भारतीय राजव्यवस्था (Polity) में ‘राष्ट्रपति’ (The President) का पद सबसे महत्वपूर्ण है। वह भारत का प्रथम नागरिक होता है और राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुदृढ़ता का प्रतीक है। भारतीय संविधान के भाग 5 के अंतर्गत अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ की कार्यपालिका का वर्णन है, जिसमें राष्ट्रपति सर्वोच्च पद पर होते हैं।

Table of Contents
राष्ट्रपति: परिचय (Introduction)
भारतीय संविधान के भाग V में अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ की कार्यपालिका का वर्णन है। संघ की कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और भारत का महान्यायवादी शामिल होते हैं।
- संवैधानिक स्थिति: अनुच्छेद 52 के अनुसार, “भारत का एक राष्ट्रपति होगा।” वह भारतीय राज्य का प्रमुख (Head of the State) और भारत का प्रथम नागरिक होता है।
- शक्तियों का स्रोत: अनुच्छेद 53 के अनुसार, संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा।
राष्ट्रपति का निर्वाचन (Election) अनुच्छेद 54 और 55
राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष न होकर एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
निर्वाचक मंडल के सदस्य:
चुनाव में निम्नलिखित लोग वोट डालते हैं:
- संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य।
- राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- केंद्र शासित प्रदेशों— दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर (जहाँ विधानसभा है) के निर्वाचित सदस्य।
महत्वपूर्ण (नोट कर लें): संसद और विधानसभाओं के मनोनीत (Nominated) सदस्य और विधान परिषदों के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते।
निर्वाचन प्रणाली:
राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote – STV) प्रणाली और गुप्त मतदान द्वारा होता है।
- इसमें उम्मीदवार को केवल बहुमत नहीं, बल्कि मतों का एक निश्चित ‘कोटा’ प्राप्त करना होता है।
अर्हताएँ और शर्तें (Qualifications & Conditions) अनुच्छेद 58
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होना अनिवार्य है:
- वह भारत का नागरिक हो।
- उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष पूर्ण हो चुकी हो।
- वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
- वह केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर न हो।
वोट वैल्यू फॉर्मूला (Important )
👉 विधायक का वोट:
(राज्य की जनसंख्या / कुल विधायक) × 1/1000
👉 सांसद का वोट:
कुल MLA वोट / कुल सांसद
चुनाव के लिए अन्य शर्तें:
- उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव कम से कम 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदक द्वारा किया जाना चाहिए।
- उसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में ₹15,000 की जमानत राशि जमा करनी होती है। (कुल वैध मतों का 1/6 भाग न मिलने पर यह राशि जब्त हो जाती है)।
💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):
“छात्रों को अक्सर कन्फ्यूजन होता है कि राष्ट्रपति चुनाव में ‘जनसंख्या’ का क्या अर्थ है। याद रखें, वर्तमान में 1971 की जनगणना को आधार माना गया है (84वें संशोधन 2001 के अनुसार यह 2026 तक स्थिर है)। साथ ही, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।”
राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) अनुच्छेद 61
राष्ट्रपति को उनके पद से केवल एक ही आधार पर हटाया जा सकता है: “संविधान का उल्लंघन” (Violation of the Constitution)। हालाँकि, संविधान में इस शब्द को कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है।
महाभियोग की प्रक्रिया (Step-by-Step Procedure)
महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में शुरू किया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया निम्नलिखित है:
- प्रस्ताव की शुरुआत: जिस सदन में आरोप लगाया जाना है, उसके कम से कम 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर उस प्रस्ताव पर होने चाहिए।
- पूर्व सूचना: राष्ट्रपति को 14 दिन का लिखित पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।
- प्रथम सदन में पारित होना: जिस सदन में प्रस्ताव पेश किया गया है, उसे उस सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से पारित करना होगा।
- दूसरे सदन की भूमिका: पारित होने के बाद प्रस्ताव दूसरे सदन में भेजा जाता है, जो इन आरोपों की जाँच करता है।
- राष्ट्रपति का अधिकार: जाँच के दौरान राष्ट्रपति को उपस्थित होने और अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।
