चक्रवात और विश्व की पवनें
पृथ्वी के वायुमंडल में वायु की गति और उसके घूमने से जुड़ी घटनाएँ मौसम तथा जलवायु को प्रभावित करती हैं। विश्व की प्रमुख पवनें, स्थानीय पवनें, चक्रवात और प्रतिचक्रवात भौतिक भूगोल के महत्त्वपूर्ण विषय हैं। इनसे संबंधित प्रश्न UPSC, SSC, रेलवे NTPC, UP PET, राज्य PCS तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
पवनों के अध्ययन से हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि पृथ्वी पर वायु किस दिशा में बहती है, समुद्र से स्थल की ओर नमी कैसे पहुँचती है, मानसून क्यों बदलता है और चक्रवात किस प्रकार विनाशकारी तूफान का रूप ले लेते हैं।
इस लेख में पवनों की उत्पत्ति, विश्व की प्रमुख पवन पेटियाँ, स्थानीय पवनों, चक्रवातों, प्रतिचक्रवातों और भारत में चक्रवातों से संबंधित तथ्यों को विस्तार से समझाया गया है।
1. पवन क्या है?
वायु का क्षैतिज रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाहित होना पवन (Wind) कहलाता है। सामान्यतः वायु उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की ओर गति करती है।
पवन की दिशा और गति को कई कारक प्रभावित करते हैं। इनमें वायुदाब का अंतर, पृथ्वी का घूर्णन, धरातलीय घर्षण और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियाँ प्रमुख हैं।
पवनों की उत्पत्ति के प्रमुख कारण
1. वायुदाब में अंतर: जब दो स्थानों के वायुदाब में अंतर होता है, तो वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलने लगती है। वायुदाब में अंतर पवन उत्पन्न करने वाला प्रमुख कारक है।
2. पृथ्वी का घूर्णन: पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण पवनों की दिशा में विचलन होता है। इस प्रभाव को कोरिऑलिस बल (Coriolis Force) कहा जाता है।
3. घर्षण: धरातल, वनस्पति, भवन और पर्वत पवन की गति को प्रभावित करते हैं। धरातल के पास घर्षण का प्रभाव अधिक होता है, जबकि ऊँचाई बढ़ने के साथ इसका प्रभाव सामान्यतः कम हो जाता है।
4. तापमान में अंतर: पृथ्वी के विभिन्न भागों में सूर्य की किरणें समान मात्रा में नहीं पड़तीं। इसके कारण तापमान और वायुदाब में अंतर पैदा होता है, जो वायु परिसंचरण को प्रभावित करता है।
कोरिऑलिस बल क्या है?
पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वायु और अन्य गतिशील वस्तुओं की दिशा में होने वाले आभासी विचलन को कोरिऑलिस प्रभाव कहते हैं।
- उत्तरी गोलार्ध में पवनें अपनी गति की दिशा के दाईं ओर मुड़ती हैं।
- दक्षिणी गोलार्ध में पवनें अपनी गति की दिशा के बाईं ओर मुड़ती हैं।
- भूमध्य रेखा पर कोरिऑलिस प्रभाव शून्य होता है।
- ध्रुवों की ओर इसका प्रभाव अधिक होता जाता है।
परीक्षा तथ्य: कोरिऑलिस बल पवन की दिशा को प्रभावित करता है, लेकिन पवन को गति देने वाला मूल बल वायुदाब प्रवणता बल है।
2. पवनों का वर्गीकरण
पवनों को उनकी नियमितता, अवधि और उत्पत्ति के आधार पर मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है।
2.1 स्थायी या ग्रहीय पवनें (Permanent or Planetary Winds)
ये पवनें वैश्विक वायुदाब पेटियों और पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित बड़े पैमाने के वायु परिसंचरण का हिस्सा हैं। इनके प्रमुख प्रकार हैं:
- व्यापारिक पवनें (Trade Winds)
- पछुआ पवनें (Westerlies)
- ध्रुवीय पूर्वी पवनें (Polar Easterlies)
2.2 मौसमी पवनें (Seasonal Winds)
इनकी दिशा मौसम या ऋतु के अनुसार बदलती है। भारतीय मानसून इसका प्रमुख उदाहरण है। गर्मियों और सर्दियों में स्थल तथा समुद्र के तापमान और वायुदाब में अंतर के कारण पवनों की दिशा में परिवर्तन होता है।
2.3 स्थानीय पवनें (Local Winds)
ये सीमित क्षेत्रों में स्थानीय तापमान, वायुदाब, स्थलाकृति और मौसम की परिस्थितियों के कारण चलती हैं। उदाहरण के लिए भारत की लू, आल्प्स की फॉन और रॉकी पर्वतों के पूर्वी भाग में चलने वाली चिनूक पवन।
3. विश्व की प्रमुख स्थायी पवनें
पृथ्वी पर वायुदाब की प्रमुख पेटियाँ और वैश्विक वायु परिसंचरण मिलकर स्थायी पवनों का निर्माण करते हैं। इन पवनों का सामान्य स्वरूप नियमित होता है, हालांकि वास्तविक मौसम में स्थानीय परिस्थितियों के कारण बदलाव हो सकते हैं।
3.1 व्यापारिक पवनें (Trade Winds)
व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर बहती हैं।
इनकी प्रमुख विशेषताएँ:
- ये सामान्यतः लगभग 30° अक्षांश के आसपास स्थित उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों से भूमध्य रेखा की ओर चलती हैं।
- उत्तरी गोलार्ध में ये उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हैं। इसलिए इन्हें उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें कहते हैं।
- दक्षिणी गोलार्ध में ये दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर बहती हैं। इसलिए इन्हें दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें कहते हैं।
- भूमध्य रेखा के पास दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं।
- इनका ऐतिहासिक महत्त्व समुद्री व्यापार और नौपरिवहन में रहा है।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: व्यापारिक पवनों का नाम ऐतिहासिक समुद्री व्यापार से जुड़ा है। इनका सामान्य प्रवाह उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर होता है।
3.2 पछुआ पवनें (Westerlies)
पछुआ पवनें उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब क्षेत्रों की ओर बहती हैं।
इनकी प्रमुख विशेषताएँ:
