“संसद केवल सदनों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संस्था है संसद की कार्यप्रणाली विशिष्ट प्रक्रियाओं के माध्यम से चलती है। संविधान के अनुच्छेद 85 से 122 के बीच संसद के कामकाज के तरीकों का वर्णन है। संसद की कार्यप्रणाली में सत्रों का आयोजन, प्रश्नों के माध्यम से सरकार की जवाबदेही तय करना और कानूनों का निर्माण करना शामिल है। इस भाग में हम समझेंगे कि देश के लिए कानून कैसे बनते हैं और संसद में चर्चा के कौन-कौन से माध्यम होते हैं।”
I. संसद के अधिकारी: अध्यक्ष और सभापति
- लोकसभा के पीठासीन अधिकारी को अध्यक्ष (Speaker) कहा जाता है।
- अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा अपने बीच से किया जाता है।
- अध्यक्ष के चुनाव की तारीख राष्ट्रपति निर्धारित करता है।
- लोकसभा अध्यक्ष का कार्यकाल लोकसभा के जीवनकाल तक होता है।
- लोकसभा भंग होने पर भी अध्यक्ष अपना पद खाली नहीं करता (अगली बैठक तक)।
- अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को सौंपता है।
- अध्यक्ष को लोकसभा के प्रभावी बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव से हटाया जा सकता है।
- अध्यक्ष को हटाने के लिए 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।
- अध्यक्ष सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए अंतिम शक्ति है।
- वह सदन की कार्यवाही चलाने के लिए नियमों की व्याख्या करने वाला अंतिम अधिकारी है।
- कोरम (गणपूर्ति) न होने पर वह सदन को स्थगित कर सकता है।
- सामान्य स्थिति में वह मत नहीं देता, लेकिन मत बराबर होने पर निर्णायक मत (Casting Vote) देता है।
- वह संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) की अध्यक्षता करता है।
- अनुच्छेद 110: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय केवल अध्यक्ष करता है।
- धन विधेयक पर अध्यक्ष का फैसला अंतिम होता है और इसे किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- वह 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल के आधार पर सदस्यों की अयोग्यता का फैसला करता है।
- लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव भी लोकसभा सदस्यों द्वारा किया जाता है।
- उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख अध्यक्ष निर्धारित करता है।
- उपाध्यक्ष अध्यक्ष के अधीन नहीं होता, वह सीधे सदन के प्रति उत्तरदायी होता है।
- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्ष के सभी कार्यों का निर्वहन करता है।
- पैनल ऑफ चेयरपर्सन्स: अध्यक्ष 10 सदस्यों का एक पैनल नामित करता है जो दोनों की अनुपस्थिति में सदन चलाते हैं।
- प्रोटेम स्पीकर (Pro-tem Speaker): नई लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त वरिष्ठ सदस्य।
- प्रोटेम स्पीकर का मुख्य कार्य नए सदस्यों को शपथ दिलाना और नए अध्यक्ष का चुनाव करवाना है।
- राज्यसभा का पीठासीन अधिकारी सभापति (Chairman) कहलाता है।
- भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन (Ex-officio) सभापति होता है।
- सभापति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है।
- राज्यसभा अपने सदस्यों में से एक उप-सभापति चुनती है।
- उप-सभापति अपना त्यागपत्र सभापति को सौंपता है।
- जब उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तो वह सभापति के रूप में कार्य नहीं करता।
- सभापति को तभी हटाया जा सकता है जब उसे उपराष्ट्रपति के पद से हटा दिया जाए।
- सभापति को राज्यसभा में मत देने का अधिकार नहीं है (निर्णायक मत को छोड़कर)।
- विपक्षी दल का नेता: संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दल का नेता होना अनिवार्य है (कुल सीटों का कम से कम 1/10 होने पर)।
- विपक्षी नेता को ‘कैबिनेट मंत्री’ का दर्जा और सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
- सचेतक (Whip): प्रत्येक राजनीतिक दल का अपना सचेतक होता है जो सदस्यों में अनुशासन बनाए रखता है।
- व्हिप के निर्देशों का उल्लंघन करने पर सदस्य के खिलाफ दलबदल की कार्यवाही हो सकती है।
II. संसद के सत्र और कार्यप्रणाली
- संसद का सत्र बुलाने (Summon) की शक्ति राष्ट्रपति के पास है।
- स्थगन (Adjournment): बैठक को कुछ घंटों या दिनों के लिए रोकना (यह अध्यक्ष/सभापति करता है)।
- सत्रावसान (Prorogation): संसद के पूरे सत्र को समाप्त करना (यह राष्ट्रपति करता है)।
- विघटन (Dissolution): केवल लोकसभा का होता है, जिससे सदन का जीवन समाप्त हो जाता है।
- प्रश्नकाल (Question Hour): संसद के प्रत्येक सत्र का पहला घंटा।
- तारांकित प्रश्न (Starred Questions): इनका उत्तर मौखिक दिया जाता है और पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
- अतारांकित प्रश्न (Unstarred Questions): इनका उत्तर लिखित दिया जाता है और पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते।
