प्रस्तावना: भारतीय संघवाद की रीढ़ – केंद्र-राज्य संबंध
भारतीय संविधान की सबसे अनूठी विशेषता इसका ‘अर्ध-संघीय’ (Quasi-federal) ढांचा है। भारत जैसे विशाल और विविध देश में, जहाँ विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियाँ और क्षेत्रीय आवश्यकताएं हैं, वहां शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन अनिवार्य है। हमारे संविधान निर्माताओं ने कनाडा के मॉडल से प्रेरित होकर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जहाँ केंद्र और राज्य अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र हैं, लेकिन राष्ट्रीय एकता और अखंडता के मामलों में केंद्र को ‘अभिभावक’ की भूमिका दी गई है।
इस लेख में हम समझेंगे कि कैसे भारतीय संविधान के भाग 11 और 12 के तहत विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को बांटा गया है। चाहे वह जीएसटी (GST) का कार्यान्वयन हो या राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) का मुद्दा, केंद्र-राज्य संबंधों की गतिशीलता ही भारत के लोकतंत्र की दिशा तय करती है। यदि आप UPSC, SSC या किसी भी राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इन संबंधों की जटिलताओं और अनुच्छेदों को समझना आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Table of Contents
I. विधायी संबंध (Legislative Relations) [अनुच्छेद 245-255]
- विधायी संबंधों का उल्लेख संविधान के भाग 11 में किया गया है।
- अनुच्छेद 245: संसद पूरे भारत के लिए और राज्य विधानमंडल अपने राज्य के लिए कानून बना सकते हैं।
- संसद को ‘राज्यक्षेत्रातीत विधान’ (Extra-territorial legislation) बनाने की विशेष शक्ति प्राप्त है।
- शक्तियों का विभाजन सातवीं अनुसूची की तीन सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) के माध्यम से है।
- संघ सूची (Union List): वर्तमान में 100 विषय (मूलतः 97) हैं, जिन पर केवल संसद कानून बना सकती है।
- राज्य सूची (State List): वर्तमान में 61 विषय (मूलतः 66) हैं, जिन पर सामान्यतः राज्य कानून बनाते हैं।
- समवर्ती सूची (Concurrent List): वर्तमान में 52 विषय (मूलतः 47) हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- समवर्ती सूची में टकराव की स्थिति में संसद का कानून प्रभावी होगा।
- अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers): वे विषय जो किसी सूची में नहीं हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है (अनुच्छेद 248)।
- अनुच्छेद 249: यदि राज्यसभा राष्ट्रीय हित में प्रस्ताव पारित करे, तो संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है।
- राज्यसभा का ऐसा प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए और यह 1 वर्ष तक प्रभावी रहता है।
- अनुच्छेद 250: राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद राज्य सूची के सभी विषयों पर कानून बना सकती है।
- आपातकाल समाप्त होने के 6 महीने बाद संसद द्वारा बनाए गए ऐसे कानून निष्प्रभावी हो जाते हैं।
- अनुच्छेद 252: दो या दो से अधिक राज्य अनुरोध करें, तो संसद उनके लिए राज्य सूची पर कानून बना सकती है।
- अनुच्छेद 253: अंतर्राष्ट्रीय समझौतों और संधियों को लागू करने के लिए संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है।
- अनुच्छेद 356: के तहत राष्ट्रपति शासन के दौरान, राज्य की विधायी शक्तियाँ संसद को प्राप्त हो जाती हैं। जबकि अनुच्छेद 256 केंद्र द्वारा राज्यों को प्रशासनिक निर्देश देने से संबंधित है।”
- राज्य सूची के 5 विषयों (शिक्षा, वन आदि) को 42वें संशोधन (1976) द्वारा समवर्ती सूची में डाला गया।
- राज्यपाल कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए सुरक्षित रख सकता है।
- कुछ राज्य विधेयकों को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
- केंद्र का राज्य की विधायी शक्तियों पर नियंत्रण संघीय ढांचे को ‘एकात्मक’ बनाता है।
विधायी संबंध (Legislative Relations)
शक्तियों का विभाजन – 7वीं अनुसूची
| सूची | वर्तमान विषय | कानून बनाने की शक्ति |
