उच्च न्यायालय भारतीय न्यायपालिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है और यह राज्य स्तर पर संविधान का संरक्षक तथा नागरिकों के मूल अधिकारों का प्रमुख रक्षक होता है। प्रत्येक राज्य या राज्यों के समूह के लिए एक उच्च न्यायालय होता है, जो न केवल अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण रखता है, बल्कि कार्यपालिका और विधायिका के कार्यों की संवैधानिक वैधता की भी जाँच करता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 उच्च न्यायालयों से संबंधित प्रावधान करते हैं। उच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र, अपीलीय अधिकार क्षेत्र, पर्यवेक्षणीय अधिकार क्षेत्र तथा विशेष रूप से अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जो इसे नागरिक अधिकारों की रक्षा का एक प्रभावी माध्यम बनाती है। कई मामलों में उच्च न्यायालय की रिट शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में भी अधिक व्यापक मानी जाती है।
I. गठन, नियुक्ति और स्वतंत्रता
- भारत में उच्च न्यायालय की संस्था का गठन सबसे पहले 1862 में (कलकत्ता, बंबई और मद्रास) हुआ था।
- संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालयों का वर्णन है।
- अनुच्छेद 214: प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
- 7वें संविधान संशोधन (1956): संसद को दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय बनाने की शक्ति है।
- वर्तमान में भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं।
- केवल दिल्ली और जम्मू-कश्मीर ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं जिनका अपना उच्च न्यायालय है।
- गठन: प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होते हैं।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाती है (यह निश्चित नहीं है)।
- नियुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राष्ट्रपति CJI और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है।
- अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी सलाह ली जाती है।
- योग्यता: वह भारत का नागरिक हो।
- वह भारत के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर रहा हो।
- या वह कम से कम 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में वकील रहा हो।
- ध्यान दें: राष्ट्रपति की दृष्टि में ‘प्रसिद्ध विधिवेत्ता’ होने का प्रावधान HC के लिए नहीं है (केवल SC के लिए है)।
- शपथ: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ संबंधित राज्य का राज्यपाल दिलाता है।
- पदावधि: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकता है।
- वह अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपता है।
- निष्कासन: न्यायाधीश को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिससे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को (महाभियोग)।
- जजों का वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
- जजों की पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है (यह एक महत्वपूर्ण अंतर है)।
II. अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ
- प्रारंभिक क्षेत्राधिकार: वसीयत, विवाह, कंपनी कानून और अवमानना के मामले सीधे HC जा सकते हैं।
- राजस्व और उसके संग्रह से जुड़े मामले भी उच्च न्यायालय के प्रारंभिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
- रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 226): मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए HC रिट जारी कर सकता है।
- उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय (Art 32) से विस्तृत है।
- अपीलीय क्षेत्राधिकार: HC अपने अधीनस्थ न्यायालयों के दीवानी और आपराधिक फैसलों के विरुद्ध अपील सुनता है।
- यदि सत्र न्यायालय ने 7 वर्ष से अधिक की जेल या मृत्युदंड दिया हो, तो HC में अपील की जा सकती है।
- पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार (Art 227): HC को अपने अधिकार क्षेत्र के सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण की शक्ति है।
- सैन्य अदालतों (Military Courts) पर HC का अधीक्षण अधिकार नहीं होता।
- अभिलेख न्यायालय (Art 215): HC के फैसले अधीनस्थ न्यायालयों के लिए नजीर (Evidence) के रूप में कार्य करते हैं।
- उच्च न्यायालय को अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड देने की शक्ति है।
- न्यायिक समीक्षा: HC संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की जांच कर सकता है।
- स्थानांतरण की शक्ति: यदि किसी अधीनस्थ न्यायालय में संविधान की व्याख्या का मामला लंबित है, तो HC उसे अपने पास मंगा सकता है।
- वह अपने अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को नियंत्रित करता है।
III. महत्वपूर्ण तथ्य और तुलना
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के बाद केवल सुप्रीम कोर्ट या अन्य उच्च न्यायालयों में वकालत कर सकते हैं।
- अनुच्छेद 222: राष्ट्रपति, CJI की सलाह पर एक न्यायाधीश का तबादला एक HC से दूसरे HC में कर सकता है।
- कलकत्ता उच्च न्यायालय भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या सबसे अधिक है।
- उच्च न्यायालय राज्य के ‘नागरिक अधिकारों का रक्षक’ है।
- जजों के वेतन में कार्यकाल के दौरान कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति ‘कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश’ नियुक्त कर सकता है।
