भारतीय राजव्यवस्था (Polity) में ‘राष्ट्रपति’ (The President) का पद सबसे महत्वपूर्ण है। वह भारत का प्रथम नागरिक होता है और राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुदृढ़ता का प्रतीक है। भारतीय संविधान के भाग 5 के अंतर्गत अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ की कार्यपालिका का वर्णन है, जिसमें राष्ट्रपति सर्वोच्च पद पर होते हैं।
I. परिचय, निर्वाचन और अर्हताएँ
- भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है।
- वह भारतीय राज्य का प्रमुख (Head of the State) होता है।
- अनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
- अनुच्छेद 53: संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।
- राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है।
- निर्वाचक मंडल में शामिल: संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य।
- निर्वाचक मंडल में शामिल: राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- निर्वाचक मंडल में शामिल: दिल्ली और पुडुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (70वें संशोधन 1992 द्वारा)।
- संसद और विधानसभाओं के मनोनीत (Nominated) सदस्य चुनाव में भाग नहीं लेते।
- राज्य विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्य भी भाग नहीं लेते।
- राष्ट्रपति का चुनाव ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व’ के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत’ (Single Transferable Vote) द्वारा होता है।
- चुनाव गुप्त मतदान द्वारा किया जाता है।
- राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार का नाम 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदक द्वारा समर्थित होना चाहिए।
- उम्मीदवार को ₹15,000 की जमानत राशि RBI में जमा करनी होती है।
- यदि उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 भाग प्राप्त नहीं करता, तो जमानत राशि जब्त हो जाती है।
- अर्हताएँ (अनुच्छेद 58): वह भारत का नागरिक हो।
- उसकी न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
- वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
- वह केंद्र, राज्य या स्थानीय सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
- राष्ट्रपति की पदावधि (Tenure) पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष होती है।
- वह अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित करता है।
- उपराष्ट्रपति इसकी सूचना तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को देता है।
- अनुच्छेद 57: भारत में एक व्यक्ति जितनी बार चाहे राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो सकता है।
- अमेरिका में एक व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।
- राष्ट्रपति को शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) दिलाते हैं।
- CJI की अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं।
- राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों की जांच और फैसला उच्चतम न्यायालय (SC) द्वारा किया जाता है।
- SC का फैसला अंतिम होता है।
- यदि किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन अवैध घोषित होता है, तो उसके द्वारा किए गए कार्य अवैध नहीं माने जाते।
- राष्ट्रपति को कार्यकाल के दौरान आपराधिक कार्यवाहियों से उन्मुक्ति (Immunity) प्राप्त है।
- राष्ट्रपति भवन उसका आधिकारिक निवास स्थान है।
- राष्ट्रपति का वेतन और भत्ते संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जो संचित निधि पर भारित होते हैं।
- कार्यकाल के दौरान उसके वेतन-भत्तों को कम नहीं किया जा सकता।
- राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
- यदि उपराष्ट्रपति का पद भी रिक्त हो, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) कार्यभार संभालते हैं।
- एम. हिदायतुल्ला एकमात्र CJI थे जिन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
- कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने की अधिकतम अवधि 6 महीने होती है।
- राष्ट्रपति का पद रिक्त होने के 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
- निर्वाचक मंडल में रिक्तता होने के आधार पर चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
- राष्ट्रपति के मत का मूल्य जनसंख्या और विधायकों की संख्या पर आधारित होता है।
- विधायक के मत का मूल्य = (राज्य की कुल जनसंख्या / निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या) × 1/1000।
- सांसद के मत का मूल्य = सभी राज्यों के विधायकों के मतों का कुल मूल्य / संसद के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या।
- वर्तमान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए 1971 की जनगणना को आधार माना गया है।
- राष्ट्रपति को उसके पद से केवल महाभियोग (Impeachment) द्वारा हटाया जा सकता है।
- महाभियोग का आधार केवल ‘संविधान का उल्लंघन’ है।
- संविधान में ‘संविधान का उल्लंघन’ वाक्य को परिभाषित नहीं किया गया है।
- महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है।
