रॉलेट एक्ट जलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन (1919–1922)

प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारतीयों को आशा थी कि ब्रिटिश सरकार राजनीतिक अधिकारों का विस्तार करेगी।
लेकिन इसके विपरीत, 1919 में रॉलेट एक्ट जैसे दमनकारी कानून और जलियांवाला बाग हत्याकांड ने जनता को झकझोर दिया।
इन्हीं घटनाओं की पृष्ठभूमि में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन आरंभ हुआ।

📌 यह कालखंड
👉 भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के गांधीवादी युग की वास्तविक शुरुआत माना जाता है।


रॉलेट एक्ट (1919)

रॉलेट एक्ट क्या था?

  • आधिकारिक नाम: Anarchical and Revolutionary Crimes Act, 1919
  • उद्देश्य: क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलना

प्रमुख प्रावधान

  • बिना मुकदमा गिरफ्तारी
  • प्रेस पर प्रतिबंध
  • जूरी के बिना विशेष अदालतें

📌 यह कानून
👉 न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन था।


रॉलेट एक्ट का विरोध

गांधीजी की प्रतिक्रिया

  • सत्याग्रह का आह्वान
  • देशव्यापी हड़ताल (6 अप्रैल 1919)

📌 यह गांधीजी का
👉 पहला अखिल भारतीय आंदोलन था।


जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)

घटना

  • स्थान: अमृतसर (पंजाब)
  • तिथि: 13 अप्रैल 1919
  • नेतृत्व: जनरल डायर

क्या हुआ?

  • शांतिपूर्ण सभा पर गोलीबारी
  • बिना चेतावनी
  • सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए

📌 यह
👉 ब्रिटिश शासन की क्रूरता का प्रतीक बन गया।


राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • पूरे देश में आक्रोश
  • रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड लौटाया
  • गांधीजी ने ब्रिटिश न्याय से विश्वास खोया

📌 इस घटना ने
👉 संवैधानिक राजनीति के अंत की घोषणा कर दी।


असहयोग आंदोलन (1920–1922)

  • रॉलेट एक्ट
  • जलियांवाला बाग
  • खिलाफत आंदोलन के साथ समर्थन

नेतृत्व

  • महात्मा गांधी

📌 असहयोग आंदोलन
👉 अहिंसक जनआंदोलन का नया चरण था।


असहयोग आंदोलन के उद्देश्य

  • अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध
  • स्वराज की प्राप्ति
  • जनभागीदारी के माध्यम से शासन को पंगु बनाना

असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम

1️⃣ सरकारी संस्थाओं से असहयोग

  • सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ना
  • न्यायालयों का बहिष्कार

2️⃣ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

  • विदेशी कपड़े
  • शराब की दुकानों का बहिष्कार

3️⃣ स्वदेशी और रचनात्मक कार्यक्रम

  • खादी का प्रचार
  • चरखा
  • राष्ट्रीय शिक्षा

आंदोलन का प्रसार

  • शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र
  • छात्रों, किसानों, महिलाओं की भागीदारी
  • कांग्रेस एक जनसंगठन बनी

📌 पहली बार
👉 आम जनता स्वतंत्रता संघर्ष से सीधे जुड़ी


आंदोलन की वापसी (1922)

चौरी-चौरा घटना

  • स्थान: गोरखपुर (UP)
  • हिंसक झड़प में पुलिस चौकी जली

📌 गांधीजी ने
👉 अहिंसा के सिद्धांत पर आंदोलन वापस ले लिया


आंदोलन के परिणाम

तत्काल परिणाम

  • राजनीतिक निराशा
  • कई नेता गिरफ्तार

दीर्घकालिक प्रभाव

  • जनता का राजनीतिक प्रशिक्षण
  • गांधीजी का राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित
  • स्वराज अब जन-मांग बना

ऐतिहासिक महत्व

राष्ट्रीय आंदोलन के लिए

  • गांधी युग की शुरुआत
  • अहिंसक संघर्ष की सफलता
  • जन-आंदोलन की परंपरा

ब्रिटिश शासन के लिए

  • नैतिक वैधता समाप्त
  • दमन की नीति उजागर

📌 इस चरण के बाद
👉 स्वतंत्रता अपरिवर्तनीय लक्ष्य बन गई


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ रॉलेट एक्ट – 1919
✔ जलियांवाला बाग – 13 अप्रैल 1919
✔ असहयोग आंदोलन – 1920–22
✔ चौरी-चौरा – 1922
✔ गांधी युग की शुरुआत


निष्कर्ष (Conclusion)

रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग और असहयोग आंदोलन
👉 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक मोड़ थे।

इन घटनाओं ने—

  • जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक किया
  • गांधीजी को निर्विवाद नेता बनाया
  • स्वतंत्रता को जन-आंदोलन में बदल दिया

“1919–22 ने भारत को विरोध से संघर्ष और संघर्ष से स्वराज की ओर मोड़ा।”


FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. रॉलेट एक्ट क्यों लाया गया?

क्रांतिकारी गतिविधियों को दबाने के लिए।

Q2. जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रभाव क्या था?

ब्रिटिश शासन की नैतिक वैधता समाप्त हो गई।

Q3. असहयोग आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग के विरोध में।

Q4. असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?

चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण।

Q5. असहयोग आंदोलन का सबसे बड़ा महत्व क्या था?

जनता की व्यापक भागीदारी और गांधी युग की स्थापना।

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