वायुमंडल की संरचना
पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए जल, भूमि और वायु तीनों आवश्यक हैं। इनमें वायु का विशेष महत्त्व है, क्योंकि इसके बिना मनुष्य, पशु और अधिकांश जीवित प्राणियों का जीवन संभव नहीं है। पृथ्वी के चारों ओर फैला गैसों का विशाल आवरण वायुमंडल (Atmosphere) कहलाता है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण इससे जुड़ा रहता है और पृथ्वी के साथ-साथ घूमता है।
वायुमंडल केवल साँस लेने के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने, जल चक्र को संचालित करने, बादलों के निर्माण, वर्षा, हवाओं और मौसम संबंधी घटनाओं में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वायुमंडल में मौजूद ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों के एक बड़े हिस्से को अवशोषित करती है। इसके अतिरिक्त, वायुमंडल पृथ्वी की सतह तक पहुँचने वाले अनेक छोटे उल्कीय कणों को गर्म करके नष्ट होने में सहायता करता है।
वायुमंडल की संरचना एक समान नहीं है। पृथ्वी की सतह से ऊँचाई बढ़ने पर वायु का घनत्व, वायुदाब, तापमान और गैसों का वितरण बदलता जाता है। तापमान में होने वाले परिवर्तन के आधार पर वायुमंडल को पाँच प्रमुख परतों में बाँटा जाता है—क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बहिर्मंडल।
प्रतियोगी परीक्षाओं में वायुमंडल की गैसों का प्रतिशत, विभिन्न परतों की ऊँचाई, ओजोन परत का स्थान, उल्काओं के जलने का क्षेत्र, वायुदाब और आर्द्रता मापने वाले यंत्रों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए इस अध्याय को अवधारणाओं और महत्त्वपूर्ण तथ्यों के साथ समझना उपयोगी है।
1. वायुमंडल (Atmosphere): अर्थ एवं परिभाषा
पृथ्वी के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बना रहने वाला गैसों का आवरण वायुमंडल कहलाता है। इसमें विभिन्न गैसों के साथ जलवाष्प, धूलकण, समुद्री लवण के सूक्ष्म कण तथा अन्य सूक्ष्म पदार्थ भी उपस्थित रहते हैं।
वायुमंडल की कोई ऐसी निश्चित ऊपरी सीमा नहीं है जहाँ से सभी गैसें अचानक समाप्त हो जाती हों। ऊँचाई बढ़ने के साथ वायु अत्यंत विरल होती जाती है और धीरे-धीरे बाह्य अंतरिक्ष की परिस्थितियों में मिल जाती है।
वायुमंडल का अधिकांश द्रव्यमान पृथ्वी की सतह के निकट पाया जाता है। इसका कारण गुरुत्वाकर्षण है, जो गैसों को पृथ्वी की ओर खींचता है। ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब और वायु का घनत्व सामान्यतः कम होते जाते हैं।
वायुमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- वायुमंडल विभिन्न गैसों का मिश्रण है।
- इसमें नाइट्रोजन और ऑक्सीजन सबसे अधिक मात्रा में पाई जाती हैं।
- वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा स्थान, मौसम और समय के अनुसार बदलती रहती है।
- पृथ्वी की सतह के पास वायुदाब सबसे अधिक होता है और ऊँचाई बढ़ने पर घटता है।
- बादल, वर्षा, आँधी और अधिकांश मौसम संबंधी घटनाएँ मुख्य रूप से क्षोभमंडल में होती हैं।
- समतापमंडल में ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र पाया जाता है।
- वायुमंडल पृथ्वी की ऊर्जा के संतुलन और जलवायु को प्रभावित करता है।
2. वायुमंडल का महत्त्व
2.1 जीवन के लिए आवश्यक गैसें
वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन मनुष्यों और अधिकांश जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है। पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। नाइट्रोजन भी जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैविक पदार्थों के निर्माण से संबंधित है। हालाँकि, अधिकांश पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का सीधे उपयोग नहीं कर सकते; इसके लिए नाइट्रोजन स्थिरीकरण जैसी प्रक्रियाएँ आवश्यक होती हैं।
2.2 पृथ्वी के तापमान का नियंत्रण
वायुमंडल पृथ्वी की सतह से निकलने वाली ऊर्जा के एक हिस्से को अवशोषित करता है और उसे पुनः विभिन्न दिशाओं में उत्सर्जित करता है। कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान देती हैं। इस प्रक्रिया के कारण पृथ्वी का औसत तापमान जीवन के अनुकूल बना रहता है।
2.3 हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा
समतापमंडल में मौजूद ओजोन सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों के एक बड़े हिस्से को अवशोषित करती है। इससे जीवों को त्वचा, आँखों और आनुवंशिक पदार्थ को नुकसान पहुँचाने वाली किरणों से सुरक्षा मिलती है।
2.4 जल चक्र का संचालन
महासागरों, नदियों, झीलों और मिट्टी से जल का वाष्पीकरण होता है। जलवाष्प वायुमंडल में पहुँचकर ठंडी होने पर संघनित हो सकती है और बादलों का निर्माण करती है। अनुकूल परिस्थितियों में वर्षा, हिमपात या ओलावृष्टि के रूप में जल वापस पृथ्वी पर पहुँचता है। इस प्रकार वायुमंडल जल चक्र का महत्त्वपूर्ण भाग है।
2.5 मौसम और जलवायु का निर्माण
तापमान, वायुदाब, आर्द्रता और हवाओं में होने वाले परिवर्तन मौसम को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक देखे गए मौसम के औसत स्वरूप और उसकी विविधताओं को जलवायु के अध्ययन में शामिल किया जाता है।
2.6 छोटे उल्कीय कणों से सुरक्षा
अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर आने वाले अनेक छोटे उल्कीय कण वायुमंडल में प्रवेश करने पर गर्म होकर चमकने लगते हैं और उनमें से बहुत-से पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। हालाँकि, बड़े उल्कापिंडों के टुकड़े पृथ्वी की सतह तक पहुँच सकते हैं।
3. वायुमंडल में गैसों का संघटन (Composition of Atmosphere)
वायुमंडल में अनेक गैसें पाई जाती हैं, लेकिन उनकी मात्रा समान नहीं है। पृथ्वी की सतह के निकट शुष्क वायु में नाइट्रोजन सबसे अधिक और ऑक्सीजन दूसरी सबसे अधिक मात्रा में मौजूद होती है।