- प्रस्ताव पर सदन के कम से कम 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- राष्ट्रपति को 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।
- महाभियोग प्रस्ताव को सदन के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से पारित होना चाहिए।
II. कार्यपालिका, विधायी और वित्तीय शक्तियाँ
- संघ के सभी शासन संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर किए जाते हैं।
- वह प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
- वह भारत के महान्यायवादी (AGI) की नियुक्ति करता है।
- वह भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति करता है।
- वह मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करता है।
- वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करता है।
- वह राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति करता है।
- वह वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करता है।
- वह केंद्र सरकार के कार्यों के संचालन के लिए नियम बनाता है।
- वह प्रधानमंत्री से किसी भी प्रशासनिक मामले पर सूचना मांग सकता है।
- वह संसद का अभिन्न अंग होता है।
- वह संसद के अधिवेशन को आहूत (Summon) और सत्रावसान (Prorogue) कर सकता है।
- वह लोकसभा को भंग कर सकता है।
- वह संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुला सकता है।
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) करता है।
- वह प्रत्येक आम चुनाव के बाद और प्रतिवर्ष संसद के प्रथम सत्र को संबोधित करता है।
- वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है (कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा)।
- वह संसद में लंबित किसी विधेयक के संबंध में संदेश भेज सकता है।
- कोई भी विधेयक तब तक अधिनियम नहीं बनता जब तक राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर न कर दे।
- अनुच्छेद 123: संसद के सत्र में न होने पर राष्ट्रपति अध्यादेश (Ordinance) जारी कर सकता है।
- अध्यादेश की शक्ति संसद के अधिनियम के समान ही होती है।
- अध्यादेश को संसद की पुनः बैठक के 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना चाहिए।
- वह CAG, UPSC और वित्त आयोग की रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखता है।
- धन विधेयक (Money Bill) राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही लोकसभा में पेश होता है।
- वह वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) को संसद में रखवाता है।
- किसी भी अनुदान की मांग राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना नहीं की जा सकती।
- वह भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से अग्रिम भुगतान कर सकता है।
- वह प्रत्येक 5 वर्ष में वित्त आयोग का गठन करता है।
- वह उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
- अनुच्छेद 143: वह किसी कानूनी मामले पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट की सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं होती।
- अनुच्छेद 72: उसे अपराधियों की सजा को क्षमा (Pardon) करने की शक्ति प्राप्त है।
- वह मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह माफ कर सकता है।
- वह कोर्ट मार्शल (सैन्य अदालत) की सजा को भी माफ कर सकता है।
- क्षमादान की शक्ति कार्यपालिका शक्ति है, न्यायिक नहीं।
- वह भारतीय सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता है।
- वह थल सेना, जल सेना और वायु सेना के प्रमुखों की नियुक्ति करता है।
- वह संसद की अनुमति से युद्ध की घोषणा या शांति की संधि करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम पर ही किए जाते हैं।
- वह विदेशों में भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों को भेजता है और विदेशी राजदूतों का स्वागत करता है।
- उसे तीन प्रकार की आपातकालीन शक्तियाँ प्राप्त हैं (352, 356, 360)।
- राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान वह मौलिक अधिकारों को निलंबित कर सकता है।
- राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियाँ प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होती हैं।
- 42वें संशोधन ने राष्ट्रपति को सलाह मानने के लिए बाध्य किया।
- 44वें संशोधन ने राष्ट्रपति को सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए भेजने की अनुमति दी।
- पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य होती है।
- वह केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन सीधे या प्रशासकों के माध्यम से चलाता है।
- वह अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) की घोषणा और उनके प्रशासन को नियंत्रित कर सकता है।
- वह भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति करता है।
- एम. लक्ष्मीकांत के अनुसार, राष्ट्रपति “संवैधानिक रबर स्टैम्प” नहीं है, बल्कि उसके पास व्यापक गरिमा है।
III. वीटो शक्तियाँ, अध्यादेश और महत्वपूर्ण तथ्य
- संसद द्वारा पारित विधेयक पर राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं (अनुच्छेद 111)।
