भारतीय संविधान ने भारत को “राज्यों का संघ” घोषित किया है (अनुच्छेद 1)। भारत में संघीय ढांचा मौजूद है—दोहरी सरकार, शक्तियों का विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका—लेकिन साथ ही मजबूत केंद्र, एकल नागरिकता और आपातकालीन प्रावधान जैसे एकात्मक तत्व भी शामिल हैं। इसी कारण भारत को अक्सर “अर्द्ध-संघीय” (Quasi-Federal) या “मजबूत केंद्र वाला संघ” कहा जाता है। संघवाद भारतीय संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

Table of Contents
I. संघीय व्यवस्था का परिचय और विशेषताएं
- शासन प्रणाली को दो भागों में बांटा जा सकता है: एकात्मक (Unitary) और संघीय (Federal)।
- एकात्मक सरकार में सभी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होती हैं (जैसे- ब्रिटेन, फ्रांस, जापान)।
- संघीय सरकार में शक्तियां केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों के बीच बंटी होती हैं (जैसे- अमेरिका, कनाडा, भारत)।
- ‘फेडरेशन’ (Federation) शब्द लैटिन शब्द ‘Foedus’ से आया है, जिसका अर्थ है ‘संधि’ या ‘समझौता’।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में ‘संघ’ (Federation) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
- इसके स्थान पर भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहा गया है।
- डॉ. अंबेडकर के अनुसार, भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी ‘समझौते’ का परिणाम नहीं है।
- भारतीय संघवाद कनाडाई मॉडल पर आधारित है, न कि अमेरिकी मॉडल पर।
- कनाडाई मॉडल की तरह ही भारत में भी एक ‘मजबूत केंद्र’ की व्यवस्था है।
- दोहरी सरकार: भारत में केंद्र और राज्य स्तर पर दो सरकारें होती हैं।
- शक्तियों का विभाजन: संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा है।
- संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं, जबकि राज्य सूची में क्षेत्रीय महत्व के।
- लिखित संविधान: भारत का संविधान लिखित और विस्तृत है, जो विवादों को रोकता है।
- संविधान की सर्वोच्चता: केंद्र या राज्य कोई भी संविधान के विरुद्ध कानून नहीं बना सकता।
- कठोर संविधान: संघीय ढांचे से जुड़े प्रावधानों को केवल विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति से बदला जा सकता है।
- स्वतंत्र न्यायपालिका: केंद्र और राज्यों के विवादों को सुलझाने के लिए न्यायपालिका स्वतंत्र है।
- द्विसदनीय व्यवस्था: संसद में दो सदन हैं—लोकसभा (जनता का प्रतिनिधित्व) और राज्यसभा (राज्यों का प्रतिनिधित्व)।
- राज्यसभा भारतीय संघीय ढांचे का रक्षक माना जाता है।
- संघवाद भारतीय संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) का हिस्सा है।
- भारतीय संघवाद को ‘सहयोगी संघवाद’ (Cooperative Federalism) भी कहा जाता है।
संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ (Core Federal Features)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| दोहरी सरकार | केंद्र + राज्य |
| शक्तियों का विभाजन | 7वीं अनुसूची: संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची |
| लिखित व सर्वोच्च संविधान | असंवैधानिक कानून शून्य |
| कठोरता (आंशिक) | संघीय प्रावधानों हेतु विशेष बहुमत + राज्यों की सहमति |
| स्वतंत्र न्यायपालिका | केंद्र-राज्य विवादों का निपटारा |
| द्विसदनीयता | लोकसभा + राज्यसभा (राज्यों का प्रतिनिधित्व) |

II. एकात्मक या गैर-संघीय विशेषताएं
- भारतीय संविधान में संघ के साथ-साथ कई एकात्मक (Unitary) लक्षण भी मौजूद हैं।