- अंतिम निर्णय: यदि दूसरा सदन भी आरोपों को सही पाता है और प्रस्ताव को अपनी कुल सदस्यता के 2/3 बहुमत से पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को उसी तारीख से पद छोड़ना पड़ता है।
महाभियोग में भाग लेने वाले सदस्य
यहाँ एक बड़ा विरोधाभास (Contradiction) है जिसे स्पष्ट करना ज़रूरी है:
- मनोनीत सदस्य: संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य, जो राष्ट्रपति के चुनाव में वोट नहीं डालते, वे महाभियोग की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
- विधानसभा सदस्य: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुडुचेरी) की विधानसभाओं के सदस्य, जो राष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालते हैं, वे महाभियोग में भाग नहीं लेते।
💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):
“भारत के इतिहास में आज तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता का प्रमाण है।”
शपथ एवं कार्यकाल (Oath & Tenure)
1. राष्ट्रपति की शपथ (Oath) अनुच्छेद 60
राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पूर्व शपथ लेता है।
- शपथ कौन दिलाता है?: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
- विकल्प: यदि मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थित हों, तो उच्चतम न्यायालय (SC) के वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
- शपथ का सार: राष्ट्रपति “संविधान और कानून के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण” (Preserve, Protect and Defend) की शपथ लेता है।
कार्यकाल (Tenure) अनुच्छेद 56
- अवधि: राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष का होता है।
- त्यागपत्र (Resignation): राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले किसी भी समय अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सौंप सकता है। (महत्वपूर्ण तथ्य: उपराष्ट्रपति इसकी सूचना तत्काल लोकसभा अध्यक्ष को देता है।)
- पुनर्निर्वाचन (Re-election) अनुच्छेद 57: भारत का राष्ट्रपति कितनी भी बार पुनः निर्वाचित हो सकता है। (अमेरिका में यह सीमा केवल 2 बार है)।
- पद की निरंतरता: 5 वर्ष पूरे होने के बाद भी राष्ट्रपति तब तक पद पर बना रहता है जब तक कि उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले।
पद की रिक्तता (Vacancy) अनुच्छेद 62
राष्ट्रपति का पद निम्नलिखित स्थितियों में रिक्त हो सकता है:
- 5 वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने पर।
- त्यागपत्र देने पर।
- महाभियोग प्रक्रिया द्वारा हटाए जाने पर।
- मृत्यु होने पर।
- यदि उच्चतम न्यायालय उनके निर्वाचन को अवैध घोषित कर दे।
💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):
यदि राष्ट्रपति का पद मृत्यु या त्यागपत्र के कारण रिक्त होता है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। इस बीच उपराष्ट्रपति ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’ के रूप में कार्य करता है। यदि उपराष्ट्रपति का पद भी रिक्त हो, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) यह जिम्मेदारी संभालता है।”
राष्ट्रपति की शक्तियाँ और कार्य (Powers & Functions)
राष्ट्रपति की शक्तियों को निम्नलिखित मुख्य शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है:
कार्यपालिका शक्तियाँ (Executive Powers)
भारत सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम पर किए जाते हैं।
- महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ: वह प्रधानमंत्री, अन्य मंत्रियों, भारत के महान्यायवादी (AGI), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), मुख्य चुनाव आयुक्त, UPSC के अध्यक्ष, राज्यों के राज्यपालों और वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति करता है।
- सूचना का अधिकार: वह प्रधानमंत्री से संघ के प्रशासनिक मामलों और विधायी प्रस्तावों के संबंध में सूचना मांग सकता है।
- आयोगों का गठन: वह SC, ST और अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) की स्थिति की जांच के लिए आयोग नियुक्त कर सकता है।
विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
राष्ट्रपति संसद का एक अभिन्न अंग है (अनुच्छेद 79), इसलिए उसके पास व्यापक विधायी शक्तियाँ हैं:
- संसद का सत्र: वह संसद के अधिवेशन को आहूत (Summon) और सत्रावसान (Prorogue) कर सकता है तथा लोकसभा को भंग कर सकता है।
- संयुक्त बैठक (Joint Sitting): अनुच्छेद 108 के तहत वह दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
- मनोनयन: वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को (साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा) मनोनीत करता है।
