केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) भारत की प्रमुख जाँच एजेंसी है। यह न तो एक संवैधानिक निकाय है और न ही एक वैधानिक निकाय, बल्कि यह अपनी शक्तियाँ एक पुराने कानून ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946’ से प्राप्त करती है।

I. स्थापना और संगठन

  1. CBI की स्थापना 1963 में गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी।
  2. इसकी स्थापना की सिफारिश संथानम समिति (1962-64) ने की थी।
  3. वर्तमान में CBI कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
  4. CBI एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) नहीं है
  5. यह अपनी जाँच की शक्तियाँ दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946 से प्राप्त करती है।
  6. यह भारत सरकार की मुख्य जाँच एजेंसी है और भ्रष्टाचार रोकने में CVC की सहायता करती है।
  7. यह ‘इंटरपोल’ (Interpol) के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में भी कार्य करती है।
  8. नारा (Motto): उद्यम, निष्पक्षता और अखंडता (Industry, Impartiality and Integrity)।

II. निदेशक और नियुक्ति

  1. CBI का प्रमुख निदेशक (Director) होता है, जिसे पुलिस महानिदेशक (DGP) का दर्जा प्राप्त होता है।
  2. 2014 के लोकपाल अधिनियम के अनुसार, CBI निदेशक की नियुक्ति राष्ट्रपति एक तीन-सदस्यीय समिति की सिफारिश पर करता है।
  3. समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष का नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट का जज।
  4. कार्यकाल: CVC अधिनियम, 2003 के तहत CBI निदेशक को 2 वर्ष के कार्यकाल की सुरक्षा प्रदान की गई है।
  5. (हाल के अध्यादेश के अनुसार, कार्यकाल को 1-1 वर्ष करके अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है)।

III. कार्य और अधिकार क्षेत्र

  1. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और कदाचार के मामलों की जाँच करना।
  2. राजकोषीय और आर्थिक कानूनों के उल्लंघन के मामलों की जाँच (जैसे सीमा शुल्क, विदेशी मुद्रा आदि)।
  3. पेशेवर अपराधियों के संगठित गिरोहों द्वारा किए गए गंभीर अपराधों की जाँच करना।
  4. भ्रष्टाचार विरोधी जाँच में CVC और लोकपाल की सहायता करना।
  5. राज्य सरकार के अनुरोध पर या सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के आदेश पर किसी भी मामले की जाँच अपने हाथ में लेना।
  6. सीमा: CBI किसी राज्य में जाँच करने के लिए संबंधित राज्य सरकार की सहमति (Consent) पर निर्भर करती है।
  7. केंद्र शासित प्रदेशों में जाँच के लिए इसे किसी सहमति की आवश्यकता नहीं होती।
  8. CBI को अक्सर ‘पिंजरे में बंद तोता’ (Caged Parrot) कहा गया है क्योंकि इसकी स्वायत्तता पर सवाल उठते रहे हैं।

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