शुष्क वायु के सामान्य संघटन में जलवाष्प को शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि इसकी मात्रा स्थान और समय के अनुसार बहुत बदलती रहती है। कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी समय के साथ बदलती है।
शुष्क वायु में प्रमुख गैसों का प्रतिशत
| गैस | अनुमानित मात्रा |
|---|---|
| नाइट्रोजन (Nitrogen) | 78.08% |
| ऑक्सीजन (Oxygen) | 20.95% |
| आर्गन (Argon) | 0.93% |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | लगभग 0.04% |
| अन्य गैसें | अत्यंत अल्प मात्रा |
ये आँकड़े शुष्क वायु के लगभग मान हैं। कार्बन डाइऑक्साइड की वास्तविक सांद्रता समय के साथ बदलती रहती है। जलवाष्प को शामिल करने पर अन्य गैसों का कुल प्रतिशत उसी अनुपात में बदल जाता है।
3.1 नाइट्रोजन (Nitrogen)
नाइट्रोजन वायुमंडल की सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। यह शुष्क वायु का लगभग 78.08% हिस्सा बनाती है।
नाइट्रोजन सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रियाशील गैस है। पौधों और जीवों को प्रोटीन तथा अन्य नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ बनाने के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी यौगिकों में बदलने का कार्य कुछ जीवाणु, बिजली चमकने जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएँ तथा औद्योगिक प्रक्रियाएँ करती हैं।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य:
- वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा वाली गैस — नाइट्रोजन।
- शुष्क वायु में मात्रा — लगभग 78.08%।
- जैविक महत्त्व — प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल के निर्माण में आवश्यक तत्व।
3.2 ऑक्सीजन (Oxygen)
ऑक्सीजन शुष्क वायु का लगभग 20.95% भाग है। अधिकांश जीवों में कोशिकीय श्वसन के लिए इसकी आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन दहन की प्रक्रिया में भी सहायक है, लेकिन स्वयं ईंधन नहीं है।
पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन छोड़ते हैं। महासागरों में पाए जाने वाले सूक्ष्म प्रकाश संश्लेषक जीव भी वैश्विक ऑक्सीजन चक्र में योगदान देते हैं।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य:
- वायुमंडल में दूसरी सबसे अधिक मात्रा वाली गैस — ऑक्सीजन।
- शुष्क वायु में मात्रा — लगभग 20.95%।
- प्रमुख उपयोग — श्वसन और दहन में सहायक।
3.3 आर्गन (Argon)
आर्गन एक निष्क्रिय या कम प्रतिक्रियाशील उत्कृष्ट गैस (Noble Gas) है। यह वायुमंडल में लगभग 0.93% मात्रा में पाई जाती है।
आर्गन का उपयोग विद्युत बल्बों, वेल्डिंग तथा कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। वायुमंडल में इसकी मात्रा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की तुलना में कम है, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक है।
3.4 कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide)
कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में कम मात्रा में पाई जाने वाली, लेकिन जलवायु की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण गैस है। पौधे प्रकाश संश्लेषण के दौरान इसका उपयोग करके कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं।
यह एक ग्रीनहाउस गैस भी है, जो पृथ्वी से निकलने वाली अवरक्त ऊर्जा के एक हिस्से को अवशोषित करती है। जीवाश्म ईंधनों के दहन, वनों की कटाई और कुछ औद्योगिक गतिविधियों के कारण वायुमंडल में इसकी मात्रा बढ़ी है, जिससे वैश्विक तापवृद्धि में योगदान मिला है।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य:
- रासायनिक सूत्र — CO₂।
- प्रमुख जैविक भूमिका — प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक।
- जलवायु संबंधी भूमिका — ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान।
3.5 ओजोन (Ozone)
ओजोन ऑक्सीजन का एक विशेष रूप है, जिसका रासायनिक सूत्र O₃ है। इसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं। वायुमंडल में ओजोन की मात्रा बहुत कम है, लेकिन समतापमंडल में इसकी उपस्थिति पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
ओजोन सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। पृथ्वी की सतह के पास ओजोन एक वायु प्रदूषक भी हो सकती है और श्वसन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न कर सकती है। इसलिए ओजोन का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह वायुमंडल की किस ऊँचाई पर मौजूद है।
3.6 अन्य गैसें
वायुमंडल में निऑन, हीलियम, क्रिप्टॉन, जीनॉन, हाइड्रोजन तथा मीथेन जैसी गैसें भी अल्प मात्रा में पाई जाती हैं। मीथेन कम मात्रा में होने के बावजूद एक प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैस है। जलवाष्प भी ग्रीनहाउस प्रभाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. वायुमंडल के अन्य घटक
गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प, धूलकण, समुद्री नमक के कण, धुआँ, परागकण और अन्य सूक्ष्म एरोसोल भी पाए जाते हैं।
4.1 जलवाष्प (Water Vapour)
जलवाष्प पानी की गैसीय अवस्था है। इसकी मात्रा सामान्यतः शुष्क और ठंडे क्षेत्रों में कम तथा गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में अधिक हो सकती है। सतह के पास वायु में जलवाष्प की मात्रा शून्य के निकट से लेकर लगभग 4% तक हो सकती है, जबकि कई स्थानों पर यह इससे काफी कम रहती है।
जलवाष्प बादलों, कोहरे, ओस और वर्षा के निर्माण में महत्त्वपूर्ण है। यह ग्रीनहाउस गैस भी है और पृथ्वी की ऊर्जा के संतुलन को प्रभावित करती है।
4.2 धूलकण (Dust Particles)
वायुमंडल में मिट्टी, रेत, समुद्री नमक, धुएँ और जैविक पदार्थों के सूक्ष्म कण मौजूद रहते हैं। ये कण बादलों की बूंदों के निर्माण में संघनन केंद्र के रूप में काम कर सकते हैं।
