गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM): इतिहास, संस्थापक और भारत की भूमिका | Political Science Notes

गुटनिरपेक्षता का अर्थ क्या है? (Meaning of Non-Alignment)

‘गुटनिरपेक्षता’ का अर्थ केवल ‘तटस्थ’ रहना नहीं है, बल्कि शीत युद्ध के दौरान दुनिया के दो शक्तिशाली सैन्य गुटों—अमेरिकी गुट (NATO) और सोवियत गुट (Warsaw Pact)—में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करना है।

  • सक्रिय भूमिका: इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से अलग-थलग हो जाना नहीं है, बल्कि विश्व शांति के लिए सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करना और सही-गलत के आधार पर अपना स्वतंत्र पक्ष रखना है।
  • सार: यह नए स्वतंत्र हुए विकासशील देशों (तीसरी दुनिया) के आत्मसम्मान और संप्रभुता का प्रतीक था।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना और इतिहास

गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उदय शीत युद्ध की चरम स्थिति और उपनिवेशवाद के अंत के समय हुआ।

  • बांडुंग सम्मेलन (1955): इंडोनेशिया के बांडुंग शहर में एशिया और अफ्रीका के 29 नए स्वतंत्र देशों का एक सम्मेलन हुआ। इसे ही ‘NAM’ की नींव माना जाता है। यहाँ ‘अफ्रीकी-एशियाई एकता’ का नारा दिया गया।
  • बेलग्रेड शिखर सम्मेलन (1961): गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला आधिकारिक शिखर सम्मेलन सितंबर 1961 में यूगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में आयोजित हुआ। इसमें 25 सदस्य देशों ने भाग लिया।
  • शर्तें: NAM का सदस्य बनने के लिए कुछ शर्तें तय की गई थीं, जैसे—देश किसी महाशक्ति के सैन्य गठबंधन का हिस्सा न हो और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति हो।
NAM: स्थापना एवं इतिहास की समयरेखा JOURNEY FROM 1955 TO 1961 • PDFNOTES.IN बांडुंग सम्मेलन वर्ष: 1955 नींव (इंडोनेशिया) 29 देशों की एकता पंचशील आधार वैचारिक तैयारी सिद्धांतों का निर्माण स्वतंत्र विदेश नीति बेलग्रेड सम्मेलन वर्ष: 1961 प्रथम शिखर सम्मेलन आंदोलन की शुरुआत VISUAL TIMELINE BY PDFNOTES.IN

मुख्य संस्थापक नेता (The Big Five)

गुटनिरपेक्ष आंदोलन को खड़ा करने में पाँच प्रमुख नेताओं की भूमिका ‘स्तंभ’ के समान थी, जिन्हें “The Big Five” कहा जाता है:

NAM के संस्थापक नेता (The Big Five) FOUNDING FATHERS OF NON-ALIGNED MOVEMENT NAM 1961 नेहरू भारत 🇮🇳 टीटो यूगोस्लाविया 🏳️ नासिर मिस्र 🇪🇬 सुकर्णो इंडोनेशिया 🇮🇩 नक्रुमा घाना 🇬🇭 VISUAL LEARNING BY PDFNOTES.IN
नेता का नामदेशभूमिका
पंडित जवाहरलाल नेहरूभारतआंदोलन के मुख्य वास्तुकार और शांतिदूत।
जोसेफ ब्रोज टीटोयूगोस्लावियाकम्युनिस्ट होने के बावजूद सोवियत गुट से अलग राह चुनी।
गमाल अब्दुल नासिरमिस्रस्वेज नहर संकट के नायक और अरब एकता के प्रतीक।
सुकर्णोइंडोनेशियाबांडुंग सम्मेलन के आयोजक और उपनिवेशवाद के विरोधी।
वामे नक्रुमाघानाअफ्रीका में स्वतंत्रता और एकता की आवाज़।

“Concept-Recall”

याद रखना चाहिए कि गुटनिरपेक्षता का अर्थ ‘पलायनवाद’ (भागना) नहीं है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को सुलझाने में मदद की। उदाहरण के लिए, कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान भारत ने मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मुख्य उद्देश्य (Objectives of NAM)

गुटनिरपेक्ष आंदोलन का लक्ष्य केवल गुटों से दूर रहना नहीं था, बल्कि विश्व स्तर पर एक नई व्यवस्था स्थापित करना था:

