भारतीय समाज ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक असमानताओं से ग्रस्त रहा है। समाज के कुछ वर्ग लंबे समय तक शोषण, भेदभाव और पिछड़ेपन का शिकार रहे।
इसी असमानता को दूर करने और समानता आधारित न्याय स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में विशेष वर्गों के लिए प्रावधान किए गए हैं।
ये प्रावधान भारत को एक सामाजिक न्याय आधारित कल्याणकारी राज्य बनाते हैं।
विशेष वर्ग से तात्पर्य
विशेष वर्ग वे सामाजिक समूह हैं जिन्हें ऐतिहासिक या सामाजिक कारणों से समान अवसर प्राप्त नहीं हो पाए, जैसे:
- अनुसूचित जातियाँ (SC)
- अनुसूचित जनजातियाँ (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- महिलाएँ
- बच्चे
- अल्पसंख्यक
- दिव्यांग (Persons with Disabilities)
विशेष प्रावधानों का संवैधानिक आधार
भारतीय संविधान में विशेष वर्गों के लिए प्रावधान निम्नलिखित भागों में किए गए हैं:
- मौलिक अधिकार
- नीति निदेशक तत्व
- विशेष अनुच्छेद
- आरक्षण व्यवस्था
📌 इन प्रावधानों का उद्देश्य समानता का वास्तविक रूप (Substantive Equality) स्थापित करना है।
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए प्रावधान
🔹 अनुच्छेद 15(4)
- राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति
🔹 अनुच्छेद 16(4)
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण
🔹 अनुच्छेद 17
- अस्पृश्यता का उन्मूलन
🔹 अनुच्छेद 46
- SC/ST के शैक्षिक और आर्थिक हितों का संरक्षण
🔹 राजनीतिक आरक्षण
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षित सीटें (अनुच्छेद 330, 332)
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए प्रावधान
- शिक्षा और सरकारी सेवाओं में आरक्षण
- मंडल आयोग की सिफारिशें
- क्रीमी लेयर की अवधारणा
📌 उद्देश्य: सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करना
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान
🔹 अनुच्छेद 15(3)
- महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति
🔹 प्रमुख उपाय:
- शिक्षा में प्रोत्साहन
- मातृत्व लाभ
- कार्यस्थल पर सुरक्षा
- पंचायतों और नगर निकायों में आरक्षण (73वां व 74वां संशोधन)
📌 महिला सशक्तिकरण भारतीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
बच्चों के लिए प्रावधान
- निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा (अनुच्छेद 21-A)
- बाल श्रम निषेध
- पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा
📌 बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं।
अल्पसंख्यकों के लिए प्रावधान
🔹 अनुच्छेद 29
- संस्कृति और भाषा की रक्षा
🔹 अनुच्छेद 30
- शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और संचालन का अधिकार
📌 अल्पसंख्यकों को अपनी पहचान बनाए रखने का संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रावधान
- समान अवसर
- आरक्षण
- विशेष शिक्षा और रोजगार योजनाएँ
📌 समानता का अर्थ समान व्यवहार नहीं, बल्कि समान अवसर है।
आरक्षण व्यवस्था का महत्व
आरक्षण का उद्देश्य:
- ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई
- सामाजिक समावेशन
- समान अवसर उपलब्ध कराना
⚠️ आरक्षण कोई दया नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है।
विशेष प्रावधानों की आलोचना
- आरक्षण की राजनीति
- योग्यता बनाम समानता की बहस
- लाभों का असमान वितरण
- क्रीमी लेयर की समस्या
📌 फिर भी, सामाजिक न्याय के लिए ये प्रावधान आवश्यक हैं।
लोकतंत्र में विशेष प्रावधानों का महत्व
- सामाजिक समरसता
- समान अवसर
- राष्ट्रीय एकता
- समावेशी विकास
निष्कर्ष (Conclusion)
विशेष वर्गों के लिए प्रावधान भारतीय संविधान की सामाजिक न्याय की भावना को दर्शाते हैं। ये प्रावधान न केवल कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ते हैं, बल्कि एक समतामूलक और समावेशी समाज की स्थापना में भी सहायक हैं।
इनका उद्देश्य विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि समानता सुनिश्चित करना है।
FAQs (Frequently Asked Questions)
❓ विशेष वर्गों के लिए प्रावधान क्यों आवश्यक हैं?
ऐतिहासिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए।
❓ महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किस अनुच्छेद में हैं?
अनुच्छेद 15(3)।
❓ आरक्षण का संवैधानिक आधार क्या है?
अनुच्छेद 15(4), 16(4), 330, 332।
❓ क्या आरक्षण हमेशा के लिए है?
नहीं, यह अस्थायी उपाय माना गया है।
❓ अल्पसंख्यकों को कौन से अधिकार प्राप्त हैं?
संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29–30)।
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