प्रायद्वीपीय पठार – संरचना, पर्वत श्रेणियाँ, नदियाँ, मिट्टी और महत्वपूर्ण तथ्य : One-liners PDF | Peninsular Plateau of India Notes

प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau) भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण भौगोलिक भू-भागों में से एक है। यह भारतीय भूगोल (Indian Geography) का महत्वपूर्ण अध्याय है और UPSC, SSC, Railway, NTPC, UPPSC, UPSSSC PET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

प्रायद्वीपीय पठार की उत्पत्ति, संरचना, अरावली, विंध्य, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, दक्कन पठार, छोटा नागपुर पठार, प्रमुख दर्रे, चोटियाँ, नदियाँ, जलप्रपात, मिट्टी और खनिज संसाधन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।


प्रायद्वीपीय पठार क्या है?

प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग है। यह प्राचीन गोंडवाना लैंड (Gondwanaland) का हिस्सा माना जाता है।

इस पठार की आकृति सामान्यतः त्रिभुजाकार (Triangular) है और इसकी औसत ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 600 से 900 मीटर के बीच बताई जाती है।

इसका विस्तार उत्तर में अरावली और राजमहल की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक माना जाता है।


प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताएँ

प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • भारत का प्राचीनतम भू-भाग
  • गोंडवाना लैंड का हिस्सा
  • त्रिभुजाकार आकृति
  • प्राचीन कठोर चट्टानों की प्रधानता
  • खनिज संसाधनों की प्रचुरता
  • अनेक पठारों और पर्वत श्रेणियों का विस्तार
  • पश्चिमी एवं पूर्वी घाट की उपस्थिति
  • नर्मदा और ताप्ती जैसी भ्रंश घाटी वाली नदियाँ

अरावली पर्वतमाला

अरावली पर्वतमाला विश्व की प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है।

इसकी सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1722 मीटर है। गुरु शिखर माउंट आबू में स्थित है।

अरावली पर्वतमाला गुजरात से दिल्ली तक लगभग 800 किमी तक फैली हुई मानी जाती है।

अरावली की प्रमुख विशेषता

अरावली पर्वतमाला राजस्थान में मानसूनी वर्षा को प्रभावी रूप से रोक नहीं पाती, क्योंकि इसका विस्तार मानसूनी हवाओं की दिशा के लगभग समानांतर है।


विंध्याचल पर्वत श्रेणी

विंध्याचल श्रेणी उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच एक महत्वपूर्ण भौगोलिक विभाजन से संबंधित है।

विंध्याचल मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से बनी मानी जाती है।

इसकी पूर्वी शाखाओं में केमूर पहाड़ियाँ शामिल हैं।


सतपुड़ा पर्वत श्रेणी

सतपुड़ा श्रेणी प्रायद्वीपीय पठार की महत्वपूर्ण पर्वत श्रेणी है।

इसे ब्लॉक पर्वत (Block Mountain) तथा हॉर्स्ट (Horst) पर्वत के उदाहरण के रूप में बताया जाता है।

सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1350 मीटर है। यह महादेव पहाड़ियों में स्थित है।


नर्मदा और ताप्ती की भ्रंश घाटियाँ

विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच नर्मदा नदी भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है।

इसी प्रकार सतपुड़ा और अजंता श्रेणी के बीच ताप्ती नदी के भ्रंश घाटी में बहने का उल्लेख मिलता है।

नर्मदा और ताप्ती प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ हैं।


मैकाल श्रेणी और अमरकंटक

मैकाल श्रेणी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र से संबंधित है।

अमरकंटक क्षेत्र नर्मदा और सोन नदियों के उद्गम के लिए प्रसिद्ध है।

मैकाल श्रेणी को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच भौगोलिक क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है।


पश्चिमी घाट

पश्चिमी घाट को सह्याद्रि (Sahyadri) के नाम से भी जाना जाता है।

यह पर्वत श्रेणी उत्तर में ताप्ती क्षेत्र से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक लगभग 1600 किमी तक फैली हुई बताई जाती है।

स्रोत सामग्री में पश्चिमी घाट को वास्तविक पर्वत की बजाय भ्रंश कगार (Fault Escarpment) के रूप में वर्णित किया गया है।

पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई लगभग 1200 मीटर बताई गई है।


पश्चिमी घाट के प्रमुख दर्रे

पश्चिमी घाट में कई महत्वपूर्ण दर्रे पाए जाते हैं।

थाल घाट

थाल घाट मुंबई को नासिक से जोड़ने वाले मार्ग से संबंधित है।

भोर घाट

भोर घाट मुंबई को पुणे से जोड़ता है।

पाल घाट

पाल घाट केरल के पलक्कड़ क्षेत्र को तमिलनाडु के कोयंबटूर क्षेत्र से जोड़ता है।

सेनकोट्टा दर्रा

सेनकोट्टा दर्रा तिरुवनंतपुरम को मदुरै से जोड़ने वाले मार्ग से संबंधित है।


पूर्वी घाट

पूर्वी घाट का विस्तार महानदी से नीलगिरी की पहाड़ियों तक बताया गया है।

यह पश्चिमी घाट की तुलना में:

  • अधिक कटा-छँटा
  • कम ऊँचा
  • अधिक असतत

है।

पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट का मिलन क्षेत्र नीलगिरी की पहाड़ियों में माना जाता है।


नीलगिरी की पहाड़ियाँ

नीलगिरी दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण पर्वत श्रेणियों में से एक है।

नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेट्टा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 2637 मीटर है।

प्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी (उदगमंडलम) भी नीलगिरी की पहाड़ियों में स्थित है।

नीलगिरी क्षेत्र में टोडा जनजाति निवास करती है।


दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी

अनाईमुडी (Anamudi) दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है।

इसकी ऊँचाई लगभग 2695 मीटर है और यह अन्नामलाई पहाड़ियों में स्थित है।

यह तथ्य हिमालय की चोटियों से अलग करके याद रखना चाहिए।


इलायची की पहाड़ियाँ

इलायची की पहाड़ियाँ (Cardamom Hills) दक्षिण भारत की प्रमुख पर्वत श्रेणियों में से एक हैं।

स्रोत सामग्री में इन्हें भारत की सबसे दक्षिणी पर्वत श्रेणी के रूप में बताया गया है।


पालनी की पहाड़ियाँ

पालनी की पहाड़ियाँ तमिलनाडु में स्थित हैं।

प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडाइकनाल इन्हीं पहाड़ियों से संबंधित है।


तमिलनाडु की अन्य पहाड़ियाँ

तमिलनाडु में:

  • सेवराय पहाड़ियाँ
  • जावदी पहाड़ियाँ

पूर्वी घाट की महत्वपूर्ण पहाड़ियों में शामिल हैं।


मेघालय का पठार

गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ संरचनात्मक दृष्टि से प्रायद्वीपीय पठार से संबंधित मानी जाती हैं।

इन्हें मेघालय पठार का हिस्सा माना जाता है।

मेघालय पठार को छोटा नागपुर पठार से राजमहल-गारो गैप (मालदा गैप) अलग करता है।


छोटा नागपुर पठार

छोटा नागपुर पठार खनिज संसाधनों की दृष्टि से भारत का अत्यंत महत्वपूर्ण पठारी क्षेत्र है।

इसे ‘भारत का रूर’ (Ruhr of India) कहा जाता है।

यहाँ लोहा, मैंगनीज, बॉक्साइट और अन्य खनिज संसाधनों के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।

छोटा नागपुर पठार की सबसे ऊँची चोटी पारसनाथ है।


पारसनाथ चोटी

पारसनाथ झारखंड में स्थित है और छोटा नागपुर पठार की प्रमुख ऊँची चोटी है।

यह जैन धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी है।


मालवा का पठार

मालवा का पठार मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और राजस्थान में विस्तृत है।

इस पठार का निर्माण मुख्य रूप से बेसाल्टिक लावा के प्रवाह से संबंधित है।


दक्कन का पठार

दक्कन का पठार (Deccan Plateau) भारत का सबसे बड़ा पठार है।

इसके बड़े भाग में बेसाल्टिक चट्टानें पाई जाती हैं।

इसी क्षेत्र से संबंधित दक्कन ट्रैप (Deccan Trap) का निर्माण ज्वालामुखीय लावा से हुआ है।