  1. स्वतंत्र विदेश नीति: नए स्वतंत्र देशों को इस योग्य बनाना कि वे किसी महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपनी विदेश नीति के निर्णय स्वयं ले सकें।
  2. साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध: दुनिया में कहीं भी हो रहे औपनिवेशिक शासन और विदेशी नियंत्रण का कड़ा विरोध करना।
  3. विश्व शांति और निःशस्त्रीकरण: शीत युद्ध के तनाव को कम करना और परमाणु हथियारों की होड़ को रोककर विश्व शांति को बढ़ावा देना।
  4. रंगभेद का विरोध: दक्षिण अफ्रीका जैसी जगहों पर जारी नस्लीय भेदभाव और रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ आवाज़ उठाना।
  5. नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO): विकासशील देशों के आर्थिक शोषण को रोकना और एक ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था की मांग करना जो गरीब देशों के लिए न्यायपूर्ण हो।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन और भारत (India and NAM)

भारत के लिए गुटनिरपेक्षता केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक ‘राष्ट्रीय गौरव’ और ‘हित’ का विषय था। नेहरू जी के नेतृत्व में भारत ने इसमें दोहरी भूमिका निभाई:

गुटनिरपेक्षता: भारत की रणनीतिक भूमिका INDIA’S STRATEGIC AUTONOMY • PDFNOTES.IN अमेरिकी गुट सोवियत गुट भारत गुटनिरपेक्षता “भारत न तो अलग-थलग रहा, न ही किसी का पिछलग्गू बना।” VISUAL LEARNING BY PDFNOTES.IN

भारत को होने वाले लाभ:

  • संतुलित संबंध: भारत इस स्थिति में रहा कि वह एक महाशक्ति द्वारा दबाए जाने पर दूसरी महाशक्ति की ओर झुक सके। इससे कोई भी गुट भारत को लेकर बेफिक्र या उसे नजरअंदाज नहीं कर पाया।
  • स्वतंत्र निर्णय: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन फैसलों का समर्थन किया जो उसके हित में थे, न कि जो किसी गुट के हित में थे।

भारत की सक्रिय भूमिका (Active Intervention):

भारत ने ‘तटस्थता’ के बजाय ‘सक्रिय हस्तक्षेप’ की नीति अपनाई:

  • कोरियाई युद्ध (1950-53): भारत ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की और युद्ध विराम में बड़ी भूमिका निभाई।
  • स्वेज नहर संकट (1956): मिस्र पर हुए हमले के खिलाफ भारत ने विश्व स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
  • अफ्रीकी-एशियाई एकता: भारत ने उपनिवेशवाद के चंगुल में फँसे अन्य देशों की आजादी के लिए UN और NAM के मंचों से निरंतर समर्थन दिया।

शीत युद्ध के बाद NAM की प्रासंगिकता (Relevance Today)

1991 में सोवियत संघ के विघटन और शीत युद्ध की समाप्ति के बाद कई आलोचकों ने कहा कि अब NAM की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन आज के बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है:

  1. विकासशील देशों की आवाज़: NAM आज भी ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) यानी विकासशील देशों का सबसे बड़ा मंच है, जो UN में उनकी सामूहिक आवाज़ बुलंद करता है।
  2. नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO): आज भी गरीब और अमीर देशों के बीच आर्थिक असमानता है। NAM एक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यापार प्रणाली की मांग जारी रखता है।
  3. आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन: ये ऐसी समस्याएँ हैं जो किसी एक गुट की नहीं हैं। NAM इन वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक कार्रवाई के लिए दबाव बनाता है।
  4. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): आज भी छोटे देश महाशक्तियों (जैसे अमेरिका बनाम चीन) के बीच पिसना नहीं चाहते। NAM उन्हें अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखने का नैतिक बल देता है।
  5. UN में सुधार: NAM सुरक्षा परिषद के विस्तार और संयुक्त राष्ट्र के लोकतंत्रीकरण का सबसे बड़ा समर्थक है।

गुटनिरपेक्षता के 5 सिद्धांत (पंचशील के आधार पर)

NAM की वैचारिक नींव ‘पंचशील’ के उन 5 सिद्धांतों पर टिकी है, जिन्हें नेहरू जी ने प्रतिपादित किया था। ये सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय व्यवहार की मर्यादा तय करते हैं:

