राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) – अनुच्छेद 315–323, संरचना, शक्तियाँ और भूमिका | Indian Polity Notes

राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) राज्य स्तर पर भर्ती की सर्वोच्च संस्था है। यह अध्याय काफी हद तक पिछले अध्याय (UPSC) के समान है, लेकिन इसमें नियुक्ति और निष्कासन को लेकर एक बहुत ही बारीक अंतर है, जहाँ अक्सर छात्र गलती करते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग भारत के राज्यों में निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट-आधारित भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय है। जिस प्रकार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) केंद्र स्तर पर सिविल सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखता है, उसी प्रकार राज्य लोक सेवा आयोग राज्य प्रशासन के लिए योग्य और निष्पक्ष अधिकारियों का चयन करता है। किसी भी राज्य की प्रशासनिक दक्षता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि लोक सेवकों की भर्ती राजनीतिक दबाव से कितनी मुक्त है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 राज्य लोक सेवा आयोग से संबंधित प्रावधान करते हैं। SPSC का मुख्य कार्य राज्य सेवाओं के लिए परीक्षाओं का आयोजन, नियुक्ति, पदोन्नति और अनुशासनात्मक मामलों में राज्य सरकार को सलाह देना है। यद्यपि इसकी सलाह सामान्यतः बाध्यकारी नहीं होती, फिर भी संवैधानिक दर्जा और परंपरागत सम्मान के कारण राज्य प्रशासन में इसका महत्व अत्यंत अधिक है।

I. गठन, संरचना और नियुक्ति

  1. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) राज्य का एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है।
  2. संविधान के भाग 14 में अनुच्छेद 315 से 323 तक SPSC का वर्णन है।
  3. आयोग में एक अध्यक्ष और अन्य सदस्य होते हैं।
  4. सदस्यों की संख्या संविधान में निश्चित नहीं है; यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर है।
  5. नियुक्ति: SPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  6. योग्यता: आधे सदस्यों को कम से कम 10 वर्ष का सरकारी सेवा (केंद्र या राज्य) का अनुभव होना चाहिए।
  7. कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्य 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक पद पर रहते हैं।
  8. नोट: UPSC के लिए यह आयु सीमा 65 वर्ष है, जबकि SPSC के लिए 62 वर्ष है।
  9. वे अपना त्यागपत्र किसी भी समय राज्यपाल को सौंप सकते हैं।
  10. कार्यवाहक अध्यक्ष: राज्यपाल किसी सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकता है यदि पद रिक्त हो।

II. निष्कासन और स्वतंत्रता

  1. सबसे महत्वपूर्ण तथ्य: SPSC के सदस्यों को राज्यपाल नियुक्त तो करता है, लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है।
  2. राष्ट्रपति उन्हें उसी आधार और रीति से हटा सकता है जैसे UPSC के सदस्यों को।
  3. ‘कदाचार’ के मामले में राष्ट्रपति जाँच के लिए मामला उच्चतम न्यायालय को भेजता है।
  4. अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  5. नियुक्ति के बाद उनकी सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  6. पुनर्नियुक्ति: SPSC का अध्यक्ष या सदस्य उसी पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए पात्र नहीं होता।
  7. सेवानिवृत्ति के बाद SPSC का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या किसी अन्य SPSC का अध्यक्ष बन सकता है।
  8. लेकिन वह भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पात्र नहीं होता।

III. कार्य, सीमाएं और JSPSC

  1. मुख्य कार्य: राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का आयोजन करना।
  2. अनुशासनात्मक मामलों में राज्य सरकार को सलाह देना।
  3. पदोन्नति और एक सेवा से दूसरी सेवा में स्थानांतरण के लिए अधिकारियों की उपयुक्तता पर सलाह देना।
  4. रिपोर्ट: SPSC अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपता है।
  5. राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
  6. सीमाएं: पिछड़ी जातियों, SC/ST के आरक्षण और दावों के मामले में SPSC से परामर्श नहीं लिया जाता।
  7. राज्यपाल किसी पद या सेवा को SPSC के अधिकार क्षेत्र से बाहर रख सकता है।
  8. संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC): दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक ही आयोग।
  9. JSPSC एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, संवैधानिक नहीं (क्योंकि इसे संसद के अधिनियम द्वारा बनाया जाता है)।
  10. JSPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  11. JSPSC अपना वार्षिक प्रतिवेदन संबंधित राज्यों के राज्यपालों को सौंपता है।
  12. SPSC राज्य में ‘मेरिट सिस्टम’ के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।

UPSC बनाम SPSC: विस्तृत तुलनात्मक तालिका

विशेषता / आधारसंघ लोक सेवा आयोग (UPSC)राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)
संविधान का भागभाग 14 (अनुच्छेद 315-323)।भाग 14 (अनुच्छेद 315-323)।
क्षेत्राधिकारअखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाएं।राज्य की सिविल सेवाएं।
नियुक्तिराष्ट्रपति द्वारा।राज्यपाल द्वारा।
कार्यकाल6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक।
त्यागपत्रराष्ट्रपति को सौंपते हैं।राज्यपाल को सौंपते हैं।
निष्कासन (Removal)केवल राष्ट्रपति द्वारा।केवल राष्ट्रपति द्वारा (राज्यपाल नहीं)।
खर्च (Expenses)भारत की संचित निधि पर भारित।राज्य की संचित निधि पर भारित।
वार्षिक रिपोर्टराष्ट्रपति को सौंपी जाती है।राज्यपाल को सौंपी जाती है।
सेवानिवृत्ति के बादसरकार में किसी अन्य पद के पात्र नहीं।UPSC के अध्यक्ष/सदस्य या अन्य SPSC के अध्यक्ष बन सकते हैं।
परीक्षा आयोजनसिविल सेवा परीक्षा (IAS, IPS आदि)।राज्य प्रशासनिक सेवा (PCS, PPS आदि)।

प्रमुख अंतर जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं:

  1. निष्कासन का पेंच (The Removal Trap): सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तो राज्यपाल करता है, लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है। यह सवाल UPSC और State PSC की प्रीलिम्स में बार-बार आता है।
  2. आयु सीमा: UPSC के लिए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, जबकि राज्यों (SPSC) के लिए यह 62 वर्ष है।
  3. पुनर्नियुक्ति: दोनों ही मामलों में, कोई भी सदस्य या अध्यक्ष अपने उसी पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त नहीं हो सकता।

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