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I. सहायक संधि और विलय की शुरुआत (Policy of Annexation)
- भारत में ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) का व्यापक प्रयोग किसने किया? – लॉर्ड वेलेजली।
- सहायक संधि स्वीकार करने वाला पहला भारतीय राज्य कौन सा था? – हैदराबाद (1798)।
- अवध ने अंग्रेजों के साथ सहायक संधि पर हस्ताक्षर कब किए? – 1801 ई.।
- मैसूर और तंजौर ने सहायक संधि कब स्वीकार की? – 1799 ई.।
- पेशवा बाजीराव द्वितीय ने किस संधि के तहत सहायक संधि स्वीकार की? – बेसिन की संधि (1802)।
- सहायक संधि स्वीकार करने वाले अन्य प्रमुख राज्य कौन थे? – भोंसले (1803), सिंधिया (1804), जोधपुर, जयपुर और भरतपुर।
- सहायक संधि का मुख्य प्रावधान क्या था? – राज्य के खर्च पर ब्रिटिश सेना रखना और विदेश नीति अंग्रेजों को सौंपना।
II. अवध का विलय (Annexation of Awadh)
- अवध को ब्रिटिश साम्राज्य में कब मिलाया गया? – 1856 ई.।
- अवध के विलय के समय वहाँ का नवाब कौन था? – वाजिद अली शाह।
- अवध का विलय किस आधार पर किया गया था? – कुशासन (Mis-governance) का आरोप लगाकर।
- किस अंग्रेज अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अवध का विलय हुआ? – आउट्रम (Outram)।
- अवध के विलय के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड डलहौजी।
- डलहौजी ने अवध के बारे में क्या कहा था? – “यह चेरी (फल) एक दिन हमारे ही मुँह में गिरेगी”।
- अवध को किस रूप में जाना जाता था? – ‘नर्सरी ऑफ बंगाल आर्मी’ (क्योंकि यहाँ के सैनिक ब्रिटिश सेना में अधिक थे)।
- अवध के विलय ने 1857 के विद्रोह की नींव कैसे रखी? – सैनिकों और तालुकेदारों में भारी असंतोष पैदा करके।
III. सिंध का विलय (Annexation of Sindh)
- सिंध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किस वर्ष हुआ? – 1843 ई.।
- सिंध विजय के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड एलेनबरो।
- सिंध विजय का श्रेय किस ब्रिटिश सेनापति को दिया जाता है? – चार्ल्स नेपियर।
- चार्ल्स नेपियर ने सिंध विजय के बाद क्या कहा था? – “हमें सिंध (पाप) करने का कोई अधिकार नहीं था, फिर भी हमने किया”।
- सिंध के शासकों को क्या कहा जाता था? – अमीर।
- अंग्रेजों ने सिंध पर अधिकार किस डर से किया था? – रूस के बढ़ते प्रभाव और अफगान युद्ध की सुरक्षा के कारण।
IV. पंजाब का विलय (Annexation of Punjab)
- पंजाब का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किस वर्ष हुआ? – 1849 ई.।
- पंजाब विलय के समय गवर्नर जनरल कौन था? – लॉर्ड डलहौजी।
- पंजाब के किस सिख महाराजा के समय विलय हुआ? – महाराजा दलीप सिंह।
- प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46) किस संधि से समाप्त हुआ? – लाहौर की संधि।
- द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49) में सिखों की निर्णायक हार कहाँ हुई? – गुजरात का युद्ध (चिनयावाला के पास)।
- पंजाब के विलय के बाद वहाँ के शासन के लिए कितने सदस्यों की परिषद बनी? – तीन सदस्य (लॉरेंस भाई और चार्ल्स मानसेल)।
- प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा दलीप सिंह से लेकर किसे भेजा गया? – महारानी विक्टोरिया को।
- महाराजा दलीप सिंह को पेंशन देकर कहाँ भेज दिया गया? – इंग्लैंड।
V. व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
- ‘व्यपगत का सिद्धांत’ या हड़प नीति किसने शुरू की थी? – लॉर्ड डलहौजी।
- इस नीति के तहत सबसे पहले किस राज्य का विलय हुआ? – सतारा (1848)।
- जैतपुर और संबलपुर का विलय कब हुआ? – 1849 ई.।
- बघाट (हिमाचल प्रदेश) का विलय कब किया गया? – 1850 ई.।
- उदयपुर का विलय ब्रिटिश साम्राज्य में कब हुआ? – 1852 ई.।
- झांसी का विलय डलहौजी ने कब किया? – 1853 ई.।
- नागपुर का विलय किस वर्ष हुआ? – 1854 ई.।
- करौली के विलय को किसने रद्द कर दिया था? – कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने।
- व्यपगत के सिद्धांत का मुख्य तर्क क्या था? – दत्तक पुत्र (Adopted son) को उत्तराधिकारी न मानना।
VI. अन्य राज्यों का विलय और नियंत्रण
- नेपाल (गोरखा) युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ? – सुगौली की संधि (1816)।
- इस संधि के बाद अंग्रेजों को कौन से पर्वतीय क्षेत्र मिले? – गढ़वाल, कुमाऊँ और शिमला।
- प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के बाद कौन सी संधि हुई? – याण्डबू की संधि (1826)।
- लॉर्ड विलियम बेंटिक ने मैसूर का प्रशासन अपने हाथ में कब लिया? – 1831 (कुशासन के आधार पर)।
- बेंटिक ने कूर्ग और कछार का विलय कब किया? – 1834 ई.।
- अंग्रेजों ने सिक्किम का कुछ हिस्सा कब हड़पा? – 1850 ई.।
- बरार का क्षेत्र हैदराबाद के निजाम से क्यों छीना गया? – सैन्य खर्च का कर्ज न चुका पाने के कारण (1853)।
VII. विलय की नीतियों का प्रभाव
- डलहौजी की विस्तारवादी नीति का अंतिम परिणाम क्या था? – 1857 का महाविद्रोह।
- देशी रियासतों के विलय से कौन सा वर्ग सबसे अधिक बेरोजगार हुआ? – सैनिक और दरबारी कर्मचारी।
- किस एक्ट के बाद अंग्रेजों ने रियासतों के विलय की नीति छोड़ दी? – 1858 का भारत सरकार अधिनियम।
- 1858 के बाद ब्रिटिश नीति क्या बनी? – रियासतों को “अधीनस्थ संघ” बनाना (Annexation बंद किया गया)।
- भारतीय राजाओं को ‘गोद लेने का अधिकार’ दोबारा कब मिला? – महारानी की उद्घोषणा (1858) के बाद।