धूलकण सूर्य के प्रकाश को बिखेरते और अवशोषित करते हैं। इसी कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश में लाल, नारंगी और पीले रंग अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं।
4.3 एरोसोल (Aerosols)
एरोसोल वायु में निलंबित ठोस या तरल सूक्ष्म कणों को कहा जाता है। इनमें धूल, समुद्री नमक, धुआँ, सल्फेट कण और अन्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। एरोसोल बादलों के निर्माण, दृश्यता और पृथ्वी के विकिरण संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
5. वायुमंडल की परतें (Layers of Atmosphere)
तापमान में ऊँचाई के साथ होने वाले परिवर्तन के आधार पर वायुमंडल को पाँच प्रमुख परतों में विभाजित किया जाता है।
- क्षोभमंडल (Troposphere)
- समतापमंडल (Stratosphere)
- मध्यमंडल (Mesosphere)
- तापमंडल (Thermosphere)
- बहिर्मंडल (Exosphere)
इन परतों की ऊँचाई अनुमानित है। अक्षांश, ऋतु, सौर गतिविधि और अन्य परिस्थितियों के अनुसार उनकी सीमाओं में बदलाव हो सकता है।
5.1 क्षोभमंडल (Troposphere)
क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है। इसकी ऊपरी सीमा को क्षोभसीमा (Tropopause) कहा जाता है। यह परत पृथ्वी की सतह के संपर्क में रहती है और मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ इसी में होती हैं।
क्षोभमंडल की औसत ऊँचाई लगभग 12 किलोमीटर मानी जाती है। भूमध्य रेखा के आसपास यह लगभग 16–18 किलोमीटर तक पहुँच सकता है, जबकि ध्रुवों के निकट इसकी ऊँचाई लगभग 8–10 किलोमीटर हो सकती है।
इस परत में वायुमंडल के द्रव्यमान का बड़ा हिस्सा और लगभग समस्त वायुमंडलीय जलवाष्प पाया जाता है। बादल, वर्षा, हिमपात, आँधी और अनेक प्रकार की हवाएँ इसी परत से संबंधित हैं।
क्षोभमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- वायुमंडल की सबसे निचली परत।
- औसत ऊँचाई लगभग 12 किमी।
- मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ यहीं होती हैं।
- ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान सामान्यतः घटता है।
- वायुदाब और वायु का घनत्व ऊँचाई बढ़ने पर कम होते हैं।
सामान्य ताप ह्रास दर (Environmental Lapse Rate)
क्षोभमंडल में औसतन तापमान लगभग 6.5°C प्रति किलोमीटर की दर से घट सकता है। इसे मानक औसत ताप ह्रास दर के रूप में पढ़ाया जाता है।
हालाँकि, वास्तविक तापमान में कमी हमेशा इसी दर से नहीं होती। मौसम, नमी, वायु की गति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तापमान का वितरण बदल सकता है। कभी-कभी ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान बढ़ने की स्थिति भी बनती है, जिसे तापमान व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) कहा जाता है।
उदाहरण: यदि किसी स्थान पर समुद्र तल के पास तापमान 30°C है और मानक औसत ताप ह्रास दर लागू मानें, तो 1 किमी ऊपर अनुमानित तापमान लगभग 23.5°C होगा। यह केवल एक गणितीय उदाहरण है, वास्तविक तापमान की गारंटी नहीं।
क्षोभसीमा (Tropopause)
क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच की सीमा को क्षोभसीमा कहते हैं। इस क्षेत्र में तापमान का सामान्य ह्रास बहुत कम हो जाता है या तापमान लगभग स्थिर हो सकता है।
परीक्षा तथ्य: मौसम संबंधी घटनाओं के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण वायुमंडलीय परत — क्षोभमंडल।
5.2 समतापमंडल (Stratosphere)
समतापमंडल क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। यह सामान्यतः लगभग 12 किलोमीटर से शुरू होकर 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला माना जाता है। इसकी निचली सीमा क्षोभसीमा और ऊपरी सीमा समतापसीमा (Stratopause) कहलाती है।
समतापमंडल की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र है। ओजोन सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है, जिसके कारण इस परत के ऊपरी भाग में तापमान ऊँचाई बढ़ने के साथ बढ़ने लगता है।
क्षोभमंडल की तुलना में समतापमंडल में ऊर्ध्वाधर वायु मिश्रण अपेक्षाकृत कम होता है। इसी कारण यह परत वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के अध्ययन में विशेष महत्त्व रखती है।
समतापमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- लगभग 12–50 किमी की ऊँचाई तक विस्तृत।
- ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र यहीं पाया जाता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान सामान्यतः बढ़ता है।
- वायु का ऊर्ध्वाधर मिश्रण क्षोभमंडल की तुलना में कम होता है।
- कुछ जेट विमान समतापमंडल के निचले हिस्से के आसपास या ऊपरी क्षोभमंडल में उड़ान भरते हैं।
परीक्षा तथ्य: ओजोन परत मुख्यतः किस परत में पाई जाती है? — समतापमंडल।
5.3 ओजोन परत (Ozone Layer)
ओजोन परत समतापमंडल में ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र को कहा जाता है। यह कोई ठोस परत नहीं है, बल्कि गैस के वितरण का एक क्षेत्र है।
ओजोन सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों, विशेषकर UV-B और UV-C के बड़े हिस्से को अवशोषित करती है। इससे पृथ्वी पर रहने वाले जीवों को विकिरण से होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है।
ओजोन क्षरण (Ozone Depletion)
कुछ मानव निर्मित रसायन, विशेषकर क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) से उत्पन्न क्लोरीन तथा हैलोन से उत्पन्न ब्रोमीन, समतापमंडलीय ओजोन को नष्ट करने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं में भाग लेते हैं।
अंटार्कटिका के ऊपर वसंत ऋतु में ओजोन की मात्रा में बहुत अधिक मौसमी कमी को सामान्यतः ओजोन छिद्र कहा जाता है। यह वास्तविक खाली छेद नहीं है, बल्कि ओजोन की सांद्रता में गंभीर कमी का क्षेत्र है।
ओजोन परत और ओजोन छिद्र: महत्त्वपूर्ण तथ्य