- इनका सामान्य प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर होता है।
- उत्तरी गोलार्ध में ये प्रायः दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं।
- दक्षिणी गोलार्ध में ये प्रायः उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हैं।
- दक्षिणी गोलार्ध के मध्य अक्षांशों में महासागरों पर इनका प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
- ये मध्य अक्षांशों के मौसम और पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली मौसम प्रणालियों को प्रभावित करती हैं।
दक्षिणी गोलार्ध में तेज पछुआ पवनों के लिए कुछ पारंपरिक नाम प्रचलित हैं:
- Roaring Forties: लगभग 40° दक्षिण अक्षांश के आसपास।
- Furious Fifties: लगभग 50° दक्षिण अक्षांश के आसपास।
- Screaming या Shrieking Sixties: लगभग 60° दक्षिण अक्षांश के आसपास।
ये नाम विशेष रूप से दक्षिणी महासागरों में तेज पछुआ पवनों की ऐतिहासिक समुद्री पहचान से जुड़े हैं।
3.3 ध्रुवीय पूर्वी पवनें (Polar Easterlies)
ध्रुवीय पूर्वी पवनें ध्रुवीय उच्च वायुदाब क्षेत्रों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब क्षेत्रों की ओर बहती हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
- ये सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं।
- उत्तरी गोलार्ध में इनकी दिशा प्रायः उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है।
- दक्षिणी गोलार्ध में इनकी दिशा प्रायः दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है।
- ये ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रों से जुड़ी होती हैं।
- उपध्रुवीय क्षेत्रों में इनका संपर्क पछुआ पवनों से होता है।
3.4 शांत पेटियाँ: डोलड्रम्स और हॉर्स लैटिट्यूड्स
डोलड्रम्स (Doldrums): भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब क्षेत्र को सामान्यतः डोलड्रम्स कहा जाता है। यहाँ गर्म वायु के ऊपर उठने के कारण सतही पवनें कई बार कमजोर या अनियमित होती हैं। यह क्षेत्र स्थिर नहीं रहता और ऋतु के अनुसार खिसक सकता है।
हॉर्स लैटिट्यूड्स (Horse Latitudes): लगभग 30° उत्तर और 30° दक्षिण अक्षांश के आसपास स्थित उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्रों को इस नाम से जाना जाता है। यहाँ वायु के नीचे उतरने के कारण कई बार शांत मौसम और कमजोर सतही पवनें मिलती हैं।
अंतर याद रखें: डोलड्रम्स भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र है, जबकि हॉर्स लैटिट्यूड्स उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्र हैं।
4. मौसमी पवनें और मानसून
मौसमी पवनों की दिशा में मौसम के साथ परिवर्तन होता है। इसका प्रमुख कारण स्थल और समुद्र का अलग-अलग गति से गर्म तथा ठंडा होना है। वायुदाब की मौसमी स्थिति और बड़े पैमाने का वायु परिसंचरण भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारतीय मानसून
भारतीय मानसून भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु का एक प्रमुख आधार है। भारत में मानसूनी वर्षा कृषि, जल संसाधन, नदियों और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः जून से सितंबर के बीच भारत में वर्षा लाता है। इसके दो प्रमुख मार्ग माने जाते हैं:
- अरब सागर शाखा: यह पश्चिमी तट और पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में वर्षा का प्रमुख स्रोत है। पश्चिमी घाट की पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा हो सकती है।
- बंगाल की खाड़ी शाखा: यह पूर्वोत्तर भारत तथा गंगा के मैदान के अनेक क्षेत्रों में वर्षा लाती है। इसकी दिशा और प्रभाव मानसूनी परिसंचरण तथा निम्न दाब प्रणालियों के अनुसार बदल सकते हैं।
उत्तर-पूर्व मानसून
उत्तर-पूर्व मानसून सामान्यतः अक्टूबर से दिसंबर के बीच दक्षिण-पूर्वी भारत, विशेषकर तमिलनाडु के कई हिस्सों में वर्षा का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दाब क्षेत्र और चक्रवात इस अवधि में वर्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
परीक्षा तथ्य: भारत के अधिकांश भागों में वार्षिक वर्षा का मुख्य स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जबकि तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में उत्तर-पूर्व मानसून विशेष महत्त्व रखता है।
5. स्थानीय पवनें (Local Winds)
स्थानीय पवनें किसी क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों से उत्पन्न होती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन पवनों के नाम और उनके क्षेत्र से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
5.1 भारत और एशिया की प्रमुख स्थानीय पवनें
लू (Loo): उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी भारत के अनेक भागों में गर्मियों के दौरान चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क पवन। इसका प्रभाव विशेष रूप से मई और जून में महसूस किया जा सकता है।
खमसिन (Khamsin): मिस्र और आसपास के क्षेत्रों में चलने वाली गर्म, शुष्क और धूलयुक्त पवन।
सिमूम (Simoom): सहारा और अरब के कुछ शुष्क क्षेत्रों से संबंधित अत्यंत गर्म, शुष्क तथा धूलयुक्त पवन।
सिरोको (Sirocco): सहारा क्षेत्र से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली गर्म पवन। समुद्र के ऊपर से गुजरने पर इसमें नमी आ सकती है। यह धूल भी साथ ला सकती है।
हरमट्टन (Harmattan): सहारा से पश्चिमी अफ्रीका के गिनी तट की ओर बहने वाली शुष्क और धूलयुक्त पवन।