- वह अपनी सहमति दे सकता है (विधेयक कानून बन जाता है)।
- वह अपनी सहमति रोक सकता है (विधेयक समाप्त हो जाता है)।
- वह विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर)।
- आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto): विधेयक पर अपनी सहमति को पूरी तरह रोक लेना।
- निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto): विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद को वापस करना।
- यदि संसद उसी विधेयक को पुनः साधारण बहुमत से पारित कर दे, तो राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने ही होते हैं।
- पॉकेट वीटो (Pocket Veto): विधेयक पर न तो सहमति देना, न ही उसे वापस करना, बल्कि अनिश्चित काल तक लंबित रखना।
- भारत के राष्ट्रपति की ‘पॉकेट वीटो’ शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति से बड़ी है।
- अमेरिका में राष्ट्रपति को 10 दिन में विधेयक वापस करना होता है, भारत में कोई समय सीमा नहीं है।
- ज्ञानी जैल सिंह ने 1986 में ‘भारतीय डाक संशोधन विधेयक’ पर पॉकेट वीटो का प्रयोग किया था।
- राष्ट्रपति को संविधान संशोधन विधेयक पर वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है (24वां संशोधन 1971)।
- राज्य विधायिका के मामले में भी राष्ट्रपति के पास वीटो शक्ति होती है (अनुच्छेद 201)।
- राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के लिए आरक्षित विधेयक पर राष्ट्रपति पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकता है।
- अध्यादेश (अनुच्छेद 123) केवल उन विषयों पर जारी हो सकता है जिन पर संसद कानून बना सकती है।
- अध्यादेश का भी न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) हो सकता है।
- राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता होती है।
- वह किसी भी समय अध्यादेश को वापस ले सकता है।
- क्षमादान के तहत ‘लघुकरण’ (Commutation) का अर्थ है सजा के स्वरूप को बदलना (कठोर से साधारण)।
- ‘परिहार’ (Remission) का अर्थ है सजा की प्रकृति बदले बिना उसकी अवधि कम करना।
- ‘विराम’ (Respite) का अर्थ है विशेष परिस्थितियों (जैसे गर्भावस्था) में सजा कम करना।
- ‘प्रविलंबन’ (Reprieve) का अर्थ है किसी सजा (विशेषकर मृत्युदंड) पर अस्थायी रोक लगाना।
- राष्ट्रपति की विवेकाधीन शक्तियाँ (Constitutional Discretion) संविधान में नहीं दी गई हैं।
- हालांकि, कुछ ‘परिस्थितिजन्य विवेकाधीन’ (Situational Discretion) शक्तियाँ प्राप्त हैं।
- त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में वह अपने विवेक से प्रधानमंत्री चुन सकता है।
- बहुमत खो देने वाली मंत्रिपरिषद द्वारा लोकसभा भंग करने की सलाह को वह अस्वीकार कर सकता है।
- यदि मंत्रिपरिषद अचानक बर्खास्त हो जाए या प्रधानमंत्री की मृत्यु हो जाए, तो वह कार्यकारी व्यवस्था कर सकता है।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे।
- वे एकमात्र राष्ट्रपति थे जो दो कार्यकाल तक पद पर रहे।
- डॉ. एस. राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति और प्रथम उपराष्ट्रपति थे।
- डॉ. जाकिर हुसैन पद पर मरने वाले प्रथम राष्ट्रपति थे।
- वी.वी. गिरी प्रथम कार्यवाहक राष्ट्रपति थे।
- नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र राष्ट्रपति थे जो निर्विरोध (Unopposed) चुने गए।
- वे लोकसभा के अध्यक्ष भी रह चुके थे।
- ज्ञानी जैल सिंह प्रथम सिख राष्ट्रपति थे।
- डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को ‘मिसाइल मैन’ और ‘जनता का राष्ट्रपति’ कहा जाता है।
- श्रीमती प्रतिभा पाटिल भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति थीं।
- श्री रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति थे।
- श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत की वर्तमान और प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
- वे स्वतंत्र भारत में जन्मी पहली राष्ट्रपति हैं।
- राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग में संसद के मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं।
- महाभियोग में राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते।
- भारत में आज तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है।
- राष्ट्रपति की वीटो शक्ति का उद्देश्य जल्दबाजी और असंवैधानिक कानून को रोकना है।
- ‘धन विधेयक’ को राष्ट्रपति कभी पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकता।
- राष्ट्रपति की शक्तियों का वास्तविक प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद करती है।
- राष्ट्रपति को संविधान का संरक्षक (Protector) माना जाता है।
- राष्ट्रपति भारत की संप्रभुता का प्रतीक है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति वास्तविक प्रमुख होता है, जबकि भारतीय राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख।
- राष्ट्रपति का पद केवल एक अलंकारिक पद नहीं है, बल्कि संकट के समय यह एक सुरक्षा वाल्व की तरह कार्य करता है।
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