भारतीय संसद (Parliament)– Article 79-122 नोट्स हिंदी में – संरचना, राज्यसभा, लोकसभा | UPSC, SSC, PCS

भारतीय संसद क्या है? (Article 79)

“भारतीय संविधान के भाग V के अंतर्गत अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद के गठन, संरचना, अवधि, अधिकारियों, प्रक्रियाओं और शक्तियों का वर्णन किया गया है। भारत ने ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ यानी ब्रिटेन की तर्ज पर संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है। संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जिसका मुख्य कार्य देश के लिए कानून बनाना है। संविधान के अनुसार, भारतीय संसद के तीन प्रमुख अंग हैं— राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।”

indian parliament structure diagram
भारतीय संसद (अनुच्छेद 79) राज्यसभा (उच्च सदन) अनुच्छेद 80 • अधिकतम: 250 सदस्य • प्रकृति: स्थायी सदन • कार्यकाल: 6 वर्ष राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग लोकसभा (निम्न सदन) अनुच्छेद 81 • अधिकतम: 550 सदस्य • कार्यकाल: 5 वर्ष • प्रत्यक्ष निर्वाचन Parliamentary Structure | pdfnotes.in | vikas singh

संसद की संरचना और राज्यसभा (अनुच्छेद 80)

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 79 स्पष्ट करता है कि संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनेगी। यहाँ हम अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा की बारीकियों को समझेंगे।

राज्यसभा की संरचना (Composition)

राज्यसभा को ‘उच्च सदन’ (Upper House) कहा जाता है। इसकी अधिकतम संख्या 250 निर्धारित है, जिसका विभाजन इस प्रकार है:

  • 238 सदस्य: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के प्रतिनिधि।
  • 12 सदस्य: राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत (साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र से)।

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में राज्यसभा में 245 सदस्य हैं (229 राज्यों से, 4 UTs से और 12 मनोनीत)।

निर्वाचन पद्धति (Election Method)

  • राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • प्रणाली: आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत’ (STV) द्वारा।
  • प्रतिनिधित्व: अमेरिका की सीनेट (जहाँ हर राज्य को 2 सीटें मिलती हैं) के विपरीत, भारत में सीटें जनसंख्या के आधार पर बांटी गई हैं। (जैसे: UP – 31 सीटें, जबकि गोवा – 1 सीट)।

कार्यकाल और प्रकृति (Tenure & Nature)

  • स्थायी सदन: राज्यसभा कभी भंग नहीं होती। यह एक निरंतर चलने वाला सदन है।
  • सदस्य कार्यकाल: एक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
  • सेवानिवृत्ति: इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

राज्यसभा के प्रमुख बिंदु:

विवरणसंवैधानिक प्रावधान
अधिकतम संख्या250 (अनुच्छेद 80)
न्यूनतम आयु30 वर्ष
सीटों का आवंटनचौथी अनुसूची के अनुसार
अध्यक्ष (सभापति)भारत का उपराष्ट्रपति (पदेन)
राज्यसभा (अनुच्छेद 80) उच्च सदन (स्थायी) कभी भंग नहीं होता निर्वाचित सदस्य (238) • राज्यों और UTs से प्रतिनिधि • जनसंख्या के आधार पर आवंटन (चौथी अनुसूची) मनोनीत सदस्य (12) • राष्ट्रपति द्वारा मनोनयन • साहित्य, कला, विज्ञान, व समाज सेवा के क्षेत्र से कार्यकाल: 6 वर्ष प्रत्येक 2 वर्ष में 1/3 सदस्य रिटायरRajya Sabha Composition | pdfnotes.in | vikas singh

लोकसभा की संरचना और निर्वाचन (अनुच्छेद 81)

लोकसभा को ‘प्रथम सदन’, ‘निम्न सदन’ या ‘लोकप्रिय सदन’ कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।

लोकसभा की संरचना (Composition)