- ओजोन का रासायनिक सूत्र — O₃।
- ओजोन परत — मुख्यतः समतापमंडल।
- प्रमुख समस्या — समतापमंडलीय ओजोन का क्षरण।
- ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण रसायन — CFCs और हैलोन।
- ओजोन संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौता — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987।
5.4 मध्यमंडल (Mesosphere)
मध्यमंडल समतापमंडल के ऊपर स्थित है। यह लगभग 50 किलोमीटर से 80–85 किलोमीटर तक विस्तृत माना जाता है। इसकी ऊपरी सीमा को मध्यमसीमा (Mesopause) कहा जाता है।
इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान सामान्यतः घटता है। मध्यमंडल का ऊपरी भाग वायुमंडल के सबसे ठंडे क्षेत्रों में से एक है।
अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर आने वाले अनेक छोटे उल्कीय कण इस परत में वायु के अणुओं से टकराने और गर्म होने के कारण चमकते हैं। इस घटना को सामान्यतः टूटते तारे या उल्का के रूप में देखा जाता है।
मध्यमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- लगभग 50–80/85 किमी की ऊँचाई।
- तापमान सामान्यतः ऊँचाई के साथ घटता है।
- इसका ऊपरी भाग अत्यंत ठंडा होता है।
- अनेक छोटे उल्कीय कण इसी क्षेत्र में गर्म होकर चमकते हैं।
परीक्षा तथ्य: उल्काएँ मुख्यतः किस वायुमंडलीय परत में जलती हुई दिखाई देती हैं? — मध्यमंडल।
5.5 तापमंडल (Thermosphere)
तापमंडल मध्यमंडल के ऊपर स्थित है। यह लगभग 80–85 किलोमीटर से शुरू होकर कई सौ किलोमीटर या उससे अधिक ऊँचाई तक विस्तृत हो सकता है। इसकी ऊपरी सीमा सौर गतिविधि के अनुसार काफी बदल सकती है।
इस परत में सूर्य से आने वाले उच्च ऊर्जा वाले विकिरणों का अवशोषण होता है। इसके कारण तापमान ऊँचाई बढ़ने के साथ बहुत अधिक बढ़ सकता है। हालाँकि, वायु अत्यंत विरल होती है, इसलिए यहाँ का उच्च तापमान पृथ्वी की सतह पर महसूस होने वाली गर्मी के समान नहीं होता।
तापमंडल में आयनित कण भी पाए जाते हैं। आयनमंडल का बड़ा हिस्सा तापमंडल के साथ अतिव्यापित होता है, लेकिन आयनमंडल को तापमंडल का बिल्कुल समानार्थी नहीं माना जाना चाहिए।
तापमंडल की प्रमुख विशेषताएँ
- मध्यमंडल के ऊपर स्थित।
- अत्यंत विरल वायु।
- ऊँचाई के साथ तापमान बहुत अधिक बढ़ सकता है।
- सौर विकिरण से गैसों का आयनीकरण होता है।
- ध्रुवीय ज्योति के निर्माण में ऊपरी वायुमंडल की भूमिका होती है।
5.6 आयनमंडल (Ionosphere)
आयनमंडल वायुमंडल का ऐसा क्षेत्र है जिसमें सौर विकिरण के कारण गैसों के अणु और परमाणु आयनित हो जाते हैं। यह कोई अलग, स्पष्ट तापीय परत नहीं है। इसका विस्तार मुख्यतः मध्यमंडल के ऊपरी भाग से तापमंडल और उससे आगे के क्षेत्रों तक होता है।
आयनमंडल की अलग-अलग परतें रेडियो तरंगों को अवशोषित, मोड़ या वापस पृथ्वी की ओर भेज सकती हैं। इस कारण यह लंबी दूरी के कुछ रेडियो संचार के लिए महत्त्वपूर्ण है। इसका प्रभाव रेडियो तरंग की आवृत्ति, दिन-रात की स्थिति और सौर गतिविधि पर निर्भर करता है।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य:
- आयनमंडल में आयनित कण पाए जाते हैं।
- यह रेडियो संचार को प्रभावित करता है।
- आयनमंडल और तापमंडल की सीमाएँ पूरी तरह समान नहीं हैं।
- रेडियो तरंगों के प्रसार पर इसका प्रभाव तरंग की आवृत्ति और वायुमंडलीय परिस्थितियों के अनुसार बदलता है।
5.7 ध्रुवीय ज्योति (Aurora)
ध्रुवीय ज्योति ऊपरी वायुमंडल में दिखाई देने वाली रंगीन प्रकाशीय घटना है। सूर्य से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से प्रभावित होकर ध्रुवीय क्षेत्रों के आसपास वायुमंडलीय गैसों से टकराते हैं। इन टक्करों के कारण गैसों से प्रकाश उत्सर्जित होता है।
इसके दो प्रमुख नाम हैं:
- ऑरोरा बोरेलिस (Aurora Borealis): उत्तरी गोलार्ध में दिखाई देने वाली ध्रुवीय ज्योति।
- ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस (Aurora Australis): दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देने वाली ध्रुवीय ज्योति।
इनका रंग ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे गैसों के प्रकार तथा टक्कर की ऊँचाई और ऊर्जा पर निर्भर करता है। हरा, लाल, बैंगनी और नीला रंग दिखाई दे सकता है।
5.8 बहिर्मंडल (Exosphere)
बहिर्मंडल वायुमंडल की सबसे बाहरी प्रमुख परत है। इसका निचला भाग सामान्यतः कई सौ किलोमीटर की ऊँचाई से माना जाता है और इसका विस्तार हजारों किलोमीटर तक हो सकता है। इसकी सटीक ऊपरी सीमा तय करना कठिन है, क्योंकि यहाँ से गैसें धीरे-धीरे अंतरिक्ष के अत्यंत विरल वातावरण में मिल जाती हैं।
इस परत में गैसों के कणों के बीच दूरी बहुत अधिक होती है। हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के कण यहाँ महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य:
- वायुमंडल की सबसे बाहरी प्रमुख परत — बहिर्मंडल।
- वायु अत्यंत विरल होती है।
- वायुमंडल और बाह्य अंतरिक्ष के बीच कोई अचानक समाप्त होने वाली ठोस सीमा नहीं है।
6. वायुमंडल की परतों की तुलना
| परत | अनुमानित ऊँचाई | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| क्षोभमंडल | सतह से लगभग 8–18 किमी | मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ |
| समतापमंडल | लगभग 12–50 किमी | ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र |
| मध्यमंडल | लगभग 50–80/85 किमी | अनेक उल्कीय कण गर्म होकर चमकते हैं |
| तापमंडल | लगभग 80/85 किमी से कई सौ किमी या अधिक | तापमान में तीव्र वृद्धि और आयनीकरण |
| बहिर्मंडल | कई सौ किमी से हजारों किमी तक | अत्यंत विरल गैसें, अंतरिक्ष में क्रमिक संक्रमण |
ये ऊँचाइयाँ अनुमानित हैं। अलग-अलग स्रोतों में सीमाएँ थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। आयनमंडल को अलग तापीय परत के रूप में नहीं, बल्कि आयनित गैसों वाले क्षेत्र के रूप में समझना चाहिए।