- सशक्त केंद्र: संघ सूची में अधिक विषय हैं और वे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
- राज्य अनश्वर नहीं हैं: संसद किसी राज्य की सीमा या नाम बदल सकती है (अनुच्छेद 3)।
- एकल संविधान: राज्यों के लिए अलग संविधान की व्यवस्था नहीं है।
- संविधान का लचीलापन: संविधान के बड़े हिस्से को संसद अकेले संशोधित कर सकती है।
- राज्यसभा में असमान प्रतिनिधित्व: अमेरिका के विपरीत, भारत में राज्यों का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर है।
- आपातकालीन प्रावधान: आपातकाल के समय केंद्र पूरी तरह शक्तिशाली हो जाता है और संघीय ढांचा एकात्मक हो जाता है।
- एकल नागरिकता: भारत में केवल राष्ट्रीय नागरिकता है, राज्य की नागरिकता नहीं।
- एकीकृत न्यायपालिका: भारत में ऊपर से नीचे तक एक ही न्यायिक तंत्र है।
- अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS): इनकी नियुक्ति केंद्र करता है, लेकिन ये राज्यों में कार्य करते हैं।
- एकीकृत निर्वाचन मशीनरी: चुनाव आयोग केंद्र और राज्य दोनों के चुनाव कराता है।
- राज्यपाल की नियुक्ति: राज्यपाल केंद्र का एजेंट होता है और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है।
- एकीकृत लेखा जांच मशीनरी: CAG केंद्र और राज्यों दोनों के खातों की जांच करता है।
- राज्य सूची पर संसद का अधिकार: अनुच्छेद 249 के तहत संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है।
- विधेयकों पर वीटो: राज्यपाल कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।
- के.सी. ह्वीयर ने भारतीय संविधान को ‘अर्द्ध-संघीय’ (Quasi-Federal) कहा है।
- मॉरिस जोन्स ने इसे ‘सौदेबाजी वाला संघवाद’ (Bargaining Federalism) कहा।
- ग्रेनविले ऑस्टिन ने इसे ‘सहयोगी संघवाद’ (Cooperative Federalism) कहा।
- आईवर जेनिंग्स ने इसे ‘मजबूत केंद्र वाला संघ’ कहा।
- भारतीय संघवाद की प्रकृति देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए है।
एकात्मक (Unitary) या गैर-संघीय तत्व
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| मजबूत केंद्र | संघ सूची अधिक व प्रमुख विषय |
| राज्य अनश्वर नहीं | अनुच्छेद 3: सीमा/नाम परिवर्तन |
| एकल नागरिकता | राज्य-नागरिकता नहीं |
| एकीकृत न्यायपालिका | एक ही न्यायिक तंत्र |
| आपातकाल | संघीय ढांचा अस्थायी रूप से एकात्मक |
| अखिल भारतीय सेवाएँ | IAS/IPS – केंद्र नियुक्ति, राज्य में कार्य |
| राज्यपाल | राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त |
III. महत्वपूर्ण तथ्य और निष्कर्ष
- एस.आर. बोम्मई मामला (1994): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संघवाद संविधान का मूल ढांचा है।
- क्षेत्रीय दलों के उभार ने भारतीय संघवाद को अधिक ‘प्रतिस्पर्धी’ बनाया है।
- नीति आयोग (NITI Aayog): यह सहयोगी संघवाद को बढ़ावा देने वाला एक मंच है।
- GST परिषद: यह वित्तीय संघवाद का सबसे बड़ा उदाहरण है।
- अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) अनुच्छेद 263 के तहत संघीय सहयोग को बढ़ाती है।
- शक्तियों का विकेंद्रीकरण (Decentralization) संघवाद की आत्मा है।
- भारतीय संघवाद ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
- अमेरिका ‘अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
- भारत में संघीय व्यवस्था को अपनाया गया क्योंकि देश बहुत विशाल और विविधतापूर्ण है।
- राज्यपाल का पद अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच तनाव का कारण बनता है।
- अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का दुरुपयोग संघवाद के लिए चुनौती रहा है।