गिबली (Ghibli): लीबिया में चलने वाली गर्म और शुष्क पवन।
5.2 यूरोप की प्रमुख स्थानीय पवनें
फॉन (Foehn/Föhn): आल्प्स पर्वत के पवनविमुख भाग में उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन। पर्वत पार करते समय वायु में होने वाली नमी की हानि और नीचे उतरते समय संपीड़न के कारण तापमान बढ़ सकता है।
मिस्ट्रल (Mistral): फ्रांस की रोन घाटी से भूमध्य सागर की ओर बहने वाली ठंडी, शुष्क और तेज पवन।
बोरा (Bora): एड्रियाटिक सागर के आसपास, विशेषकर क्रोएशिया और इटली के कुछ भागों में चलने वाली ठंडी तथा तेज पवन।
5.3 उत्तरी अमेरिका की प्रमुख स्थानीय पवनें
चिनूक (Chinook): रॉकी पर्वत के पूर्वी भाग में उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन। यह तापमान तेजी से बढ़ा सकती है और बर्फ पिघलाने के कारण इसे “Snow Eater” भी कहा जाता है।
सांता एना (Santa Ana): दक्षिणी कैलिफोर्निया में चलने वाली गर्म और शुष्क अवरोही पवन। शुष्क वनस्पति और अन्य अनुकूल परिस्थितियों के साथ यह जंगल की आग के खतरे को बढ़ा सकती है।
5.4 दक्षिणी अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका की पवनें
पैम्पेरो (Pampero): अर्जेंटीना और पम्पास क्षेत्र में आने वाली ठंडी पवन, जो प्रायः ठंडी वायु राशियों के आगमन से संबंधित होती है।
बर्ग विंड (Berg Wind): दक्षिणी अफ्रीका में आंतरिक ऊँचे क्षेत्रों से तट की ओर उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन।
5.5 ऑस्ट्रेलिया की स्थानीय पवन
ब्रिकफील्डर (Brickfielder): ऑस्ट्रेलिया के कुछ भागों में गर्म और शुष्क परिस्थितियों से जुड़ी पवन के लिए प्रयुक्त नाम।
5.6 बंगाल और पूर्वी भारत की मौसमी आँधियाँ
नॉर्वेस्टर (Nor’wester): बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान आने वाले तेज गर्जन-तूफानों के लिए यह नाम प्रचलित है। बंगाल में इन्हें कालबैसाखी भी कहा जाता है। इनसे तेज हवाएँ, बिजली और अल्प अवधि में भारी वर्षा हो सकती है।
ध्यान दें: स्थानीय पवनों के नाम और उनके क्षेत्रीय उपयोग में अंतर हो सकता है। परीक्षा की तैयारी में प्रत्येक पवन के साथ उसका भौगोलिक क्षेत्र और प्रमुख विशेषता याद रखना उपयोगी है।
6. समुद्री समीर और स्थल समीर
समुद्र और स्थल के गर्म तथा ठंडा होने की गति में अंतर के कारण तटीय क्षेत्रों में दैनिक आधार पर पवनों की दिशा बदल सकती है।
समुद्री समीर (Sea Breeze)
दिन के समय स्थल समुद्र की तुलना में तेजी से गर्म होता है। स्थल के ऊपर की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और वहाँ अपेक्षाकृत निम्न दाब बन सकता है। इसके परिणामस्वरूप समुद्र से स्थल की ओर हवा बहती है। इसे समुद्री समीर कहते हैं।
स्थल समीर (Land Breeze)
रात के समय स्थल समुद्र की तुलना में तेजी से ठंडा होता है। ऐसी स्थिति में स्थल के ऊपर अपेक्षाकृत उच्च दाब बन सकता है और हवा स्थल से समुद्र की ओर बहती है। इसे स्थल समीर कहते हैं।
याद रखने की ट्रिक:
- दिन: समुद्र से स्थल की ओर — समुद्री समीर।
- रात: स्थल से समुद्र की ओर — स्थल समीर।
स्थानीय मौसम, तटरेखा और बड़े पैमाने की पवनें इस सामान्य व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
7. चक्रवात क्या है? (Cyclone)
चक्रवात एक ऐसी मौसम प्रणाली है जिसके केंद्र में अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब होता है और सतह के पास वायु आसपास के क्षेत्रों से केंद्र की ओर प्रवाहित होती है। पृथ्वी के घूर्णन के प्रभाव से इस वायु में घूर्णन विकसित होता है।
चक्रवात के दौरान तेज हवाएँ, भारी वर्षा, गरज-चमक, ऊँची समुद्री लहरें और तटीय क्षेत्रों में तूफानी ज्वार जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। प्रभाव चक्रवात के प्रकार, तीव्रता, गति और स्थानीय भूगोल पर निर्भर करता है।
चक्रवात की प्रमुख विशेषताएँ
- इसके केंद्र में अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब होता है।
- सतह के पास वायु सामान्यतः केंद्र की ओर सर्पिल रूप से आती है।
- उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात का घूर्णन सामान्यतः वामावर्त होता है।
- दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात का घूर्णन सामान्यतः दक्षिणावर्त होता है।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में तेज हवाएँ और भारी वर्षा हो सकती है।
- चक्रवात का वास्तविक प्रभाव उसके मार्ग, गति, तीव्रता और भूमि से दूरी पर निर्भर करता है।
महत्त्वपूर्ण: चक्रवात का घूर्णन केवल गोलार्ध से संबंधित सामान्य नियम के आधार पर समझाया जाता है। वास्तविक वायु प्रवाह पर घर्षण और स्थानीय परिस्थितियों का भी प्रभाव होता है।
8. चक्रवात के प्रमुख प्रकार
चक्रवातों को उनकी उत्पत्ति और संरचना के आधार पर कई वर्गों में समझा जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
8.1 उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone)
उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्रों में विकसित होने वाली तीव्र निम्न दाब प्रणालियाँ हैं। इन्हें ऊर्जा मुख्यतः गर्म समुद्र से वाष्पीकरण और जलवाष्प के संघनन से प्राप्त होती है।
निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ
- समुद्र की सतह का पर्याप्त गर्म होना। सामान्यतः लगभग 26.5°C या उससे अधिक तापमान को एक उपयोगी संकेतक माना जाता है, लेकिन केवल तापमान पर्याप्त नहीं है।
- वायुमंडल में पर्याप्त नमी।
- निम्न स्तर पर पहले से मौजूद अशांति या निम्न दाब क्षेत्र।
- ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear) का अपेक्षाकृत कम होना।
- कोरिऑलिस प्रभाव का पर्याप्त होना, इसलिए चक्रवात सामान्यतः भूमध्य रेखा के बिल्कुल पास नहीं बनते।
- समुद्र की पर्याप्त गहराई तक गर्म जल की उपलब्धता, ताकि समुद्र की ऊष्मा ऊर्जा बनी रहे।
इन परिस्थितियों में गर्म और नम वायु ऊपर उठती है। जलवाष्प के संघनन से गुप्त ऊष्मा निकलती है, जो चक्रवात को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के क्षेत्रीय नाम
| क्षेत्र | प्रचलित नाम |
|---|---|
| अटलांटिक महासागर और उत्तर-पूर्वी प्रशांत | हरिकेन (Hurricane) |
| उत्तर-पश्चिमी प्रशांत | टाइफून (Typhoon) |
| उत्तर हिंद महासागर | चक्रवात (Cyclone) |
| दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत | उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) |
ये अलग-अलग प्रकार की सामान्यतः समान प्रकृति की मौसम प्रणालियों के क्षेत्रीय नाम हैं। उनके नाम से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि उनकी संरचना पूरी तरह अलग है।
चक्रवात की संरचना
1. चक्रवात की आँख (Eye): विकसित उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र हो सकता है। यहाँ हवाएँ आसपास की दीवार की तुलना में कमजोर होती हैं और कभी-कभी आकाश साफ दिखाई देता है।
2. आँख की दीवार (Eyewall): आँख के चारों ओर स्थित क्षेत्र, जहाँ अक्सर सबसे तेज हवाएँ और अत्यधिक वर्षा होती है। चक्रवात की अधिकतम तीव्रता से संबंधित सबसे गंभीर परिस्थितियाँ सामान्यतः इसी क्षेत्र में मिलती हैं।
3. वर्षा पट्टियाँ (Rainbands): चक्रवात के बाहरी हिस्सों में सर्पिल आकार की वर्षा पट्टियाँ होती हैं। इनमें भारी बारिश, तेज हवाएँ और गरज-चमक हो सकती है।
4. निम्न दाब केंद्र: चक्रवात के केंद्र में आसपास की तुलना में कम वायुदाब होता है। सामान्यतः दबाव का अंतर जितना अधिक होगा, अन्य परिस्थितियाँ समान रहने पर हवाएँ उतनी तेज हो सकती हैं।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के प्रमुख खतरे
- तेज और विनाशकारी हवाएँ।
- अत्यधिक वर्षा तथा बाढ़।
- तटीय क्षेत्रों में तूफानी ज्वार (Storm Surge)।
- समुद्र में ऊँची लहरें।
- भूस्खलन और अचानक बाढ़।
- बिजली, संचार, सड़क और अन्य बुनियादी ढाँचे को नुकसान।
तटीय क्षेत्रों में तूफानी ज्वार विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह समुद्र के पानी को सामान्य स्तर से ऊपर उठाकर तटीय बस्तियों में पहुँचा सकता है।
8.2 शीतोष्ण या बहिर्उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Temperate/Extratropical Cyclone)
शीतोष्ण चक्रवात सामान्यतः मध्य अक्षांशों में विकसित होते हैं। इनका संबंध प्रायः गर्म और ठंडी वायु राशियों के संपर्क तथा वाताग्रों (Fronts) से होता है।
मुख्य विशेषताएँ:
- ये सामान्यतः मध्य अक्षांशों में विकसित होते हैं।
- इनकी उत्पत्ति में गर्म और ठंडी वायु राशियों का संपर्क महत्त्वपूर्ण है।
- इनमें गर्म वाताग्र और शीत वाताग्र विकसित हो सकते हैं।
- इनका आकार बहुत बड़ा हो सकता है और ये विस्तृत क्षेत्रों के मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।
- इनमें वर्षा, हिमपात, तेज हवाएँ और तापमान में परिवर्तन हो सकता है।
- ये सामान्यतः उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तरह गर्म महासागरीय जल से ऊर्जा प्राप्त करने वाली प्रणाली नहीं होते।
अंतर समझें: उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म समुद्र और संघनन से मिलने वाली ऊर्जा पर निर्भर करते हैं, जबकि शीतोष्ण चक्रवातों में विभिन्न तापमान वाली वायु राशियों और वाताग्रों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।
9. प्रतिचक्रवात (Anticyclone)
प्रतिचक्रवात एक ऐसी मौसम प्रणाली है जिसके केंद्र में आसपास की तुलना में उच्च वायुदाब होता है। सतह के पास वायु सामान्यतः केंद्र से बाहर की ओर फैलती है।
प्रतिचक्रवात की प्रमुख विशेषताएँ
- इसके केंद्र में उच्च वायुदाब होता है।
- सतह के पास वायु केंद्र से बाहर की ओर प्रवाहित होती है।
- उत्तरी गोलार्ध में प्रतिचक्रवात का घूर्णन सामान्यतः दक्षिणावर्त होता है।
- दक्षिणी गोलार्ध में इसका घूर्णन सामान्यतः वामावर्त होता है।
- नीचे उतरती वायु के कारण कई बार मौसम साफ और शुष्क रहता है।
- सर्दियों में प्रतिचक्रवाती परिस्थितियाँ कुछ क्षेत्रों में कोहरा, तापमान का उलटाव और प्रदूषण को बढ़ावा दे सकती हैं।
प्रतिचक्रवात में हमेशा साफ मौसम ही हो, यह आवश्यक नहीं है। सतह के पास नमी और अन्य स्थानीय परिस्थितियों के कारण कोहरा, धुंध या बादल भी बन सकते हैं।
चक्रवात और प्रतिचक्रवात में अंतर
| आधार | चक्रवात | प्रतिचक्रवात |
|---|---|---|
| केंद्र का वायुदाब | निम्न | उच्च |
| सतह के पास वायु | केंद्र की ओर आती है | केंद्र से बाहर जाती है |
| उत्तरी गोलार्ध में सामान्य घूर्णन | वामावर्त | दक्षिणावर्त |
| दक्षिणी गोलार्ध में सामान्य घूर्णन | दक्षिणावर्त | वामावर्त |
| सामान्य मौसम | बादल, वर्षा और तेज हवाएँ संभव | कई बार साफ और शुष्क मौसम |
| प्रमुख प्रक्रिया | सतह पर अभिसरण और ऊपर उठती वायु | सतह पर अपसरण और नीचे उतरती वायु |
10. बवंडर (Tornado)
बवंडर एक संकीर्ण और तीव्र गति से घूमता हुआ वायु स्तंभ है, जो प्रायः शक्तिशाली गर्जन-तूफान से जुड़ा होता है और अनुकूल परिस्थितियों में धरातल तक पहुँचता है।
बवंडर की विशेषताएँ
- इसका आकार उष्णकटिबंधीय चक्रवात की तुलना में बहुत छोटा होता है।