दक्कन ट्रैप

दक्कन ट्रैप की चट्टानें मुख्यतः बेसाल्ट से बनी हैं।

इस क्षेत्र की काली मिट्टी को रेगुड़ (Regur Soil) भी कहा जाता है।

काली मिट्टी कपास की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है।


प्रायद्वीपीय पठार की ढाल

प्रायद्वीपीय पठार की सामान्य ढाल उत्तर-पूर्व की ओर मानी जाती है।

हालाँकि नर्मदा और ताप्ती जैसी प्रमुख नदियाँ पश्चिम की ओर बहती हैं।

महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रमुख नदियाँ सामान्यतः पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं।


प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख पठार

प्रायद्वीपीय पठार में कई क्षेत्रीय पठार शामिल हैं।

बुंदेलखंड पठार

यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के आसपास स्थित है।

बघेलखंड पठार

यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विस्तृत है।

दंडकारण्य पठार

यह छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच स्थित क्षेत्र से संबंधित है।

मैसूर पठार

मैसूर का पठार कर्नाटक में स्थित है।

तेलंगाना पठार

तेलंगाना का पठार तेलंगाना तथा आसपास के दक्षिण-मध्य भारतीय क्षेत्र से संबंधित है।


महाराष्ट्र की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

महाराष्ट्र में:

  • अजंता
  • एलोरा
  • बालाघाट
  • हरिश्चंद्र

जैसी पर्वत श्रेणियाँ पाई जाती हैं।

कलसुबाई महाराष्ट्र की सबसे ऊँची चोटी है।


प्रायद्वीपीय पठार की मिट्टी

प्रायद्वीपीय पठार में कई प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं।

काली मिट्टी

काली मिट्टी को रेगुड़ मिट्टी भी कहा जाता है।

यह कपास की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

लाल और पीली मिट्टी

पठारी क्षेत्रों में लाल और पीली मिट्टी भी व्यापक रूप से पाई जाती है।


प्रायद्वीपीय पठार की चट्टानें

प्रायद्वीपीय पठार में मुख्य रूप से:

  • आग्नेय चट्टानें
  • कायांतरित चट्टानें

पाई जाती हैं।

प्राचीन एवं कठोर भूगर्भीय संरचना के कारण यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता है।


प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रायद्वीपीय नदियाँ सामान्यतः अनुवर्ती (Consequent) अपवाह तंत्र का उदाहरण मानी जाती हैं।

इनमें से कई नदियाँ वर्षा पर निर्भर होती हैं और गर्मियों में इनके जल प्रवाह में कमी आ सकती है।

प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं:

  • महानदी
  • गोदावरी
  • कृष्णा
  • कावेरी
  • नर्मदा
  • ताप्ती

गोदावरी नदी

गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और इसकी लंबाई लगभग 1465 किमी बताई गई है।

इसे:

  • दक्षिण गंगा
  • वृद्ध गंगा

के नाम से भी जाना जाता है।


कावेरी नदी

कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है।

कावेरी पर स्थित शिवसमुद्रम जलप्रपात एक महत्वपूर्ण जलप्रपात है।


महाबलेश्वर और कृष्णा नदी

महाबलेश्वर से कृष्णा नदी का उद्गम होता है।

कृष्णा दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण पूर्ववाहिनी नदियों में से एक है।


प्रमुख जलप्रपात

प्रायद्वीपीय पठार में कई प्रसिद्ध जलप्रपात स्थित हैं।

जोग जलप्रपात

जोग या गरसोप्पा जलप्रपात कर्नाटक में शरावती नदी पर स्थित है।

चित्रकूट जलप्रपात

चित्रकूट जलप्रपात इंद्रावती नदी पर स्थित है।

इसे अक्सर भारत का नियाग्रा कहा जाता है।

शिवसमुद्रम जलप्रपात

यह कावेरी नदी पर स्थित है।


छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली नदियाँ

छोटा नागपुर पठार से कई महत्वपूर्ण नदियाँ निकलती हैं, जिनमें:

  • दामोदर
  • सुवर्णरेखा
  • कोयल

प्रमुख हैं।

हजारीबाग पठार और रांची पठार भी छोटा नागपुर पठार के भाग हैं।


पश्चिमी और पूर्वी तट

प्रायद्वीपीय पठार से संबंधित तटीय क्षेत्रों में पश्चिमी और पूर्वी तट का विशेष महत्व है।

पश्चिमी तट

पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर:

  • कनारा तट
  • मालाबार तट

प्रमुख तटीय क्षेत्र हैं।

पूर्वी तट

पूर्वी घाट के पूर्वी भाग में विशेष रूप से तमिलनाडु का कोरोमंडल तट महत्वपूर्ण है।


पठारी क्षेत्र की कृषि

प्रायद्वीपीय पठार में विभिन्न प्रकार की कृषि की जाती है।

प्रमुख गतिविधियाँ हैं:

  • सीढ़ीदार खेती
  • बागवानी
  • कॉफी उत्पादन
  • चाय उत्पादन
  • मसालों की खेती

कर्नाटक के पठारी भागों में कॉफी का उत्पादन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


कर्नाटक का पठारी क्षेत्र

कर्नाटक में कई महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र और पर्वत पाए जाते हैं।

कुद्रेमुख

कुद्रेमुख लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध है।

बाबा बुदन पहाड़ियाँ

बाबा बुदन की पहाड़ियाँ कॉफी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

मैसूर पठार

मैसूर का पठार कर्नाटक के महत्वपूर्ण पठारी क्षेत्रों में शामिल है।


प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख खनिज

प्रायद्वीपीय पठार खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यहाँ प्रमुख धात्विक खनिजों में:

  • लोहा
  • मैंगनीज
  • बॉक्साइट

शामिल हैं।

छोटा नागपुर पठार और धारवाड़ क्षेत्र खनिज संसाधनों की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।


प्रायद्वीपीय पठार और जल विभाजक

प्रायद्वीपीय भारत का प्रमुख जल विभाजक पश्चिमी घाट माना जाता है।

पश्चिमी घाट के कारण कई नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती जैसी नदियाँ पश्चिम की ओर बहती हैं।


नर्मदा और ताप्ती

नर्मदा और ताप्ती प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख पश्चिमवाहिनी नदियाँ हैं।

दोनों नदियाँ भ्रंश घाटियों से होकर बहती हैं।

ताप्ती को स्रोत सामग्री में नर्मदा की ‘जुड़वां बहन’ के रूप में वर्णित किया गया है।


सोन नदी

सोन नदी गंगा की महत्वपूर्ण सहायक नदी है।

स्रोत सामग्री में इसे गंगा की ऐसी सहायक नदी के रूप में बताया गया है जो दक्षिण से आकर उत्तर की ओर बहती है।


प्रायद्वीपीय पठार और चंबल के बीहड़

पठारी क्षेत्र में नदियों के अपरदन से गहरी गली एवं खड्ड जैसी स्थलाकृतियाँ बनती हैं।

चंबल क्षेत्र के बीहड़ इसका प्रमुख उदाहरण हैं।

स्रोत सामग्री में पठार के अंदर स्थित धँसे हुए भागों को स्थानीय रूप से खड्ड (Gully) कहा गया है।


प्रायद्वीपीय पठार का भौगोलिक महत्व

प्रायद्वीपीय पठार भारत के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:

  • प्राचीन भूगर्भीय संरचना
  • खनिज संसाधनों की प्रचुरता
  • कृषि
  • जलविद्युत
  • उद्योग
  • वन संसाधन
  • कॉफी एवं मसाला उत्पादन
  • प्रमुख नदियों का उद्गम
  • पर्यटन

इसी कारण प्रायद्वीपीय पठार को भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।


प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख पर्वत और चोटियाँ

पर्वत/श्रेणीप्रमुख चोटी/विशेषता
अरावलीगुरु शिखर – 1722 मीटर
सतपुड़ाधूपगढ़ – 1350 मीटर
नीलगिरीदोदाबेट्टा – 2637 मीटर
अन्नामलाईअनाईमुडी – 2695 मीटर
छोटा नागपुरपारसनाथ
महाराष्ट्रकलसुबाई
पश्चिमी घाटसह्याद्रि
पूर्वी घाटझिंधागाड़ा का उल्लेख

