उत्तर भारत का विशाल मैदान (Northern Indian Plain) भारतीय भूगोल (Indian Geography) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौतिक प्रदेश है। यह मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों (Alluvial Deposits) से बना है।
UPSC, SSC, Railway, NTPC, UPPSC, UPSSSC PET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर भारत का मैदान, भाबर, तराई, बांगर, खादर, दोआब, गंगा का मैदान, ब्रह्मपुत्र का मैदान, डेल्टा और जलोढ़ मिट्टी से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस लेख में उत्तर भारत के मैदान की उत्पत्ति, विस्तार, संरचना, क्षेत्रीय विभाजन, कृषि, नदियाँ, मिट्टी, प्रमुख भौगोलिक शब्दावली और परीक्षा उपयोगी तथ्यों को विस्तार से समझाया गया है।
उत्तर भारत के मैदान का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर भारत के मैदान का निर्माण मुख्य रूप से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा हुआ है।
इन नदियों ने हिमालय तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में मिट्टी, बालू, गाद और अन्य पदार्थ लाकर लंबे समय तक इस क्षेत्र में जमा किए। इन निक्षेपों से विशाल जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain) का निर्माण हुआ।
यह मैदान:
- उत्तर में हिमालय
- दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार
के बीच स्थित है।
उत्तर भारत के मैदान का विस्तार
उत्तर भारत का मैदान पूर्व से पश्चिम तक लगभग 2400 किमी लंबा है।
इसकी चौड़ाई पश्चिमी भाग में अधिक और पूर्वी भाग में अपेक्षाकृत कम है।
- पश्चिमी भाग में चौड़ाई लगभग 500 किमी
- पूर्वी भाग में चौड़ाई लगभग 150 किमी
तक बताई जाती है।
यह मैदान विश्व के सबसे उपजाऊ मैदानों में से एक है।
उत्तर भारत के मैदान की प्रमुख विशेषताएँ
उत्तर भारत के मैदान की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- जलोढ़ मिट्टी की प्रधानता
- समतल एवं मंद ढाल
- नदियों का विस्तृत जाल
- अत्यधिक कृषि योग्य भूमि
- उच्च जनसंख्या घनत्व
- नहर एवं ट्यूबवेल आधारित सिंचाई
- उपजाऊ कृषि भूमि
- परिवहन के लिए अनुकूल स्थलाकृति
इसी कारण यह क्षेत्र भारत के प्रमुख कृषि एवं जनसंख्या क्षेत्रों में शामिल है।
उत्तर भारत के मैदान के प्रमुख भौगोलिक भाग
हिमालय की तलहटी से दक्षिण की ओर बढ़ने पर उत्तर भारत के मैदान में कई महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र मिलते हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
- भाबर
- तराई
- बांगर
- खादर
इन चारों को समझना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
भाबर क्या है?
हिमालय की तलहटी में कंकड़-पत्थरों के निक्षेप से बने क्षेत्र को भाबर (Bhabar) कहा जाता है।
भाबर क्षेत्र में नदियाँ सतह से गायब होकर कंकड़-पत्थरों के नीचे बहने लगती हैं।
भाबर की चौड़ाई लगभग 8 से 16 किमी तक मानी जाती है।
भाबर की प्रमुख विशेषताएँ
- कंकड़-पत्थरों का निक्षेप
- अत्यधिक छिद्रयुक्त क्षेत्र
- नदियों का भूमिगत होना
- कृषि के लिए अपेक्षाकृत अनुपयुक्त
- हिमालय की तलहटी में स्थिति
तराई क्या है?