  1. एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान: प्रत्येक देश दूसरे देश की सीमाओं और आजादी का आदर करेगा।
  2. अनासक्रमण (Non-Aggression): कोई भी देश दूसरे देश पर हमला नहीं करेगा।
  3. आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना: एक देश दूसरे देश के घरेलू मामलों में दखल नहीं देगा।
  4. समानता और परस्पर लाभ: राष्ट्रों के बीच संबंध समानता पर आधारित होंगे ताकि दोनों का विकास हो सके।
  5. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (Peaceful Co-existence): अलग-अलग विचारधारा वाले देश भी एक-दूसरे के साथ शांति से रह सकते हैं।
गुटनिरपेक्षता के 5 मूल सिद्धांत THE FIVE PRINCIPLES OF CO-EXISTENCE • PDFNOTES.IN पंचशील 1. संप्रभुता का सम्मान Mutual Respect 2. अनाक्रमण Non-Aggression 3. हस्तक्षेप न करना Non-Interference 4. समानता और लाभ Equality & Benefit 5. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व Peaceful Co-existence MASTER NOTES BY PDFNOTES.IN

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM): महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)

उत्पत्ति और आधार

  1. NAM का पूर्ण रूप क्या है? – Non-Aligned Movement (गुटनिरपेक्ष आंदोलन)।
  2. गुटनिरपेक्षता का मूल अर्थ क्या है? – महाशक्तियों के सैन्य गुटों से अलग रहना।
  3. NAM की नींव किस सम्मेलन में रखी गई? – 1955 का बांडुंग सम्मेलन।
  4. बांडुंग सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ था? – इंडोनेशिया में।
  5. बांडुंग सम्मेलन में कितने देशों ने भाग लिया था? – 29 एशियाई और अफ्रीकी देश।
  6. NAM का पहला आधिकारिक शिखर सम्मेलन कब हुआ? – सितंबर 1961 में।
  7. पहला शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था? – बेलग्रेड (यूगोस्लाविया)।
  8. बेलग्रेड सम्मेलन में कितने सदस्य देशों ने भाग लिया? – 25 देशों ने।
  9. गुटनिरपेक्ष आंदोलन के कितने ‘संस्थापक पिता’ (Founding Fathers) माने जाते हैं? – पाँच।
  10. भारत की ओर से NAM के संस्थापक कौन थे? – जवाहरलाल नेहरू।
  11. यूगोस्लाविया के किस नेता ने NAM की स्थापना में भूमिका निभाई? – जोसेफ ब्रोज टीटो।
  12. मिस्र (Egypt) के संस्थापक नेता कौन थे? – गमाल अब्दुल नासिर।
  13. इंडोनेशिया के किस नेता ने NAM का नेतृत्व किया? – सुकर्णो।
  14. घाना के संस्थापक नेता का नाम क्या था? – वामे नक्रुमा।
  15. NAM का विचार किस युद्ध के दौरान पैदा हुआ? – शीत युद्ध (Cold War)।
  16. ‘तीसरी दुनिया’ (Third World) शब्द का संबंध किससे है? – गुटनिरपेक्ष और विकासशील देशों से।
  17. ‘पंचशील’ के सिद्धांतों का प्रतिपादन किसने किया? – जवाहरलाल नेहरू ने।
  18. पंचशील समझौता (1954) किन दो देशों के बीच हुआ था? – भारत और चीन।
  19. NAM का मुख्य उद्देश्य क्या था? – उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का अंत।
  20. नेहरू ने गुटनिरपेक्षता को क्या कहा था? – “एक सकारात्मक और सक्रिय नीति”।

