मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) – Part 1

मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग 3 में वर्णित हैं, जिन्हें ‘भारत का मैग्नाकार्टा’ कहा जाता है। ये अधिकार नागरिकों के सर्वांगीण विकास और गरिमापूर्ण जीवन के लिए अनिवार्य हैं।

I. परिचय और सामान्य प्रावधान: अनुच्छेद 12-13

  1. मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के भाग 3 में किया गया है।
  2. ये अधिकार अनुच्छेद 12 से 35 तक विस्तृत हैं।
  3. मौलिक अधिकारों का विचार अमेरिकी संविधान (Bill of Rights) से लिया गया है।
  4. भाग 3 को ‘भारत का मैग्नाकार्टा’ की संज्ञा दी गई है।
  5. मूल संविधान में कुल 7 मौलिक अधिकार थे।
  6. 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा ‘संपत्ति के अधिकार’ को मौलिक अधिकारों से हटा दिया गया।
  7. वर्तमान में भारतीय नागरिकों को कुल 6 मौलिक अधिकार प्राप्त हैं।
  8. मौलिक अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं, यानी इनके उल्लंघन पर अदालत जाया जा सकता है।
  9. उच्चतम न्यायालय (SC) मौलिक अधिकारों का रक्षक और गारंटी देने वाला है।
  10. मौलिक अधिकार स्थायी नहीं हैं; संसद इनमें संशोधन कर सकती है।
  11. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर सभी अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं।
  12. अनुच्छेद 12: ‘राज्य’ शब्द की परिभाषा देता है।
  13. राज्य में केंद्र सरकार, संसद, राज्य सरकारें, विधानमंडल और सभी स्थानीय निकाय शामिल हैं।
  14. एलआईसी (LIC), ओएनजीसी (ONGC) जैसी वैधानिक संस्थाएं भी ‘राज्य’ की श्रेणी में आती हैं।
  15. अनुच्छेद 13: घोषणा करता है कि मौलिक अधिकारों से असंगत कानून शून्य (Void) होंगे।
  16. यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को ‘न्यायिक पुनरावलोकन’ (Judicial Review) की शक्ति देता है।
  17. सुप्रीम कोर्ट (Art 32) और हाई कोर्ट (Art 226) किसी भी असंवैधानिक कानून को रद्द कर सकते हैं।
  18. संविधान संशोधन को भी अनुच्छेद 13 के तहत चुनौती दी जा सकती है यदि वह मूल ढांचे का उल्लंघन करे।
  19. मौलिक अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र के आदर्श को बढ़ावा देते हैं।
  20. ये अधिकार व्यक्ति को राज्य की कठोर सत्ता के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  21. कुछ मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को प्राप्त हैं (15, 16, 19, 29, 30)।
  22. कुछ अधिकार नागरिकों और विदेशियों (शत्रु देश को छोड़कर) दोनों को प्राप्त हैं।
  23. मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं; राज्य इन पर ‘उचित प्रतिबंध’ लगा सकता है।
  24. इन अधिकारों का निलंबन केवल राष्ट्रपति द्वारा किया जा सकता है।
  25. मौलिक अधिकारों का मुख्य उद्देश्य ‘कानून का शासन’ स्थापित करना है।

II. समानता का अधिकार: अनुच्छेद 14 से 18

  1. अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण।
  2. ‘विधि के समक्ष समता’ का विचार ब्रिटेन से लिया गया है (नकारात्मक अवधारणा)।
  3. ‘विधियों का समान संरक्षण’ का विचार अमेरिका से लिया गया है (सकारात्मक अवधारणा)।
  4. विधि का शासन (Rule of Law) संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।
  5. राष्ट्रपति और राज्यपाल को अनुच्छेद 361 के तहत अनुच्छेद 14 से छूट प्राप्त है।
  6. अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
  7. यह अनुच्छेद केवल नागरिकों को प्राप्त है।
  8. राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति है।
  9. सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC/SC/ST) के लिए आरक्षण का आधार यही अनुच्छेद है।
  10. अनुच्छेद 16: लोक नियोजन (सरकारी नौकरी) के विषय में अवसर की समता।
  11. राज्य नियुक्तियों में किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
  12. पिछड़ा वर्ग आरक्षण और EWS आरक्षण (103वां संशोधन) इसी अनुच्छेद के अंतर्गत आते हैं।
  13. अनुच्छेद 17: ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) का अंत।
  14. अस्पृश्यता को किसी भी रूप में लागू करना एक दंडनीय अपराध है।
  15. यह अधिकार पूर्ण (Absolute) है, इसका कोई अपवाद नहीं है।
  16. अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत (Abolition of Titles)।
  17. राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
  18. भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।
  19. ‘भारत रत्न’ और ‘पद्म पुरस्कार’ उपाधियाँ नहीं बल्कि सम्मान हैं (बालाजी राघवन केस)।