- अध्यादेश (Ordinance): अनुच्छेद 123 के तहत वह तब अध्यादेश जारी कर सकता है जब संसद के दोनों सदनों का सत्र न चल रहा हो।
अध्यादेश जारी करने की शर्तें (Conditions)
अध्यादेश एक अस्थाई कानून है जिसकी शक्ति और प्रभाव संसद द्वारा पारित अधिनियम के समान ही होता है। राष्ट्रपति केवल निम्नलिखित परिस्थितियों में ही अध्यादेश जारी कर सकते हैं:
- संसद का विश्रांति काल: जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों, या कोई एक सदन सत्र में न हो (चूंकि कानून बनने के लिए दोनों सदनों की सहमति आवश्यक है)।
- तत्काल आवश्यकता: राष्ट्रपति को यह संतोष (Satisfaction) होना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनमें तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है।
- मंत्रिमंडल की सलाह: यह शक्ति राष्ट्रपति की अपनी ‘विवेकाधीन शक्ति’ नहीं है; वह केवल मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर ही अध्यादेश जारी कर सकता है।
अध्यादेश की सीमाएँ (Limitations)
- संसद के समान: अध्यादेश केवल उन्हीं विषयों पर जारी किया जा सकता है जिन पर संसद कानून बना सकती है।
- मौलिक अधिकार: अध्यादेश द्वारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीना या कम नहीं किया जा सकता।
- संवैधानिक संशोधन: अध्यादेश के माध्यम से संविधान में संशोधन नहीं किया जा सकता।
अध्यादेश की अवधि और अनुमोदन (Duration & Approval)
यह हिस्सा छात्रों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है, इसे ध्यान से समझें:
- संसद के समक्ष प्रस्तुति: संसद का सत्र शुरू होने पर अध्यादेश को दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना चाहिए।
- 6 सप्ताह का नियम: यदि संसद सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर इसे अनुमोदित कर देती है, तो यह ‘अधिनियम’ बन जाता है।
- निष्कासन: यदि संसद कोई कार्रवाई नहीं करती, तो सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह बाद अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है।
- अधिकतम अवधि: चूंकि संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतर 6 माह हो सकता है, इसलिए एक अध्यादेश की अधिकतम जीवन अवधि 6 माह और 6 सप्ताह होती है।
💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):
कूपर केस (1970): के बारे में ज़रूर बताएं जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति के ‘संतोष’ को अदालत में चुनौती दी जा सकती है यदि वह ‘दुर्भावनापूर्ण’ हो।
डी.सी. वाधवा केस (1987): यह स्पष्ट करता है कि बिना संसद में पेश किए बार-बार अध्यादेश जारी करना ‘संविधान पर धोखाधड़ी’ है।”
वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)
- धन विधेयक: धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही संसद में पेश किया जा सकता है।
- बजट: वह वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) को संसद के समक्ष रखवाता है।
- आकस्मिकता निधि: वह किसी अप्रत्याशित खर्च के लिए ‘भारत की आकस्मिकता निधि’ (Contingency Fund) से अग्रिम भुगतान कर सकता है।
- वित्त आयोग: वह हर 5 वर्ष में राजस्व के बँटवारे हेतु वित्त आयोग का गठन करता है।
न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)
- नियुक्ति: वह सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
- सलाह: अनुच्छेद 143 के तहत वह किसी कानूनी तथ्य पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकता है (सलाह बाध्यकारी नहीं है)।
- क्षमादान (Art. 72): वह किसी अपराध के लिए दोषी व्यक्ति की सजा को क्षमा, लघुकरण, परिहार, विराम या प्रविलंबन कर सकता है।
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (Pardoning Power) अनुच्छेद 72
अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को उन व्यक्तियों को क्षमा करने की शक्ति प्रदान करता है जो किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए हैं। यह शक्ति मुख्य रूप से दो कारणों से दी गई है: न्याय की गलती को सुधारने के लिए और यदि सजा बहुत कठोर लगे तो राहत देने के लिए।
राष्ट्रपति निम्नलिखित पाँच प्रकार की राहत दे सकता है:
- क्षमा (Pardon): इसमें सजा और दोषसिद्धि (Conviction) दोनों को पूरी तरह से हटा दिया जाता है। अपराधी ऐसा हो जाता है जैसे उसने कभी कोई अपराध किया ही न हो। यह मृत्युदंड को भी माफ कर सकता है।
- लघुकरण (Commutation): इसमें सजा के स्वरूप (Nature) को बदला जाता है। उदाहरण के लिए, मृत्युदंड को कठोर कारावास में बदलना या कठोर कारावास को साधारण कारावास में बदलना।
- परिहार (Remission): इसमें सजा की प्रकृति बदले बिना उसकी अवधि (Period) को कम किया जाता है। जैसे— 2 वर्ष के कठोर कारावास को 1 वर्ष के कठोर कारावास में बदलना।