सिद्धांत और नीतियां

  1. गुटनिरपेक्षता का क्या अर्थ ‘तटस्थता’ (Neutrality) है? – नहीं, यह सक्रिय भागीदारी की नीति है।
  2. पृथकतावाद (Isolationism) और गुटनिरपेक्षता में क्या अंतर है? – पृथकतावाद विश्व राजनीति से कट जाना है, जबकि NAM सक्रिय रहना है।
  3. NAM का कौन सा सिद्धांत संप्रभुता पर जोर देता है? – एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान।
  4. अनासक्रमण (Non-aggression) से क्या तात्पर्य है? – एक देश द्वारा दूसरे पर हमला न करना।
  5. NAM ने किस भेदभाव का कड़ा विरोध किया? – रंगभेद (Apartheid) और नस्लीय भेदभाव।
  6. NIEO का पूर्ण रूप क्या है? – New International Economic Order (नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था)।
  7. NIEO की मांग किस दशक में उठी? – 1970 के दशक में।
  8. NAM सदस्य बनने की प्रमुख शर्त क्या है? – देश किसी महाशक्ति के सैन्य गुट (जैसे NATO) का हिस्सा न हो।
  9. क्या NAM एक सैन्य गठबंधन है? – नहीं, यह एक राजनीतिक और वैचारिक मंच है।
  10. ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व’ किसका मूल मंत्र है? – गुटनिरपेक्ष आंदोलन का।
  11. NAM ने किस अधिकार का समर्थन किया? – आत्म-निर्णय का अधिकार (Right to self-determination)।
  12. हॉट लाइन (1963) की स्थापना में NAM का क्या प्रभाव था? – तनाव कम करने का दबाव।
  13. भारत ने किस वर्ष परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर से मना किया? – 1968 (NAM के सिद्धांतों के तहत)।
  14. NAM का 7वां शिखर सम्मेलन भारत में कब हुआ? – 1983 (नई दिल्ली)।
  15. 1983 के दिल्ली सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी? – इंदिरा गांधी ने।
  16. NAM देशों का सामूहिक वोट बैंक कहाँ प्रभावी होता है? – संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में।
  17. दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) का क्या अर्थ है? – विकासशील देशों का आपस में सहयोग।
  18. NAM ने निःशस्त्रीकरण (Disarmament) पर क्या स्टैंड लिया? – वैश्विक परमाणु हथियारों के खात्मे की मांग।
  19. स्वेज नहर संकट (1956) में NAM देशों ने किसका साथ दिया? – मिस्र का।
  20. लुसाका शिखर सम्मेलन (1970) का मुख्य मुद्दा क्या था? – आर्थिक स्वावलंबन।

प्रासंगिकता और वर्तमान स्थिति

  1. शीत युद्ध की समाप्ति के बाद NAM की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों उठे? – क्योंकि गुटबाजी खत्म हो गई थी।
  2. आज NAM कितने देशों का समूह है? – 120 सदस्य देश।
  3. विश्व की कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत NAM देशों में रहता है? – लगभग 55%।
  4. क्या NAM आज भी प्रासंगिक है? – हाँ, ग्लोबल साउथ की आवाज़ उठाने के लिए।
  5. एकध्रुवीय विश्व में NAM की क्या भूमिका है? – किसी एक महाशक्ति के वर्चस्व को रोकना।
  6. NAM का मुख्यालय कहाँ है? – इसका कोई स्थायी मुख्यालय नहीं है।
  7. NAM का संचालन कौन करता है? – समन्वय ब्यूरो (Coordinating Bureau)।
  8. NAM का 18वां शिखर सम्मेलन (2019) कहाँ हुआ था? – बाकू, अज़रबैजान।
  9. भारत के किस प्रधानमंत्री ने 2016 और 2019 के शिखर सम्मेलनों में भाग नहीं लिया? – नरेंद्र मोदी।
  10. हाल के वर्षों में भारत NAM की जगह किस पर ध्यान दे रहा है? – बहु-पक्षवाद (Multi-alignment)।
  11. NAM और G-77 के बीच क्या संबंध है? – दोनों विकासशील देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करते हैं।
  12. कोविड-19 के दौरान NAM की बैठक में भारत ने क्या संदेश दिया? – ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और सामूहिक स्वास्थ्य सुरक्षा।
  13. आतंकवाद पर NAM का क्या रुख है? – आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा।
  14. जलवायु परिवर्तन पर NAM देश क्या मांग करते हैं? – विकसित देशों द्वारा वित्तीय सहायता।
  15. NAM के वर्तमान अध्यक्ष (2024-2027) कौन हैं? – युगांडा।
  16. 19वां शिखर सम्मेलन (जनवरी 2024) कहाँ आयोजित हुआ? – कंपाला, युगांडा।
  17. पर्यवेक्षक (Observer) देशों की संख्या NAM में कितनी है? – 17 देश और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठन।
  18. क्या चीन NAM का सदस्य है? – नहीं, चीन केवल एक पर्यवेक्षक (Observer) है।
  19. NAM की सबसे बड़ी ताकत क्या है? – इसकी बड़ी सदस्य संख्या।
  20. NAM का भविष्य किस पर निर्भर है? – सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकजुटता पर।