|---|---|---|
| संघ सूची | 100 (मूल 97) | केवल संसद |
| राज्य सूची | 61 (मूल 66) | सामान्यतः राज्य |
| समवर्ती सूची | 52 (मूल 47) | केंद्र + राज्य (टकराव में केंद्र प्रबल) |
प्रमुख अनुच्छेद
| अनुच्छेद | सार |
|---|---|
| 245 | संसद/राज्य की विधायी सीमा |
| 248 | अवशिष्ट शक्तियाँ = संसद |
| 249 | राष्ट्रीय हित में राज्य सूची पर संसद (RS 2/3) |
| 250 | आपातकाल में राज्य सूची पर संसद |
| 252 | राज्यों के अनुरोध पर संसद |
| 253 | अंतर्राष्ट्रीय संधि लागू करने हेतु संसद |
| 254 | समवर्ती टकराव में केंद्रीय कानून प्रभावी |
नोट: 42वाँ संशोधन (1976) – शिक्षा, वन आदि राज्य सूची से समवर्ती सूची में।
II. प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations) [अनुच्छेद 256-263]
- प्रशासनिक संबंधों का वर्णन भी भाग 11 में ही किया गया है।
- केंद्र की कार्यपालिका शक्ति उन विषयों तक सीमित है जिन पर संसद कानून बना सकती है।
- राज्यों को अपनी कार्यपालिका शक्ति का उपयोग इस तरह करना चाहिए कि संसद के कानूनों का उल्लंघन न हो।
- अनुच्छेद 256: केंद्र राज्यों को निर्देश दे सकता है कि वे संसद के कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
- अनुच्छेद 257: केंद्र राज्यों को संचार साधनों के रखरखाव और रेलवे की सुरक्षा के लिए निर्देश दे सकता है।
- यदि राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन न करे, तो अनुच्छेद 365 के तहत वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
- अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS): ये केंद्र द्वारा चुनी जाती हैं लेकिन राज्यों में शीर्ष पदों पर कार्य करती हैं।
- ये सेवाएँ केंद्र को राज्यों के प्रशासन पर नियंत्रण रखने में मदद करती हैं।
- अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के निपटारे के लिए संसद कानून बना सकती है।
- नदी जल विवादों के लिए न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को संसद सीमित कर सकती है।
- अनुच्छेद 263: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के लिए ‘अंतर-राज्य परिषद’ (Inter-State Council) का गठन।
- अंतर-राज्य परिषद की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- सरकारी आयोग की सिफारिश पर 1990 में पहली बार अंतर-राज्य परिषद गठित हुई।
- राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है, जो केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है, लेकिन उसे केवल राष्ट्रपति ही हटा सकता है।
प्रशासनिक संबंध (Administrative Relations)
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 256 | संसद के कानून लागू कराने हेतु केंद्र के निर्देश |
| 257 | संचार/रेल सुरक्षा पर निर्देश |
| 262 | अंतर-राज्य नदी जल विवाद |
| 263 | अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) |
अन्य बिंदु
- अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS) – केंद्र चयन, राज्य में सेवा
- राज्यपाल – राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त
- अनु. 365 – निर्देश न मानने पर 356 लागू हो सकता है
III. वित्तीय संबंध (Financial Relations) [अनुच्छेद 268-293]
- वित्तीय संबंधों का उल्लेख संविधान के भाग 12 में है।
- भारत में कर लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से विभाजित है; समवर्ती सूची में कोई कर विषय नहीं है (GST को छोड़कर)।
- GST (101वां संशोधन): इसने केंद्र और राज्यों को समवर्ती रूप से कर लगाने की शक्ति दी है।
- अनुच्छेद 280: राष्ट्रपति हर 5 वर्ष में एक ‘वित्त आयोग’ (Finance Commission) का गठन करता है।
- वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है।
- अनुच्छेद 275: संसद राज्यों को आवश्यकतानुसार ‘सांविधिक अनुदान’ (Statutory Grants) दे सकती है।
- अनुच्छेद 282: केंद्र और राज्य किसी भी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ‘स्वविवेकी अनुदान’ (Discretionary Grants) दे सकते हैं।
- वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के दौरान केंद्र राज्यों के वित्तीय मामलों पर पूर्ण नियंत्रण कर सकता है।