  • अधिकतम संख्या: 550 निर्धारित है।
  • विभाजन: इसमें राज्यों से अधिकतम 530 और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से 20 सदस्य हो सकते हैं।
  • 104वाँ संशोधन (2019): इस संशोधन द्वारा लोकसभा में 2 आंग्ल-भारतीयों (Anglo-Indians) के मनोनयन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
  • वर्तमान प्रभावी संख्या: 543 (सभी निर्वाचित)।

निर्वाचन प्रणाली (Election System)

  • प्रत्यक्ष चुनाव: लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा वयस्क मताधिकार (18 वर्ष+) के आधार पर होता है।
  • FPTP प्रणाली: भारत में ‘सबसे आगे रहने वाले की जीत’ (First-Past-The-Post) प्रणाली अपनाई जाती है।
  • मतदान आयु: 61वें संविधान संशोधन (1988) द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।

सीटों का आवंटन और परिसीमन (Delimitation)

  • आधार वर्ष: वर्तमान में सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना पर आधारित है।
  • 2026 तक रोक: 84वें संशोधन (2001) के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 2026 तक स्थिर कर दी गई है।
  • आरक्षण (अनुच्छेद 330): लोकसभा में SC (84 सीटें) और ST (47 सीटें) के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित हैं।

लोकसभा एक नज़र में:

विशेषताविवरण
न्यूनतम आयु25 वर्ष
सामान्य कार्यकाल5 वर्ष (समय से पहले भंग संभव)
कोरम (गणपूर्ति)कुल सदस्य संख्या का 1/10
अध्यक्ष (Speaker)सदस्यों के बीच से ही चुना जाता है
लोकसभा (अनुच्छेद 81) प्रथम सदन (अस्थायी) जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व सदस्य संख्या (543) • राज्यों से: 524 सदस्य • UTs से: 19 सदस्य (आंग्ल-भारतीय कोटा समाप्त) 104वाँ संशोधन (2019) निर्वाचन प्रणाली • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष (61वाँ सं.) • FPTP (सबसे आगे की जीत) पद्धति सीटें 2026 तक स्थिर (84वाँ संशोधन) आधार: 1971 की जनगणनाLok Sabha Framework | pdfnotes.in | vikas singh

शपथ, कार्यकाल और अयोग्यता (अनुच्छेद 84, 99 और 102)

संसद का सदस्य निर्वाचित होने के बाद पद ग्रहण करने और बने रहने की कुछ संवैधानिक शर्तें हैं।

शपथ या प्रतिज्ञान (Oath) – अनुच्छेद 99

  • प्रत्येक सदस्य को अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति (जैसे- प्रोटेम स्पीकर) के समक्ष शपथ लेनी होती है।
  • जुर्माना: यदि कोई सदस्य बिना शपथ लिए सदन की कार्यवाही में भाग लेता है या वोट देता है, तो उस पर ₹500 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाता है।

कार्यकाल (Tenure) – अनुच्छेद 83

  • राज्यसभा: यह एक स्थायी सदन है। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। प्रत्येक 2 वर्ष में 1/3 सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
  • लोकसभा: इसका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है। हालांकि, राष्ट्रपति इसे समय से पहले भंग कर सकता है।
  • आपातकाल: राष्ट्रीय आपातकाल के समय संसद कानून बनाकर लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में 1 वर्ष के लिए बढ़ा सकती है।

अयोग्यता (Disqualifications) – अनुच्छेद 102

संविधान के अनुसार एक सांसद अयोग्य घोषित होगा यदि:

  1. वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन ‘लाभ के पद’ (Office of Profit) पर हो।
  2. वह विकृत चित्त (Unsound Mind) हो या दिवालिया हो।
  3. उसने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली हो।
  • निर्णय: अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता का निर्णय राष्ट्रपति, चुनाव आयोग की सलाह पर लेता है।

दलबदल के आधार पर अयोग्यता (10वीं अनुसूची)

52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा 10वीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके तहत अयोग्यता के आधार:

