भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) – 1935 अधिनियम सहित | 8वां संस्करण अपडेटेड

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) भारत के संवैधानिक विकास की आधारशिला है। इस लेख में भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) को क्रमबद्ध रूप में समझाया गया है।

✨ M. Laxmikanth 8th Edition (2025) Update

इस लेख को एम. लक्ष्मीकांत के नवीनतम 8वें संस्करण (आठवां संस्करण) के आधार पर अपडेट कर दिया गया है। हमने उन सभी बारीक पॉइंट्स को जोड़ दिया है जो पुराने नोट्स में नहीं थे। 2026-27 की परीक्षाओं के लिए यह सबसे सटीक और अद्यतन (Updated) सामग्री है।

संवैधानिक विकास की विकास यात्रा (1773 – 1947)

1773: रेगुलेटिंग एक्ट
नियमन और नियंत्रण की शुरुआत
1833: चार्टर अधिनियम
केंद्रीकरण (भारत का गवर्नर जनरल)
1858: भारत सरकार अधिनियम
सत्ता का हस्तांतरण (क्राउन का शासन)
1919/1935: उत्तरदायी शासन
द्वैध शासन और प्रांतीय स्वायत्तता
1947: स्वतंत्रता अधिनियम
पूर्ण संप्रभु लोकतांत्रिक भारत
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ऑडियो सारांश: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

M. LAXMIKANTH 8TH EDITION

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भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1773-1947 टाइमलाइन

भारत में संवैधानिक विकास की नींव ब्रिटिश शासन के दौरान पड़े विभिन्न अधिनियमों (Acts) से पड़ी। इसे हम दो भागों में पढ़ते हैं:

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भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) – कंपनी का शासन

  1. 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट: भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित करने का यह पहला कदम था।
  2. इसके द्वारा बंगाल के गवर्नर को ‘बंगाल का गवर्नर जनरल’ बनाया गया।
  3. लॉर्ड वारन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बने।
  4. इसके तहत 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई (1 मुख्य न्यायाधीश और 3 अन्य)।
  5. कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और भारतीयों से उपहार लेने पर रोक लगा दी गई।
  6. 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट: इसने कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया।
  7. राजनीति के लिए ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ और व्यापार के लिए ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ बनाया गया।
  8. इसी एक्ट के साथ भारत में ‘द्वैध शासन’ (Dual Government) की शुरुआत हुई।
  9. भारत में कंपनी के अधीन क्षेत्र को पहली बार ‘ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र’ कहा गया।
  10. 1813 का चार्टर अधिनियम: इसने भारत में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया (चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर)।
  11. इसके द्वारा ईसाई मिशनरियों को भारत आकर धर्म प्रचार की अनुमति दी गई।
  12. 1833 का चार्टर अधिनियम: यह ब्रिटिश भारत के ‘केंद्रीकरण’ की दिशा में अंतिम कदम था।
  13. बंगाल के गवर्नर जनरल को अब ‘भारत का गवर्नर जनरल’ बना दिया गया।
  14. लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
  15. इसने मद्रास और बॉम्बे के गवर्नरों की विधायिका शक्ति छीन ली।
  16. ईस्ट इंडिया कंपनी अब पूर्ण रूप से एक प्रशासनिक निकाय बन गई।
  17. 1853 का चार्टर अधिनियम: इसने पहली बार गवर्नर जनरल की परिषद के ‘विधायी’ और ‘प्रशासनिक’ कार्यों को अलग किया।
  18. सिविल सेवकों की भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता शुरू करने का प्रावधान किया गया (मैकाले समिति, 1854)।
  19. इसने पहली बार भारतीय केंद्रीय विधान परिषद में स्थानीय प्रतिनिधित्व की शुरुआत की।

I. कंपनी का शासन (1773 से 1858)Updated(2026-27)

  • 1781 का संशोधन अधिनियम (Act of Settlement): रेगुलेटिंग एक्ट की खामियों को दूर करने के लिए इसे लाया गया। इसने गवर्नर जनरल और उसकी काउंसिल को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया।
  • 1813 का चार्टर: भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान पहली बार इसी एक्ट में किया गया था।
  • 1833 का चार्टर: इस अधिनियम ने सिविल सेवकों के चयन के लिए ‘खुली प्रतियोगिता’ का प्रयास किया था (लेकिन कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका)।
  • 1853 का चार्टर: भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद में जो 6 नए सदस्य जोड़े गए थे, उन्हें ‘विधान पार्षद’ कहा गया।

भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1773–1947) – सम्राट का शासन