7. वायुदाब (Air Pressure)
वायु अपने भार के कारण पृथ्वी की सतह और अन्य वस्तुओं पर दबाव डालती है। वायु द्वारा किसी सतह पर प्रति इकाई क्षेत्रफल लगाया गया बल वायुदाब कहलाता है।
समुद्र तल पर मानक वायुदाब लगभग 1013.25 हेक्टोपास्कल (hPa) होता है। इसे 1 वायुमंडलीय दाब (1 atmosphere) के बराबर माना जाता है।
ऊँचाई बढ़ने पर वायु का ऊपर स्थित स्तंभ छोटा और कम घना होता जाता है, इसलिए वायुदाब सामान्यतः घटता है।
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारक
1. ऊँचाई: ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब सामान्यतः घटता है।
2. तापमान: गर्म होने पर वायु फैल सकती है और आसपास की परिस्थितियों के अनुसार ऊपर उठ सकती है। इससे सतह पर निम्न वायुदाब बनने की प्रवृत्ति हो सकती है।
3. आर्द्रता: समान तापमान और दाब पर जलवाष्प वाली वायु का औसत आणविक भार शुष्क वायु से कम होता है। इसलिए अन्य परिस्थितियाँ समान रहने पर आर्द्र वायु का घनत्व कम हो सकता है।
4. पृथ्वी का घूर्णन और वायुमंडलीय परिसंचरण: बड़े पैमाने पर वायु की गति और दाब वितरण पर पृथ्वी का घूर्णन तथा वैश्विक परिसंचरण प्रभाव डालते हैं।
वायुदाब मापने का यंत्र
वायुदाब मापने के लिए बैरोमीटर (Barometer) का उपयोग किया जाता है।
प्रमुख इकाइयाँ:
- पास्कल (Pa)
- हेक्टोपास्कल (hPa)
- मिलीबार (mb)
- पारा का मिलीमीटर (mmHg)
परीक्षा तथ्य: वायुदाब मापने का यंत्र — बैरोमीटर।
8. तापमान और वायुदाब का संबंध
तापमान और वायुदाब का संबंध समझने के लिए केवल एक नियम याद करना पर्याप्त नहीं है। वायु का तापमान, घनत्व, ऊपर उठने या नीचे उतरने की प्रवृत्ति तथा आसपास की परिस्थितियाँ मिलकर दाब का वितरण निर्धारित करती हैं।
सामान्य रूप से गर्म सतह के ऊपर हवा गर्म होकर फैल सकती है और ऊपर उठ सकती है, जिससे सतह पर निम्न दाब बनने की संभावना रहती है। ठंडी वायु अधिक घनी हो सकती है और नीचे बैठने की प्रवृत्ति दिखा सकती है, जिससे उच्च दाब बन सकता है।
लेकिन यह कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है कि हर गर्म क्षेत्र में हमेशा निम्न दाब और हर ठंडे क्षेत्र में हमेशा उच्च दाब ही होगा। वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण, ऊँचाई और मौसम प्रणालियाँ भी दाब को प्रभावित करती हैं।
One-liners:
- वायु के ऊपर उठने की प्रवृत्ति — कई परिस्थितियों में निम्न सतही दाब से संबंधित।
- वायु के नीचे उतरने की प्रवृत्ति — कई परिस्थितियों में उच्च सतही दाब से संबंधित।
- वायुदाब मापने का यंत्र — बैरोमीटर।
9. पवन (Wind)
वायु का क्षैतिज दिशा में एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाह पवन कहलाता है। पवन के निर्माण में वायुदाब का अंतर प्रमुख भूमिका निभाता है। सामान्यतः हवा उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर चलने की प्रवृत्ति रखती है।
वास्तविक पवन की दिशा और गति पर पृथ्वी का घूर्णन, घर्षण और स्थानीय भू-आकृति भी प्रभाव डालते हैं।
पवनों के प्रमुख प्रकार
1. स्थायी या वैश्विक पवनें: ये बड़े पैमाने पर वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण से जुड़ी होती हैं। व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पूर्वी पवनें इसके उदाहरण हैं।
2. मौसमी पवनें: इनकी दिशा में मौसम के अनुसार बदलाव होता है। भारतीय मानसून इसका प्रमुख उदाहरण है।
3. स्थानीय पवनें: ये सीमित क्षेत्रों में स्थानीय तापमान और दाब के अंतर के कारण चलती हैं। समुद्री समीर, स्थल समीर और पर्वतीय-घाटी समीर इसके उदाहरण हैं।
पवनों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
- वायुदाब का अंतर।
- पृथ्वी का घूर्णन और कोरिऑलिस बल।
- सतह का घर्षण।
- पर्वत, घाटियाँ और अन्य स्थानीय स्थलरूप।
10. आर्द्रता (Humidity)
वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। आर्द्रता मौसम, बादलों के निर्माण, वर्षा और मानव शरीर द्वारा गर्मी महसूस किए जाने को प्रभावित करती है।
आर्द्रता के प्रमुख प्रकार
1. निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity): प्रति इकाई आयतन वायु में उपस्थित जलवाष्प का द्रव्यमान।
2. विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity): नम वायु के कुल द्रव्यमान में जलवाष्प के द्रव्यमान का अनुपात।
3. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity): किसी निश्चित तापमान पर वायु में उपस्थित जलवाष्प के वास्तविक आंशिक दाब और संतृप्त जलवाष्प दाब के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
सापेक्ष आर्द्रता 100% होने का अर्थ है कि वायु उस तापमान पर जलवाष्प से संतृप्त है। उपयुक्त परिस्थितियों में इसके बाद संघनन शुरू हो सकता है।
आर्द्रता मापने का यंत्र
आर्द्रता मापने के लिए हाइग्रोमीटर (Hygrometer) का उपयोग किया जाता है। आर्द्रता मापने के लिए शुष्क और आर्द्र बल्ब वाले साइक्रोमीटर का भी उपयोग किया जाता है।
परीक्षा तथ्य: आर्द्रता मापने का यंत्र — हाइग्रोमीटर।
11. संघनन (Condensation)
जब जलवाष्प ठंडी होकर तरल जल की बूंदों में बदलती है, तो इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं। सामान्यतः वायु के ओसांक तक ठंडा होने पर और उपयुक्त संघनन केंद्र उपलब्ध होने पर संघनन हो सकता है।
संघनन के कारण बादल, कोहरा और ओस जैसी घटनाएँ विकसित हो सकती हैं। बहुत कम तापमान पर जलवाष्प से बर्फ के क्रिस्टल भी बन सकते हैं।
संघनन के प्रमुख रूप
1. ओस (Dew): जब किसी सतह का तापमान ओसांक तक गिर जाता है और जलवाष्प उस पर तरल बूंदों के रूप में जमा हो जाती है, तो ओस बनती है।
2. पाला (Frost): जब सतह का तापमान हिमांक से नीचे होता है और जलवाष्प बर्फ के क्रिस्टल के रूप में जमती है, तो पाला बन सकता है।