  • यदि वह स्वेच्छा से अपने राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ देता है।
  • यदि वह सदन में अपने दल के निर्देशों (Whip) के विपरीत वोट देता है।
  • यदि कोई निर्दलीय सदस्य चुनाव के बाद किसी दल में शामिल हो जाता है।
  • यदि कोई मनोनीत सदस्य 6 महीने के बाद किसी दल में शामिल होता है।
  • निर्णय: दलबदल के आधार पर अयोग्यता का निर्णय सदन का अध्यक्ष या सभापति करता है (इसकी न्यायिक समीक्षा संभव है)।
सांसद की अयोग्यता संवैधानिक आधार (Art. 102) • लाभ का पद (Office of Profit) • मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) • दिवालिया (Undischarged Insolvent) • विदेशी नागरिकता ग्रहण करना निर्णयकर्ता: राष्ट्रपति (चुनाव आयोग की सलाह पर) दलबदल आधार (10वीं अनुसूची) • स्वेच्छा से दल छोड़ना • दल के निर्देश (Whip) का उल्लंघन • निर्दलीय का किसी दल में शामिल होना • मनोनीत सदस्य (6 माह बाद दल प्रवेश) निर्णयकर्ता: अध्यक्ष/सभापति (न्यायिक समीक्षा संभव) © 2026 | pdfnotes.in | vikas singh