III. स्वतंत्रता का अधिकार: अनुच्छेद 19 से 21

  1. अनुच्छेद 19: 6 लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा करता है।
  2. 19(1)(a): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (प्रेस की स्वतंत्रता इसी में शामिल है)।
  3. 19(1)(b): शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन की स्वतंत्रता।
  4. 19(1)(c): संगम, संघ या सहकारी समितियाँ बनाने की स्वतंत्रता।
  5. 19(1)(d): भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र निर्बाध संचरण (घूमने) की स्वतंत्रता।
  6. 19(1)(e): भारत के किसी भी भाग में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता।
  7. 19(1)(g): कोई भी वृत्ति, व्यापार या व्यवसाय करने की स्वतंत्रता।
  8. सूचना का अधिकार (RTI) अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत एक मूल अधिकार माना गया है।
  9. हड़ताल करने का अधिकार (Right to Strike) मौलिक अधिकार नहीं है।
  10. अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण।
  11. यह अनुच्छेद नागरिकों और विदेशियों दोनों को सुरक्षा देता है।
  12. ‘कार्योत्तर विधि’ (Ex-post-facto law) से संरक्षण: कानून बनने से पहले के कृत्यों पर सजा नहीं।
  13. ‘दोहरी क्षति’ (Double Jeopardy) से संरक्षण: एक अपराध के लिए दो बार सजा नहीं।
  14. ‘स्व-अभिशंसन’ (Self-incrimination) से संरक्षण: खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
  15. अनुच्छेद 21: प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
  16. “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” के बिना किसी को जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता।
  17. मेनका गांधी केस (1978) में अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या की गई।
  18. विदेश जाने का अधिकार अनुच्छेद 21 का हिस्सा है।
  19. निजता का अधिकार (Right to Privacy) अब एक मूल अधिकार है (पुट्टास्वामी केस)।
  20. स्वच्छ पर्यावरण और आश्रय का अधिकार भी अनुच्छेद 21 में शामिल है।
  21. अनुच्छेद 21-A: शिक्षा का अधिकार (Right to Education)।
  22. इसे 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया।
  23. 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना राज्य का कर्तव्य है।
  24. अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और निरोध (Detention) से संरक्षण।
  25. गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।
  26. पसंद के वकील से परामर्श करने का अधिकार अनुच्छेद 22 में है।
  27. निवारक निरोध (Preventive Detention) के तहत किसी को बिना ट्रायल के 3 महीने तक रखा जा सकता है।
  28. मौलिक अधिकार केवल दावों के रूप में नहीं, बल्कि राज्य पर सीमाओं के रूप में कार्य करते हैं।
  29. अनुच्छेद 15(6) और 16(6) को 2019 में जोड़ा गया (EWS आरक्षण)।
  30. राष्ट्रीय ध्वज फहराना अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार है।
  31. चुप रहने का अधिकार (Right to Silence) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
  32. ‘प्रस्तावना’ मौलिक अधिकारों की व्याख्या का आधार है।
  33. अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होने पर उसे अनुच्छेद 13 के तहत चुनौती दी जा सकती है।
  34. ‘राज्य’ की परिभाषा में प्राइवेट एजेंसियां भी आ सकती हैं यदि वे राज्य के अंग के रूप में कार्य करें।
  35. अनुच्छेद 17 के तहत दंड देने की शक्ति संसद के पास है।
  36. अस्पृश्यता अपराध अधिनियम 1955 का नाम बदलकर ‘सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम’ किया गया।
  37. अनुच्छेद 18 शैक्षणिक डिग्रियों (जैसे- PhD) पर रोक नहीं लगाता।
  38. अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रता केवल ‘नागरिकों’ को प्राप्त है।
  39. संचरण की स्वतंत्रता पर ‘जनजातीय क्षेत्रों’ के हित में रोक लगाई जा सकती है।
  40. संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300-A के तहत एक ‘कानूनी अधिकार’ है।
  41. अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में भी नहीं छीने जा सकते (44वां संशोधन)।
  42. हथकड़ी लगाना मानवाधिकारों और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
  43. त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) का अधिकार अनुच्छेद 21 में शामिल है।
  44. भोजन का अधिकार (Right to Food) भी अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना गया है।
  45. इंटरनेट का उपयोग करना अब अनुच्छेद 19 और 21 के तहत एक बुनियादी हक है।
  46. अनुच्छेद 21-A के लिए ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ 2009 में पारित हुआ।
  47. निवारक निरोध का उपयोग केवल असाधारण स्थितियों में ही किया जाना चाहिए।
  48. मौलिक अधिकार ‘पूर्ण’ (Absolute) नहीं बल्कि ‘प्रतिबंधित’ (Qualified) हैं।
  49. मौलिक अधिकार व्यक्ति और समाज के हितों के बीच संतुलन बनाते हैं।
  50. डॉ. अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की ‘हृदय और आत्मा’ कहा (इसे हम Part 2 में पढ़ेंगे)।
  51. मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार अनुच्छेद 32 देता है।
  52. भारतीय संविधान में ‘मूल अधिकारों’ का अध्याय सबसे विस्तृत है।
  53. सशस्त्र बलों के लिए मौलिक अधिकारों को संसद सीमित कर सकती है (अनुच्छेद 33)।
  54. मार्शल लॉ लागू होने पर मौलिक अधिकार प्रतिबंधित हो जाते हैं (अनुच्छेद 34)।
  55. मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति केवल संसद को है (अनुच्छेद 35)।
  56. एम. लक्ष्मीकांत के अनुसार, मौलिक अधिकार भारत में ‘कानून के शासन’ की आधारशिला हैं।

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