मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) – Part 2

मौलिक अधिकारों के इस भाग में हम अनुच्छेद 23 से 35 तक के महत्वपूर्ण तथ्यों को कवर करेंगे, जो भारतीय नागरिकों को शोषण और अन्याय के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं।

I. शोषण के विरुद्ध और धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 23-28)

  1. अनुच्छेद 23: मानव तस्करी (Human Trafficking) और जबरन श्रम (Begar) का निषेध करता है।
  2. यह अधिकार नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों को प्राप्त है।
  3. अनुच्छेद 23 के तहत ‘बंधुआ मजदूरी’ को समाप्त किया गया है।
  4. राज्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अनिवार्य सेवा (जैसे सैन्य सेवा) लागू कर सकता है, जो इसका अपवाद है।
  5. अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का निषेध।
  6. 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी खतरनाक काम (खदान, फैक्ट्री) में लगाना प्रतिबंधित है।
  7. बाल श्रम निषेध एवं नियमन अधिनियम 1986 इसी अनुच्छेद को प्रभावी बनाने के लिए बनाया गया।
  8. अनुच्छेद 25: अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
  9. यह व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
  10. सिखों द्वारा ‘कृपाण’ धारण करना और लेकर चलना अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार है।
  11. अनुच्छेद 25 के तहत ‘हिंदू’ शब्द में जैन, बौद्ध और सिख भी शामिल हैं।
  12. धार्मिक स्वतंत्रता असीमित नहीं है; यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।
  13. अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता (सामूहिक धार्मिक अधिकार)।
  14. धार्मिक संस्थाएं जंगम (Movable) और स्थावर (Immovable) संपत्ति अर्जित कर सकती हैं।
  15. अनुच्छेद 27: किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों (Taxes) के संदाय से स्वतंत्रता।
  16. राज्य किसी भी व्यक्ति को किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए टैक्स देने को मजबूर नहीं कर सकता।
  17. राज्य टैक्स के पैसे का उपयोग किसी एक धर्म के उत्थान के लिए नहीं कर सकता।
  18. शुल्क (Fees) लगाया जा सकता है, लेकिन टैक्स नहीं (क्योंकि शुल्क का उद्देश्य सेवा प्रदान करना है)।
  19. अनुच्छेद 28: सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा का निषेध।
  20. राज्य द्वारा पूरी तरह वित्तपोषित संस्थानों में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
  21. निजी संस्थानों में धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है, लेकिन छात्र की सहमति अनिवार्य है।

II. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)

  1. अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण।
  2. भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के वर्ग को अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार है।
  3. अनुच्छेद 29 केवल अल्पसंख्यकों के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के सभी वर्गों के लिए है।
  4. अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थानों की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्ग का अधिकार।
  5. अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान खोलने का अधिकार है।
  6. सहायता देते समय राज्य किसी संस्थान के साथ इस आधार पर भेदभाव नहीं करेगा कि वह अल्पसंख्यक प्रबंध के अधीन है।
  7. संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द की परिभाषा नहीं दी गई है।
  8. अल्पसंख्यकों का निर्धारण धर्म या भाषा के आधार पर किया जाता है।

III. संवैधानिक उपचारों का अधिकार: अनुच्छेद 32 (रिट्स)

  1. अनुच्छेद 32: मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए उपचार।
  2. डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इसे “संविधान की आत्मा और हृदय” कहा था।
  3. इसके बिना अन्य सभी मौलिक अधिकार अर्थहीन हैं।
  4. अनुच्छेद 32 के तहत व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) जा सकता है।
  5. सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए 5 प्रकार की रिट (Writs) जारी कर सकता है।
  6. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): “व्यक्ति को हमारे समक्ष प्रस्तुत करो।”
  7. यह अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को स्वतंत्र कराने के लिए है।
  8. परमादेश (Mandamus): “हम आदेश देते हैं।”
  9. यह सार्वजनिक अधिकारियों को उनके कर्तव्य पालन के लिए आदेश देने हेतु जारी किया जाता है।
  10. प्रतिषेध (Prohibition): “रोकना।”
  11. उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालतों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने के लिए।
  12. उत्प्रेषण (Certiorari): “पूर्णतः सूचित होना।”
  13. यह किसी मामले को निचली अदालत से ऊपर की अदालत में स्थानांतरित करने के लिए जारी किया जाता है।
  14. अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto): “किस अधिकार से?”
  15. किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद को अवैध रूप से धारण करने की जांच के लिए।
  16. उच्च न्यायालय (High Court) अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी कर सकता है।
  17. हाई कोर्ट की रिट शक्ति सुप्रीम कोर्ट से व्यापक है क्योंकि वह कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
  18. आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 32 के तहत अदालत जाने का अधिकार निलंबित किया जा सकता है।

IV. अन्य प्रावधान और सीमाएं (अनुच्छेद 33-35)

  1. अनुच्छेद 33: सशस्त्र बलों के मौलिक अधिकारों को संसद द्वारा सीमित या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  2. इसका उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना और कर्तव्यों का उचित पालन सुनिश्चित करना है।
  3. अनुच्छेद 34: जब किसी क्षेत्र में ‘मार्शल लॉ’ (सैन्य शासन) लागू हो, तब मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध।
  4. मार्शल लॉ और राष्ट्रीय आपातकाल दो अलग-अलग स्थितियां हैं।
  5. अनुच्छेद 35: केवल संसद को ही मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति है।
  6. राज्य विधानमंडलों के पास यह शक्ति नहीं है ताकि पूरे देश में अधिकारों की एकरूपता बनी रहे।
  7. अस्पृश्यता (Art 17) और बाल श्रम (Art 24) के लिए दंड निर्धारित करने का अधिकार संसद को है।
  8. मौलिक अधिकार नकारात्मक (राज्य पर रोक) और सकारात्मक (व्यक्ति को सुविधा) दोनों प्रकार के हैं।
  9. गोलकनाथ मामला (1967): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद मौलिक अधिकारों को छीन नहीं सकती।
  10. 24वां संशोधन (1971): संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से को बदलने की शक्ति दी गई।
  11. केशवानंद भारती मामला (1973): संसद संशोधन कर सकती है लेकिन ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) को नहीं बदल सकती।
  12. मौलिक अधिकार भारत में ‘कानून के शासन’ के आधार स्तंभ हैं।
  13. एम. लक्ष्मीकांत के अनुसार, भाग 3 लोकतंत्र का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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