प्रायद्वीपीय पठार के प्रमुख दर्रे

दर्राकिन स्थानों को जोड़ता है
थाल घाटमुंबई – नासिक
भोर घाटमुंबई – पुणे
पाल घाटपलक्कड़ – कोयंबटूर
सेनकोट्टा दर्रातिरुवनंतपुरम – मदुरै

प्रायद्वीपीय पठार – महत्वपूर्ण प्रश्न

भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग कौन-सा है?

प्रायद्वीपीय पठार।

प्रायद्वीपीय पठार किस प्राचीन भू-भाग का हिस्सा है?

गोंडवाना लैंड।

प्रायद्वीपीय पठार की आकृति कैसी है?

त्रिभुजाकार।

अरावली की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

गुरु शिखर।

गुरु शिखर की ऊँचाई कितनी है?

लगभग 1722 मीटर।

सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

धूपगढ़।

नर्मदा नदी किस प्रकार की घाटी में बहती है?

भ्रंश घाटी (Rift Valley)।

पश्चिमी घाट को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

सह्याद्रि।

पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

अनाईमुडी।

दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

अनाईमुडी।

नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?

दोदाबेट्टा।

छोटा नागपुर पठार को किस नाम से जाना जाता है?

भारत का रूर।

दक्कन पठार की चट्टानें मुख्यतः किस प्रकार की हैं?

बेसाल्टिक ज्वालामुखीय चट्टानें।

काली मिट्टी को किस नाम से जाना जाता है?

रेगुड़ मिट्टी।

काली मिट्टी किस फसल के लिए प्रसिद्ध है?

कपास।

प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?

गोदावरी।

गोदावरी को किन नामों से जाना जाता है?

दक्षिण गंगा और वृद्ध गंगा।

जोग जलप्रपात किस नदी पर है?

शरावती नदी।

चित्रकूट जलप्रपात किस नदी पर है?

इंद्रावती नदी।

पश्चिमी घाट के प्रमुख दर्रे कौन-से हैं?

थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट और सेनकोट्टा दर्रा।


प्रायद्वीपीय पठार – Quick Revision

विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
सबसे प्राचीन भू-भागप्रायद्वीपीय पठार
प्राचीन भू-भागगोंडवाना लैंड
आकृतित्रिभुजाकार
औसत ऊँचाई600–900 मीटर
अरावली की सबसे ऊँची चोटीगुरु शिखर
सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटीधूपगढ़
पश्चिमी घाटसह्याद्रि
नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटीदोदाबेट्टा
दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटीअनाईमुडी
छोटा नागपुर की प्रमुख चोटीपारसनाथ
सबसे बड़ा पठारदक्कन पठार
प्रमुख मिट्टीकाली, लाल एवं पीली
काली मिट्टीरेगुड़
काली मिट्टी की प्रमुख फसलकपास
पश्चिमवाहिनी प्रमुख नदियाँनर्मदा, ताप्ती
सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदीगोदावरी
दक्षिण भारत की गंगाकावेरी
दक्षिण गंगागोदावरी
प्रमुख जलप्रपातजोग, शिवसमुद्रम, चित्रकूट
प्रमुख खनिजलोहा, मैंगनीज, बॉक्साइट

निष्कर्ष

प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau) भारत के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक है और भारतीय भूगोल में इसका विशेष महत्व है। इसकी पर्वत श्रेणियाँ, पठार, नदियाँ, मिट्टी, खनिज और जलप्रपात भारत की प्राकृतिक एवं आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अरावली, विंध्य, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, दक्कन पठार, छोटा नागपुर पठार, प्रमुख चोटियाँ, दर्रे, नदियाँ, जलप्रपात और मिट्टी से संबंधित तथ्यों को विशेष रूप से याद करना चाहिए।

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PYQ

Q. प्रायद्वीपीय पठार भारत का कौन-सा भू-भाग है?
प्रायद्वीपीय पठार भारत के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक है।

