सोवियत संघ का विघटन (1991): कारण, सुधार और परिणाम | USSR Dissolution Notes in Hindi

सोवियत समाजवादी गणतंत्र संघ (USSR) का विघटन आधुनिक इतिहास की एक युगांतरकारी घटना थी। 26 दिसंबर 1991 को दुनिया के सबसे बड़े साम्यवादी देश का अस्तित्व समाप्त हो गया और वह 15 स्वतंत्र देशों में बंट गया। इस घटना ने न केवल शीत युद्ध को समाप्त किया, बल्कि वैश्विक राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।

1. सोवियत संघ क्या था? (एक परिचय)

1917 की रूसी क्रांति के बाद 1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई थी। यह 15 गणराज्यों का एक संघ था, जिसमें रूस सबसे शक्तिशाली था। इसकी विचारधारा ‘मार्क्सवाद-लेनिनवाद’ पर आधारित थी, जहाँ अर्थव्यवस्था और शासन पर कम्युनिस्ट पार्टी का पूर्ण नियंत्रण था।


2. विघटन के प्रमुख कारण (Causes of Dissolution)

सोवियत संघ का पतन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई गहरे आर्थिक और राजनीतिक कारण थे:

(A) आर्थिक ठहराव (Economic Stagnation)

सोवियत अर्थव्यवस्था पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में थी। 1970 और 80 के दशक तक आते-आते यह पिछड़ने लगी।

  • हथियारों की होड़: अमेरिका से प्रतिस्पर्धा में सोवियत संघ ने अपना अधिकांश बजट हथियारों पर खर्च किया, जिससे आम जनता के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी हो गई।
  • तकनीकी पिछड़ापन: पश्चिमी देशों के मुकाबले सोवियत संघ तकनीकी और कंप्यूटर के क्षेत्र में बहुत पीछे रह गया।

(B) नौकरशाही और भ्रष्टाचार

कम्युनिस्ट पार्टी का शासन अधिनायकवादी था। नौकरशाही (Bureaucracy) भ्रष्ट और अक्षम हो गई थी। आम जनता को कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं थे, जिससे लोगों के भीतर व्यवस्था के प्रति भारी गुस्सा था।

(C) गोर्बाचेव के सुधार (The Reforms of Gorbachev)

1985 में मिखाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ के महासचिव बने। उन्होंने व्यवस्था को सुधारने के लिए दो नीतियां लागू कीं:

  • ग्लासनोस्त (Glasnost): इसका अर्थ था ‘खुलापन’। इसके तहत लोगों को बोलने और सरकार की आलोचना करने की आजादी दी गई।
  • पेरेस्त्रोइका (Perestroika): इसका अर्थ था ‘पुनर्गठन’। इसके तहत अर्थव्यवस्था में ढील देकर निजी निवेश की अनुमति दी गई। इन सुधारों ने वह रास्ता खोल दिया जिसे बाद में रोकना मुश्किल हो गया।

(D) राष्ट्रवाद का उदय

बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) और यूक्रेन जैसे गणराज्यों में राष्ट्रवाद की लहर दौड़ गई। वे रूस के प्रभुत्व से बाहर निकलकर स्वतंत्र होना चाहते थे।

(E) अफगानिस्तान युद्ध (1979-89)

अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप बहुत महंगा साबित हुआ। इसमें भारी धन और जनहानि हुई, जिसे ‘सोवियत संघ का वियतनाम’ कहा जाता है।


3. विघटन का घटनाक्रम (The Timeline)

  • 1989: बर्लिन की दीवार गिरी, जिसने पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के पतन की शुरुआत की।
  • अगस्त 1991: कम्युनिस्ट पार्टी के कट्टरपंथियों ने गोर्बाचेव के खिलाफ तख्तापलट (Coup) की कोशिश की, जो विफल रही। बोरिस येल्तसिन इस विरोध के नायक बनकर उभरे।
  • दिसंबर 1991: रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने घोषणा की कि सोवियत संघ अब अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने ‘स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रमंडल’ (CIS) बनाया।
  • 25 दिसंबर 1991: मिखाइल गोर्बाचेव ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।
  • 26 दिसंबर 1991: आधिकारिक तौर पर सोवियत संघ का विघटन हो गया।

4. विघटन के परिणाम (Consequences)

  1. शीत युद्ध का अंत: अमेरिका और सोवियत संघ के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव समाप्त हो गया।
  2. अमेरिका का वर्चस्व: दुनिया में केवल एक महाशक्ति बची—संयुक्त राज्य अमेरिका।
  3. 15 नए देशों का उदय: रूस, यूक्रेन, जॉर्जिया, बेलारूस, आर्मेनिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उजबेकिस्तान, मोल्दोवा, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया।
  4. शॉक थेरेपी: पूर्व साम्यवादी देशों ने अचानक अपनी अर्थव्यवस्था को पूंजीवाद में बदला, जिसे ‘शॉक थेरेपी’ कहा गया। इससे शुरू में भारी आर्थिक तबाही हुई।

5. भारत पर प्रभाव

भारत और सोवियत संघ के बीच बहुत गहरे संबंध थे। विघटन ने भारत के सामने कई चुनौतियां पेश कीं:

  • भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापारिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करना पड़ा।
  • रक्षा आपूर्ति के लिए भारत अब केवल रूस पर निर्भर नहीं रह सकता था।
  • भारत ने 1991 में ही अपनी अर्थव्यवस्था के उदारीकरण (Liberalization) की शुरुआत की।

📝 UPSC / SSC Exam Oriented One-liners

  • सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव थे।
  • रूस के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन थे।
  • सोवियत संघ की सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट रूस को मिली।
  • ‘ग्लासनोस्त’ और ‘पेरेस्त्रोइका’ शब्दों का संबंध गोर्बाचेव से है।
  • सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य (Successor State) रूस को माना गया।