यक्ति (जिनमें कम से कम एक महिला हो)।
- पदेन सदस्य (Ex-officio Members): इसमें 7 राष्ट्रीय आयोगों (SC, ST, OBC, महिला, अल्पसंख्यक, बाल अधिकार और दिव्यांगजन) के अध्यक्ष शामिल होते हैं।
- नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक 6-सदस्यीय समिति की सिफारिश पर की जाती है।
- समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा का उप-सभापति, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता और केंद्रीय गृह मंत्री।
II. कार्यकाल और निष्कासन
- कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है। (2019 संशोधन के बाद)।
- वे पुनर्नियुक्ति के पात्र होते हैं।
- पद छोड़ने के बाद, वे भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के पात्र नहीं होते।
- निष्कासन: राष्ट्रपति उन्हें दिवालियापन, मानसिक अक्षमता या सवैतनिक नियोजन के आधार पर हटा सकता है।
- ‘कदाचार’ के मामले में राष्ट्रपति मामला सुप्रीम कोर्ट को भेजता है, जिसकी सलाह बाध्यकारी होती है।
III. कार्य और शक्तियाँ
- मुख्य कार्य: मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच करना (स्वप्रेरणा या शिकायत पर)।
- जेलों और बंदी गृहों का दौरा करना और वहां की स्थितियों का अध्ययन करना।
- मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना।
- यह केवल उन्हीं मामलों की जांच कर सकता है जो एक वर्ष के भीतर घटित हुए हों (पुराने मामलों में हस्तक्षेप नहीं)।
- न्यायिक शक्ति: जांच के दौरान आयोग को सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
- सीमा: आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं; यह न तो सजा दे सकता है और न ही मुआवजा।
- सशस्त्र बलों (Armed Forces) के मामले में आयोग की शक्तियाँ बहुत सीमित हैं।
- रिपोर्ट: आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकार को सौंपता है।
- NHRC को ‘दंतविहीन बाघ’ (Toothless Tiger) भी कहा जाता है क्योंकि इसके पास दंड देने की शक्ति नहीं है।
NHRC vs SHRC (Comparison Table)
| आधार | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) | राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) |
|---|---|---|
| कानूनी आधार | मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 |
| प्रकृति | वैधानिक (Statutory) निकाय | वैधानिक (Statutory) निकाय |
| क्षेत्राधिकार | पूरे भारत में मानवाधिकार मामले | राज्य स्तर तक सीमित |
| अध्यक्ष | सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, भारत | सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय |
| सदस्यों की संरचना | न्यायिक + गैर-न्यायिक सदस्य; राष्ट्रीय आयोगों के प्रमुख ex-officio | अध्यक्ष + सदस्य (संख्या/प्रकृति राज्य अधिनियम/नियमों पर निर्भर) |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति (केंद्र सरकार की सिफारिश पर) | राज्यपाल (राज्य सरकार की सिफारिश पर) |
| रिपोर्ट किसे | राष्ट्रपति → संसद | राज्यपाल → राज्य विधानमंडल |
| शक्तियाँ | जाँच, सिफारिश, अध्ययन, जागरूकता | जाँच और सिफारिश (राज्य मामलों तक) |
| बाध्यकारी प्रकृति | सिफारिशें बाध्यकारी नहीं | सिफारिशें बाध्यकारी नहीं |
| पुलिस/हिरासत मामले | जाँच/सिफारिश; अभियोजन नहीं | जाँच/सिफारिश; अभियोजन नहीं |
| ओवरलैप | SHRC मामलों पर मार्गदर्शन/समीक्षा संभव | NHRC के अधीन/समन्वय |
📌 Prelims Tip:
NHRC = National jurisdiction, SHRC = State jurisdiction (दोनों Statutory, न कि Constitutional)
❓ NHRC & SHRC – FAQs
1. NHRC क्या है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन हेतु गठित वैधानिक निकाय है।
2. NHRC का गठन किस अधिनियम के तहत हुआ?
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993।
3. SHRC क्या है?
राज्य मानवाधिकार आयोग राज्यों में मानवाधिकार मामलों की जाँच हेतु गठित वैधानिक आयोग है।
4. NHRC और SHRC में मुख्य अंतर क्या है?
NHRC का क्षेत्राधिकार राष्ट्रीय, जबकि SHRC का राज्य स्तर तक सीमित है।
5. NHRC के अध्यक्ष की योग्यता क्या होती है?
सेवानिवृत्त भारत के मुख्य न्यायाधीश।
6. SHRC के अध्यक्ष की योग्यता क्या होती है?
सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।
7. क्या NHRC/SHRC की सिफारिशें बाध्यकारी होती हैं?
नहीं, दोनों की सिफारिशें सलाहकारी होती हैं।
8. NHRC अपनी रिपोर्ट किसे देता है?
राष्ट्रपति को; रिपोर्ट संसद में रखी जाती है।
9. SHRC अपनी रिपोर्ट किसे देता है?
राज्यपाल को; रिपोर्ट राज्य विधानमंडल में रखी जाती है।
10. क्या NHRC सीधे सज़ा दे सकता है?
नहीं, यह जाँच और सिफारिश तक सीमित है।
11. पुलिस/हिरासत मामलों में NHRC की भूमिका क्या है?
जाँच, मुआवज़े/सुधार की सिफारिश; अभियोजन नहीं।
12. क्या NHRC संवैधानिक निकाय है?
नहीं, यह वैधानिक (Statutory) निकाय है।
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