भाबर के दक्षिण में स्थित दलदली और नम क्षेत्र को तराई (Terai) कहा जाता है।
भाबर क्षेत्र में जो नदियाँ सतह से गायब हो जाती हैं, वे तराई क्षेत्र में पुनः सतह पर दिखाई देने लगती हैं।
तराई क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ:
- अधिक नमी
- दलदली भूमि
- सघन वनस्पति
- वन्यजीवों की अधिकता
- कृषि की संभावनाएँ
वर्तमान समय में तराई क्षेत्र के कई हिस्सों को साफ करके गन्ना और चावल जैसी फसलों की खेती की जाती है।
भाबर और तराई में अंतर
| आधार | भाबर | तराई |
|---|---|---|
| स्थिति | हिमालय की तलहटी के निकट | भाबर के दक्षिण में |
| मिट्टी/निक्षेप | कंकड़-पत्थर | महीन जलोढ़ निक्षेप |
| नदियाँ | सतह से गायब होती हैं | पुनः सतह पर आती हैं |
| नमी | अपेक्षाकृत कम | अधिक |
| वनस्पति | अपेक्षाकृत कम | सघन |
| कृषि | कम अनुकूल | अधिक अनुकूल |
बांगर क्या है?
मैदान का वह ऊँचा भाग जहाँ सामान्यतः नदियों के बाढ़ का पानी नहीं पहुँचता, बांगर (Bhangar) कहलाता है।
बांगर क्षेत्र पुरानी जलोढ़ मिट्टी (Old Alluvium) से बना होता है।
इस क्षेत्र में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय रूप से कंकड़ कहा जाता है।
बांगर की प्रमुख विशेषताएँ
- पुरानी जलोढ़ मिट्टी
- अपेक्षाकृत ऊँचा क्षेत्र
- बाढ़ का खतरा कम
- बस्तियों का अधिक घनत्व
- कंकड़युक्त चूनेदार निक्षेप
खादर क्या है?
मैदान का वह निचला भाग जहाँ नदियों द्वारा प्रतिवर्ष नई जलोढ़ मिट्टी और बाढ़ का पानी पहुँचता है, खादर (Khadar) कहलाता है।
खादर क्षेत्र नवीन जलोढ़ मिट्टी (New Alluvium) से बना होता है।
हर वर्ष नई मिट्टी के निक्षेप के कारण यह क्षेत्र अत्यधिक उपजाऊ माना जाता है।
खादर की प्रमुख विशेषताएँ
- नवीन जलोढ़ मिट्टी
- नदी के निकट स्थिति
- बाढ़ का प्रभाव
- प्रतिवर्ष नए निक्षेप
- अधिक उर्वरता
बांगर और खादर में अंतर
| आधार | बांगर | खादर |
|---|---|---|
| मिट्टी | पुरानी जलोढ़ | नवीन जलोढ़ |
| स्थिति | ऊँचा भाग | निचला भाग |
| बाढ़ | सामान्यतः कम प्रभाव | अधिक प्रभाव |
| उर्वरता | अपेक्षाकृत कम | अधिक |
| नए निक्षेप | कम | हर वर्ष |
| स्थानीय निक्षेप | कंकड़ | नवीन जलोढ़ |
उत्तर भारत के मैदान में प्रमुख दोआब
दो नदियों के बीच स्थित उपजाऊ भूमि को दोआब (Doab) कहा जाता है।
पंजाब के मैदान में कई महत्वपूर्ण दोआब पाए जाते हैं।
बिस्त दोआब
ब्यास और सतलज नदियों के बीच का क्षेत्र बिस्त दोआब कहलाता है।
बारी दोआब
ब्यास और रावी नदियों के बीच का क्षेत्र बारी दोआब कहलाता है।
रचना दोआब
रावी और चेनाब नदियों के बीच का क्षेत्र रचना दोआब कहलाता है।
चाज दोआब
चेनाब और झेलम नदियों के बीच का क्षेत्र चाज दोआब कहलाता है।
सिंधु सागर दोआब
झेलम, चेनाब और सिंधु नदियों के बीच का क्षेत्र सिंधु सागर दोआब कहलाता है।
गंगा के मैदान का विभाजन
गंगा के मैदान को सामान्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है:
- ऊपरी गंगा मैदान
- मध्य गंगा मैदान
- निचला गंगा मैदान
ऊपरी गंगा मैदान
ऊपरी गंगा मैदान मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विस्तृत है।
मध्य गंगा मैदान
मध्य गंगा मैदान पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में फैला हुआ है।
