18वीं–19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने भारत में केवल युद्धों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक और प्रशासनिक नीतियों के जरिए भी अपना साम्राज्य विस्तार किया।
इन नीतियों में सबसे प्रभावशाली थीं—
- सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
- विलय की नीति (Policy of Annexation / Doctrine of Lapse)
📌 इन नीतियों ने भारतीय राज्यों को बिना प्रत्यक्ष युद्ध के अंग्रेजी सत्ता के अधीन कर दिया और भारत में औपनिवेशिक शासन को स्थायी बना दिया।
सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
सहायक संधि क्या थी?
सहायक संधि एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत कोई भारतीय राज्य—
- अपनी सेना भंग करता था
- अंग्रेजी सेना को अपने राज्य में रखता था
- और उसके खर्च का भुगतान करता था
इसके बदले अंग्रेज उस राज्य की बाहरी सुरक्षा का दायित्व लेते थे।
सहायक संधि का प्रवर्तक
- लॉर्ड वेलेजली
- कार्यकाल: 1798–1805
सहायक संधि की प्रमुख शर्तें
- भारतीय शासक स्वतंत्र विदेश नीति नहीं अपनाएगा
- राज्य में अंग्रेजी सेना की तैनाती अनिवार्य
- सेना के खर्च हेतु धन या क्षेत्र देना होगा
- अंग्रेजी अनुमति के बिना किसी यूरोपीय शक्ति से संबंध नहीं
- अंग्रेजी रेजिडेंट की नियुक्ति
सहायक संधि स्वीकार करने वाले प्रमुख राज्य
- हैदराबाद
- मैसूर (1799 के बाद)
- अवध
- तंजौर
- पेशवा (1802 – बेसिन की संधि)
📌 बेसिन की संधि (1802) मराठा पतन का मुख्य कारण बनी।
सहायक संधि के परिणाम
✔ भारतीय राज्यों की संप्रभुता समाप्त
✔ अंग्रेजों को बिना युद्ध क्षेत्रीय नियंत्रण
✔ भारतीय शासक अंग्रेजों पर निर्भर
✔ आर्थिक शोषण और प्रशासनिक कमजोरी
विलय की नीति (Policy of Annexation)
विलय की नीति क्या थी?
विलय की नीति के अंतर्गत अंग्रेजों ने विभिन्न बहानों से भारतीय राज्यों को सीधे अपने साम्राज्य में मिला लिया।
नीति का प्रमुख प्रवर्तक
- लॉर्ड डलहौजी
- कार्यकाल: 1848–1856
विलय के प्रमुख आधार
- दत्तक पुत्र अस्वीकार (Doctrine of Lapse)
- कुशासन का आरोप
- संधि उल्लंघन
- प्राकृतिक उत्तराधिकारी का अभाव
दत्तक सिद्धांत (Doctrine of Lapse)
यदि किसी भारतीय शासक की—
- प्राकृतिक संतान न हो
- और उसने दत्तक पुत्र गोद लिया हो
तो अंग्रेज—
👉 उस दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी नहीं मानते थे
👉 और राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लेते थे
दत्तक सिद्धांत के अंतर्गत विलय किए गए राज्य
| राज्य | वर्ष |
|---|---|
| सतारा | 1848 |
| सांभलपुर | 1849 |
| झांसी | 1853 |
| नागपुर | 1854 |
📌 झांसी का विलय 1857 के विद्रोह का बड़ा कारण बना।
अन्य विलय (कुशासन के आधार पर)
- अवध (1856)
- कर्नाटक
- तंजौर
सहायक संधि बनाम विलय की नीति (तुलना)
| बिंदु | सहायक संधि | विलय की नीति |
|---|---|---|
| प्रकृति | अप्रत्यक्ष नियंत्रण | प्रत्यक्ष नियंत्रण |
| प्रवर्तक | लॉर्ड वेलेजली | लॉर्ड डलहौजी |
| उद्देश्य | निर्भरता बढ़ाना | पूर्ण विलय |
| प्रभाव | संप्रभुता समाप्त | राज्य का अंत |
भारतीय प्रतिक्रिया
- शासकों में असंतोष
- जनता में आक्रोश
- सैन्य और प्रशासनिक अस्थिरता
📌 ये नीतियाँ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि बनीं।
ऐतिहासिक महत्व
अंग्रेजों के लिए
- बिना युद्ध विशाल साम्राज्य
- प्रशासनिक एकीकरण
- आर्थिक नियंत्रण
भारत के लिए
- भारतीय राज्यों का पतन
- पारंपरिक शासन व्यवस्था का अंत
- राष्ट्रीय चेतना का उदय
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
✔ सहायक संधि – लॉर्ड वेलेजली
✔ बेसिन की संधि – 1802
✔ विलय की नीति – लॉर्ड डलहौजी
✔ दत्तक सिद्धांत – Doctrine of Lapse
✔ झांसी विलय – 1853
✔ अवध विलय – 1856
निष्कर्ष (Conclusion)
सहायक संधि और विलय की नीति अंग्रेजी साम्राज्य विस्तार की सबसे प्रभावशाली और घातक रणनीतियाँ थीं।
इन नीतियों ने भारत को बिना बड़े युद्धों के अंग्रेजों के अधीन कर दिया, लेकिन साथ ही भारतीय असंतोष और विद्रोह की नींव भी रखी।
“जहाँ सहायक संधि ने भारतीय राज्यों को निर्भर बनाया, वहीं विलय की नीति ने उन्हें समाप्त कर दिया।”
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. सहायक संधि किसने शुरू की?
लॉर्ड वेलेजली ने।
Q2. विलय की नीति का सबसे विवादास्पद सिद्धांत कौन-सा था?
दत्तक सिद्धांत (Doctrine of Lapse)।
Q3. बेसिन की संधि क्यों महत्वपूर्ण है?
इससे मराठा शक्ति का पतन हुआ।
Q4. अवध का विलय किस आधार पर हुआ?
कुशासन के आधार पर (1856)।
Q5. इन नीतियों का सबसे बड़ा परिणाम क्या था?
1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार हुई।