- विराम (Respite): किसी विशेष परिस्थिति के कारण सजा को कम करना। जैसे— अपराधी का शारीरिक रूप से अपाहिज होना या महिला अपराधी का गर्भवती होना।
- प्रविलंबन (Reprieve): किसी सजा (विशेषकर मृत्युदंड) के निष्पादन पर अस्थायी रोक लगाना ताकि दोषी को क्षमादान या लघुकरण के लिए समय मिल सके।
सैन्य एवं आपातकालीन शक्तियाँ
- सर्वोच्च सेनापति: वह भारत की तीनों सेनाओं (थल, जल, नभ) का सर्वोच्च सेनापति होता है। वह सेना प्रमुखों की नियुक्ति करता है।
- आपातकाल: उसे तीन प्रकार के आपातकाल लगाने की शक्ति है: राष्ट्रीय आपातकाल (352), राष्ट्रपति शासन (356/365) और वित्तीय आपातकाल (360)।
राष्ट्रपति की वीटो शक्तियाँ (Veto Powers) अनुच्छेद 111
जब संसद द्वारा पारित कोई विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है, तो अनुच्छेद 111 के तहत उनके पास तीन विकल्प होते हैं।
भारतीय राष्ट्रपति के पास तीन प्रकार की वीटो ( ‘वीटो’ का अर्थ है— ‘रोकना’) शक्तियाँ हैं:
आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto)
इसमें राष्ट्रपति विधेयक पर अपनी सहमति सुरक्षित रखता है (हस्ताक्षर नहीं करता), जिससे विधेयक समाप्त हो जाता है और कानून नहीं बन पाता।
- प्रयोग: आमतौर पर गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों या ऐसे सरकारी विधेयकों पर जब मंत्रिमंडल इस्तीफा दे दे।
निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto)
राष्ट्रपति विधेयक को संसद को पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है।
- शर्त: यदि संसद उस विधेयक को दोबारा बिना किसी बदलाव के या बदलाव के साथ साधारण बहुमत से पारित कर दे, तो राष्ट्रपति को उस पर हस्ताक्षर करने ही पड़ते हैं।
- नोट: राष्ट्रपति धन विधेयक (Money Bill) पर इस वीटो का प्रयोग नहीं कर सकता।
जेबी वीटो (Pocket Veto)
इसमें राष्ट्रपति विधेयक पर न तो सहमति देता है, न ही उसे अस्वीकृत करता है और न ही लौटाता है, बल्कि उसे अनिश्चित काल के लिए अपने पास लंबित रखता है।
- विशेष तथ्य: भारतीय राष्ट्रपति की ‘जेब’ अमेरिकी राष्ट्रपति से बड़ी है क्योंकि अमेरिका में 10 दिनों में बिल लौटाना अनिवार्य है, जबकि भारत में ऐसी कोई समय सीमा नहीं है।
- ऐतिहासिक प्रयोग: 1986 में ज्ञानी जैल सिंह ने ‘भारतीय डाक संशोधन विधेयक’ पर इसका प्रयोग किया था।
💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):
वीटो शक्तियों (Veto Powers) और अध्यादेश के बीच का अंतर: वीटो संसद द्वारा पारित बिलों को रोकने की शक्ति है, जबकि अध्यादेश खुद एक अस्थाई कानून बनाने की शक्ति है।
ये दोनों ही बिंदु परीक्षाओं में ‘Confusing Statements’ के रूप में पूछे जाते हैं।”
राष्ट्रपति की शक्तियों पर ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय
| केस का नाम | वर्ष | मुख्य विषय | प्रभाव |
| कूपर केस | 1970 | अध्यादेश (Art 123) | न्यायिक समीक्षा संभव |
| डी.सी. वाधवा | 1987 | अध्यादेश का दुरुपयोग | पुन: जारी करना असंवैधानिक |
| एस.आर. बोम्मई | 1994 | राष्ट्रपति शासन (356) | ‘फ्लोर टेस्ट’ अनिवार्य |
| केहर सिंह | 1989 | क्षमादान (Art 72) | साक्ष्यों की नई समीक्षा संभव |
| एपुरु सुधाकर | 2006 | क्षमादान | दुर्भावनापूर्ण क्षमा रद्द हो सकती है |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रपति की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा (अनुच्छेद 74)।
- संविधान के भाग V और अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ की कार्यपालिका का वर्णन है।
- अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
- राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक और राज्य का प्रमुख होता है।
- अनुच्छेद 53: संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है।
- राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
- निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
- राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालते हैं।
- 70वें संशोधन (1992) द्वारा दिल्ली और पुडुचेरी विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों को शामिल किया गया।
- संसद और विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य चुनाव में भाग नहीं लेते।
- विधान परिषदों (Legislative Councils) के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया से बाहर होते हैं।
- राष्ट्रपति का चुनाव ‘एकल संक्रमणीय मत’ (STV) प्रणाली द्वारा होता है।
- राष्ट्रपति पद के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
- उम्मीदवार को लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखनी चाहिए।