Q. प्रायद्वीपीय पठार की आकृति कैसी है?
इसकी आकृति सामान्यतः त्रिभुजाकार मानी जाती है।

Q. पश्चिमी घाट को किस नाम से जाना जाता है?
पश्चिमी घाट को सह्याद्रि के नाम से भी जाना जाता है।

Q. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?
गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है।

Q. प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख मिट्टी कौन-सी है?
काली मिट्टी, लाल मिट्टी और पीली मिट्टी प्रमुख हैं।

Q. काली मिट्टी को किस नाम से जाना जाता है?
काली मिट्टी को रेगुड़ मिट्टी भी कहा जाता है।

Q. दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है?
अनाईमुडी दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है।

भाग 1: संरचना और पर्वत श्रेणियाँ (1-40)

  1. प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग है।
  2. यह पठार प्राचीन गोंडवाना लैंड (Gondwanaland) का हिस्सा है।
  3. प्रायद्वीपीय पठार की आकृति त्रिभुजाकार (Triangular) है।
  4. इसकी औसत ऊँचाई समुद्र तल से 600 से 900 मीटर के बीच है।
  5. इस पठार का विस्तार उत्तर में अरावली और राजमहल की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक है।
  6. अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखला (Old Fold Mountain) है।
  7. अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर (1722 मीटर) है जो माउंट आबू में स्थित है।
  8. अरावली पर्वत श्रेणी गुजरात से दिल्ली तक लगभग 800 किमी तक फैली है।
  9. विंध्याचल श्रेणी उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है।
  10. विंध्याचल मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से बनी है।
  11. सतपुड़ा श्रेणी एक ब्लॉक पर्वत (Block Mountain) का उदाहरण है।
  12. सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी धूपगढ़ (1350 मीटर) है जो महादेव पहाड़ी पर स्थित है।
  13. विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच नर्मदा नदी भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है।
  14. सतपुड़ा और अजंता श्रेणी के बीच ताप्ती नदी भ्रंश घाटी में बहती है।
  15. मैकाल पठार की सबसे ऊँची चोटी अमरकंटक है।
  16. अमरकंटक से ही नर्मदा और सोन नदियों का उद्गम होता है।
  17. पश्चिमी घाट को ‘सह्याद्रि’ (Sahyadri) के नाम से भी जाना जाता है।
  18. पश्चिमी घाट उत्तर में ताप्ती के मुहाने से दक्षिण में कन्याकुमारी तक 1600 किमी लंबा है।
  19. पश्चिमी घाट एक वास्तविक पर्वत न होकर एक ‘भ्रंश कगार’ (Fault Escarpment) है।
  20. पूर्वी घाट का विस्तार महानदी से नीलगिरी की पहाड़ियों तक है।
  21. पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट की तुलना में कटा-छंटा और कम ऊँचा है।
  22. पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट का मिलन बिंदु नीलगिरी की पहाड़ियाँ हैं।
  23. नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटी दोदाबेट्टा (2637 मीटर) है।
  24. दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी अनाईमुडी (2695 मीटर) है जो अन्नामलाई पहाड़ी पर है।
  25. इलायची की पहाड़ियाँ (Cardamom Hills) भारत की सबसे दक्षिणी पर्वत श्रेणी हैं।
  26. ‘पालनी की पहाड़ियाँ’ तमिलनाडु में स्थित हैं, जहाँ प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडाइकनाल है।
  27. सेवराय और जावदी पहाड़ियाँ तमिलनाडु में स्थित पूर्वी घाट का हिस्सा हैं।
  28. गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ संरचना की दृष्टि से प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा हैं (मेघालय का पठार)।
  29. छोटा नागपुर पठार को ‘भारत का रूर’ (Ruhr of India) कहा जाता है क्योंकि यह खनिजों में समृद्ध है।
  30. छोटा नागपुर पठार की सबसे ऊँची चोटी पारसनाथ है।
  31. ‘मालवा का पठार’ मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और राजस्थान में विस्तृत है।
  32. मालवा पठार का निर्माण बेसाल्टिक लावा के प्रवाह से हुआ है।
  33. दक्कन का पठार (Deccan Plateau) भारत का सबसे बड़ा पठार है।
  34. दक्कन ट्रैप की चट्टानें ज्वालामुखी लावा (बेसाल्ट) से बनी हैं।
  35. प्रायद्वीपीय पठार की ढाल उत्तर-पूर्व की ओर है (नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर)।
  36. महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं।
  37. बुंदेलखंड का पठार UP और MP की सीमा पर स्थित है।
  38. बघेलखंड का पठार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैला है।
  39. ‘दंडकारण्य पठार’ छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच स्थित है।
  40. मेघालय के पठार को छोटा नागपुर पठार से ‘राजमहल-गारो गैप’ (मालदा गैप) अलग करता है।