- यह अत्यंत तेज हवाएँ उत्पन्न कर सकता है।
- इसका मार्ग अपेक्षाकृत संकीर्ण हो सकता है, लेकिन उस क्षेत्र में नुकसान बहुत गंभीर हो सकता है।
- यह घरों, पेड़ों, वाहनों और बिजली की लाइनों को नुकसान पहुँचा सकता है।
- बवंडर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं; वे दुनिया के अन्य भागों में भी आते हैं।
बवंडर और चक्रवात में अंतर
चक्रवात व्यापक मौसम प्रणाली है, जबकि बवंडर छोटे क्षेत्र में केंद्रित तीव्र घूर्णनशील वायु स्तंभ होता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात समुद्र के ऊपर विकसित होकर बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि बवंडर अक्सर शक्तिशाली गर्जन-तूफानों से जुड़े होते हैं।
परीक्षा तथ्य: बवंडर की तीव्रता और उससे हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अमेरिका में Enhanced Fujita (EF) Scale का उपयोग किया जाता है। अटलांटिक और उत्तर-पूर्वी प्रशांत के हरिकेन की तीव्रता को वर्गीकृत करने के लिए Saffir–Simpson Hurricane Wind Scale प्रचलित है। ये दोनों अलग-अलग प्रणालियाँ हैं।
11. भारत में चक्रवात
भारत की लंबी तटरेखा और उत्तर हिंद महासागर में मानसूनी तथा उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियों की सक्रियता के कारण देश के तटीय क्षेत्र चक्रवातों से प्रभावित हो सकते हैं।
भारत में चक्रवात प्रभावित क्षेत्र
1. बंगाल की खाड़ी का तट: ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों पर चक्रवातों का प्रभाव पड़ सकता है।
2. अरब सागर का तट: गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और पश्चिमी तट के अन्य भाग भी चक्रवातों से प्रभावित हो सकते हैं।
3. द्वीपीय क्षेत्र: अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के आसपास की समुद्री परिस्थितियाँ भी उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियों से प्रभावित हो सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी के चक्रवात भारत के पूर्वी तट पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अरब सागर में चक्रवात नहीं बनते या पश्चिमी तट पर खतरा नहीं होता।
भारत में चक्रवातों का मौसम
उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात बनने की गतिविधि वर्ष के अलग-अलग समय में देखी जाती है। सामान्यतः मानसून से पहले और मानसून के बाद के समय में चक्रवातों की सक्रियता महत्त्वपूर्ण रहती है। वास्तविक गतिविधि वर्ष, समुद्री तापमान, वायुमंडलीय परिसंचरण और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदलती है।
भारत में चक्रवातों की निगरानी
भारत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department—IMD) मौसम प्रणालियों की निगरानी, चक्रवात संबंधी पूर्वानुमान और चेतावनियाँ जारी करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
चक्रवात की चेतावनी मिलने पर प्रशासन और आम नागरिकों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए। तटीय क्षेत्रों में निकासी, सुरक्षित आश्रय, बिजली से जुड़े खतरों से बचाव और समुद्र में न जाने जैसे निर्देश जीवन की रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं।
12. चक्रवातों से बचाव के प्रमुख उपाय
चक्रवात के दौरान सही समय पर दी गई चेतावनी और तैयारी से जनहानि कम की जा सकती है।
- मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें।
- प्रशासन द्वारा निर्देश दिए जाने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ।
- समुद्र तट, नदी के मुहाने और बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
- मछुआरे समुद्र में जाने से संबंधित आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।
- पीने का पानी, आवश्यक दवाएँ, टॉर्च, बैटरी और प्राथमिक उपचार सामग्री तैयार रखें।
- तेज हवाओं के दौरान खिड़कियों, कमजोर दीवारों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
- तूफान के बाद गिरे हुए बिजली के तारों और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहें।
महत्त्वपूर्ण: चक्रवात की आँख में कुछ समय के लिए हवा शांत हो सकती है, लेकिन इसे खतरा समाप्त होने का संकेत नहीं समझना चाहिए। आँख के गुजरने के बाद तेज हवाएँ दूसरी दिशा से फिर शुरू हो सकती हैं।
भाग 2: विश्व की पवनें और चक्रवात — महत्त्वपूर्ण One-liners
नीचे दिए गए प्रश्न-उत्तर त्वरित पुनरावृत्ति के लिए तैयार किए गए हैं।
- पवन किसे कहते हैं? — वायु के एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाह को पवन कहते हैं।
- पवन को गति देने वाला प्रमुख बल कौन-सा है? — वायुदाब प्रवणता बल।
- पृथ्वी के घूर्णन से पवन की दिशा में विचलन किस कारण होता है? — कोरिऑलिस प्रभाव।
- उत्तरी गोलार्ध में पवन किस ओर मुड़ती है? — अपनी गति की दिशा के दाईं ओर।
- दक्षिणी गोलार्ध में पवन किस ओर मुड़ती है? — अपनी गति की दिशा के बाईं ओर।
- भूमध्य रेखा पर कोरिऑलिस प्रभाव कितना होता है? — शून्य।
- विश्व की प्रमुख स्थायी पवनें कौन-सी हैं? — व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पूर्वी पवनें।
- व्यापारिक पवनें कहाँ से कहाँ बहती हैं? — उपोष्ण उच्च दाब क्षेत्रों से भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र की ओर।
- उत्तरी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें किस दिशा से चलती हैं? — उत्तर-पूर्व से।
- दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनें किस दिशा से चलती हैं? — दक्षिण-पूर्व से।
