भाग 1: सिंधु नदी – उद्गम और प्रवाह
- सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के पास बोखर-चू (Bokhar-Chu) ग्लेशियर से होता है।
- तिब्बत में सिंधु नदी को ‘सिंगी खंबान’ (Sengi Khamban) या ‘शेर का मुख’ कहा जाता है।
- सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2880 किमी है (भारत में इसकी लंबाई 1114 किमी है)।
- सिंधु नदी भारत में लद्दाख के दमचोक (Demchok) नामक स्थान से प्रवेश करती है।
- यह नदी लद्दाख और जास्कर श्रेणियों के बीच उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है।
- लेह शहर सिंधु नदी के दाएं तट पर स्थित है।
- सिंधु नदी गिलगित के पास एक बहुत गहरा गार्ज (Gorge) बनाती है।
- यह नदी पाकिस्तान के चिल्लास (Chillas) नामक स्थान से प्रवेश करती है।
- सिंधु नदी अंत में कराची (पाकिस्तान) के पूर्व में अरब सागर में गिरती है।
- श्योक (Shyok) नदी सिंधु की एक प्रमुख सहायक नदी है जिसे ‘मृत्यु की नदी’ भी कहा जाता है।
- गिलगित, जास्कर, हुंजा और नुब्रा सिंधु की अन्य सहायक नदियाँ हैं।
- सिंधु नदी हिमालय को पार करने वाली एक पूर्ववर्ती (Antecedent) नदी है।
- सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।
- इस समझौते की मध्यस्थता विश्व बैंक (World Bank) ने की थी।
- समझौते के अनुसार, पश्चिम की तीन नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का 80% पानी पाकिस्तान उपयोग करेगा।
- पूर्व की तीन नदियों (रावी, ब्यास, सतलज) के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है।
- सिंधु नदी लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की सबसे प्रमुख नदी है।
- काबुल और खुर्रम नदियाँ सिंधु में पश्चिम (अफगानिस्तान) की ओर से आकर मिलती हैं।
- सिंधु नदी तंत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 11.65 लाख वर्ग किमी है।
- भारत में सिंधु का अपवाह क्षेत्र मुख्य रूप से लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब में है।
भाग 2: पंचनद – झेलम, चेनाब और रावी
- सिंधु की पाँच प्रमुख सहायक नदियों को ‘पंचनद’ कहा जाता है।
- झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलज मिलकर पंचनद बनाती हैं।
- ये पाँचों नदियाँ पाकिस्तान के मिठनकोट में सिंधु नदी से मिलती हैं।
- झेलम (Jhelum) नदी का उद्गम कश्मीर के वेरीनाग झरने से होता है।
- झेलम का प्राचीन नाम वितस्ता (Vitasta) है।
- श्रीनगर शहर झेलम नदी के तट पर स्थित है।
- झेलम नदी वुलर झील (भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील) से होकर गुजरती है।
- झेलम नदी भारत और पाकिस्तान की सीमा के समानांतर बहती है।
- किशनगंगा झेलम की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- चेनाब (Chenab) सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
- चेनाब का प्राचीन नाम अस्किनी (Asikni) है।
- चेनाब नदी का निर्माण दो धाराओं ‘चन्द्रा’ और ‘भागा’ के मिलने से होता है।
- चन्द्रा और भागा नदियाँ हिमाचल के बाड़ा लाचा ला दर्रे के पास से निकलती हैं।
- हिमाचल प्रदेश में चेनाब को चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है।
- बगलिहार, दुलहस्ती और सलाल जलविद्युत परियोजनाएं चेनाब नदी पर स्थित हैं।
- रावी (Ravi) नदी का उद्गम हिमाचल के रोहतांग दर्रे के पास से होता है।
- रावी का प्राचीन नाम परुष्णी या इरावती है।
- ऐतिहासिक ‘दसराज युद्ध’ (Battle of Ten Kings) परुष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था।
- थीन बांध (रणजीत सागर बांध) रावी नदी पर स्थित है।
- चम्बा शहर रावी नदी के किनारे बसा है।
भाग 3: ब्यास और सतलज नदी
- ब्यास (Beas) नदी का उद्गम रोहतांग दर्रे के पास ब्यास कुंड से होता है।
- ब्यास का प्राचीन नाम विपाशा (Vipasha) है।
- ब्यास पंचनद की एकमात्र नदी है जो पूरी तरह से भारत में बहती है।