3. कोहरा (Fog): पृथ्वी की सतह के निकट वायु में उपस्थित सूक्ष्म जल बूंदों या बर्फ के क्रिस्टलों के कारण दृश्यता कम हो जाती है। इसे कोहरा कहते हैं।
4. बादल (Clouds): वायुमंडल में ऊँचाई पर निलंबित सूक्ष्म जल बूंदों या बर्फ के क्रिस्टलों का समूह बादल कहलाता है।
12. वर्षा (Precipitation) और उसके प्रकार
जब वायुमंडल में मौजूद जल बूंदें या बर्फ के कण इतने बड़े और भारी हो जाते हैं कि वे गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की सतह पर गिरने लगते हैं, तो इसे वर्षण (Precipitation) कहते हैं। वर्षा इसका एक रूप है। हिमपात, ओले और कुछ अन्य रूप भी वर्षण में शामिल होते हैं।
भौतिक भूगोल में वर्षा को उत्पन्न करने वाली प्रक्रियाओं के आधार पर सामान्यतः तीन प्रमुख प्रकारों में समझाया जाता है।
12.1 संवहनीय वर्षा (Convectional Rainfall)
जब पृथ्वी की सतह गर्म होती है, तो उसके संपर्क में आने वाली वायु गर्म होकर ऊपर उठती है। ऊपर जाने पर वायु का विस्तार होता है और वह ठंडी होती जाती है। यदि वायु ओसांक तक पहुँचती है, तो संघनन और बादल निर्माण हो सकता है। अनुकूल परिस्थितियों में वर्षा होती है।
यह वर्षा प्रायः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में देखी जाती है और कई बार गरज-चमक के साथ होती है।
मुख्य कारण: सतह का गर्म होना और वायु का संवहन द्वारा ऊपर उठना।
12.2 पर्वतीय या स्थलाकृतिक वर्षा (Orographic Rainfall)
जब नम हवा पर्वत से टकराती है, तो उसे ऊपर उठना पड़ता है। ऊपर उठने के दौरान वायु ठंडी होती है और उपयुक्त परिस्थितियों में संघनन तथा वर्षा होती है।
पर्वत की हवा की ओर वाली ढाल को पवनाभिमुख ढाल (Windward Slope) कहा जाता है। दूसरी ओर उतरती हवा गर्म और शुष्क हो सकती है, जिससे वर्षा कम होती है। इसे वर्षाछाया प्रभाव कहा जाता है।
मुख्य कारण: पर्वतों के कारण नम वायु का ऊपर उठना।
12.3 चक्रवाती या वाताग्रीय वर्षा (Cyclonic/Frontal Rainfall)
जब विभिन्न तापमान वाली वायु राशियाँ मिलती हैं, तो अपेक्षाकृत गर्म और नम वायु ऊपर उठ सकती है। इसके ठंडा होने और संघनन से बादल तथा वर्षा बन सकती है। शीतोष्ण क्षेत्रों में वाताग्रीय वर्षा का विशेष महत्त्व है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में भी निम्न दाब, नम हवा के अभिसरण और तीव्र वायुगति के कारण भारी वर्षा हो सकती है।
मुख्य कारण: निम्न दाब, वायु का अभिसरण तथा गर्म नम वायु का ऊपर उठना।
13. ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect)
पृथ्वी सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है। इस ऊर्जा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित किया जाता है और बाद में अवरक्त विकिरण के रूप में बाहर की ओर उत्सर्जित होता है।
वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसें इस अवरक्त ऊर्जा के एक हिस्से को अवशोषित करके पुनः विभिन्न दिशाओं में उत्सर्जित करती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया को ग्रीनहाउस प्रभाव कहा जाता है।
प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी का औसत तापमान जीवन के लिए अधिक अनुकूल रहता है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता बढ़ जाती है और अतिरिक्त ऊर्जा पृथ्वी-वायुमंडल प्रणाली में जमा होने लगती है।
प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
- मीथेन (CH₄)
- नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)
- जलवाष्प
- कुछ औद्योगिक गैसें, जैसे HFCs
परीक्षा तथ्य: ग्रीनहाउस प्रभाव और ओजोन क्षरण अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। दोनों का संबंध वायुमंडल से है, लेकिन उनके कारण और रासायनिक तंत्र अलग हैं।
14. वैश्विक तापवृद्धि (Global Warming)
मानवीय गतिविधियों के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत सतही तापमान में होने वाली दीर्घकालिक वृद्धि को वैश्विक तापवृद्धि कहते हैं।
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का दहन, वनों की कटाई, कृषि तथा कुछ औद्योगिक प्रक्रियाएँ ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
वैश्विक तापवृद्धि के प्रमुख प्रभाव
- वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि।
- हिमनदों और बर्फ की चादरों का पिघलना।
- समुद्र के स्तर में वृद्धि।
- कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी की घटनाओं का बढ़ना।
- वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन।
- पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता पर प्रभाव।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हर क्षेत्र में समान नहीं होते। कुछ क्षेत्रों में सूखे का जोखिम बढ़ सकता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।
15. अम्ल वर्षा (Acid Rain)
जब सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) वायुमंडल में रासायनिक प्रतिक्रियाओं से सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल जैसे यौगिक बनाते हैं, तो वे वर्षा, हिमपात, कोहरे या सूखे निक्षेप के माध्यम से पृथ्वी की सतह तक पहुँच सकते हैं। इस प्रक्रिया को अम्ल निक्षेपण कहा जाता है। अम्ल वर्षा इसका प्रमुख रूप है।
जीवाश्म ईंधनों का दहन, बिजली उत्पादन, उद्योग और वाहन उत्सर्जन इन गैसों के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
अम्ल वर्षा के प्रभाव
- झीलों और नदियों के पानी की अम्लता बढ़ सकती है।
- कुछ मिट्टियों से पोषक तत्वों का ह्रास हो सकता है।
- जलीय जीवों और वनस्पतियों को नुकसान पहुँच सकता है।
- इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों का क्षरण हो सकता है।
परीक्षा तथ्य: अम्ल वर्षा के निर्माण में मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड की भूमिका होती है।
16. वायुमंडल से संबंधित प्रमुख मापन यंत्र
| मापन का विषय | यंत्र |