  1. 1858 का भारत सरकार अधिनियम: 1857 के विद्रोह के बाद कंपनी का शासन समाप्त कर सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथ में दे दिया गया।
  2. गवर्नर जनरल का पदनाम बदलकर वायसराय कर दिया गया।
  3. लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
  4. ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ और ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ को समाप्त कर दिया गया।
  5. एक नया पद ‘भारत का राज्य सचिव’ बनाया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद थी।
  6. 1861 का भारत परिषद अधिनियम: वायसराय को आपातकाल में बिना परिषद की सलाह के अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति मिली।
  7. इसने कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत की।
  8. वायसराय द्वारा लॉर्ड कैनिंग ने 1859 में शुरू की गई ‘पोर्टफोलियो (विभागीय) प्रणाली’ को मान्यता दी।
  9. 1892 का अधिनियम: इसने विधान परिषदों के कार्यों में वृद्धि की और उन्हें बजट पर चर्चा करने की शक्ति दी।
  10. इसमें ‘चुनाव’ शब्द का प्रयोग नहीं हुआ, लेकिन सीमित रूप से निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू हुई।
  11. 1909 का अधिनियम (मार्ले-मिंटो सुधार): लॉर्ड मार्ले भारत सचिव थे और लॉर्ड मिंटो वायसराय।
  12. इसने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत की (मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र)।
  13. लॉर्ड मिंटो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक’ के रूप में जाना जाने लगा।
  14. सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपालिका परिषद में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने।
  15. 1919 का अधिनियम (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार): इसने केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था (लोकसभा और राज्यसभा) शुरू की।
  16. प्रांतों में ‘द्वैध शासन’ (Dyarchy) व्यवस्था लागू की गई।
  17. लोक सेवा आयोग (PSC) का गठन करने का प्रावधान इसी एक्ट में था (1926 में गठन)।
  18. पहली बार महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।
  19. 1935 का भारत शासन अधिनियम: यह सबसे विस्तृत अधिनियम था जिससे भारतीय संविधान का 70% हिस्सा लिया गया है।
  20. इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर उन्हें ‘स्वायत्तता’ प्रदान की।
  21. केंद्र में द्वैध शासन प्रणाली शुरू की गई।
  22. एक संघीय न्यायालय (Federal Court) और RBI की स्थापना का प्रावधान किया गया।
  23. शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में हुआ: संघीय, प्रांतीय और समवर्ती।
  24. 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम: इसने भारत को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र घोषित किया।
  25. 15 अगस्त 1947 से भारत में ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया।
  26. वायसराय का पद समाप्त कर दिया गया और गवर्नर जनरल का पद पुनः बनाया गया।

II. सम्राट का शासन (1858 से 1947)Updated(2026-27)

  • 1861 का अधिनियम: वायसराय को अपनी परिषद में गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में भारतीयों को नामित करने की शक्ति मिली। 1862 में लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों— बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को विधान परिषद में मनोनीत किया।
  • 1909 का अधिनियम (मार्ले-मिंटो): पहली बार किसी भारतीय को वायसराय और गवर्नर की कार्यपालिका परिषद (Executive Council) के साथ एसोसिएशन बनाने का प्रावधान किया गया। (सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा को विधि सदस्य बनाया गया था)।
  • 1919 का अधिनियम: इसने केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था के साथ-साथ प्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था प्रारंभ की। बहुसंख्यक सदस्यों को प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से चुना जाता था।
  • 1919 का अधिनियम (विषय पृथक्करण): केंद्रीय और प्रांतीय विषयों की सूची को अलग किया गया। प्रांतीय विषयों को पुनः दो भागों में बांटा गया— हस्तांतरित (Transferred) और आरक्षित (Reserved)
  • 1935 का अधिनियम (शक्तियों का विभाजन): शक्तियों का बंटवारा इस प्रकार था:
    • संघीय सूची (59 विषय)
    • प्रांतीय सूची (54 विषय)
    • समवर्ती सूची (36 विषय)
    • अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers): ये वायसराय को दी गई थीं।
  • 1935 का अधिनियम: इसने 11 राज्यों में से 6 राज्यों में द्विसदनीय व्यवस्था (विधान परिषद और विधानसभा) शुरू की थी (जैसे- बंगाल, बॉम्बे, मद्रास, बिहार, संयुक्त प्रांत और असम)।

तुलना तालिका (Quick Revision Table)

