सविनय अवज्ञा आंदोलन और गोलमेज सम्मेलन (1930–1934)

1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा के बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन निर्णायक संघर्ष के चरण में प्रवेश करता है।
ब्रिटिश सरकार की असंवेदनशीलता और संवैधानिक टालमटोल के विरुद्ध महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) शुरू हुआ।
इसी दौरान, संवैधानिक समाधान के नाम पर गोलमेज सम्मेलन (1930–32) आयोजित किए गए।

📌 यह कालखंड जन-आंदोलन और संवैधानिक वार्ता—दोनों का संगम था।


सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • साइमन कमीशन का बहिष्कार
  • नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति
  • पूर्ण स्वराज का संकल्प (1929)
  • आर्थिक मंदी और बढ़ता कर-भार

📌 गांधीजी का निष्कर्ष:
👉 अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण उल्लंघन आवश्यक है।


सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)

अर्थ

सविनय अवज्ञा = अन्यायपूर्ण कानूनों का अहिंसक उल्लंघन

नेतृत्व

  • महात्मा गांधी

नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च)

दांडी मार्च

  • तिथि: 12 मार्च – 6 अप्रैल 1930
  • मार्ग: साबरमती → दांडी (लगभग 240 किमी)

📌 नमक को चुना गया क्योंकि—

  • यह हर भारतीय से जुड़ा था
  • कर-शोषण का प्रतीक था

प्रभाव

  • देशभर में नमक कानून का उल्लंघन
  • महिलाओं और किसानों की व्यापक भागीदारी
  • आंदोलन का जन-रूपांतरण

आंदोलन का विस्तार

प्रमुख कार्यक्रम

  • नमक बनाना
  • कर न देना
  • शराब और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
  • जंगल कानूनों की अवज्ञा

क्षेत्रीय नेतृत्व

  • तमिलनाडु: सी. राजगोपालाचारी
  • उत्तर-पश्चिम सीमांत: खान अब्दुल गफ्फार खान
  • महाराष्ट्र: महिलाओं की अग्रणी भूमिका

📌 पहली बार आंदोलन ग्रामीण भारत तक गहराई से पहुँचा।


सरकारी दमन

  • सामूहिक गिरफ्तारियाँ
  • प्रेस पर प्रतिबंध
  • कांग्रेस पर पाबंदी

📌 दमन के बावजूद आंदोलन नैतिक रूप से मजबूत रहा।


गांधी-इरविन समझौता (1931)

प्रमुख प्रावधान

  • आंदोलन स्थगित
  • राजनीतिक कैदियों की रिहाई
  • नमक सत्याग्रह की सीमित अनुमति
  • गांधीजी की गोलमेज सम्मेलन में भागीदारी

📌 यह समझौता
👉 दोनों पक्षों के बीच संवाद की स्वीकृति था।


गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conferences)

उद्देश्य

  • भारत के संवैधानिक भविष्य पर चर्चा

प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930)

  • कांग्रेस अनुपस्थित
  • रियासतों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी
  • कोई ठोस परिणाम नहीं

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931)

  • गांधीजी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया
  • प्रमुख मुद्दे:
    • अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व
    • संघीय ढाँचा

📌 साम्प्रदायिक प्रश्न पर गतिरोध


तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932)

  • कांग्रेस अनुपस्थित
  • संविधान का ढाँचा तैयार

पूना समझौता (1932)

  • डॉ. भीमराव आंबेडकर और गांधीजी के बीच
  • दलितों के लिए संयुक्त निर्वाचन और आरक्षित सीटें

📌 इसने सामाजिक न्याय को संवैधानिक दिशा दी।


आंदोलन का पुनरारंभ और अंत (1932–34)

  • समझौतों की विफलता से आंदोलन पुनः शुरू
  • दमन और थकान
  • 1934 में सविनय अवज्ञा समाप्त

परिणाम और प्रभाव

तत्काल

  • ब्रिटिश सरकार की नैतिक स्थिति कमजोर
  • कांग्रेस का जनाधार सुदृढ़

दीर्घकालिक

  • भारत सरकार अधिनियम 1935 की पृष्ठभूमि
  • संघीय विचारधारा को बल
  • अहिंसक संघर्ष की वैश्विक प्रतिष्ठा

ऐतिहासिक महत्व

  • नमक सत्याग्रह: प्रतीकात्मक राजनीति की शक्ति
  • सविनय अवज्ञा: जन-आंदोलन का चरम
  • गोलमेज सम्मेलन: संवैधानिक बहस का मंच

📌 यह चरण दिखाता है कि
👉 संघर्ष और संवाद—दोनों स्वतंत्रता के उपकरण थे।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ दांडी मार्च – 1930
✔ सविनय अवज्ञा – 1930–34
✔ गांधी-इरविन समझौता – 1931
✔ गोलमेज सम्मेलन – 1930–32
✔ पूना समझौता – 1932


निष्कर्ष (Conclusion)

सविनय अवज्ञा आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को अपरिवर्तनीय मोड़ दिया।
जहाँ इसने जनता को सीधे संघर्ष में जोड़ा, वहीं गोलमेज सम्मेलनों ने यह स्पष्ट किया कि
👉 ब्रिटिश शासन स्वेच्छा से सत्ता हस्तांतरण को तैयार नहीं था।

इसी द्वंद्व से आगे चलकर 1935 का अधिनियम और अंततः 1947 की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।

“नमक के एक कण ने साम्राज्य की नींव हिला दी।”


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. सविनय अवज्ञा आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

पूर्ण स्वराज की मांग और अन्यायपूर्ण कानूनों के विरोध में।

Q2. नमक सत्याग्रह का प्रतीकात्मक महत्व क्या था?

यह कर-शोषण और औपनिवेशिक नियंत्रण का प्रतीक था।

Q3. गांधी-इरविन समझौते का महत्व क्या था?

इसने संवाद का मार्ग खोला और आंदोलन को अस्थायी विराम दिया।

Q4. गोलमेज सम्मेलन क्यों असफल रहे?

साम्प्रदायिक मतभेद और ब्रिटिश हठधर्मिता के कारण।

Q5. इस चरण का सबसे बड़ा योगदान क्या था?

जन-आंदोलन की परिपक्वता और संघीय संवैधानिक सोच।

Notes & Quiz Updates!

Join @mypdfnotes on Telegram ➔
Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।