- राष्ट्रपति के नामांकन के लिए 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदक आवश्यक हैं।
- उम्मीदवार को ₹15,000 की जमानत राशि RBI में जमा करनी होती है।
- कुल वैध मतों का 1/6 भाग न मिलने पर जमानत राशि जब्त हो जाती है।
- अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति को शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) दिलाते हैं।
- राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित करता है।
- राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट करता है।
- अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष होता है।
- अनुच्छेद 57: भारत में एक व्यक्ति कितनी भी बार राष्ट्रपति निर्वाचित हो सकता है।
- अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया का वर्णन है।
- महाभियोग का एकमात्र आधार ‘संविधान का उल्लंघन’ है।
- महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है।
- महाभियोग प्रस्ताव के लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।
- प्रस्ताव पर सदन के कम से कम 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- महाभियोग को सदन के 2/3 (विशेष बहुमत) से पारित होना आवश्यक है।
- महाभियोग प्रक्रिया में संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं।
- अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति को क्षमादान (Pardon) की शक्ति प्राप्त है।
- राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Penalty) को पूरी तरह माफ करने वाला एकमात्र अधिकारी है।
- अनुच्छेद 123: राष्ट्रपति को अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 माह और 6 सप्ताह होती है।
- अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति कानूनी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट की सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं होती।
- राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है।
- राष्ट्रपति लोकसभा को भंग करने की शक्ति रखता है।
- अनुच्छेद 108: राष्ट्रपति संसद की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाता है।
- धन विधेयक (Money Bill) राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना पेश नहीं किया जा सकता।
- राष्ट्रपति प्रत्येक 5 वर्ष में वित्त आयोग का गठन करता है।
- राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता है।
- जेबी वीटो (Pocket Veto) का प्रयोग पहली बार ज्ञानी जैल सिंह ने किया था।
- निलंबनकारी वीटो के तहत राष्ट्रपति बिल को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।
- राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करता है।
- अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।
- अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल की घोषणा की जाती है।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम और सबसे लंबे समय तक रहने वाले राष्ट्रपति थे।
- नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र राष्ट्रपति थे जो निर्विरोध चुने गए थे।
- प्रतिभा पाटिल भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति थीं।
- द्रौपदी मुर्मू भारत की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
- भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है।
PYQ (Previous Year Questions)
Q1. राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?
A. प्रत्यक्ष
B. अप्रत्यक्ष
C. नामांकन
D. न्यायालय द्वारा
✅ उत्तर: B
Q2. राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
A. अविश्वास प्रस्ताव
B. महाभियोग
C. जनमत संग्रह
D. चुनाव आयोग
✅ उत्तर: B
Q3. अध्यादेश किस अनुच्छेद में है?
A. 111
B. 123
C. 356
D. 360
✅ उत्तर: B
Q4. राष्ट्रपति किसका हिस्सा है?
A. कार्यपालिका
B. विधायिका
C. न्यायपालिका
D. तीनों
✅ उत्तर: B (संसद का अंग)
FAQ
Q1. क्या राष्ट्रपति केवल रबर स्टैम्प है?
👉 नहीं, वह संवैधानिक प्रमुख है और संकट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
Q2. क्या राष्ट्रपति स्वतंत्र निर्णय ले सकता है?
👉 सीमित स्थितियों में (Situational Discretion)
Q3. क्या राष्ट्रपति कानून रोक सकता है?
👉 हाँ (Veto Power)
Q4. वास्तविक शक्ति किसके पास होती है?
👉 मंत्रिपरिषद (PM)
निष्कर्ष
राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक संरक्षक (Guardian of Constitution) है।
हालांकि वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के पास होती है, लेकिन राष्ट्रपति लोकतंत्र का संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण पद है।
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