मंत्रिमंडलीय समितियाँ: कार्य, प्रकार और महत्व | Cabinet Committees in Hindi Notes

“भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में मंत्रिमंडलीय समितियाँ ‘अतिरिक्त-संवैधानिक’ (Extra-Constitutional) निकाय हैं, जिसका अर्थ है कि इनका उल्लेख मूल संविधान में नहीं है, बल्कि इन्हें ‘कार्य संचालन नियमों’ (Rules of Business) के तहत बनाया गया है। ये समितियाँ मंत्रिमंडल के कार्यभार को कम करती हैं और जटिल नीतिगत मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श करने में मदद करती हैं। इन समितियों का गठन प्रधानमंत्री द्वारा समय की आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।”

शक्तिशाली मंत्रिमंडलीय समितियाँ प्रधानमंत्री (मुख्य अध्यक्ष) राजनैतिक मामले (सुपर कैबिनेट) आर्थिक मामले (CCEA) निवेश व आर्थिक नीतियां सुरक्षा संबंधी (CCS) रक्षा व आंतरिक सुरक्षा नियुक्ति समिति (ACC) शीर्ष सरकारी नियुक्तियां संसदीय मामले अध्यक्ष: गृह मंत्री (अपवाद) © 2026 | pdfnotes.in | विकास सिंह द्वारा विशेष डिजाइन

मंत्रिमंडलीय समितियाँ (Cabinet Committees)

मंत्रिमंडल के भारी कार्यभार को कम करने और विशेषज्ञता के साथ निर्णय लेने के लिए ‘कार्य संचालन नियमों, 1961’ के तहत इन समितियों का गठन किया गया है।

मुख्य विशेषताएँ (Key Features)

  • प्रकृति: ये ‘अतिरिक्त-संवैधानिक’ (Extra-Constitutional) निकाय हैं।
  • गठन: इनका गठन प्रधानमंत्री द्वारा समय की आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।
  • प्रकार: ये दो प्रकार की होती हैं— स्थायी (निरंतर कार्य करने वाली) और तदर्थ (विशेष उद्देश्य के लिए)।
  • सदस्यता: इनकी संख्या आमतौर पर 3 से 8 होती है। इनमें अधिकांशतः कैबिनेट मंत्री होते हैं।
  • अध्यक्षता: अधिकांश समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। (विशेष नोट: यदि पीएम किसी समिति के सदस्य हैं, तो वही उसके अध्यक्ष होंगे)।

प्रमुख मंत्रिमंडलीय समितियाँ और उनके उत्तरदायित्व

वर्तमान में भारत सरकार के सुचारू संचालन के लिए 8 स्थायी समितियाँ हैं, जिनमें से ये 4 सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:

1. राजनैतिक मामलों की समिति (Political Affairs Committee)

  • उपनाम: इसे “सुपर कैबिनेट” (Super Cabinet) कहा जाता है।
  • कार्य: यह केंद्र सरकार की सबसे शक्तिशाली समिति है जो सभी महत्वपूर्ण घरेलू और विदेशी राजनैतिक मामलों पर निर्णय लेती है।
  • अध्यक्षता: प्रधानमंत्री।

2. आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA)

  • कार्य: यह देश की आर्थिक प्रवृत्तियों की समीक्षा करती है और सरकारी निवेश, कीमतों के निर्धारण और आर्थिक नीतियों में समन्वय स्थापित करती है। यह ₹1000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार है।
  • अध्यक्षता: प्रधानमंत्री।

3. सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCS)

  • कार्य: यह रक्षा खर्च, राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और विदेशी रक्षा सौदों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम निर्णय लेती है।
  • अध्यक्षता: प्रधानमंत्री।
  • सदस्य: इसमें प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री शामिल होते हैं।

4. नियुक्ति समिति (ACC – Appointments Committee)

  • कार्य: यह केंद्रीय सचिवालय, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और वित्तीय संस्थानों के सभी शीर्ष पदों (जैसे— सचिव, डीजीपी, बैंक प्रमुख) पर नियुक्तियों का फैसला करती है।
  • अध्यक्षता: प्रधानमंत्री।

एक नज़र में महत्वपूर्ण समितियाँ:

समिति का नामअध्यक्षतामुख्य कार्य
राजनैतिक मामलों की समितिप्रधानमंत्रीनीतिगत और राजनैतिक निर्णय (सुपर कैबिनेट)
आर्थिक मामलों की समिति (CCEA)प्रधानमंत्रीनिवेश, सरकारी खर्च और आर्थिक नीतियां
सुरक्षा संबंधी समिति (CCS)प्रधानमंत्रीरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और विदेश रक्षा संबंध
नियुक्ति समिति (ACC)प्रधानमंत्रीउच्च स्तरीय सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति
संसदीय मामलों की समितिगृह मंत्रीसंसद के सत्र और विधायी कार्यों का प्रबंधन

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

संसदीय मामलों की समिति एकमात्र ऐसी प्रमुख समिति है जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि गृह मंत्री करते हैं। इसके अलावा, यदि किसी भी समिति में प्रधानमंत्री सदस्य हैं, तो वह स्वतः ही उसके अध्यक्ष बन जाते हैं।”

मंत्रिमंडलीय समितियाँ न केवल कैबिनेट के कार्यभार को कम करती हैं, बल्कि ‘सहयोगी संघवाद’ और ‘विशेषज्ञ परामर्श’ का भी आधार हैं। यह एक ऐसा मंच है जहाँ जटिल मुद्दों पर कैबिनेट की औपचारिक बैठक से पहले ही विस्तार से विचार हो जाता है।”