भाग 2: दर्रे, चोटियाँ और क्षेत्रीय भूगोल (41-80)

  1. पश्चिमी घाट में स्थित थाल घाट दर्रा मुंबई को नासिक से जोड़ता है।
  2. भोर घाट दर्रा मुंबई को पुणे से जोड़ता है।
  3. पाल घाट दर्रा केरल (पलक्कड़) को तमिलनाडु (कोयंबटूर) से जोड़ता है।
  4. सेनकोट्टा दर्रा तिरुवनंतपुरम को मदुरै से जोड़ता है।
  5. पश्चिमी घाट की औसत ऊँचाई 1200 मीटर है।
  6. पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी झिंधागाड़ा (1690 मीटर) मानी जाती है (पुराने आंकड़ों में विशाखापत्तनम चोटी/अरमाकोंडा)।
  7. अजंता, एलोरा और बालाघाट श्रेणियां महाराष्ट्र में स्थित हैं।
  8. हरिश्चंद्र श्रेणी भी महाराष्ट्र में स्थित है।
  9. कलसुबाई महाराष्ट्र की सबसे ऊँची चोटी है।
  10. महाबलेश्वर से कृष्णा नदी का उद्गम होता है।
  11. प्रायद्वीपीय पठार में ‘काली मिट्टी’ (Black Soil) की प्रधानता है, जिसे रेगुड़ मिट्टी भी कहते हैं।
  12. यह काली मिट्टी कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम होती है।
  13. पठारी क्षेत्रों में लाल और पीली मिट्टी भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
  14. प्रायद्वीपीय नदियाँ ‘अनुवर्ती’ (Consequent) अपवाह तंत्र का उदाहरण हैं।
  15. ये नदियाँ वर्षा पर निर्भर होती हैं और गर्मियों में सूख जाती हैं (Non-perennial)।
  16. कावेरी नदी को ‘दक्षिण भारत की गंगा’ कहा जाता है।
  17. गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी (1465 किमी) है।
  18. गोदावरी को ‘वृद्ध गंगा’ या ‘दक्षिण गंगा’ भी कहते हैं।
  19. ‘शिवसमुद्रम’ जलप्रपात कावेरी नदी पर स्थित है।
  20. ‘जोग’ या ‘गरसोप्पा’ जलप्रपात शरावती नदी (कर्नाटक) पर है।
  21. चित्रकूट जलप्रपात को ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है (इंद्रावती नदी)।
  22. छोटा नागपुर पठार से दामोदर, सुवर्णरेखा और कोयल नदियाँ निकलती हैं।
  23. हजारीबाग का पठार और रांची का पठार छोटा नागपुर का ही हिस्सा हैं।
  24. दक्षिण भारत का प्रसिद्ध स्वास्थ्यवर्धक स्थान ऊटी (उदगमंडलम) नीलगिरी की पहाड़ियों में है।
  25. ‘मैसूर का पठार’ कर्नाटक में स्थित है।
  26. ‘तेलंगाना का पठार’ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विस्तृत है।
  27. प्रायद्वीपीय पठार में अग्नेय और कायांतरित (Metamorphic) चट्टानें अधिक पाई जाती हैं।
  28. यहाँ की अधिकांश नदियाँ डेल्टा बनाती हैं (नर्मदा-ताप्ती एश्चुअरी बनाती हैं)।
  29. पठार का उत्तर-पश्चिमी भाग (दक्कन ट्रैप) कपास और गन्ने के लिए प्रसिद्ध है।
  30. कनारा तट और मालाबार तट पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल पर हैं।
  31. ‘कोरोमंडल तट’ पूर्वी घाट के पूर्वी हिस्से (तमिलनाडु) को कहते हैं।
  32. पठारी क्षेत्र में सीढ़ीदार खेती और बागवानी (कॉफी, चाय, मसाले) की जाती है।
  33. भारत की अधिकांश कॉफी कर्नाटक के पठारी भागों में होती है।
  34. ‘कुद्रेमुख’ कर्नाटक में लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध पर्वत चोटी है।
  35. बाबा बुदन की पहाड़ियाँ कर्नाटक में कॉफी के लिए प्रसिद्ध हैं।
  36. नीलगिरी की पहाड़ियों पर ‘टोडा’ जनजाति निवास करती है।
  37. विंध्याचल श्रेणी के दक्षिण में मालवा पठार के किनारे को ‘मेवाड़ पठार’ कहा जाता है।
  38. पठार के अंदर स्थित धंसे हुए भागों को स्थानीय भाषा में ‘खड्ड’ (Gully) कहते हैं (जैसे चंबल के बीहड़)।
  39. प्रायद्वीपीय पठार भूगर्भीय रूप से बहुत स्थिर क्षेत्र माना जाता है।
  40. यहाँ धात्विक खनिजों जैसे लोहा, मैंगनीज और बॉक्साइट का विशाल भंडार है।

