ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था: स्थायी, रैयतवाड़ी और महलवाड़ी बंदोबस्त – 100 One-liners

I. स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement / जमींदारी)

  1. भारत में ‘स्थायी बंदोबस्त’ की शुरुआत किसने की थी? – लॉर्ड कॉर्नवालिस
  2. स्थायी बंदोबस्त किस वर्ष लागू किया गया था? – 1793 ई.
  3. कॉर्नवालिस ने यह व्यवस्था किसकी सलाह पर तैयार की थी? – सर जॉन शोर
  4. इस व्यवस्था में भूमि का वास्तविक स्वामी किसे माना गया? – जमींदार को
  5. स्थायी बंदोबस्त मुख्य रूप से किन क्षेत्रों में लागू था? – बंगाल, बिहार, उड़ीसा, उत्तरी कर्नाटक और बनारस
  6. ब्रिटिश भारत के कुल कितने प्रतिशत क्षेत्रफल पर यह व्यवस्था लागू थी? – 19 प्रतिशत
  7. इस व्यवस्था में सरकार और जमींदार के बीच राजस्व का बँवारा किस अनुपात में था? – 10/11 भाग सरकार का और 1/11 भाग जमींदार का
  8. ‘सूर्यास्त कानून’ (Sunset Law) का संबंध किस भू-राजस्व व्यवस्था से है? – स्थायी बंदोबस्त
  9. सूर्यास्त कानून के अनुसार, यदि निश्चित समय तक लगान नहीं चुकाया गया तो क्या होता था? – जमींदार की जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी
  10. स्थायी बंदोबस्त का मुख्य दोष क्या था? – किसानों का अत्यधिक शोषण और सरकार को भविष्य में राजस्व वृद्धि का लाभ न मिलना

II. रैयतवाड़ी व्यवस्था (Ryotwari System)

  1. ‘रैयतवाड़ी व्यवस्था’ के जन्मदाता कौन माने जाते हैं? – थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड
  2. रैयतवाड़ी व्यवस्था सबसे पहले कहाँ लागू की गई थी? – मद्रास के बारा महल जिले में (1792)
  3. ‘रैयत’ शब्द का अर्थ क्या होता है? – किसान
  4. इस व्यवस्था में भूमि का स्वामी किसे माना गया? – प्रत्येक पंजीकृत किसान (रैयत) को
  5. रैयतवाड़ी व्यवस्था ब्रिटिश भारत के कितने प्रतिशत भाग पर लागू थी? – 51 प्रतिशत
  6. यह व्यवस्था किन प्रमुख क्षेत्रों में लागू थी? – मद्रास, बॉम्बे, पूर्वी बंगाल, असम और कुर्ग
  7. रैयतवाड़ी व्यवस्था में लगान की दर शुरू में कितनी थी? – उपज का 1/2 या 33% से 55% के बीच
  8. इस व्यवस्था में लगान सीधे किससे वसूल किया जाता था? – सीधे किसान से (बिना किसी बिचौलिए के)
  9. रैयतवाड़ी व्यवस्था कितने वर्षों के लिए लागू की जाती थी? – 20 से 30 वर्षों के लिए (पुनर्निर्धारण संभव था)
  10. इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या था? – जमींदारों (बिचौलियों) को समाप्त करना

III. महलवाड़ी व्यवस्था (Mahalwari System)

  1. ‘महलवाड़ी व्यवस्था’ का प्रस्ताव सबसे पहले किसने दिया था? – होल्ट मैकेंजी (1819)
  2. महलवाड़ी व्यवस्था कानूनी रूप से कब लागू की गई? – 1822 के नियम (Regulation) VII द्वारा
  3. ‘महल’ का अर्थ ब्रिटिश राजस्व शब्दावली में क्या था? – गाँव या जागीर
  4. इस व्यवस्था में लगान वसूलने का समझौता किसके साथ किया जाता था? – पूरे गाँव या महल के साथ
  5. महलवाड़ी व्यवस्था किन क्षेत्रों में लागू थी? – उत्तर प्रदेश (उत्तर-पश्चिम प्रांत), मध्य प्रांत और पंजाब
  6. ब्रिटिश भारत के कुल कितने प्रतिशत भू-भाग पर महलवाड़ी व्यवस्था थी? – 30 प्रतिशत
  7. लगान जमा करने की जिम्मेदारी किसकी होती थी? – गाँव के मुखिया (लंबरदार) की
  8. लॉर्ड विलियम बेंटिक के समय इस व्यवस्था में सुधार किसने किया था? – मार्टिन बर्ड (उत्तर भारत में भू-राजस्व व्यवस्था का जनक)
  9. महलवाड़ी व्यवस्था में राजस्व का निर्धारण कैसे होता था? – पूरे गाँव की उपज के अनुमान के आधार पर
  10. इस व्यवस्था का किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा? – मुखिया और लंबरदार शक्तिशाली हो गए और छोटे किसानों का शोषण बढ़ा

IV. तुलनात्मक अध्ययन और प्रभाव

  1. भारत में सबसे बड़े क्षेत्रफल (51%) पर कौन सी व्यवस्था लागू थी? – रैयतवाड़ी
  2. सबसे छोटे क्षेत्रफल (19%) पर कौन सी व्यवस्था थी? – स्थायी बंदोबस्त
  3. किस व्यवस्था में बिचौलियों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त करने का दावा किया गया? – रैयतवाड़ी
  4. ‘इस्तमरारी’ बंदोबस्त किस व्यवस्था का दूसरा नाम है? – स्थायी बंदोबस्त
  5. किस व्यवस्था को ‘मालगुजारी’ व्यवस्था भी कहा जाता था? – जमींदारी/स्थायी बंदोबस्त
  6. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों का प्राथमिक उद्देश्य क्या था? – अधिकतम धन निष्कासन
  7. इन व्यवस्थाओं के कारण ग्रामीण ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness) क्यों बढ़ी? – ऊँची लगान दर और फसल खराब होने पर भी राहत न मिलना
  8. ‘अनुपस्थित जमींदारी’ (Absentee Landlordism) किस व्यवस्था का परिणाम थी? – स्थायी बंदोबस्त
  9. किस व्यवस्था ने किसानों को उनकी ही जमीन पर “किरायेदार” बना दिया? – स्थायी बंदोबस्त
  10. ब्रिटिश शासन के दौरान भू-राजस्व आय का मुख्य स्रोत क्या था? – कृषि लगान

V. आर्थिक प्रभाव और कृषि का वाणिज्यीकरण

  1. ‘कृषि के वाणिज्यीकरण’ (Commercialization of Agriculture) का क्या अर्थ है? – नकदी फसलों (नील, कपास, जूट) का उत्पादन बढ़ाना
  2. भू-राजस्व चुकाने के लिए किसानों को फसलें किसे बेचनी पड़ती थीं? – साहूकारों और व्यापारियों को
  3. ‘धन का निष्कासन’ सिद्धांत के अनुसार राजस्व का उपयोग कहाँ होता था? – ब्रिटेन के हितों की पूर्ति में
  4. किस व्यवस्था ने ‘महाजनी’ प्रथा को जन्म दिया? – रैयतवाड़ी और महलवाड़ी (लगान चुकाने हेतु कर्ज लेने के कारण)
  5. कृषि पर ब्रिटिश नीतियों का अंतिम परिणाम क्या था? – बार-बार अकाल और गरीबी