अधिनियम (Act)प्रमुख विशेषता (Key Highlight)गवर्नर जनरल / वायसराय
1773 रेगुलेटिंग एक्टबंगाल का गवर्नर जनरल पद बनालॉर्ड वारन हेस्टिंग्स
1833 चार्टर एक्टभारत का गवर्नर जनरल पद बनालॉर्ड विलियम बेंटिक
1858 एक्टभारत का वायसराय पद बनालॉर्ड कैनिंग
1909 मार्ले-मिंटोसांप्रदायिक निर्वाचन की शुरुआतलॉर्ड मिंटो
1919 मोंटेग्यू-चेम्सफोर्डप्रांतों में द्वैध शासनलॉर्ड चेम्सफोर्ड
1935 भारत शासन एक्टकेंद्र में द्वैध शासन और प्रांतीय स्वायत्ततालॉर्ड विलिंगडन

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

  • इसने ‘भारत का सम्राट’ शब्द को शाही पदवी से समाप्त कर दिया।
  • ब्रिटिश शासक के ‘विधेयकों पर वीटो’ करने या उन्हें स्वीकृति के लिए आरक्षित रखने के अधिकार को समाप्त कर दिया गया, लेकिन यह अधिकार गवर्नर जनरल को दे दिया गया।

अतिरिक्त जानकारी

महत्वपूर्ण संस्था/प्रणालीस्थापना/अधिनियमविशेष टिप्पणी
विधि आयोग (Law Commission)1833 का चार्टर एक्टलॉर्ड मैकाले पहले अध्यक्ष बने
लोक सेवा आयोग (CPSC)1919 का एक्ट (ली आयोग)1926 में स्थापना हुई
सांप्रदायिक अवार्ड (Communal Award)1932 (रैमजे मैकडोनाल्ड)दलितों के लिए अलग निर्वाचन
संघीय न्यायालय (Federal Court)1935 का एक्ट1937 में कार्य शुरू किया

🔥 परीक्षा में पूछे गए प्रश्न (PYQ)

🟢 प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के द्वारा भारत में संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना का प्रावधान किया गया? (UPSC)

(A) 1919 का अधिनियम
(B) 1935 का अधिनियम
(C) 1909 का अधिनियम
(D) 1858 का अधिनियम

सही उत्तर: (B) 1935 का भारत शासन अधिनियम


🟢 प्रश्न 2.भारत में पृथक निर्वाचन (Separate Electorate) की शुरुआत किस अधिनियम से हुई? (SSC CGL)

(A) 1892
(B) 1909
(C) 1919
(D) 1935

सही उत्तर: (B) 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार


🟢 प्रश्न 3. द्वैध शासन’ (Dyarchy) की व्यवस्था सर्वप्रथम किस अधिनियम में लागू की गई? (UPPSC)‘

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1858

सही उत्तर: (B) 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार


🟢 प्रश्न 4.भारत में सिविल सेवा के लिए खुली प्रतियोगिता की व्यवस्था किस अधिनियम में की गई? (Railway)

(A) 1833
(B) 1853
(C) 1861
(D) 1919

सही उत्तर: (B) 1853 का चार्टर अधिनियम


🟢 प्रश्न 5.निम्नलिखित में से किस अधिनियम ने गवर्नर जनरल को ‘वायसराय’ में परिवर्तित किया? (UPSC)

(A) 1773
(B) 1833
(C) 1858
(D) 1909

सही उत्तर: (C) 1858 का भारत सरकार अधिनियम


🟢 प्रश्न 6. केंद्रीय एवं प्रांतीय विषयों का पृथक्करण किस अधिनियम के तहत हुआ? (BPSC)

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1858

सही उत्तर: (B) 1919 का अधिनियम


🟢 प्रश्न 7. निम्नलिखित में से किस अधिनियम को भारतीय संविधान का “Blueprint” कहा जाता है? (SSC)

(A) 1909
(B) 1919
(C) 1935
(D) 1947

सही उत्तर: (C) 1935 का भारत शासन अधिनियम


🟢 प्रश्न 8. भारत में पहली बार विधि आयोग (Law Commission) की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत हुई? (UPSC)

(A) 1813
(B) 1833
(C) 1853
(D) 1919

सही उत्तर: (B) 1833 का चार्टर अधिनियम

FQA

Q1. भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कब से कब तक मानी जाती है?

1773 से 1947 तक।

Q2. 1935 का अधिनियम क्यों महत्वपूर्ण है?

इसी से भारतीय संविधान का लगभग 70% भाग लिया गया।

Q3. Separate Electorate कब शुरू हुआ?

1909 के अधिनियम से।

Q4. पहली बार सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता कब शुरू हुई?

1853 के चार्टर एक्ट के बाद।

Q5. भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कितने कालखंडों में बाँटी जाती है?

दो कालखंडों में – कंपनी शासन (1773–1858) और सम्राट शासन (1858–1947)।

Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।