- ब्यास और सतलज का संगम पंजाब के हरिके (Harike) में होता है।
- हरिके बैराज से ही भारत की सबसे लंबी नहर ‘इंदिरा गांधी नहर’ निकलती है।
- पोंग बांध ब्यास नदी पर हिमाचल प्रदेश में बना है।
- सतलज (Satluj) नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर के पास राकस ताल झील से होता है।
- सतलज का प्राचीन नाम शतुद्रि (Shutudri) है।
- सतलज नदी भारत में शिपकी ला (Shipki La) दर्रे से प्रवेश करती है।
- यह नदी हिमालय को काटकर गहरी घाटी (Gorge) बनाती है।
- भाखड़ा-नांगल बांध सतलज नदी पर स्थित है।
- भाखड़ा बांध के पीछे बनी झील का नाम गोविंद सागर झील है।
- नाथपा झाकरी परियोजना सतलज नदी पर हिमाचल प्रदेश में है।
- सतलज नदी पूर्ववर्ती अपवाह का एक उदाहरण है।
- सतलज, सिंधु नदी के समानांतर लगभग 400 किमी तक बहती है।
- लुधियाना और फिरोजपुर शहर सतलज नदी के किनारे स्थित हैं।
- सिंधु नदी तंत्र उत्तर-पश्चिम भारत की कृषि की रीढ़ है।
- पंजाब को ‘पांच नदियों की भूमि’ कहा जाता है।
- दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहते हैं।
- बिस्त दोआब: ब्यास और सतलज के बीच।
- बारी दोआब: ब्यास और रावी के बीच।
- रचना दोआब: रावी और चेनाब के बीच।
- चाज दोआब: चेनाब और झेलम के बीच।
- सिंधु सागर दोआब: झेलम और सिंधु के बीच।
- सिंधु जल समझौते के तहत भारत सतलज, ब्यास और रावी के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करता है।
- पाकिस्तान सिंधु, झेलम और चेनाब पर मुख्य रूप से निर्भर है।
- सिंधु नदी की सहायक नदी द्रास भारत का सबसे ठंडा स्थान है।
- तुलबुल परियोजना झेलम नदी पर स्थित है।
- उरी बांध भी झेलम नदी पर जम्मू-कश्मीर में बना है।
- सिंधु नदी तंत्र हिमालय की सबसे पश्चिमी नदी प्रणाली है।
- सिंधु नदी का मुहाना अरब सागर में है।
- इस तंत्र की नदियाँ गहरी घाटियों और विसर्पों का निर्माण करती हैं।
- सिंधु घाटी सभ्यता का विकास इसी नदी तंत्र के किनारे हुआ था।
- हड़प्पा रावी नदी के तट पर और मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के तट पर स्थित थे।
- सिंधु नदी तंत्र में जल परिवहन की अपार संभावनाएं हैं।
- ‘पंचनद’ का पानी अंत में सिंधु के बाएं तट पर मिलता है।
- कामेत पर्वत के पास से सिंधु की कई छोटी धाराएं निकलती हैं।
- सिंधु नदी तंत्र में मछलियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं।
- सिंधु डॉल्फिन (Indus River Dolphin) केवल सिंधु नदी में पाई जाने वाली एक दुर्लभ प्रजाति है।
- यह डॉल्फिन पंजाब (भारत) का राजकीय जलीय जीव है।
- ‘नीलम’ नदी किशनगंगा का ही दूसरा नाम है।
- सिंधु नदी तंत्र की नदियाँ जलविद्युत उत्पादन के लिए बहुत उपयुक्त हैं।
- हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी ब्यास नदी द्वारा निर्मित है।
- चमेरा बांध रावी नदी पर हिमाचल में बना है।
- सतलज नदी तिब्बत, भारत और पाकिस्तान तीन देशों में बहती है।
- ब्यास नदी कुल्लू पहाड़ियों से होकर बहती है।
- झेलम नदी पीर पंजाल पर्वतमाला के तलहटी में बहती है।
- चेनाब नदी लाहुल-स्पीति जिले से होकर गुजरती है।
- सिंधु जल समझौते को दुनिया के सबसे सफल जल समझौतों में गिना जाता है।
- भारत इस तंत्र पर कई ‘रन ऑफ द रिवर’ (Run-of-the-river) प्रोजेक्ट बना रहा है।
- सिंधु नदी का कुल अपवाह क्षेत्र 3,21,289 वर्ग किमी भारत में है।
- सिंधु की सहायक नदी जास्कर पदम घाटी से होकर बहती है।
- रावी नदी धौलाधार श्रेणी को काटती है।
- झेलम नदी पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले एक गहरी तंग घाटी बनाती है।
- सिंधु नदी तंत्र भारत की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
- रतले जलविद्युत परियोजना चेनाब नदी पर निर्माणाधीन है।
- कीरू परियोजना भी चेनाब नदी पर प्रस्तावित है।
- सिंधु की सहायक नदी सुरु कारगिल शहर से होकर बहती है।
- शाहपुर कंडी बांध रावी नदी पर स्थित है।