निचला गंगा मैदान
निचला गंगा मैदान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में स्थित है।
ब्रह्मपुत्र का मैदान
ब्रह्मपुत्र का मैदान मुख्य रूप से असम में स्थित है और इसे असम घाटी के नाम से भी जाना जाता है।
यह एक अपेक्षाकृत सँकरी घाटी के रूप में फैला हुआ है।
ब्रह्मपुत्र नदी मैदान में प्रवेश करने के बाद अपना मार्ग बदलती रहती है और यहाँ बाढ़ की समस्या महत्वपूर्ण है।
माजुली द्वीप
ब्रह्मपुत्र के मैदान में माजुली नदी द्वीप स्थित है, जिसे विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप के रूप में जाना जाता है।
उत्तर भारत का मैदान और कृषि
उत्तर भारत के मैदान को अक्सर भारत का अन्न भंडार (Granary of India) कहा जाता है।
यहाँ गेहूँ, चावल और गन्ने का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
मुख्य कारण हैं:
- उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी
- पर्याप्त जल उपलब्धता
- सिंचाई की सुविधा
- समतल भूमि
- अनुकूल कृषि परिस्थितियाँ
उत्तर भारत की जलोढ़ मिट्टी
उत्तर भारत के मैदान में मुख्य रूप से जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) पाई जाती है।
जलोढ़ मिट्टी नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी और अवसादों के जमाव से बनती है।
स्रोत सामग्री के अनुसार जलोढ़ मिट्टी में पोटाश की अधिकता और फास्फोरस की कमी पाई जाती है।
उत्तर भारत के मैदान में सिंचाई
उत्तर भारत के मैदान में सिंचाई के लिए:
- नहरें
- ट्यूबवेल
- भूमिगत जल
का व्यापक उपयोग किया जाता है।
इस क्षेत्र में नहरों का विस्तृत जाल पाया जाता है।
हरित क्रांति का प्रभाव विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण रहा।
उत्तर भारत के मैदान की प्रमुख नदियाँ
उत्तर भारत के विशाल मैदान को बनाने वाली प्रमुख नदी प्रणालियाँ हैं:
सिंधु नदी तंत्र
सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदान के निर्माण में महत्वपूर्ण रही हैं।
गंगा नदी तंत्र
गंगा नदी तंत्र उत्तर भारत के विशाल मैदान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र
ब्रह्मपुत्र नदी असम घाटी तथा पूर्वोत्तर भारत के मैदान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नदियों द्वारा बनाए गए विसर्प और गोखुर झील
मैदानों में नदियाँ अपने परिपक्व या वृद्धावस्था के दौरान विसर्प (Meanders) बनाती हैं।
जब नदी का कोई घुमाव मुख्य नदी से कटकर अलग हो जाता है तो वहाँ गोखुर झील (Ox-bow Lake) बन सकती है।
यह प्रक्रिया उत्तर भारत के जलोढ़ मैदान की महत्वपूर्ण भू-आकृतिक विशेषता है।
सुंदरबन डेल्टा
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित सुंदरबन डेल्टा विश्व के सबसे बड़े डेल्टा क्षेत्रों में से एक है।
इस क्षेत्र में विशाल मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।
सुंदरबन नाम का संबंध यहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्षों से माना जाता है।
उत्तर भारत के मैदान में वर्षा का वितरण
उत्तर भारत के मैदान में वर्षा की मात्रा सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है।
इस वर्षा वितरण का कृषि पर भी प्रभाव पड़ता है।