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  1. संसद का वर्णन संविधान के भाग V के अनुच्छेद 79 से 122 तक है।
  2. भारतीय संसद के तीन अंग हैं: राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा
  3. भारत ने ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ (ब्रिटेन) पर आधारित संसदीय प्रणाली अपनाई है।
  4. अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की एक संसद होगी।
  5. राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है।
  6. राज्यसभा को ‘उच्च सदन’, ‘द्वितीय सदन’ या ‘बड़ों की सभा’ कहा जाता है।
  7. लोकसभा को ‘निम्न सदन’, ‘प्रथम सदन’ या ‘लोकप्रिय सदन’ कहा जाता है।
  8. अनुच्छेद 80: राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित है।
  9. राज्यसभा में वर्तमान में 245 सदस्य हैं।
  10. राज्यसभा में 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
  11. मनोनयन का आधार: साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा
  12. राज्यसभा में सीटों का आवंटन चौथी अनुसूची में दिया गया है।
  13. राज्यसभा सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा होता है।
  14. राज्यसभा में सीटों का बँवारा राज्यों की जनसंख्या के आधार पर होता है।
  15. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में सर्वाधिक 31 सदस्य आते हैं।
  16. राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता।
  17. राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
  18. राज्यसभा के 1/3 सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त (Retire) हो जाते हैं।
  19. राज्यसभा का सभापति भारत का उपराष्ट्रपति होता है।
  20. अनुच्छेद 312: नई अखिल भारतीय सेवा बनाने का अधिकार केवल राज्यसभा को है।
  21. अनुच्छेद 249: राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार संसद को राज्यसभा दे सकती है।
  22. अनुच्छेद 81: लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 निर्धारित है।
  23. 104वें संशोधन (2019) द्वारा आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) सीटों को समाप्त कर दिया गया।
  24. वर्तमान में लोकसभा की प्रभावी संख्या 543 है।
  25. लोकसभा के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
  26. मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष 61वें संशोधन (1988) द्वारा की गई।
  27. लोकसभा में ‘सबसे आगे रहने वाले की जीत’ (FPTP) प्रणाली अपनाई जाती है।
  28. 84वें संशोधन (2001) ने लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक स्थिर कर दी है।
  29. वर्तमान सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना पर आधारित है।
  30. लोकसभा में SC के लिए 84 और ST के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं।
  31. लोकसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
  32. राष्ट्रपति किसी भी समय लोकसभा को भंग कर सकता है।
  33. आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल एक बार में 1 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  34. लोकसभा अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को सौंपता है।
  35. अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है।
  36. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
  37. राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।
  38. संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान अनुच्छेद 108 में है।
  39. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
  40. संसद का सत्र बुलाने (Summoning) की शक्ति राष्ट्रपति के पास है।
  41. दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
  42. कोरम (गणपूर्ति): सदन चलाने के लिए कुल सदस्यों का 1/10 उपस्थित होना अनिवार्य है।
  43. राज्यसभा के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष और लोकसभा के लिए 25 वर्ष है।
  44. अनुच्छेद 102: सांसदों की अयोग्यता (लाभ का पद, दिवालिया आदि) का वर्णन है।
  45. दलबदल के आधार पर अयोग्यता का निर्णय सदन का अध्यक्ष/सभापति करता है।
  46. दलबदल कानून 10वीं अनुसूची (52वाँ संशोधन, 1985) में दिया गया है।
  47. बिना शपथ लिए सदन में बैठने पर ₹500 प्रतिदिन का जुर्माना लगता है।
  48. अनुच्छेद 105: सांसदों के विशेषाधिकारों का वर्णन करता है।
  49. प्रश्नकाल: संसद की बैठक का पहला घंटा (11 से 12 बजे) होता है।
  50. तारांकित प्रश्न का उत्तर मौखिक दिया जाता है और पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  51. अतारांकित प्रश्न का उत्तर लिखित दिया जाता है।
  52. शून्यकाल (Zero Hour): प्रश्नकाल के तुरंत बाद (दोपहर 12 बजे) शुरू होता है।
  53. शून्यकाल भारतीय संसदीय प्रणाली की अपनी देन है (1962 से)।
  54. स्थगन (Adjournment): बैठक को कुछ समय के लिए रोकना (अध्यक्ष द्वारा)।
  55. सत्रावसान (Prorogation): पूरे सत्र को समाप्त करना (राष्ट्रपति द्वारा)।
  56. विघटन (Dissolution): सदन का जीवनकाल समाप्त करना (केवल लोकसभा)।
  57. राज्यसभा कभी विघटित नहीं होती।
  58. विधेयक (Bill): कानून बनाने का प्रस्ताव।
  59. साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
  60. अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा दी गई है।
  61. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है।
  62. अनुच्छेद 112: ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ (बजट) का उल्लेख है।
  63. विनियोग विधेयक (Art. 114): संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है।
  64. लेखानुदान (Vote on Account): बजट पारित होने तक अग्रिम धन की व्यवस्था।
  65. अनुच्छेद 122: न्यायपालिका द्वारा संसद की कार्यवाही की जाँच नहीं की जा सकती।
  66. संसद सदस्यों के वेतन-भत्ते संसद स्वयं तय करती है।
  67. प्रोटेम स्पीकर नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाता है।
  68. संसद का बजट सत्र सबसे लंबा और शीतकालीन सत्र सबसे छोटा होता है।
  69. संविधान संशोधन विधेयक में संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।
  70. धन विधेयक में भी संयुक्त बैठक नहीं हो सकती।
  71. लेम डक सत्र (Lame Duck Session): नई लोकसभा चुनाव के बाद पुरानी लोकसभा का अंतिम सत्र।
  72. व्विप (Whip): दल का अनुशासन बनाए रखने वाला अधिकारी।
  73. भारत में संसद सर्वोच्च है लेकिन संविधान के अधीन है।
  74. संसदीय समितियाँ एक्स्ट्रा-कॉन्स्टिट्यूशनल निकाय हैं।
  75. प्राकलन समिति (Estimates Committee): इसमें केवल लोकसभा के 30 सदस्य होते हैं।
  76. लोक लेखा समिति (PAC): इसमें 22 सदस्य (15 LS + 7 RS) होते हैं।
  77. लोक लेखा समिति का अध्यक्ष आमतौर पर विपक्ष का नेता होता है।
  78. सीएजी (CAG) को लोक लेखा समिति का ‘मित्र और दार्शनिक’ कहा जाता है।
  79. संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की सहमति के बाद अधिनियम (Act) बनता है।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।