मंत्रिमंडलीय समितियाँ: संरचनात्मक ढांचा 1 गठन व अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा गठित और नियंत्रित 2 दो मुख्य प्रकार स्थायी (Standing) तदर्थ (Ad-hoc) 3 निर्णय प्रक्रिया गहरा विश्लेषण व मंत्रालय समन्वय 4 सुपर कैबिनेट राजनैतिक मामलों की मुख्य समिति 5 अपवाद (Notice) संसदीय समिति अध्यक्ष: गृह मंत्री Cabinet Committee Framework | pdfnotes.in | विकास सिंह

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

विशेषताएँ और कार्यप्रणाली

  1. मंत्रिमंडलीय समितियाँ संविधान के मूल पाठ में नहीं थीं (ये एक्स्ट्रा-कॉन्स्टिट्यूशनल हैं)।
  2. इनका निर्माण ‘भारत सरकार के कार्य आवंटन नियम, 1961’ के तहत किया गया है।
  3. ये समितियाँ दो प्रकार की होती हैं: स्थायी (Standing) और तदर्थ (Ad hoc)।
  4. स्थायी समितियाँ: ये निरंतर प्रकृति की होती हैं और स्थायी रूप से कार्य करती हैं।
  5. तदर्थ समितियाँ: ये किसी विशेष समस्या को हल करने के लिए बनाई जाती हैं और कार्य पूरा होने पर भंग कर दी जाती हैं।
  6. इन समितियों का गठन प्रधानमंत्री द्वारा समय और परिस्थिति की मांग के अनुसार किया जाता है।
  7. इनकी सदस्य संख्या 3 से 8 तक हो सकती है।
  8. आमतौर पर इनमें केवल कैबिनेट मंत्री ही शामिल होते हैं, लेकिन कभी-कभी गैर-कैबिनेट मंत्री भी सदस्य हो सकते हैं।
  9. इन समितियों में न केवल संबंधित मंत्रालयों के प्रभारी मंत्री होते हैं, बल्कि वरिष्ठ मंत्री भी शामिल होते हैं।
  10. अधिकांश समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
  11. यदि किसी समिति में प्रधानमंत्री सदस्य हैं, तो वे अनिवार्य रूप से उसके अध्यक्ष होते हैं।
  12. गृह मंत्री या वित्त मंत्री भी कुछ समितियों की अध्यक्षता कर सकते हैं, लेकिन पीएम वाली समितियों में नहीं।
  13. ये समितियाँ ‘विभाजन के सिद्धांत’ (Principle of Division) पर आधारित हैं।
  14. इनका मुख्य कार्य कैबिनेट के कार्यभार को कम करना है।
  15. ये समितियाँ नीतिगत मुद्दों का गहरा विश्लेषण करती हैं और सिफारिशें देती हैं।
  16. कई बार कैबिनेट इन समितियों के फैसलों की केवल समीक्षा करती है, उन्हें बदलती नहीं।
  17. ये समितियाँ सरकार के भीतर समन्वय (Coordination) स्थापित करने का शक्तिशाली माध्यम हैं।

प्रमुख समितियाँ और उनके कार्य

  1. वर्तमान में 8 मुख्य स्थायी समितियाँ कार्य कर रही हैं।
  2. राजनैतिक मामलों की समिति: यह सबसे शक्तिशाली समिति है, जिसे ‘सुपर कैबिनेट’ भी कहा जाता है।
  3. यह समिति घरेलू और विदेशी मामलों से संबंधित सभी नीतिगत निर्णयों को देखती है।
  4. आर्थिक मामलों की समिति (CCEA): यह आर्थिक क्षेत्र के सरकारी कार्यों का निर्देशन और समन्वय करती है।
  5. नियुक्ति समिति (ACC): यह केंद्रीय सचिवालय, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों के शीर्ष पदों पर नियुक्तियाँ तय करती है।
  6. संसदीय मामलों की समिति: यह संसद में सरकार की भूमिका और कार्यों को देखती है।
  7. महत्वपूर्ण तथ्य: संसदीय मामलों की समिति की अध्यक्षता गृह मंत्री करते हैं, न कि प्रधानमंत्री।
  8. सुरक्षा संबंधी समिति (CCS): यह रक्षा, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेती है।
  9. निवेश और विकास पर बनी समिति तथा रोजगार और कौशल विकास पर बनी समिति नई समितियाँ हैं।
  10. तदर्थ समितियाँ समय-समय पर विशेष मुद्दों जैसे—जीएसटी, नई शिक्षा नीति आदि के लिए बनाई जाती हैं।
  11. ये समितियाँ सरकार की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं।

FAQ ( महत्वपूर्ण प्रश्न)

प्रश्न 1: क्या मंत्रिमंडलीय समितियाँ संवैधानिक निकाय हैं?

उत्तर: नहीं, ये अतिरिक्त-संवैधानिक (Extra-Constitutional) निकाय हैं। इनका निर्माण सरकार के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए किया गया है।

प्रश्न 2: ‘सुपर कैबिनेट’ किसे कहा जाता है?

उत्तर: राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति को इसकी व्यापक शक्तियों के कारण ‘सुपर कैबिनेट’ कहा जाता है।

प्रश्न 3: क्या इन समितियों के निर्णयों को मंत्रिमंडल बदल सकता है?

उत्तर: हाँ, समितियाँ मंत्रिमंडल की ओर से निर्णय लेती हैं, लेकिन उनके द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा की जा सकती है।

प्रश्न 4: सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) का अध्यक्ष कौन होता है?

उत्तर: सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।

प्रश्न 5: क्या कोई गैर-कैबिनेट मंत्री समिति का सदस्य हो सकता है?

उत्तर: हाँ, विशेष परिस्थितियों में राज्य मंत्रियों को भी इन समितियों में शामिल किया जा सकता है।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।