पूर्वी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा के कारण चावल की प्रधानता होती है, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम वर्षा और सिंचाई की सुविधाओं के कारण गेहूँ का महत्व अधिक है।
उत्तर भारत के मैदान की जलवायु
उत्तर भारत के मैदान के पश्चिमी भाग में अपेक्षाकृत शुष्क और पूर्वी भाग में अधिक आर्द्र जलवायु पाई जाती है।
सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण वर्षा होती है।
यह वर्षा रबी की प्रमुख फसल गेहूँ के लिए उपयोगी होती है।
गर्मियों में उत्तर भारत के मैदान में चलने वाली गर्म और शुष्क हवा को लू (Loo) कहा जाता है।
राजस्थान का मैदान और थार मरुस्थल
उत्तर भारत के पश्चिमी भाग में राजस्थान का मैदान मुख्य रूप से थार मरुस्थल से संबंधित है।
लूनी नदी
थार मरुस्थल में बहने वाली प्रमुख नदी लूनी है।
सांभर झील
राजस्थान में स्थित सांभर झील एक महत्वपूर्ण खारे पानी की झील है।
इसके अलावा डीडवाना और पंचभद्रा भी खारे पानी की प्रमुख झीलों में शामिल हैं।
धरियन
थार मरुस्थल में पाए जाने वाले रेतीले टीलों को धरियन कहा जाता है।
बरखान
अर्धचंद्राकार रेत के टीलों को बरखान (Barchan) कहा जाता है।
रोही
राजस्थान के मैदान में उपजाऊ उप-मैदानी पट्टी को रोही कहा जाता है।
उत्तर भारत के मैदान की ढाल
उत्तर भारत के मैदान की ढाल बहुत मंद है।
स्रोत सामग्री में इसकी ढाल लगभग 10–15 सेमी प्रति किमी बताई गई है।
इस मंद ढाल के कारण नदियाँ धीरे-धीरे बहती हैं और मैदान में निक्षेपण (Deposition) की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।
उत्तर भारत का मैदान और जनसंख्या
उत्तर भारत का विशाल मैदान भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है।
उपजाऊ मिट्टी, जल की उपलब्धता, कृषि, परिवहन और समतल भूमि के कारण यहाँ बड़ी संख्या में बस्तियाँ विकसित हुई हैं।
बांगर क्षेत्र में बस्तियाँ अपेक्षाकृत सघन पाई जाती हैं क्योंकि यहाँ बाढ़ का खतरा खादर की तुलना में कम होता है।
उत्तर भारत का मैदान और परिवहन
उत्तर भारत का मैदान समतल होने के कारण रेलवे और सड़क परिवहन के विकास के लिए अनुकूल है।
मैदान में:
- सड़क नेटवर्क
- रेलवे नेटवर्क
- नहरें
- कृषि बाजार
- बड़े शहर
- औद्योगिक केंद्र
का व्यापक विकास हुआ है।
उत्तर भारत के मैदान की महत्वपूर्ण स्थानीय शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भाबर | कंकड़-पत्थरों वाला तलहटी क्षेत्र |
| तराई | भाबर के दक्षिण का नम एवं दलदली क्षेत्र |
| बांगर | पुरानी जलोढ़ मिट्टी का ऊँचा भाग |
| खादर | नवीन जलोढ़ मिट्टी वाला निचला भाग |
| दोआब | दो नदियों के बीच की भूमि |
| कंकड़ | बांगर में पाए जाने वाले चूनेदार निक्षेप |
| रेह/कलर | भूमि पर जमी सफेद नमकीन परत |
| भूड़ | ऊँचे बलुई जमाव |
| धरियन | राजस्थान के रेतीले टीले |
| बरखान | अर्धचंद्राकार रेत के टीले |
| रोही | राजस्थान की उपजाऊ उप-मैदानी पट्टी |
| मर्ग | कश्मीर के घास के मैदान |
| बुग्याल | उत्तराखंड के घास के मैदान |
| दून | पर्वत श्रेणियों के बीच की समतल घाटी |
| तराई | शिवालिक के दक्षिण का नम क्षेत्र |
उत्तर भारत के मैदान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न
उत्तर भारत के मैदान का निर्माण किन नदी तंत्रों द्वारा हुआ है?
सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा।
भारत के मैदान की मिट्टी किस प्रकार की है?
मुख्य रूप से जलोढ़ मिट्टी।
भाबर क्या है?
हिमालय की तलहटी में कंकड़-पत्थरों के निक्षेप से बना क्षेत्र भाबर कहलाता है।
तराई क्या है?
भाबर के दक्षिण में स्थित नम एवं दलदली क्षेत्र को तराई कहते हैं।
बांगर किसे कहते हैं?
मैदान के ऊँचे भाग में पाई जाने वाली पुरानी जलोढ़ मिट्टी वाले क्षेत्र को बांगर कहते हैं।
खादर किसे कहते हैं?
नदी के बाढ़ क्षेत्र में प्रतिवर्ष नई जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप वाले निचले भाग को खादर कहते हैं।
दोआब क्या है?
दो नदियों के बीच स्थित भूमि को दोआब कहते हैं।
गंगा के मैदान को कितने भागों में बाँटा जाता है?
ऊपरी, मध्य और निचला गंगा मैदान।
बिहार का शोक किस नदी को कहा जाता है?
कोसी नदी।
बंगाल का शोक किस नदी को कहा जाता था?
दामोदर नदी।
भारत का अन्न भंडार किस क्षेत्र को कहा जाता है?
उत्तर भारत का विशाल मैदान।
गोखुर झील कैसे बनती है?
नदी के विसर्प के कटकर मुख्य नदी से अलग हो जाने पर गोखुर झील बनती है।
उत्तर भारत के मैदान में सर्दियों की वर्षा किस कारण होती है?
पश्चिमी विक्षोभ के कारण।
गर्मियों में उत्तर भारत में चलने वाली गर्म हवा को क्या कहते हैं?
लू।
दोआब का क्या अर्थ है?
दो नदियों के बीच स्थित भूमि।
उत्तर भारत का मैदान – Quick Revision
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| निर्माण | सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र |
| प्रमुख निक्षेप | जलोढ़ निक्षेप |
| लंबाई | लगभग 2400 किमी |
| पश्चिमी चौड़ाई | लगभग 500 किमी |
| पूर्वी चौड़ाई | लगभग 150 किमी |
| प्रमुख मिट्टी | जलोढ़ मिट्टी |
| तलहटी का कंकड़ क्षेत्र | भाबर |
| भाबर के दक्षिण का नम क्षेत्र | तराई |
| पुरानी जलोढ़ | बांगर |
| नई जलोढ़ | खादर |
| दो नदियों के बीच भूमि | दोआब |
| प्रमुख डेल्टा | सुंदरबन |
| प्रमुख मरुस्थलीय नदी | लूनी |
| खारे पानी की प्रमुख झील | सांभर |
| प्रमुख नदी द्वीप | माजुली |
| शीतकालीन वर्षा | पश्चिमी विक्षोभ |
| गर्मियों की गर्म हवा | लू |
| प्रमुख कृषि | गेहूँ, चावल, गन्ना |
| प्रसिद्ध नदी | गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु तंत्र |
निष्कर्ष
उत्तर भारत का विशाल मैदान भारत के भौतिक भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसका निर्माण मुख्य रूप से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है।
भाबर, तराई, बांगर और खादर इसकी प्रमुख भौगोलिक इकाइयाँ हैं, जबकि दोआब, डेल्टा, विसर्प और गोखुर झीलें इसकी महत्वपूर्ण भू-आकृतिक विशेषताएँ हैं।
उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और समतल भूमि के कारण यह क्षेत्र कृषि, जनसंख्या, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को विशेष रूप से भाबर-तराई, बांगर-खादर, दोआब, गंगा के मैदान का विभाजन, ब्रह्मपुत्र मैदान, सुंदरबन डेल्टा, जलोढ़ मिट्टी और स्थानीय भौगोलिक शब्दावली को अच्छी तरह समझना चाहिए।
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भाग 1: उत्पत्ति, विस्तार और संरचना
