राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) – अनुच्छेद 165, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार का मुख्य विधि अधिकारी (Chief Legal Advisor) होता है, जो राज्य से संबंधित संवैधानिक, वैधानिक और कानूनी मामलों में सरकार को परामर्श देता है तथा उच्च न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है। जिस प्रकार केंद्र सरकार के लिए भारत का महान्यायवादी (Attorney General) होता है, उसी प्रकार राज्य सरकार के लिए महाधिवक्ता कार्य करता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह ऐसे व्यक्ति को बनाया जाता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के योग्य हो। यद्यपि महाधिवक्ता राज्य मंत्रिपरिषद का सदस्य नहीं होता, फिर भी उसे राज्य विधानमंडल की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है (मतदान के बिना)। इस प्रकार महाधिवक्ता कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कड़ी के रूप में कार्य करता है।

I. नियुक्ति, योग्यता और कार्यकाल

  1. राज्य के महाधिवक्ता का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 165 में किया गया है।
  2. वह राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है।
  3. महाधिवक्ता की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  4. योग्यता: वह व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता हो।
  5. इसका अर्थ है—वह भारत का नागरिक हो और उसने 10 वर्ष तक न्यायिक पद धारण किया हो या 10 वर्ष तक हाई कोर्ट में वकील रहा हो।
  6. कार्यकाल: संविधान द्वारा महाधिवक्ता का कार्यकाल निश्चित नहीं किया गया है।
  7. वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the pleasure) पद धारण करता है।
  8. उसे हटाने के लिए संविधान में कोई विशेष प्रक्रिया या आधार नहीं दिया गया है।
  9. वह अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंपता है।
  10. परंपरा: जब राज्य की मंत्रिपरिषद इस्तीफा देती है, तो महाधिवक्ता भी इस्तीफा दे देता है, क्योंकि उसकी नियुक्ति सरकार की सलाह पर होती है।
  11. महाधिवक्ता का पारिश्रमिक (Remuneration) राज्यपाल द्वारा निर्धारित किया जाता है।

II. अधिकार और कर्तव्य

  1. महाधिवक्ता का मुख्य कर्तव्य राज्य सरकार को उन कानूनी विषयों पर सलाह देना है जो राज्यपाल द्वारा सौंपे गए हों।
  2. उसे राज्य के किसी भी न्यायालय में समक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
  3. अनुच्छेद 177: उसे राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (यदि द्विसदनीय है) की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है।
  4. वह विधानमंडल की किसी भी समिति का सदस्य बन सकता है, लेकिन उसे वहाँ मतदान (Vote) करने का अधिकार नहीं होता।
  5. उसे वे सभी विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त होती हैं जो एक विधायक (MLA) को मिलती हैं।

III. सीमाएँ और तुलना

  1. महाधिवक्ता सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए वह निजी कानूनी अभ्यास जारी रख सकता है।
  2. वह राज्य सरकार के विरुद्ध किसी मामले में सलाह या पैरवी नहीं कर सकता।
  3. वह सरकार की अनुमति के बिना किसी आपराधिक मामले में आरोपी का बचाव नहीं कर सकता।
  4. जो स्थान केंद्र में महान्यायवादी का है, वही स्थान राज्य में महाधिवक्ता का है।

महान्यायवादी (Attorney General) बनाम महाधिवक्ता (Advocate General)

विशेषता / आधारभारत के महान्यायवादी (AGI)राज्य के महाधिवक्ता (AGS)
अनुच्छेदअनुच्छेद 76अनुच्छेद 165
क्षेत्राधिकारपूरे भारत की केंद्र सरकार।संबंधित राज्य की सरकार।
सर्वोच्च अधिकारीभारत का सर्वोच्च कानून अधिकारी।राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी।
नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा।संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा।
योग्यताउच्चतम न्यायालय (SC) का जज बनने के योग्य।उच्च न्यायालय (HC) का जज बनने के योग्य।
कार्यकालराष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (निश्चित नहीं)।राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (निश्चित नहीं)।
त्यागपत्रराष्ट्रपति को सौंपता है।राज्यपाल को सौंपता है।
पारिश्रमिकराष्ट्रपति द्वारा निर्धारित।राज्यपाल द्वारा निर्धारित।
सदन की शक्तिसंसद के दोनों सदनों में बैठने/बोलने का अधिकार।राज्य विधानमंडल के सदनों में बैठने/बोलने का अधिकार।
मतदान का अधिकारसंसद में वोट नहीं दे सकता (Art 88)।विधानमंडल में वोट नहीं दे सकता (Art 177)।
निजी वकालतनिजी प्रैक्टिस कर सकता है (सरकारी नौकर नहीं)।निजी प्रैक्टिस कर सकता है (सरकारी नौकर नहीं)।

❓ राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) – FAQs

1. राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) कौन होता है?

राज्य का महाधिवक्ता राज्य सरकार का मुख्य विधि सलाहकार होता है, जो कानूनी मामलों में सरकार को परामर्श देता है।


2. महाधिवक्ता का संवैधानिक आधार क्या है?

राज्य के महाधिवक्ता का प्रावधान अनुच्छेद 165 में किया गया है।


3. महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?

महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।


4. महाधिवक्ता बनने की योग्यता क्या होती है?

वह व्यक्ति जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के योग्य हो, उसे महाधिवक्ता बनाया जा सकता है।


5. महाधिवक्ता का कार्यकाल कितना होता है?

महाधिवक्ता राज्यपाल की इच्छा (pleasure of Governor) तक पद पर बना रहता है।


6. महाधिवक्ता के प्रमुख कार्य क्या हैं?

  • राज्य सरकार को विधिक परामर्श देना
  • उच्च न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करना
  • राज्य विधानमंडल में कानूनी मुद्दों पर राय देना

7. क्या महाधिवक्ता राज्य मंत्रिपरिषद का सदस्य होता है?

नहीं, महाधिवक्ता मंत्रिपरिषद का सदस्य नहीं होता।


8. क्या महाधिवक्ता राज्य विधानमंडल की कार्यवाही में भाग ले सकता है?

हाँ, महाधिवक्ता को विधानसभा/विधान परिषद में बोलने का अधिकार है, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं


9. क्या महाधिवक्ता निजी वकालत (Private Practice) कर सकता है?

हाँ, लेकिन वह राज्य सरकार के हितों के विरुद्ध कोई मामला नहीं ले सकता।


10. महाधिवक्ता और महान्यायवादी में मुख्य अंतर क्या है?

  • महाधिवक्ता → राज्य सरकार का विधि अधिकारी
  • महान्यायवादी → केंद्र सरकार का विधि अधिकारी

11. क्या महाधिवक्ता को हटाने की कोई विशेष प्रक्रिया है?

नहीं, उसे राज्यपाल की इच्छा से हटाया जा सकता है।


12. महाधिवक्ता किस न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है?

मुख्य रूप से उच्च न्यायालय (High Court) में।


13. क्या महाधिवक्ता की सलाह बाध्यकारी होती है?

नहीं, उसकी सलाह सलाहकारी (Advisory) प्रकृति की होती है।

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