|---|---|
| वायुदाब | बैरोमीटर (Barometer) |
| तापमान | थर्मामीटर (Thermometer) |
| आर्द्रता | हाइग्रोमीटर (Hygrometer) |
| वर्षा की मात्रा | वर्षामापी (Rain Gauge) |
| पवन की गति | एनीमोमीटर (Anemometer) |
| पवन की दिशा | विंड वेन (Wind Vane) |
इन यंत्रों का उपयोग मौसम विज्ञान और जलवायु अध्ययन में किया जाता है। मौसम केंद्रों पर इनसे प्राप्त आँकड़ों की मदद से मौसम की स्थिति का आकलन किया जाता है।
17. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्त्वपूर्ण One-liners
वायुमंडल की संरचना
- पृथ्वी के चारों ओर गैसों का आवरण — वायुमंडल।
- वायुमंडल को पृथ्वी से बाँधे रखने वाला प्रमुख बल — गुरुत्वाकर्षण।
- शुष्क वायु में सर्वाधिक मात्रा वाली गैस — नाइट्रोजन।
- शुष्क वायु में नाइट्रोजन की मात्रा — लगभग 78.08%।
- शुष्क वायु में ऑक्सीजन की मात्रा — लगभग 20.95%।
- शुष्क वायु में आर्गन की मात्रा — लगभग 0.93%।
- कार्बन डाइऑक्साइड का रासायनिक सूत्र — CO₂।
- ओजोन का रासायनिक सूत्र — O₃।
- वायुमंडलीय जलवाष्प की मात्रा — स्थान और समय के अनुसार परिवर्तनशील।
- वायुमंडल की सबसे निचली तापीय परत — क्षोभमंडल।
वायुमंडलीय परतें
A. क्षोभमंडल (Troposphere) – सबसे निचली परत
A. क्षोभमंडल (Troposphere) – सबसे निचली परत
- वायुमंडल की सबसे निचली और पहली परत का नाम क्या है? — क्षोभमंडल (Troposphere)
- मौसम की सारी घटनाएं (बादल, बिजली, बारिश, आंधी) किस परत में होती हैं? — क्षोभमंडल में
- क्षोभमंडल की ऊंचाई ध्रुवों पर कितनी होती है? — लगभग 8 किलोमीटर
- विषुवत रेखा (भूमध्य रेखा) पर क्षोभमंडल की ऊंचाई कितनी है? — लगभग 18 किलोमीटर
- क्षोभमंडल में ऊपर जाने पर तापमान पर क्या असर पड़ता है? — तापमान घटने लगता है
- कितनी ऊंचाई पर जाने पर 1°C तापमान कम हो जाता है? — 165 मीटर की ऊंचाई पर
- 1 किलोमीटर ऊपर जाने पर तापमान में कितनी गिरावट आती है? — 6.5°C (इसे सामान्य ह्रास दर कहते हैं)
- वायुमंडल का सबसे ज्यादा घनत्व (Density) किस परत में होता है? — क्षोभमंडल में
- क्षोभमंडल और समतापमंडल को अलग करने वाली पतली सीमा? — क्षोभ सीमा (Tropopause)
B. समतापमंडल (Stratosphere) – विमानों के लिए आदर्श
- क्षोभमंडल के ठीक ऊपर वाली दूसरी परत कौन सी है? — समतापमंडल (Stratosphere)
- समतापमंडल की ऊंचाई कहाँ तक फैली है? — जमीन से 50 किलोमीटर तक
- हवाई जहाजों के उड़ने के लिए सबसे बढ़िया परत कौन सी है? — समतापमंडल (क्योंकि यहाँ बादल और हलचल नहीं होती)
- ओजोन परत (Ozone Layer) किस मंडल में पाई जाती है? — समतापमंडल में
- ओजोन परत सूरज की किन किरणों से हमारी रक्षा करती है? — पराबैंगनी (Ultra Violet) किरणों से
- ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाली मुख्य गैस कौन सी है? — CFC (क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन)
- समतापमंडल में तापमान की क्या स्थिति रहती है? — निचले हिस्से में तापमान स्थिर रहता है, फिर बढ़ने लगता है
C. मध्यमंडल (Mesosphere) – सबसे ठंडी परत
- वायुमंडल की तीसरी परत का नाम क्या है? — मध्यमंडल (Mesosphere)
- मध्यमंडल का विस्तार कितनी ऊंचाई तक है? — 50 से 80 किलोमीटर तक
- अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंड किस परत में आकर जल जाते हैं? — मध्यमंडल में
- वायुमंडल की सबसे ठंडी परत कौन सी मानी जाती है? — मध्यमंडल (तापमान -100°C तक गिर जाता है)
D. आयनमंडल (Ionosphere) – रेडियो और संचार
- मध्यमंडल के ऊपर वाली चौथी परत का नाम? — आयनमंडल (Ionosphere)
- आयनमंडल की ऊंचाई कितनी है? — 80 से 640 किलोमीटर तक
- रेडियो, टेलीविजन और मोबाइल के सिग्नल किस परत से टकराकर वापस आते हैं? — आयनमंडल से
- अंतरिक्ष में भेजे गए संचार उपग्रह (Satellites) किस परत में छोड़े जाते हैं? — आयनमंडल (या बाह्यमंडल) में
- उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव पर चमकने वाली रोशनी (Auroas) कहाँ दिखती है? — आयनमंडल में
E. बाह्यमंडल (Exosphere) – सबसे बाहरी हिस्सा
- वायुमंडल की सबसे ऊपरी और पांचवीं परत कौन सी है? — बाह्यमंडल (Exosphere)
- बाह्यमंडल की ऊपरी सीमा कहाँ तक है? — इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं है, यह अंतरिक्ष में मिल जाता है
- इस परत में कौन सी गैसें सबसे ज्यादा पाई जाती हैं? — हाइड्रोजन और हीलियम
- बाह्यमंडल में हवा कैसी होती है? — बहुत ही पतली और विरल
वायुमंडलीय घटनाएँ और मापन
- वायुदाब मापने का यंत्र — बैरोमीटर।
- तापमान मापने का यंत्र — थर्मामीटर।
- आर्द्रता मापने का यंत्र — हाइग्रोमीटर।
- वर्षा मापने का यंत्र — वर्षामापी।
- पवन की गति मापने का यंत्र — एनीमोमीटर।
- पवन की दिशा बताने वाला यंत्र — विंड वेन।
- वायु में जलवाष्प की मात्रा — आर्द्रता।
- जलवाष्प का ठंडा होकर तरल जल में बदलना — संघनन।
- वायु के संतृप्त होने पर संबंधित तापमान — ओसांक।
- सतह पर जल की बूंदों का जमना — ओस।
- सतह पर बर्फ के क्रिस्टलों का जमना — पाला।
- सतह के पास सूक्ष्म बूंदों के कारण दृश्यता कम होना — कोहरा।
- पर्वत के कारण नम हवा का ऊपर उठकर वर्षा करना — पर्वतीय वर्षा।
- सतह गर्म होने से वायु के ऊपर उठने के कारण वर्षा — संवहनीय वर्षा।
- ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान देने वाली प्रमुख गैस — कार्बन डाइऑक्साइड।
- अम्ल वर्षा के प्रमुख पूर्वगामी प्रदूषक — सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड।
- ओजोन परत के क्षरण से संबंधित ऐतिहासिक रसायन — CFCs।
- ओजोन संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौता — मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987।
18. वायुमंडल की संरचना पर आधारित MCQs
प्रश्न 1. वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सी गैस पाई जाती है?