- उत्तर भारत के मैदान का निर्माण मुख्य रूप से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा हुआ है।
- इन मैदानों का निर्माण नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों (Alluvial Deposits) से हुआ है।
- उत्तर भारत का मैदान हिमालय के दक्षिण और प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर में स्थित है।
- इस मैदान की पूर्व से पश्चिम तक कुल लंबाई लगभग 2400 किमी है।
- मैदान की चौड़ाई पश्चिम में अधिक (लगभग 500 किमी) और पूर्व में कम (लगभग 150 किमी) है।
- उत्तर भारत का मैदान विश्व के सबसे उपजाऊ मैदानों में से एक है।
- हिमालय की तलहटी में कंकड़-पत्थरों के निक्षेप से बने क्षेत्र को भाबर कहा जाता है।
- भाबर क्षेत्र में नदियाँ सतह से विलीन (गायब) हो जाती हैं और पत्थरों के नीचे बहती हैं।
- भाबर क्षेत्र की चौड़ाई लगभग 8 से 16 किमी तक होती है।
- भाबर के दक्षिण में स्थित दलदली और नम क्षेत्र को तराई कहा जाता है।
- तराई क्षेत्र में गायब हुई नदियाँ पुनः सतह पर प्रकट होती हैं।
- तराई क्षेत्र अपनी सघन वनस्पतियों और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है।
- मैदानों का वह उच्च भाग जहाँ नदियों के बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता, बांगर कहलाता है।
- बांगर क्षेत्र पुरानी जलोढ़ मिट्टी से बना होता है।
- मैदानों का वह निचला भाग जहाँ प्रतिवर्ष बाढ़ का नया पानी और मिट्टी पहुँचती है, खादर कहलाता है।
- खादर क्षेत्र नवीन जलोढ़ मिट्टी से बना होता है और अत्यधिक उपजाऊ होता है।
- बांगर मिट्टी में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘कंकड़’ कहते हैं।
- अत्यधिक सिंचाई के कारण बांगर भूमि पर जमी सफेद नमकीन परत को ‘रेह’ या ‘कलर’ कहते हैं।
- गंगा के मैदान में ऊँचे टीलेनुमा बलुई जमाव को ‘भूड’ कहा जाता है।
- नदियों के मुहाने पर बनने वाले दलदली और उपजाऊ भाग को डेल्टा कहते हैं।
- विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा सुंदरबन डेल्टा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बनाया जाता है।
- सुंदरबन डेल्टा का नाम वहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्षों के कारण पड़ा है।
- उत्तर भारत के मैदान की औसत ऊँचाई समुद्र तल से 200 मीटर के लगभग है।
- अम्बाला शहर सिंधु और गंगा नदी तंत्र के बीच ‘जल विभाजक’ का कार्य करता है।
- राजस्थान का मैदान मुख्य रूप से थार मरुस्थल का हिस्सा है।
- थार मरुस्थल में बहने वाली सबसे प्रमुख नदी लूनी है।
- राजस्थान के मैदान में स्थित खारे पानी की सबसे बड़ी झील सांभर झील है।
- पंजाब और हरियाणा के मैदान का निर्माण सतलज, रावी और ब्यास नदियों द्वारा हुआ है।
- दो नदियों के बीच की उपजाऊ भूमि को ‘दोआब’ कहा जाता है।
- बिस्त दोआब: ब्यास और सतलज नदियों के बीच का क्षेत्र।
- बारी दोआब: ब्यास और रावी नदियों के बीच का क्षेत्र।
- रचना दोआब: रावी और चेनाब नदियों के बीच का क्षेत्र।
- चाज दोआब: चेनाब और झेलम नदियों के बीच का क्षेत्र।
- सिंधु सागर दोआब: झेलम, चेनाब और सिंधु नदियों के बीच का क्षेत्र।