- राज्य विदेशों से सीधे ऋण नहीं ले सकते; उन्हें केंद्र की अनुमति की आवश्यकता होती है।
- केंद्र की संपत्ति को राज्य के करों से छूट प्राप्त है (अनुच्छेद 285)।
- राज्यों की संपत्ति और आय को केंद्रीय करों से छूट प्राप्त है (अनुच्छेद 289)।
- नीति आयोग: योजना निर्माण के माध्यम से वित्तीय संसाधनों के आवंटन में भूमिका निभाता है।
- सरकारिया आयोग (1983): केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आयोग।
- पुंछी आयोग (2007): केंद्र-राज्य संबंधों पर नवीनतम महत्वपूर्ण रिपोर्ट।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव का मुख्य कारण अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग और वित्तीय निर्भरता है।
वित्तीय संबंध (Financial Relations)
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| कर-विभाजन | स्पष्ट पृथक्करण (समवर्ती में सामान्यतः कर नहीं) |
| 280 | वित्त आयोग (हर 5 वर्ष) |
| 275 | सांविधिक अनुदान |
| 282 | स्वविवेकी अनुदान |
| 285 | केंद्र संपत्ति पर राज्य कर से छूट |
| 289 | राज्य संपत्ति पर केंद्रीय कर से छूट |
| 360 | वित्तीय आपातकाल |
💰 GST (101वाँ संशोधन)
- केंद्र + राज्य की समवर्ती कर शक्ति
- GST परिषद = सहकारी वित्तीय संघवाद का उदाहरण
⚖️ प्रमुख आयोग/रिपोर्ट
| आयोग | वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| सरकारिया आयोग | 1983 | संतुलन व सुधार सुझाव |
| पुंछी आयोग | 2007 | समकालीन संघीय मुद्दे |
⚖️ प्रमुख केस लॉ
| केस | निष्कर्ष |
|---|---|
| एस.आर. बोम्मई (1994) | 356 की न्यायिक समीक्षा; संघवाद = मूल ढांचा |
| केशवानंद (1973) | संघवाद मूल संरचना का हिस्सा |
निष्कर्ष: सहकारी संघवाद की ओर कदम
भारत में केंद्र-राज्य संबंध समय के साथ विकसित हुए हैं। जहाँ शुरुआत में केंद्र का पलड़ा भारी था, वहीं अब ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) का दौर है। नीति आयोग का गठन और जीएसटी परिषद (GST Council) की सफलता इस बात का प्रमाण है कि विकास के लिए केंद्र और राज्यों का साथ मिलकर चलना कितना आवश्यक है। हालाँकि, राज्यपाल की भूमिका, संसाधनों का बँटवारा और केंद्रीय जांच एजेंसियों के उपयोग जैसे मुद्दों पर आज भी तनाव देखा जाता है, लेकिन सरकारिया आयोग और पुंछी आयोग जैसी समितियों की सिफारिशों ने इन विवादों को सुलझाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
एक गंभीर अभ्यर्थी के रूप में, आपको इन संबंधों को केवल अनुच्छेदों के नजरिए से नहीं, बल्कि समसामयिक राजनीतिक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में भी देखना चाहिए। भारत की प्रगति तभी संभव है जब ‘टीम इंडिया’ के रूप में केंद्र और सभी राज्य एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करें।
🎯 PYQ (UPSC/PCS Pattern)
Q1. अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास हैं?(UPSC)
(a) राज्य (b) समवर्ती (c) संसद (d) राष्ट्रपति
✅ उत्तर: (c)
Q2. अनुच्छेद 249 के तहत राज्य सूची पर कानून बनाने हेतु कौन-सा सदन प्रस्ताव पारित करता है? (UPPCS)
(a) लोकसभा (b) राज्यसभा (c) दोनों (d) विधानसभा
✅ उत्तर: (b)
Q3. वित्त आयोग किस अनुच्छेद के तहत गठित होता है? (BPSC)
(a) 275 (b) 280 (c) 282 (d) 360
✅ उत्तर: (b)
Q4. समवर्ती सूची में टकराव की स्थिति में कौन-सा कानून प्रभावी होगा? (MPPSC)
(a) राज्य (b) केंद्र (c) दोनों (d) राष्ट्रपति
✅ उत्तर: (b)
❓ FAQ
Q1. केंद्र-राज्य संबंध किन भागों में वर्णित हैं?
भाग 11 (विधायी/प्रशासनिक) और भाग 12 (वित्तीय)।
Q2. 7वीं अनुसूची में कितनी सूचियाँ हैं?
तीन—संघ, राज्य, समवर्ती।
Q3. क्या संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है?
हाँ—अनु. 249, 250, 252, 253 के तहत।
Q4. वित्त आयोग का कार्य क्या है?
केंद्र-राज्य कर-वितरण की सिफारिश।
Q5. 356 के दुरुपयोग पर कौन-सा केस महत्वपूर्ण है?
एस.आर. बोम्मई (1994)।
प्रीमियम तैयारी @mypdfnotes
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