संघ एवं इसका राज्य क्षेत्र (Union and its Territory)

भारतीय संविधान के भाग 1 के तहत अनुच्छेद 1 से 4 तक संघ और इसके राज्य क्षेत्रों (Union and its Territory) का वर्णन किया गया है। यह अध्याय भारत की भौगोलिक सीमाओं और राज्यों के निर्माण की शक्ति को स्पष्ट करता है। एम. लक्ष्मीकांत पुस्तक पर आधारित 100+ मास्टर वन-लाइनर्स नीचे दिए गए हैं:

I. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 1 से 4

  1. भारतीय संविधान का भाग 1 संघ और उसके राज्य क्षेत्रों से संबंधित है।
  2. अनुच्छेद 1 के अनुसार, भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहा गया है।
  3. ‘राज्यों का संघ’ शब्द यह दर्शाता है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है।
  4. किसी भी राज्य को भारतीय संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
  5. अनुच्छेद 1 भारत के राज्य क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटता है: राज्यों के क्षेत्र, संघ राज्य क्षेत्र, और ऐसे क्षेत्र जिन्हें भारत सरकार द्वारा अधिग्रहित किया जा सकता है।
  6. वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं।
  7. राज्यों और उनके क्षेत्रों के नाम संविधान की पहली अनुसूची में दिए गए हैं।
  8. ‘भारत का राज्य क्षेत्र’ शब्द ‘भारत का संघ’ की तुलना में अधिक व्यापक है।
  9. ‘भारत का संघ’ में केवल राज्य शामिल हैं, जबकि ‘भारत का राज्य क्षेत्र’ में संघ राज्य क्षेत्र और अधिग्रहित क्षेत्र भी शामिल हैं।
  10. अनुच्छेद 2 संसद को भारतीय संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है।
  11. अनुच्छेद 2 उन राज्यों से संबंधित है जो पहले से भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं (जैसे सिक्किम)।
  12. अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों के आंतरिक पुनर्गठन की शक्ति प्रदान करता है।
  13. अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकती है या घटा सकती है।
  14. संसद किसी राज्य की सीमाओं या नाम में परिवर्तन कर सकती है।
  15. दो या अधिक राज्यों के हिस्सों को मिलाकर एक नया राज्य बनाने की शक्ति भी संसद के पास है।
  16. राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है।
  17. राष्ट्रपति उस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विचार के लिए भेजता है।
  18. राज्य विधानमंडल का विचार संसद के लिए बाध्यकारी नहीं है।
  19. संसद राज्य की सहमति के बिना भी उसके भूगोल को बदल सकती है, इसलिए भारत को ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ कहा जाता है।
  20. केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में संबंधित विधानमंडल के पास विचार भेजने की आवश्यकता नहीं है।
  21. अनुच्छेद 4 घोषणा करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए बदलाव संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं माने जाएंगे।
  22. इसका अर्थ है कि ऐसे बदलावों को संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
  23. साधारण बहुमत का अर्थ है— उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 50% से अधिक।
  24. बेरुबारी यूनियन मामला (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय क्षेत्र को किसी विदेशी देश को देने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन अनिवार्य है।
  25. 9वें संविधान संशोधन (1960) द्वारा बेरुबारी क्षेत्र पाकिस्तान को हस्तांतरित किया गया था।