- पछुआ पवनों का सामान्य प्रवाह किस दिशा में होता है? — पश्चिम से पूर्व की ओर।
- ध्रुवीय पूर्वी पवनें सामान्यतः किस दिशा में बहती हैं? — पूर्व से पश्चिम की ओर।
- डोलड्रम्स किस क्षेत्र से संबंधित हैं? — भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब क्षेत्र।
- हॉर्स लैटिट्यूड्स किस वायुदाब पेटी से संबंधित हैं? — उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी।
- Roaring Forties किस अक्षांश के आसपास स्थित हैं? — लगभग 40° दक्षिण अक्षांश।
- Furious Fifties किस अक्षांश के आसपास स्थित हैं? — लगभग 50° दक्षिण अक्षांश।
- Screaming Sixties किस अक्षांश के आसपास स्थित हैं? — लगभग 60° दक्षिण अक्षांश।
- भारत में गर्मियों में चलने वाली गर्म और शुष्क पवन कौन-सी है? — लू।
- चिनूक पवन किस पर्वत क्षेत्र से संबंधित है? — रॉकी पर्वत।
- चिनूक को किस उपनाम से जाना जाता है? — Snow Eater।
- फॉन पवन किस पर्वत से संबंधित है? — आल्प्स पर्वत।
- मिस्ट्रल पवन किस देश से विशेष रूप से संबंधित है? — फ्रांस।
- बोरा पवन किस क्षेत्र में चलती है? — एड्रियाटिक सागर के आसपास।
- सिरोको पवन का उद्गम क्षेत्र कौन-सा है? — सहारा क्षेत्र।
- हरमट्टन पवन किस क्षेत्र से संबंधित है? — पश्चिमी अफ्रीका और सहारा से गिनी तट की ओर का क्षेत्र।
- सांता एना पवन कहाँ चलती है? — दक्षिणी कैलिफोर्निया।
- पैम्पेरो पवन किस क्षेत्र से संबंधित है? — अर्जेंटीना और पम्पास क्षेत्र।
- कालबैसाखी किस प्रकार की मौसमी घटना है? — पूर्वी भारत और बंगाल क्षेत्र में आने वाले तेज गर्जन-तूफान।
- समुद्री समीर किस दिशा में बहती है? — दिन में समुद्र से स्थल की ओर।
- स्थल समीर किस दिशा में बहती है? — रात में स्थल से समुद्र की ओर।
- मानसून की प्रमुख विशेषता क्या है? — ऋतु के अनुसार पवनों की दिशा में परिवर्तन।
- भारत में अधिकांश क्षेत्रों के लिए वर्षा का प्रमुख स्रोत कौन-सा मानसून है? — दक्षिण-पश्चिम मानसून।
- तमिलनाडु के कई भागों में कौन-सा मानसून विशेष महत्त्व रखता है? — उत्तर-पूर्व मानसून।
- चक्रवात के केंद्र में कैसा वायुदाब होता है? — अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब।
- उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात का सामान्य घूर्णन कैसा होता है? — वामावर्त।
- दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात का सामान्य घूर्णन कैसा होता है? — दक्षिणावर्त।
- प्रतिचक्रवात के केंद्र में कैसा वायुदाब होता है? — अपेक्षाकृत उच्च वायुदाब।
- उत्तरी गोलार्ध में प्रतिचक्रवात का सामान्य घूर्णन कैसा होता है? — दक्षिणावर्त।
- दक्षिणी गोलार्ध में प्रतिचक्रवात का सामान्य घूर्णन कैसा होता है? — वामावर्त।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात मुख्यतः किससे ऊर्जा प्राप्त करते हैं? — गर्म समुद्र से वाष्पीकरण और जलवाष्प के संघनन से।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण में गर्म समुद्री जल क्यों महत्त्वपूर्ण है? — यह नमी और ऊष्मा ऊर्जा उपलब्ध कराता है।
- चक्रवात का केंद्र अपेक्षाकृत शांत भाग क्या कहलाता है? — आँख (Eye)।
- चक्रवात में अक्सर सबसे तेज हवाएँ कहाँ पाई जाती हैं? — आँख की दीवार (Eyewall) में।
- अटलांटिक महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवात को क्या कहते हैं? — हरिकेन।
- उत्तर-पश्चिमी प्रशांत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात को क्या कहते हैं? — टाइफून।
- उत्तर हिंद महासागर में ऐसी प्रणाली को सामान्यतः क्या कहते हैं? — चक्रवात।
- शीतोष्ण चक्रवातों में कौन-सी प्रक्रिया महत्त्वपूर्ण होती है? — गर्म और ठंडी वायु राशियों तथा वाताग्रों का संपर्क।
- बवंडर (Tornado) क्या है? — तीव्र गति से घूमता हुआ संकीर्ण वायु स्तंभ।
- हरिकेन की तीव्रता वर्गीकृत करने के लिए कौन-सा पैमाना प्रचलित है? — Saffir–Simpson Hurricane Wind Scale।
- बवंडर से हुई क्षति और तीव्रता का आकलन करने के लिए अमेरिका में कौन-सा पैमाना उपयोग होता है? — Enhanced Fujita (EF) Scale।
- भारत में चक्रवातों की निगरानी और चेतावनी देने वाली प्रमुख संस्था कौन-सी है? — भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)।
- चक्रवात का एक प्रमुख तटीय खतरा क्या है? — तूफानी ज्वार (Storm Surge)।
- चक्रवात की आँख में हवा शांत होने पर क्या खतरा समाप्त हो जाता है? — नहीं, आँख के गुजरने के बाद तेज हवाएँ दोबारा चल सकती हैं।
- क्या चक्रवात केवल बंगाल की खाड़ी में बनते हैं? — नहीं, अरब सागर में भी चक्रवात बनते हैं।
- क्या बवंडर केवल अमेरिका में आते हैं? — नहीं, वे दुनिया के अन्य भागों में भी आते हैं।
भाग 3: चक्रवात और विश्व की पवनें — MCQs
प्रश्न 1. पवनों को गति देने वाला प्रमुख बल कौन-सा है?
A. गुरुत्वाकर्षण बल
B. वायुदाब प्रवणता बल
C. चुंबकीय बल
D. ज्वारीय बल
सही उत्तर: B. वायुदाब प्रवणता बल
व्याख्या: वायुदाब में अंतर के कारण वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर गति करती है।
प्रश्न 2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिऑलिस प्रभाव के कारण पवन किस ओर मुड़ती है?
A. बाईं ओर
B. दाईं ओर
C. केवल उत्तर की ओर
D. केवल दक्षिण की ओर
सही उत्तर: B. दाईं ओर
व्याख्या: पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्तरी गोलार्ध में गतिशील वायु अपनी गति की दिशा के दाईं ओर मुड़ती है।
प्रश्न 3. व्यापारिक पवनें सामान्यतः कहाँ से कहाँ बहती हैं?
