संघीय व्यवस्था (Federal System)

भारतीय संविधान ने भारत के लिए एक संघीय व्यवस्था की घोषणा की है, लेकिन इसमें कुछ अनोखी एकात्मक विशेषताएं भी शामिल हैं।

I. संघीय व्यवस्था का परिचय और विशेषताएं

  1. शासन प्रणाली को दो भागों में बांटा जा सकता है: एकात्मक (Unitary) और संघीय (Federal)
  2. एकात्मक सरकार में सभी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होती हैं (जैसे- ब्रिटेन, फ्रांस, जापान)।
  3. संघीय सरकार में शक्तियां केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों के बीच बंटी होती हैं (जैसे- अमेरिका, कनाडा, भारत)।
  4. ‘फेडरेशन’ (Federation) शब्द लैटिन शब्द ‘Foedus’ से आया है, जिसका अर्थ है ‘संधि’ या ‘समझौता’।
  5. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में ‘संघ’ (Federation) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।
  6. इसके स्थान पर भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहा गया है।
  7. डॉ. अंबेडकर के अनुसार, भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी ‘समझौते’ का परिणाम नहीं है।
  8. भारतीय संघवाद कनाडाई मॉडल पर आधारित है, न कि अमेरिकी मॉडल पर।
  9. कनाडाई मॉडल की तरह ही भारत में भी एक ‘मजबूत केंद्र’ की व्यवस्था है।
  10. दोहरी सरकार: भारत में केंद्र और राज्य स्तर पर दो सरकारें होती हैं।
  11. शक्तियों का विभाजन: संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा है।
  12. संघ सूची में राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं, जबकि राज्य सूची में क्षेत्रीय महत्व के।
  13. लिखित संविधान: भारत का संविधान लिखित और विस्तृत है, जो विवादों को रोकता है।
  14. संविधान की सर्वोच्चता: केंद्र या राज्य कोई भी संविधान के विरुद्ध कानून नहीं बना सकता।
  15. कठोर संविधान: संघीय ढांचे से जुड़े प्रावधानों को केवल विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति से बदला जा सकता है।
  16. स्वतंत्र न्यायपालिका: केंद्र और राज्यों के विवादों को सुलझाने के लिए न्यायपालिका स्वतंत्र है।
  17. द्विसदनीय व्यवस्था: संसद में दो सदन हैं—लोकसभा (जनता का प्रतिनिधित्व) और राज्यसभा (राज्यों का प्रतिनिधित्व)।
  18. राज्यसभा भारतीय संघीय ढांचे का रक्षक माना जाता है।
  19. संघवाद भारतीय संविधान के ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) का हिस्सा है।
  20. भारतीय संघवाद को ‘सहयोगी संघवाद’ (Cooperative Federalism) भी कहा जाता है।