- गंगा के मैदान को तीन भागों में बांटा गया है: ऊपरी, मध्य और निचला गंगा मैदान।
- ऊपरी गंगा मैदान मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विस्तृत है।
- मध्य गंगा मैदान पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में फैला हुआ है।
- निचला गंगा मैदान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में स्थित है।
- ब्रह्मपुत्र का मैदान एक सँकरी घाटी के रूप में असम में स्थित है।
- ब्रह्मपुत्र मैदान में विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप ‘माजुली’ स्थित है।
भाग 2: कृषि, नदियाँ और क्षेत्रीय विशेषताएं
- उत्तर भारत के मैदान को ‘भारत का अन्न भंडार’ (Granary of India) कहा जाता है।
- यह मैदान भारत में गेहूं, चावल और गन्ने के उत्पादन का मुख्य केंद्र है।
- उत्तर भारत के मैदान में मुख्य रूप से जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
- जलोढ़ मिट्टी में पोटाश की अधिकता और फास्फोरस की कमी होती है।
- भाबर क्षेत्र कृषि के लिए अनुपयुक्त होता है क्योंकि यहाँ पानी पत्थरों के नीचे चला जाता है।
- तराई क्षेत्र को साफ करके अब वहाँ भारी मात्रा में गन्ना और चावल की खेती की जाती है।
- मैदानों में बहने वाली नदियाँ अपनी वृद्धावस्था में विसर्प (Meanders) बनाती हैं।
- विसर्पों के कटने से मैदानों में गोखुर झीलें (Ox-bow Lakes) बनती हैं।
- बिहार में कोसी नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है क्योंकि यह अपना मार्ग बहुत बदलती है।
- पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था।
- गंगा-यमुना का दोआब क्षेत्र भारत का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है।
- उत्तर भारत के मैदान में वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है।
- यही कारण है कि पूर्व में चावल और पश्चिम में गेहूं की प्रधानता है।
- ‘रोही’ राजस्थान के मैदान में उपजाऊ उप-मैदानी पट्टी को कहा जाता है।
- थार मरुस्थल में स्थित रेतीले टीलों को ‘धरियन’ कहा जाता है।
- अर्ध-चंद्राकार रेत के टीलों को ‘बरखान’ कहा जाता है।
- मैदानों में जलभराव के कारण बनने वाली छोटी झीलों को पंजाब में ‘ढाया’ कहते हैं।
- उत्तर भारत के मैदान की ढाल अत्यंत मंद है (लगभग 10-15 सेमी प्रति किमी)।
- गंगा नदी हरिद्वार के पास पहली बार मैदानों में प्रवेश करती है।
- यमुना नदी दिल्ली और आगरा जैसे शहरों से गुजरते हुए मैदानों को सींचती है।
- उत्तर भारत का मैदान भू-आकृतिक दृष्टि से एक ‘अग्रगर्त’ (Foredeep) है।
- इस मैदान में जलोढ़ निक्षेपों की गहराई 1000 से 2000 मीटर तक हो सकती है।
- मैदानों का सबसे ऊँचा भाग अरावली और दिल्ली की पहाड़ियों के पास है।
- ब्रह्मपुत्र मैदान को असम घाटी के नाम से भी जाना जाता है।
- ब्रह्मपुत्र नदी सदिया के पास मैदानों में प्रवेश करती है।
- उत्तर भारत के मैदान में नहरों का जाल सबसे अधिक विस्तृत है।
- हरित क्रांति का सबसे अधिक प्रभाव उत्तर भारत के मैदानों (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP) पर पड़ा।
- मैदानों में स्थित बांगर क्षेत्र में बस्तियाँ अधिक सघन पाई जाती हैं क्योंकि यहाँ बाढ़ का खतरा कम होता है।