A. भूमध्यरेखीय निम्न दाब से ध्रुवों की ओर
B. ध्रुवीय उच्च दाब से भूमध्य रेखा की ओर
C. उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर
D. केवल पश्चिम से पूर्व की ओर
सही उत्तर: C. उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर
व्याख्या: व्यापारिक पवनें दोनों गोलार्धों में उपोष्ण उच्च दाब पेटियों से भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती हैं।
प्रश्न 4. पछुआ पवनों का सामान्य प्रवाह किस दिशा में होता है?
A. पूर्व से पश्चिम
B. पश्चिम से पूर्व
C. उत्तर से दक्षिण
D. दक्षिण से उत्तर
सही उत्तर: B. पश्चिम से पूर्व
व्याख्या: पछुआ पवनें मध्य अक्षांशों में सामान्यतः पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं।
प्रश्न 5. डोलड्रम्स किससे संबंधित हैं?
A. ध्रुवीय उच्च दाब
B. भूमध्यरेखीय निम्न दाब
C. उपोष्ण उच्च दाब
D. केवल शीतोष्ण चक्रवात
सही उत्तर: B. भूमध्यरेखीय निम्न दाब
व्याख्या: भूमध्यरेखीय निम्न दाब क्षेत्र में सतही पवनें कई बार कमजोर और अनियमित होती हैं।
प्रश्न 6. हॉर्स लैटिट्यूड्स सामान्यतः किस अक्षांशीय क्षेत्र से संबंधित हैं?
A. भूमध्य रेखा
B. लगभग 30° अक्षांश
C. लगभग 60° अक्षांश
D. ध्रुवों के बिल्कुल पास
सही उत्तर: B. लगभग 30° अक्षांश
व्याख्या: हॉर्स लैटिट्यूड्स उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से संबंधित हैं।
प्रश्न 7. चिनूक पवन किस पर्वत क्षेत्र से संबंधित है?
A. आल्प्स
B. हिमालय
C. रॉकी पर्वत
D. एंडीज
सही उत्तर: C. रॉकी पर्वत
व्याख्या: चिनूक रॉकी पर्वत के पूर्वी भाग में उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन है।
प्रश्न 8. फॉन पवन किस पर्वत से संबंधित है?
A. आल्प्स
B. रॉकी
C. अरावली
D. नीलगिरि
सही उत्तर: A. आल्प्स
व्याख्या: फॉन आल्प्स के पवनविमुख भाग में उतरने वाली गर्म और शुष्क पवन है।
प्रश्न 9. भारत में गर्मियों में चलने वाली गर्म और शुष्क पवन कौन-सी है?
A. चिनूक
B. लू
C. मिस्ट्रल
D. बोरा
सही उत्तर: B. लू
व्याख्या: लू उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी भारत के अनेक क्षेत्रों में गर्मियों में चलती है।
प्रश्न 10. दिन के समय समुद्री समीर किस दिशा में बहती है?
A. स्थल से समुद्र की ओर
B. समुद्र से स्थल की ओर
C. ध्रुव से भूमध्य रेखा की ओर
D. केवल पर्वतों की ओर
सही उत्तर: B. समुद्र से स्थल की ओर
व्याख्या: दिन में स्थल तेजी से गर्म होता है और समुद्र से स्थल की ओर हवा चल सकती है।
प्रश्न 11. रात में सामान्यतः स्थल समीर किस दिशा में बहती है?
A. समुद्र से स्थल की ओर
B. स्थल से समुद्र की ओर
C. पूर्व से पश्चिम
D. केवल उत्तर की ओर
सही उत्तर: B. स्थल से समुद्र की ओर
व्याख्या: रात में स्थल तेजी से ठंडा होने के कारण स्थानीय दाब-अंतर स्थल से समुद्र की ओर हवा चला सकता है।
प्रश्न 12. चक्रवात के केंद्र में सामान्यतः कैसा वायुदाब होता है?
A. उच्च
B. निम्न
C. हमेशा समान
D. शून्य
सही उत्तर: B. निम्न
व्याख्या: चक्रवात निम्न वायुदाब से जुड़ी मौसम प्रणाली है।
प्रश्न 13. उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात का सामान्य घूर्णन कैसा होता है?
A. दक्षिणावर्त
B. वामावर्त
C. घूर्णन नहीं होता
D. हमेशा पूर्व से पश्चिम
सही उत्तर: B. वामावर्त
व्याख्या: उत्तरी गोलार्ध में कोरिऑलिस प्रभाव के कारण चक्रवात का सामान्य घूर्णन वामावर्त होता है।
प्रश्न 14. प्रतिचक्रवात के केंद्र में कैसा वायुदाब होता है?
A. निम्न
B. उच्च
C. हमेशा शून्य
D. केवल भूमध्यरेखीय
सही उत्तर: B. उच्च
व्याख्या: प्रतिचक्रवात उच्च वायुदाब से संबंधित होता है।
प्रश्न 15. उष्णकटिबंधीय चक्रवात मुख्यतः किससे ऊर्जा प्राप्त करता है?
A. हिमनदों से
B. गर्म समुद्र और जलवाष्प के संघनन से
C. केवल पृथ्वी के घूर्णन से
D. पर्वतीय घर्षण से
सही उत्तर: B. गर्म समुद्र और जलवाष्प के संघनन से
व्याख्या: गर्म समुद्र से वाष्पीकरण और जलवाष्प के संघनन से निकलने वाली गुप्त ऊष्मा चक्रवात को ऊर्जा देने में मदद करती है।
प्रश्न 16. उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र के अपेक्षाकृत शांत भाग को क्या कहते हैं?
A. वाताग्र
B. आँख
C. वर्षा छाया
D. दाब प्रवणता
सही उत्तर: B. आँख
व्याख्या: विकसित उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र में आँख नामक अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र हो सकता है।
प्रश्न 17. चक्रवात में प्रायः सबसे तेज हवाएँ कहाँ होती हैं?
A. आँख के केंद्र में
B. आँख की दीवार में
C. चक्रवात से बहुत दूर
D. केवल समुद्र तल के नीचे
सही उत्तर: B. आँख की दीवार में
व्याख्या: आँख की दीवार में तीव्र संवहन, तेज हवाएँ और भारी वर्षा मिल सकती है।
प्रश्न 18. उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवात को क्या कहते हैं?