II. एकात्मक या गैर-संघीय विशेषताएं

  1. भारतीय संविधान में संघ के साथ-साथ कई एकात्मक (Unitary) लक्षण भी मौजूद हैं।
  2. सशक्त केंद्र: संघ सूची में अधिक विषय हैं और वे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
  3. राज्य अनश्वर नहीं हैं: संसद किसी राज्य की सीमा या नाम बदल सकती है (अनुच्छेद 3)।
  4. एकल संविधान: राज्यों के लिए अलग संविधान की व्यवस्था नहीं है।
  5. संविधान का लचीलापन: संविधान के बड़े हिस्से को संसद अकेले संशोधित कर सकती है।
  6. राज्यसभा में असमान प्रतिनिधित्व: अमेरिका के विपरीत, भारत में राज्यों का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर है।
  7. आपातकालीन प्रावधान: आपातकाल के समय केंद्र पूरी तरह शक्तिशाली हो जाता है और संघीय ढांचा एकात्मक हो जाता है।
  8. एकल नागरिकता: भारत में केवल राष्ट्रीय नागरिकता है, राज्य की नागरिकता नहीं।
  9. एकीकृत न्यायपालिका: भारत में ऊपर से नीचे तक एक ही न्यायिक तंत्र है।
  10. अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS): इनकी नियुक्ति केंद्र करता है, लेकिन ये राज्यों में कार्य करते हैं।
  11. एकीकृत निर्वाचन मशीनरी: चुनाव आयोग केंद्र और राज्य दोनों के चुनाव कराता है।
  12. राज्यपाल की नियुक्ति: राज्यपाल केंद्र का एजेंट होता है और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है।
  13. एकीकृत लेखा जांच मशीनरी: CAG केंद्र और राज्यों दोनों के खातों की जांच करता है।
  14. राज्य सूची पर संसद का अधिकार: अनुच्छेद 249 के तहत संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है।
  15. विधेयकों पर वीटो: राज्यपाल कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।
  16. के.सी. ह्वीयर ने भारतीय संविधान को ‘अर्द्ध-संघीय’ (Quasi-Federal) कहा है।
  17. मॉरिस जोन्स ने इसे ‘सौदेबाजी वाला संघवाद’ (Bargaining Federalism) कहा।
  18. ग्रेनविले ऑस्टिन ने इसे ‘सहयोगी संघवाद’ (Cooperative Federalism) कहा।
  19. आईवर जेनिंग्स ने इसे ‘मजबूत केंद्र वाला संघ’ कहा।
  20. भारतीय संघवाद की प्रकृति देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए है।

III. महत्वपूर्ण तथ्य और निष्कर्ष

  1. एस.आर. बोम्मई मामला (1994): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संघवाद संविधान का मूल ढांचा है।
  2. क्षेत्रीय दलों के उभार ने भारतीय संघवाद को अधिक ‘प्रतिस्पर्धी’ बनाया है।
  3. नीति आयोग (NITI Aayog): यह सहयोगी संघवाद को बढ़ावा देने वाला एक मंच है।
  4. GST परिषद: यह वित्तीय संघवाद का सबसे बड़ा उदाहरण है।
  5. अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) अनुच्छेद 263 के तहत संघीय सहयोग को बढ़ाती है।
  6. शक्तियों का विकेंद्रीकरण (Decentralization) संघवाद की आत्मा है।
  7. भारतीय संघवाद ‘विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
  8. अमेरिका ‘अविनाशी राज्यों का अविनाशी संघ’ है।
  9. भारत में संघीय व्यवस्था को अपनाया गया क्योंकि देश बहुत विशाल और विविधतापूर्ण है।
  10. राज्यपाल का पद अक्सर केंद्र और राज्यों के बीच तनाव का कारण बनता है।
  11. अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का दुरुपयोग संघवाद के लिए चुनौती रहा है।
  12. केंद्र द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान (Grants) राज्यों की वित्तीय स्थिति प्रभावित करते हैं।
  13. जल विवाद (Water Disputes) राज्यों के बीच सहयोग और संघर्ष दोनों के बिंदु हैं।
  14. ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (GST) ने वित्तीय शक्तियों का एकीकरण किया है।
  15. भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन ने भारतीय संघवाद को मजबूत किया है।
  16. क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ही संघवाद आवश्यक है।
  17. भारत में ‘विशेष राज्य का दर्जा’ संघवाद की विविधता को दर्शाता है।
  18. केंद्र-राज्य संबंधों पर सरकारिया आयोग और पुंछी आयोग ने महत्वपूर्ण सिफारिशें दीं।
  19. संघवाद केवल सत्ता का बंटवारा नहीं, बल्कि ‘साझा शासन’ है।
  20. भारतीय संघवाद केंद्र और राज्यों के बीच एक ‘संतुलन चक्र’ है।

क्या आप इन नोट्स को ऑफलाइन पढ़ना चाहते हैं?

📄 डाउनलोड करें (Click here)

(“ऐसे ही और शानदार PDF नोट्स के लिए हमारे टेलीग्राम चैनल से अभी जुड़ें!”)

प्रीमियम नोट्स @mypdfnotes

अपनी UPSC/SSC तैयारी को नई धार दें, अभी टेलीग्राम जॉइन करें।

Join Telegram Channel ➔