- अल्प सूचना प्रश्न: जो 10 दिन से कम का नोटिस देकर पूछे जाते हैं।
- शून्यकाल (Zero Hour): प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय (भारतीय संसदीय नवाचार)।
- शून्यकाल में बिना किसी पूर्व सूचना के लोक महत्व के मुद्दे उठाए जा सकते हैं।
- प्रस्ताव (Motions): सदन में किसी भी लोक महत्व के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रस्ताव लाना आवश्यक है।
- अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): यह केवल लोकसभा में लाया जा सकता है।
- इसे लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
- यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाए, तो पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
- निंदा प्रस्ताव (Censure Motion): यह किसी विशिष्ट मंत्री या पूरी परिषद के खिलाफ उनकी नीतियों की निंदा के लिए लाया जाता है।
- ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion): किसी मंत्री का ध्यान लोक महत्व के जरूरी मुद्दे पर खींचने के लिए।
- स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion): किसी बहुत ही जरूरी सार्वजनिक मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन के नियमित कार्य को रोकना।
- स्थगन प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए।
- धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks): राष्ट्रपति के पहले संबोधन के बाद लाया जाता है (इसका पारित होना अनिवार्य है)।
- विशेषाधिकार प्रस्ताव: किसी मंत्री द्वारा तथ्यों को छुपाने या गलत सूचना देने पर लाया जाता है।
- आधा घंटा चर्चा: पर्याप्त सार्वजनिक महत्व के मामले पर जिस पर बहुत चर्चा की जरूरत हो।
- अल्पकालिक चर्चा (Short Duration Discussion): इसे ‘दो घंटे की चर्चा’ भी कहा जाता है।
III. विधायी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तथ्य
- विधेयक (Bill): चार प्रकार के होते हैं—साधारण, धन, वित्त और संविधान संशोधन विधेयक।
- साधारण विधेयक: इसे किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
- साधारण विधेयक के मामले में गतिरोध होने पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है।
- धन विधेयक (अनुच्छेद 110): केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से पेश होता है।
- वित्त विधेयक (अनुच्छेद 117): इनमें धन संबंधी प्रावधानों के साथ-साथ अन्य मामले भी होते हैं।
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
- आज तक केवल 3 बार (1961, 1978, 2002) संयुक्त बैठक बुलाई गई है।
- अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) का वर्णन करता है।
- बजट में ‘विनियोग विधेयक’ (Appropriation Bill) के बिना संचित निधि से धन नहीं निकाला जा सकता।
- गैलोटिन (Guillotine): समय की कमी के कारण बजट की अनुदान मांगों को बिना चर्चा के मतदान के लिए रखना।
- लेखानुदान (Vote on Account): बजट पारित होने तक सरकार के खर्च के लिए एडवांस धन की मंजूरी।
- पूरक अनुदान: जब बजट में दिया गया धन पर्याप्त न हो।
- सांकेतिक अनुदान: जब किसी नई सेवा के लिए धन की आवश्यकता हो।
- भारतीय संसद ‘प्रभुत्व संपन्न’ नहीं है क्योंकि इसके कानूनों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है।
- संसद की भाषा हिंदी और अंग्रेजी है, लेकिन अध्यक्ष मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है।
- लेम-डक सत्र (Lame-duck Session): नई लोकसभा चुने जाने के बाद पुरानी लोकसभा का अंतिम सत्र।
- लेम-डक उन सदस्यों को कहा जाता है जो नई लोकसभा के लिए नहीं चुने गए।
- संसद की प्रक्रियाएँ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं।
FAQ ( महत्वपूर्ण प्रश्न)
प्रश्न 1: धन विधेयक (Money Bill) को केवल लोकसभा में ही क्यों पेश किया जाता है?
उत्तर: चूंकि लोकसभा जनता का सीधा प्रतिनिधित्व करती है और वित्त पर जनता का नियंत्रण होना चाहिए, इसलिए धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होता है।
प्रश्न 2: संसद की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) कब बुलाई जाती है?
उत्तर: जब किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध (Deadlock) हो जाए, तो अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाता है।
प्रश्न 3: क्या राज्यसभा धन विधेयक को खारिज कर सकती है?
उत्तर: नहीं, राज्यसभा धन विधेयक को न तो खारिज कर सकती है और न ही संशोधित। वह इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।
प्रश्न 4: ‘अविश्वास प्रस्ताव’ (No-Confidence Motion) क्या है?
उत्तर: यह केवल लोकसभा में लाया जाता है। यदि यह पारित हो जाए, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
प्रश्न 5: संसद में ‘कोरम’ (Quorum) क्या है?
उत्तर: सदन की कार्यवाही चलाने के लिए आवश्यक न्यूनतम सदस्यों की संख्या (कुल सदस्यों का 1/10 भाग)।
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