भारत और विविध तथ्य

  1. नेहरू के बाद NAM को गति देने वाले भारतीय नेता? – लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी।
  2. भारत की विदेश नीति का ‘चुंबक’ किसे कहा जाता है? – गुटनिरपेक्षता को।
  3. 1971 की भारत-सोवियत संधि क्या गुटनिरपेक्षता का उल्लंघन थी? – भारत के अनुसार नहीं, क्योंकि यह केवल रक्षा सहयोग था।
  4. हवाना शिखर सम्मेलन (1979) क्यों चर्चित रहा? – फिदेल कास्त्रो के क्रांतिकारी नेतृत्व के कारण।
  5. NAM में ‘समन्वय ब्यूरो’ कहाँ स्थित है? – संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क।
  6. ‘कंटेनमेंट’ (Containment) की नीति का NAM ने क्या किया? – विरोध किया।
  7. NAM का झंडा क्या दर्शाता है? – शांति का प्रतीक कबूतर और विश्व मानचित्र।
  8. NAM के सम्मेलनों की आवृत्ति क्या है? – सामान्यतः प्रत्येक 3 वर्ष में।
  9. अफ्रीका फंड (AFRICA Fund) की स्थापना किस सम्मेलन में हुई? – 1986 (हरारे सम्मेलन)।
  10. किस भारतीय प्रधानमंत्री ने NAM को “दुनिया का सबसे बड़ा शांति आंदोलन” कहा था? – इंदिरा गांधी।
  11. NAM ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर क्या रुख अपनाया? – हमेशा स्वतंत्र फिलिस्तीन का समर्थन किया।
  12. क्या पाकिस्तान NAM का सदस्य है? – हाँ, पाकिस्तान 1979 में सदस्य बना।
  13. 1961 के पहले सम्मेलन में भाग लेने वाले एकमात्र यूरोपीय देश? – यूगोस्लाविया और साइप्रस।
  14. बांडुंग सम्मेलन के 50 वर्ष पूरे होने पर कहाँ उत्सव मनाया गया? – जकार्ता (2005)।
  15. NAM में ‘ट्रोइका’ (Troika) का क्या अर्थ है? – पिछले, वर्तमान और अगले अध्यक्ष का समूह।
  16. UN में सुधारों के लिए NAM की मुख्य मांग क्या है? – सुरक्षा परिषद का विस्तार।
  17. NAM के सिद्धांतों का उल्लंघन करने पर क्या होता है? – सदस्यता पर चर्चा या निलंबन।
  18. भारत के लिए NAM का रणनीतिक महत्व क्या है? – स्वायत्तता (Autonomy) बनाए रखना।
  19. NAM को ‘एक क्लब’ किसने कहा था? – आलोचकों ने इसे ‘कमजोरों का क्लब’ कहा था।
  20. NAM का मुख्य नारा आज क्या है? – “साझा भविष्य के लिए गहरी प्रतिबद्धता”।

महत्वपूर्ण PYQs (UPSC/SSC/State PCS)

  1. UPSC (2018): “गुटनिरपेक्षता (Non-alignment) की प्रासंगिकता शीत युद्ध के बाद और बढ़ गई है।” इस कथन का परीक्षण करें।
  2. SSC CGL: गुटनिरपेक्ष आंदोलन का प्रथम शिखर सम्मेलन किस वर्ष और कहाँ आयोजित किया गया था?(उत्तर: 1961, बेलग्रेड)
  3. NDA/CDS: निम्नलिखित में से कौन गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल नहीं था? (नेहरू, नासिर, स्टालिन, टीटो)(उत्तर: स्टालिन)
  4. State PCS: ‘पंचशील’ के सिद्धांतों को सबसे पहले किस आधिकारिक दस्तावेज में शामिल किया गया था?(उत्तर: 1954 के भारत-चीन समझौते में)
  5. UPSC: ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की अवधारणा को मज़बूत करने में NAM का क्या योगदान है?
  6. SSC: बांडुंग सम्मेलन (1955) के दौरान कितने देशों ने भाग लिया था?(उत्तर: 29)
  7. BPSC: भारत में आयोजित 1983 के NAM शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी?(उत्तर: इंदिरा गांधी)
  8. UPSC: “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) और गुटनिरपेक्षता के बीच संबंध स्पष्ट करें।
  9. Railway: 1961 में बेलग्रेड सम्मेलन के समय कितने देश NAM के सदस्य थे?(उत्तर: 25)
  10. State PCS: ‘नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था’ (NIEO) की मांग सबसे पहले किस अंतरराष्ट्रीय मंच से उठी थी?(उत्तर: गुटनिरपेक्ष आंदोलन के अल्जीयर्स सम्मेलन (1973) से)
Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।