- केंद्र द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान (Grants) राज्यों की वित्तीय स्थिति प्रभावित करते हैं।
- जल विवाद (Water Disputes) राज्यों के बीच सहयोग और संघर्ष दोनों के बिंदु हैं।
- ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (GST) ने वित्तीय शक्तियों का एकीकरण किया है।
- भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन ने भारतीय संघवाद को मजबूत किया है।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ही संघवाद आवश्यक है।
- भारत में ‘विशेष राज्य का दर्जा’ संघवाद की विविधता को दर्शाता है।
- केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारिया आयोग और पुंछी आयोग ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं।
- संघवाद केवल सत्ता का बंटवारा नहीं, बल्कि ‘साझा शासन’ है।
- भारतीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच एक ‘संतुलन चक्र’ है।
संघ बनाम एकात्मक – तुलनात्मक सार
| आधार | संघीय तत्व | एकात्मक तत्व |
|---|---|---|
| शक्ति वितरण | 7वीं अनुसूची | संघ सूची प्रधान |
| संविधान | कठोर (आंशिक) | कई संशोधन साधारण बहुमत |
| नागरिकता | — | एकल |
| न्यायपालिका | स्वतंत्र | एकीकृत संरचना |
| आपातकाल | — | केंद्र का वर्चस्व |
संघवाद पर महत्वपूर्ण आयोग/विचार
| विद्वान/आयोग | मत |
|---|---|
| K.C. Wheare | Quasi-Federal |
| Ivor Jennings | Strong Centre |
| Granville Austin | Cooperative Federalism |
| सरकारिया आयोग | केंद्र-राज्य संतुलन सुधार |
| पुंछी आयोग | समकालीन संघीय चुनौतियाँ |
प्रमुख केस लॉ
| केस | वर्ष | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| एस.आर. बोम्मई | 1994 | संघवाद = मूल ढांचा; 356 की न्यायिक समीक्षा |
| केशवानंद भारती | 1973 | संघवाद मूल संरचना का हिस्सा |
| वामन राव | 1981 | 24 अप्रैल 1973 के बाद Basic Structure लागू |
वित्तीय संघवाद के उदाहरण
| संस्था/तंत्र | महत्व |
|---|---|
| GST परिषद | सहकारी वित्तीय संघवाद |
| वित्त आयोग | कर-वितरण अनुशंसा |
| अंतर-राज्य परिषद (Art 263) | समन्वय मंच |
| नीति आयोग | सहयोगी संघवाद |
🎯 PYQ (UPSC/State PCS Pattern)
Q1. भारत को ‘राज्यों का संघ’ कहा गया है, क्योंकि: (UPSC)
(a) राज्य संधि से बने हैं
(b) राज्यों को पृथक होने का अधिकार है
(c) संघ राज्यों का समझौता नहीं है
(d) राज्य सर्वोच्च हैं
✅ उत्तर: (c)
Q2. निम्न में से कौन-सा भारतीय संघवाद का एकात्मक तत्व है?(UPPCS)
- एकल नागरिकता
- स्वतंत्र न्यायपालिका
- अखिल भारतीय सेवाएँ
(a) केवल 1
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
✅ उत्तर: (b)
Q3. संघवाद को मूल संरचना किस मामले में घोषित किया गया?(BPSC)
(a) गोलकनाथ
(b) मिनर्वा मिल्स
(c) एस.आर. बोम्मई
(d) शंकरी प्रसाद
✅ उत्तर: (c)
Q4. अनुच्छेद 3 संबंधित है: (MPPSC)
(a) वित्त आयोग
(b) राज्य पुनर्गठन
(c) नागरिकता
(d) न्यायपालिका
✅ उत्तर: (b)
❓ FAQ
Q1. क्या भारत पूर्ण संघीय राज्य है?
नहीं, इसे अर्द्ध-संघीय या मजबूत केंद्र वाला संघ कहा जाता है।
Q2. भारतीय संघवाद किस मॉडल पर आधारित है?
कनाडाई मॉडल।
Q3. 7वीं अनुसूची में कितनी सूचियाँ हैं?
तीन—संघ, राज्य, समवर्ती।
Q4. संघवाद संविधान के किस हिस्से में है?
अनुच्छेद 1 और 7वीं अनुसूची में; साथ ही मूल ढांचा सिद्धांत में।
Q5. संघवाद क्यों अपनाया गया?
विविधता, विशालता और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के संतुलन हेतु।
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