II. राज्यों का पुनर्गठन और आयोग

  1. स्वतंत्रता के समय भारत में ब्रिटिश प्रांत और देसी रियासतें (Princely States) दो तरह की इकाइयां थीं।
  2. भारत की 552 देसी रियासतों में से 549 स्वेच्छा से भारत में शामिल हो गईं।
  3. तीन रियासतों— हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर ने शुरुआत में शामिल होने से मना किया था।
  4. हैदराबाद को ‘पुलिस कार्रवाई’ (Operation Polo) के माध्यम से मिलाया गया।
  5. जूनागढ़ को ‘जनमत संग्रह’ (Referendum) के द्वारा भारत में शामिल किया गया।
  6. कश्मीर को ‘विलय पत्र’ (Instrument of Accession) के माध्यम से भारत का हिस्सा बनाया गया।
  7. दक्षिण भारत से भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग सबसे पहले उठी।
  8. एस.के. धर आयोग (1948): इसने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषाई आधार को खारिज कर दिया।
  9. धर आयोग ने प्रशासनिक सुविधा को पुनर्गठन का मुख्य आधार माना।
  10. JVP समिति (1948): इसमें जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया शामिल थे।
  11. JVP समिति ने भी भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया।
  12. अक्टूबर 1953 में, भारत सरकार को भाषाई आधार पर पहले राज्य ‘आंध्र प्रदेश’ का गठन करना पड़ा।
  13. आंध्र प्रदेश का गठन 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु के कारण हुआ।
  14. फजल अली आयोग (1953): यह तीन सदस्यीय आयोग था (फजल अली, के.एम. पणिक्कर और एच.एन. कुंजरू)।
  15. फजल अली आयोग ने राज्यों के पुनर्गठन के लिए भाषाई आधार को स्वीकार कर लिया।
  16. हालांकि, इसने ‘एक राज्य-एक भाषा’ के सिद्धांत को पूरी तरह खारिज कर दिया।
  17. इसने सिफारिश की कि राज्यों का वर्गीकरण (भाग A, B, C, D) समाप्त किया जाए।
  18. राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956): इसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
  19. 7वें संविधान संशोधन (1956) द्वारा राज्यों की श्रेणियों को समाप्त कर दिया गया।
  20. 1960 में द्विभाषी राज्य बॉम्बे को विभाजित कर महाराष्ट्र और गुजरात बनाए गए।
  21. गुजरात भारतीय संघ का 15वां राज्य बना।
  22. दादरा और नगर हवेली को 1954 में पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया था (10वें संशोधन 1961 द्वारा UT बना)।
  23. गोवा और दमन-दीव को 1961 में पुलिस कार्रवाई के जरिए पुर्तगालियों से वापस लिया गया।
  24. 12वें संशोधन 1962 के द्वारा इन्हें केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया (गोवा 1987 में राज्य बना)।
  25. पुडुचेरी का प्रशासन फ्रांस ने 1954 में भारत को सौंपा था (14वें संशोधन द्वारा UT बना)।