A. हरिकेन
B. टाइफून
C. बवंडर
D. प्रतिचक्रवात
सही उत्तर: B. टाइफून
व्याख्या: उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए टाइफून नाम प्रचलित है।
प्रश्न 19. शीतोष्ण चक्रवातों में कौन-सी प्रक्रिया विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है?
A. केवल गर्म समुद्री जल
B. गर्म और ठंडी वायु राशियों तथा वाताग्रों का संपर्क
C. केवल रेगिस्तानी रेत
D. केवल ज्वारीय बल
सही उत्तर: B. गर्म और ठंडी वायु राशियों तथा वाताग्रों का संपर्क
व्याख्या: शीतोष्ण चक्रवात सामान्यतः मध्य अक्षांशों में विभिन्न तापमान वाली वायु राशियों के संपर्क से जुड़े होते हैं।
प्रश्न 20. बवंडर (Tornado) की सबसे उपयुक्त परिभाषा क्या है?
A. विशाल महासागरीय धारा
B. तीव्र गति से घूमता संकीर्ण वायु स्तंभ
C. स्थायी व्यापारिक पवन
D. उच्च वायुदाब की पेटी
सही उत्तर: B. तीव्र गति से घूमता संकीर्ण वायु स्तंभ
व्याख्या: बवंडर एक छोटे क्षेत्र में केंद्रित तीव्र घूर्णनशील वायु स्तंभ होता है।
प्रश्न 21. भारत में चक्रवातों की निगरानी और चेतावनी जारी करने वाली प्रमुख संस्था कौन-सी है?
A. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
B. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
C. भारतीय रिजर्व बैंक
D. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
सही उत्तर: B. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
व्याख्या: IMD भारत में मौसम संबंधी पूर्वानुमान और चक्रवात चेतावनियों में प्रमुख भूमिका निभाता है।
प्रश्न 22. तूफानी ज्वार (Storm Surge) किससे संबंधित है?
A. समुद्र के जलस्तर का तूफान के कारण असामान्य रूप से बढ़ना
B. रेगिस्तान में तापमान गिरना
C. पर्वत पर हिमपात रुकना
D. भूमिगत जल का जमना
सही उत्तर: A. समुद्र के जलस्तर का तूफान के कारण असामान्य रूप से बढ़ना
व्याख्या: चक्रवात की तेज हवाएँ और कम वायुदाब समुद्र के पानी को तट की ओर धकेल सकते हैं, जिससे तटीय बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
प्रश्न 23. तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में कौन-सा मानसून विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है?
A. केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून
B. उत्तर-पूर्व मानसून
C. ध्रुवीय पूर्वी पवनें
D. पछुआ पवनें
सही उत्तर: B. उत्तर-पूर्व मानसून
व्याख्या: तमिलनाडु के अनेक भागों में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान उत्तर-पूर्व मानसून से महत्त्वपूर्ण वर्षा होती है।
प्रश्न 24. Enhanced Fujita Scale का उपयोग किसके आकलन में किया जाता है?
A. हरिकेन की समुद्री ऊँचाई
B. बवंडर से हुई क्षति और अनुमानित तीव्रता
C. मानसून की अवधि
D. समुद्री समीर की गति
सही उत्तर: B. बवंडर से हुई क्षति और अनुमानित तीव्रता
व्याख्या: EF Scale बवंडर से हुई क्षति के आधार पर उसकी तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए उपयोग की जाती है।
प्रश्न 25. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
A. चक्रवात केवल बंगाल की खाड़ी में बनते हैं।
B. बवंडर केवल अमेरिका में आते हैं।
C. अरब सागर में भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात बन सकते हैं।
D. प्रतिचक्रवात के केंद्र में हमेशा निम्न दाब होता है।
सही उत्तर: C. अरब सागर में भी उष्णकटिबंधीय चक्रवात बन सकते हैं।
व्याख्या: उत्तर हिंद महासागर में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात विकसित हो सकते हैं।
13. परीक्षा के लिए अंतिम पुनरावृत्ति
चक्रवात और विश्व की पवनों का अध्ययन करते समय इन बिंदुओं को विशेष रूप से याद रखें:
- पवन की उत्पत्ति का प्रमुख कारण वायुदाब में अंतर है।
- कोरिऑलिस प्रभाव उत्तरी गोलार्ध में दाईं और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विचलन उत्पन्न करता है।
- व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर बहती हैं।
- पछुआ पवनों का सामान्य प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर होता है।
- डोलड्रम्स भूमध्यरेखीय निम्न दाब और हॉर्स लैटिट्यूड्स उपोष्ण उच्च दाब से संबंधित हैं।
- लू भारत की गर्म और शुष्क स्थानीय पवन है।
- चिनूक रॉकी पर्वत और फॉन आल्प्स से संबंधित गर्म, शुष्क अवरोही पवनें हैं।
- समुद्री समीर दिन में समुद्र से स्थल और स्थल समीर रात में स्थल से समुद्र की ओर बहती है।
- चक्रवात में निम्न दाब तथा प्रतिचक्रवात में उच्च दाब होता है।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म समुद्र से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
- हरिकेन, टाइफून और चक्रवात क्षेत्र के अनुसार प्रयुक्त नाम हैं।
- शीतोष्ण चक्रवातों में वाताग्रों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।
- बवंडर और उष्णकटिबंधीय चक्रवात अलग-अलग मौसम घटनाएँ हैं।
- भारत में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों चक्रवातों के क्षेत्र हैं।
- चक्रवात के समय आधिकारिक चेतावनियों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
निष्कर्ष
विश्व की पवनें पृथ्वी के वायुमंडलीय परिसंचरण का आधार हैं। ये तापमान और नमी के वितरण, समुद्री व्यापार, वर्षा तथा क्षेत्रीय जलवायु को प्रभावित करती हैं। स्थानीय पवनें किसी क्षेत्र की भौगोलिक और मौसमी विशेषताओं को दर्शाती हैं, जबकि चक्रवात और प्रतिचक्रवात बड़े पैमाने पर मौसम की दशाओं में परिवर्तन लाते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विषय से अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए केवल नाम याद करना पर्याप्त नहीं है। पवनों की दिशा, उत्पत्ति, अक्षांशीय स्थिति, संबंधित क्षेत्र और मौसम पर उनके प्रभाव को समझना अधिक उपयोगी है।