- अतिरिक्त न्यायाधीश: कार्य के बोझ को देखते हुए राष्ट्रपति 2 वर्ष के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है।
- उच्च न्यायालय राज्य की न्यायिक स्वतंत्रता का प्रहरी है।
उच्चतम न्यायालय (SC) बनाम उच्च न्यायालय (HC): तुलनात्मक तालिका
| विशेषता / आधार | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) | उच्च न्यायालय (High Court) |
| संविधान का भाग | भाग 5 (अनुच्छेद 124-147)। | भाग 6 (अनुच्छेद 214-231)। |
| क्षेत्राधिकार | पूरे भारत के क्षेत्र पर अधिकार। | संबंधित राज्य या राज्यों के समूह पर अधिकार। |
| जजों की संख्या | संसद द्वारा निर्धारित (वर्तमान में 34)। | राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित (निश्चित नहीं)। |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति द्वारा (CJI की सलाह पर)। | राष्ट्रपति द्वारा (CJI और राज्यपाल की सलाह पर)। |
| सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष। | 62 वर्ष। |
| शपथ | राष्ट्रपति दिलाते हैं। | संबंधित राज्य के राज्यपाल दिलाते हैं। |
| रिट शक्ति (Writs) | अनुच्छेद 32: केवल मौलिक अधिकारों के लिए। | अनुच्छेद 226: मौलिक अधिकारों + अन्य कानूनी अधिकारों के लिए। |
| पर्यवेक्षण शक्ति | भारत के सभी न्यायालयों का शीर्ष। | अपने अधीनस्थ न्यायालयों (District Courts) का अधीक्षण। |
| त्यागपत्र | राष्ट्रपति को संबोधित। | राष्ट्रपति को संबोधित। |
| पेंशन | भारत की संचित निधि से। | भारत की संचित निधि से (वेतन राज्य की निधि से होता है)। |
| वकालत पर रोक | रिटायरमेंट के बाद कहीं भी वकालत नहीं कर सकते। | रिटायरमेंट के बाद केवल SC या अन्य HC में वकालत कर सकते हैं। |
प्रमुख अंतर जो आपको याद रखने चाहिए:
- रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction): यहाँ उच्च न्यायालय (HC) की शक्ति उच्चतम न्यायालय (SC) से अधिक विस्तृत है। SC केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर रिट जारी कर सकता है, जबकि HC मौलिक अधिकारों के साथ-साथ सामान्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
- वेतन और पेंशन का पेंच: यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है—उच्च न्यायालय के जजों का वेतन राज्य सरकार देती है, लेकिन उनकी पेंशन केंद्र सरकार (भारत की संचित निधि) देती है।
- स्थानांतरण (Transfer): केवल राष्ट्रपति ही जजों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में तबादला कर सकता है।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
1. उच्च न्यायालय (High Court) क्या है?
उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो संविधान का संरक्षक, अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रक तथा नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक होता है।
2. भारतीय संविधान में उच्च न्यायालय से संबंधित प्रावधान कहाँ दिए गए हैं?
उच्च न्यायालय से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 214 से 231 में दिए गए हैं।
3. क्या प्रत्येक राज्य का अलग उच्च न्यायालय होता है?
नहीं, कुछ राज्यों का संयुक्त उच्च न्यायालय (Common High Court) भी हो सकता है, जैसे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय।
4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श किया जाता है।
5. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की न्यूनतम योग्यता क्या है?
व्यक्ति:
- भारत का नागरिक हो
- कम से कम 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष उच्च न्यायालय में वकालत का अनुभव रखता हो
6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल कितना होता है?
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।
7. उच्च न्यायालय की प्रमुख शक्तियाँ क्या हैं?
उच्च न्यायालय की प्रमुख शक्तियाँ हैं:
- मूल अधिकार क्षेत्र
- अपीलीय अधिकार क्षेत्र
- पर्यवेक्षणीय अधिकार (Article 227)
- रिट जारी करने की शक्ति (Article 226)
8. अनुच्छेद 226 का क्या महत्व है?
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
9. क्या उच्च न्यायालय की रिट शक्ति सर्वोच्च न्यायालय से अधिक व्यापक है?
हाँ, क्योंकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के अलावा अन्य अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
10. उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों पर कैसे नियंत्रण रखता है?
उच्च न्यायालय अनुच्छेद 227 के अंतर्गत अधीनस्थ न्यायालयों के कार्यों पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखता है।
11. क्या उच्च न्यायालय न्यायिक समीक्षा कर सकता है?
हाँ, उच्च न्यायालय कानूनों और कार्यपालिका के कार्यों की संवैधानिक वैधता की जाँच कर सकता है।
12. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य अंतर क्या है?
- उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर कार्य करता है
- सर्वोच्च न्यायालय पूरे देश के लिए सर्वोच्च न्यायिक संस्था है
- अनुच्छेद 226 बनाम अनुच्छेद 32 का अंतर परीक्षा में महत्वपूर्ण है
13. क्या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जा सकता है?
हाँ, उन्हें संसद द्वारा महाभियोग प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है।
14. उच्च न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध अपील कहाँ की जाती है?
उच्च न्यायालय के निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
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