भाग 3: विशेष तथ्य और परीक्षा उपयोगी डेटा (81-110)

  1. ‘सोन’ नदी गंगा की एकमात्र सहायक नदी है जो दक्षिण से आकर उत्तर की ओर बहती है।
  2. प्रायद्वीपीय भारत का जल विभाजक पश्चिमी घाट को माना जाता है।
  3. अरावली पर्वत श्रेणी राजस्थान में वर्षा को रोकने में विफल रहती है क्योंकि यह मानसून के समानांतर है।
  4. सतपुड़ा श्रेणी एक ‘हॉर्स्ट’ (Horst) पर्वत का उदाहरण है।
  5. विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी सद्भावना शिखर (Goodwill Peak) है।
  6. ‘पारसनाथ’ चोटी जैन धर्म का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
  7. धारवाड़ का पठार (कर्नाटक) खनिजों की दृष्टि से भारत का सबसे समृद्ध क्षेत्र है।
  8. दक्कन ट्रैप की चट्टानों का निर्माण मेसोजोइक युग के अंत में हुआ था।
  9. ‘राजमहल की पहाड़ियाँ’ झारखंड में स्थित हैं।
  10. पूर्वी घाट को आंध्र प्रदेश में ‘नल्लामलाई’ और ‘वेलीकोंडा’ पहाड़ियों के रूप में जाना जाता है।
  11. पालकोंडा और एरामाला पहाड़ियाँ भी आंध्र प्रदेश का हिस्सा हैं।
  12. ‘गढ़जात’ की पहाड़ियाँ ओडिशा राज्य में स्थित हैं।
  13. दक्षिण भारत की नदियों में नर्मदा सबसे लंबी नदी है जो पश्चिम की ओर बहती है।
  14. ताप्ती नदी को नर्मदा की ‘जुड़वां बहन’ (Handmaid of Narmada) कहा जाता है।
  15. प्रायद्वीपीय पठार भारत का सबसे बड़ा भौगोलिक प्रदेश है, जो लगभग 16 लाख वर्ग किमी में फैला है।
  16. केमूर पहाड़ियाँ विंध्याचल श्रेणी का पूर्वी विस्तार हैं।
  17. ‘मैकाल श्रेणी’ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा बनाती है।
  18. प्रायद्वीपीय पठार की नदियाँ V-आकार की घाटी के बजाय उथली घाटियों में बहती हैं।
  19. कोयना बांध महाराष्ट्र के पठारी क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना है।
  20. प्रायद्वीपीय पठार भारत की आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास की रीढ़ है।
Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।