III. नए राज्यों के गठन का क्रम और तथ्य

  1. नागालैंड का गठन 1963 में असम से अलग करके किया गया।
  2. 1966 में पंजाब को विभाजित कर हरियाणा (17वां राज्य) और चंडीगढ़ (UT) बनाया गया।
  3. हिमाचल प्रदेश को 1971 में केंद्र शासित प्रदेश से राज्य का दर्जा दिया गया।
  4. सिक्किम को 35वें संशोधन (1974) द्वारा ‘सह-राज्य’ का दर्जा दिया गया था।
  5. 36वें संविधान संशोधन (1975) द्वारा सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य (22वां) बनाया गया।
  6. 1987 में मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा राज्य बने।
  7. वर्ष 2000 में तीन नए राज्य बने: छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड
  8. छत्तीसगढ़ (26वां राज्य) मध्य प्रदेश से अलग होकर बना।
  9. उत्तराखंड (27वां राज्य) उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना।
  10. झारखंड (28वां राज्य) बिहार से अलग होकर बना।
  11. तेलंगाना का गठन 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग करके किया गया (29वां राज्य)।
  12. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया।
  13. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं।
  14. दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव का विलय कर 2020 में एक ही केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।
  15. वर्तमान में भारत में राज्यों की संख्या 28 और UT की संख्या 8 है।
  16. संसद द्वारा राज्यों का नाम बदलना अनुच्छेद 3 के तहत आता है।
  17. संयुक्त प्रांत (United Provinces) का नाम बदलकर 1950 में उत्तर प्रदेश किया गया था।
  18. मद्रास का नाम बदलकर 1969 में तमिलनाडु किया गया।
  19. मैसूर का नाम बदलकर 1973 में कर्नाटक किया गया।
  20. लक्कादीव-मिनिकॉय-अमीनदीवी का नाम बदलकर 1973 में लक्षद्वीप किया गया।
  21. उत्तरांचल का नाम बदलकर 2006 में उत्तराखंड किया गया।
  22. पांडिचेरी का नाम बदलकर 2006 में पुडुचेरी किया गया।
  23. उड़ीसा का नाम बदलकर 2011 में ओडिशा किया गया।
  24. संघ और उसके राज्य क्षेत्रों के विकास का मुख्य उद्देश्य ‘राष्ट्रीय एकता’ है।
  25. भारत में नए राज्य के गठन के लिए संसद को किसी विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं होती।
  26. यह शक्ति संसद की सर्वोच्चता को दर्शाती है।
  27. अनुच्छेद 2 के तहत विदेशी क्षेत्र के अधिग्रहण की शक्ति भी संसद के पास है।
  28. अधिग्रहण का अर्थ है— खरीद, उपहार, व्यवसाय या जीत के माध्यम से क्षेत्र प्राप्त करना।
  29. अनुच्छेद 3 के तहत संसद भारत का राजनीतिक मानचित्र बदलने में सक्षम है।
  30. राज्य विधानमंडल को दी गई विचार की शक्ति केवल एक औपचारिकता है।
  31. 1956 से पहले राज्य चार श्रेणियों (A, B, C, D) में बंटे थे।
  32. भाग A में ब्रिटिश भारत के गवर्नर के प्रांत शामिल थे।
  33. भाग B में विधानमंडल वाली रियासतें शामिल थीं।
  34. भाग C में मुख्य आयुक्त के प्रांत और कुछ रियासतें थीं।
  35. भाग D में केवल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल था।
  36. 100वां संविधान संशोधन (2015): भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रों का आदान-प्रदान (Land Boundary Agreement)।
  37. इसके तहत भारत ने 111 एन्क्लेव बांग्लादेश को दिए और 51 एन्क्लेव प्राप्त किए।
  38. हरियाणा के गठन के लिए शाह आयोग की सिफारिश ली गई थी।
  39. पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र अधिनियम 1971’ महत्वपूर्ण था।
  40. दिल्ली को 69वें संशोधन (1991) द्वारा ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ (NCR) का दर्जा मिला।
  41. चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी और एक UT है।
  42. लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है।
  43. लद्दाख क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है।
  44. पुडुचेरी तीन अलग-अलग राज्यों (आंध्र, तमिलनाडु, केरल) में फैला हुआ है।
  45. राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया ‘लोकतांत्रिक’ है क्योंकि इसमें राज्य से राय मांगी जाती है।
  46. पुनर्गठन का अंतिम अधिकार ‘संघ’ के पास है, जो भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करता है।
  47. राज्यों के नाम और सीमा में बदलाव के लिए संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ती।
  48. भारत का आंतरिक राजनीतिक नक्शा कभी भी बदला जा सकता है।
  49. एम. लक्ष्मीकांत के अनुसार, भारत ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
  50. संघ एवं राज्य क्षेत्र की अवधारणा भारत की अखंडता का आधार है।

तुलना तालिका: राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित प्रमुख आयोग

आयोग / समितिवर्षमुख्य आधार / सिफारिश
धर आयोग1948प्रशासनिक सुविधा (भाषा को नकारा)
JVP समिति1948भाषाई आधार को पूरी तरह अस्वीकार किया
फजल अली आयोग1953भाषाई आधार को स्वीकार किया (एक राज्य-एक भाषा नहीं)
राज्य पुनर्गठन एक्ट195614 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेशों का निर्माण

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