(A) ऑक्सीजन
(B) नाइट्रोजन
(C) कार्बन डाइऑक्साइड
(D) आर्गन
सही उत्तर: (B) नाइट्रोजन
प्रश्न 2. वायुमंडल की किस परत में मौसम संबंधी अधिकांश घटनाएँ होती हैं?
(A) समतापमंडल
(B) मध्यमंडल
(C) क्षोभमंडल
(D) बहिर्मंडल
सही उत्तर: (C) क्षोभमंडल
प्रश्न 3. ओजोन की अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र मुख्यतः कहाँ पाया जाता है?
(A) क्षोभमंडल
(B) समतापमंडल
(C) मध्यमंडल
(D) बहिर्मंडल
सही उत्तर: (B) समतापमंडल
प्रश्न 4. अनेक छोटे उल्कीय कण मुख्यतः किस परत में गर्म होकर चमकते हैं?
(A) क्षोभमंडल
(B) समतापमंडल
(C) मध्यमंडल
(D) बहिर्मंडल
सही उत्तर: (C) मध्यमंडल
प्रश्न 5. वायुदाब मापने के लिए किस यंत्र का प्रयोग किया जाता है?
(A) हाइग्रोमीटर
(B) बैरोमीटर
(C) एनीमोमीटर
(D) वर्षामापी
सही उत्तर: (B) बैरोमीटर
प्रश्न 6. आर्द्रता मापने का यंत्र कौन-सा है?
(A) बैरोमीटर
(B) थर्मामीटर
(C) हाइग्रोमीटर
(D) विंड वेन
सही उत्तर: (C) हाइग्रोमीटर
प्रश्न 7. ओजोन का रासायनिक सूत्र क्या है?
(A) O₂
(B) O₃
(C) CO₂
(D) N₂
सही उत्तर: (B) O₃
प्रश्न 8. उत्तरी गोलार्ध में दिखाई देने वाली ध्रुवीय ज्योति को क्या कहते हैं?
(A) ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस
(B) ऑरोरा बोरेलिस
(C) सोलर विंड
(D) आयन वर्षा
सही उत्तर: (B) ऑरोरा बोरेलिस
प्रश्न 9. वायुमंडल में जलवाष्प का ठंडा होकर तरल बूंदों में बदलना क्या कहलाता है?
(A) वाष्पीकरण
(B) संघनन
(C) उर्ध्वपातन
(D) वाष्पोत्सर्जन
सही उत्तर: (B) संघनन
प्रश्न 10. अम्ल वर्षा के निर्माण में कौन-से प्रदूषक प्रमुख भूमिका निभाते हैं?
(A) ऑक्सीजन और नाइट्रोजन
(B) हीलियम और आर्गन
(C) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
(D) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन
सही उत्तर: (C) सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड
प्रश्न 11. शुष्क वायु में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग कितनी होती है?
(A) 78%
(B) 50%
(C) 21%
(D) 0.93%
सही उत्तर: (C) 21%
प्रश्न 12. रेडियो तरंगों के प्रसार को प्रभावित करने वाला आयनित क्षेत्र कौन-सा है?
(A) आयनमंडल
(B) केवल क्षोभमंडल
(C) केवल समतापमंडल
(D) केवल बहिर्मंडल
सही उत्तर: (A) आयनमंडल
प्रश्न 13. क्षोभमंडल में औसत मानक ताप ह्रास दर लगभग कितनी मानी जाती है?
(A) 1°C प्रति किमी
(B) 3°C प्रति किमी
(C) 6.5°C प्रति किमी
(D) 15°C प्रति किमी
सही उत्तर: (C) 6.5°C प्रति किमी
प्रश्न 14. ओजोन परत के संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौता कौन-सा है?
(A) क्योटो प्रोटोकॉल
(B) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
(C) पेरिस समझौता
(D) रामसर समझौता
सही उत्तर: (B) मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
प्रश्न 15. वायुमंडल की सबसे बाहरी प्रमुख तापीय परत कौन-सी है?
(A) क्षोभमंडल
(B) समतापमंडल
(C) मध्यमंडल
(D) बहिर्मंडल
सही उत्तर: (D) बहिर्मंडल
19. निष्कर्ष
वायुमंडल पृथ्वी की प्राकृतिक व्यवस्था का एक अनिवार्य भाग है। यह जीवन के लिए आवश्यक गैसें उपलब्ध कराता है, तापमान और जल चक्र को प्रभावित करता है तथा मौसम और जलवायु के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी अलग-अलग परतों में तापमान, वायु का घनत्व और रासायनिक प्रक्रियाएँ अलग-अलग होती हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वायुमंडल की पाँच प्रमुख तापीय परतों, गैसों के संघटन, ओजोन परत, आयनमंडल, वायुदाब और आर्द्रता की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। इसके साथ ही ग्रीनहाउस प्रभाव, वैश्विक तापवृद्धि और ओजोन क्षरण के बीच अंतर को भी याद रखना चाहिए।