- खादर क्षेत्र में हर साल नई मिट्टी आने से खाद की कम आवश्यकता पड़ती है।
- राजस्थान के मैदान में ‘डीडवाना’ और ‘पंचभद्रा’ खारे पानी की अन्य प्रमुख झीलें हैं।
- मैदानों में नदियों के किनारे ऊँची बलुई भूमि को स्थानीय रूप से ‘कौल’ भी कहा जाता है।
- गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा का समुद्री भाग मैंग्रोव वनों से ढका हुआ है।
- मैदानों में भूमिगत जल स्तर (Groundwater level) काफी ऊँचा पाया जाता है।
- उत्तर भारत का मैदान भारत की 60% से अधिक आबादी को आश्रय देता है।
- यहाँ की नदियाँ ‘अपरदन’ (Erosion) से अधिक ‘निक्षेपण’ (Deposition) का कार्य करती हैं।
- मैदानों में पाए जाने वाले अनुपजाऊ गड्ढों को पश्चिम बंगाल में ‘बिल’ (Beel) कहते हैं।
- उत्तर भारत के मैदान में सर्दियों में होने वाली वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है।
- यह शीतकालीन वर्षा गेहूं की फसल (रबी) के लिए ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ कहलाती है।
- गर्मियों में मैदानों में चलने वाली गर्म हवा को ‘लू’ कहा जाता है।
- उत्तर भारत का मैदान परिवहन (रेलवे और रोड) के लिए सबसे सुगम क्षेत्र है।
भाग 3: विशेष तथ्य और परीक्षा उपयोगी प्रश्न
- ‘चोस’ (Chos) नामक मौसमी धाराएं शिवालिक के पास मैदानों में कटाव करती हैं।
- उत्तर भारत के मैदान का सबसे दक्षिणी भाग विंध्य और सतपुड़ा के पास समाप्त होता है।
- मैदानों में जलोढ़ मिट्टी का रंग हल्के भूरे से राख जैसा होता है।
- तटीय मैदानों की तुलना में उत्तर भारत का मैदान अधिक विस्तृत और उपजाऊ है।
- गंगा के मैदान में सिंचाई का मुख्य स्रोत नहरें और ट्यूबवेल हैं।
- उत्तर भारत का मैदान प्राचीन काल से ही सभ्यताओं का केंद्र रहा है (जैसे सिंधु घाटी)।
- कम्पोजिट ग्रास उत्तर भारत के मैदानों में पाए जाने वाले घास के मैदान हैं।
- उत्तर भारत के मैदान में वनों का प्रतिशत बहुत कम है क्योंकि अधिकांश भूमि पर कृषि होती है।
- उत्तर प्रदेश भारत में सर्वाधिक जलोढ़ मिट्टी वाला राज्य है।
- मैदानों में नदियों का मार्ग बदलने से बनने वाली झीलों को ‘ताल’ (जैसे रामगढ़ ताल) भी कहते हैं।
- ब्रह्मपुत्र नदी मैदानों में अक्सर अपना मार्ग बदलती है और भीषण बाढ़ लाती है।
- राजस्थान के मरुस्थलीय मैदान में वर्षा 25 सेमी से भी कम होती है।
- पंजाब के मैदान में पाई जाने वाली नदियों के किनारे की भूमि को ‘बेट’ (Bet) कहा जाता है।
- उत्तर भारत के मैदान को ‘ग्रेट आर्क’ भी कहा जाता है।
- यह मैदान उत्तर में हिमालय और दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार के बीच एक समतल कड़ी है।
- मैदानों के पश्चिमी भाग में ‘शुष्क’ और पूर्वी भाग में ‘आर्द्र’ जलवायु पाई जाती है।
- जबलपुर के पास नर्मदा नदी मैदानों के पास से गुजरती है लेकिन वह पठारी नदी है।
- उत्तर भारत का मैदान भारत की जीडीपी (GDP) में कृषि क्षेत्र से सबसे बड़ा योगदान देता है।
- मैदानों में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाया जाता है।
- उत्तर भारत का विशाल मैदान भारत का ‘हृदय स्थल’ (Heartland) कहलाता है।
