द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया ने राहत की सांस ली ही थी कि एक नए प्रकार का संघर्ष शुरू हो गया, जिसे ‘शीत युद्ध’ कहा जाता है। यह युद्ध हथियारों से नहीं, बल्कि विचारधाराओं, कूटनीति, जासूसी और मनोवैज्ञानिक प्रचार के माध्यम से लड़ा गया। यह मुख्य रूप से दो महाशक्तियों— संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) के बीच का संघर्ष था।

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शीत युद्ध (Cold War) का अर्थ क्या है?
‘शीत युद्ध’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले बर्नार्ड बारूक ने किया था, लेकिन इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय वाल्टर लिपमैन को जाता है।
- परिभाषा: शीत युद्ध प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष (आमने-सामने की लड़ाई) न होकर दो महाशक्तियों—संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) के बीच वैचारिक, राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव की स्थिति थी।
- प्रकृति: यह “मस्तिष्क का युद्ध” था जो समाचार पत्रों, प्रचार (Propaganda) और जासूसी के माध्यम से लड़ा गया। इसमें युद्ध जैसी स्थितियाँ तो बनी रहीं, लेकिन ‘तीसरा विश्व युद्ध’ नहीं हुआ।
शीत युद्ध के मुख्य कारण (Causes)
शीत युद्ध अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई गहरे और जटिल कारण थे:
वैचारिक मतभेद (Ideological Conflict)
यह शीत युद्ध का सबसे बुनियादी कारण था। दुनिया दो अलग-अलग जीवन-दर्शनों में बँट गई थी:
- पश्चिमी गुट (USA): यह पूँजीवाद (Capitalism) और लोकतंत्र का समर्थक था। इनका मानना था कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त बाज़ार सबसे महत्वपूर्ण हैं।
- पूर्वी गुट (USSR): यह साम्यवाद (Communism) और समाजवाद का समर्थक था। इनका उद्देश्य समानता और राज्य का पूर्ण नियंत्रण था।
परमाणु हथियारों की होड़ (Nuclear Arms Race)
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने गुप्त रूप से परमाणु बम बनाया और उसका प्रयोग किया।
- सोवियत संघ को लगा कि अमेरिका ने यह जानकारी उससे छिपाई है, जिससे उनमें अविश्वास पैदा हुआ।
- परिणामस्वरूप, सोवियत संघ ने भी 1949 में अपना परमाणु परीक्षण किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच विनाशकारी हथियारों को इकट्ठा करने की अंधी दौड़ शुरू हो गई।
सोवियत संघ द्वारा समझौतों का उल्लंघन
युद्ध के दौरान ‘याल्टा’ और ‘पोट्सडैम’ सम्मेलनों में कुछ समझौते हुए थे:
- तय हुआ था कि पूर्वी यूरोप के देशों में लोकतांत्रिक चुनाव होंगे।
- लेकिन स्टालिन ने पोलैंड, हंगरी, रोमानिया और बुल्गारिया में साम्यवादी कठपुतली सरकारें स्थापित कर दीं, जिससे अमेरिका और ब्रिटेन भड़क गए।
ट्रूमैन सिद्धांत और मार्शल योजना (Truman Doctrine & Marshall Plan)
अमेरिका ने साम्यवाद के प्रसार को रोकने के लिए “नियंत्रण की नीति” (Containment) अपनाई:
- ट्रूमैन सिद्धांत (1947): राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने घोषणा की कि अमेरिका उन देशों को सैन्य और आर्थिक सहायता देगा जो साम्यवाद के खतरे का सामना कर रहे हैं (विशेषकर यूनान और तुर्की)।
- मार्शल योजना (1948): इसके तहत अमेरिका ने युद्ध से तबाह यूरोपीय देशों को अरबों डॉलर की आर्थिक सहायता दी ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर साम्यवाद के जाल में न फँसें। सोवियत संघ ने इसे “डॉलर साम्राज्यवाद” कहा और इसका विरोध किया।
शीत युद्ध की प्रमुख घटनाएँ और चरण
बर्लिन की नाकेबंदी (Berlin Blockade, 1948)
यह शीत युद्ध का पहला बड़ा संकट था जिसने यूरोप को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया।
- कारण: अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने अपने नियंत्रण वाले पश्चिमी जर्मनी में एक नई मुद्रा (Deutsche Mark) शुरू की, जिसका सोवियत संघ ने विरोध किया।
- घटना: स्टालिन ने पश्चिमी बर्लिन के सभी जमीनी रास्तों (सड़क और रेल) को बंद कर दिया ताकि वहाँ रसद न पहुँच सके।
- समाधान: अमेरिका ने ‘बर्लिन एयरलिफ्ट’ शुरू किया, जिसमें हवाई जहाजों के जरिए लाखों टन भोजन और ईंधन पहुँचाया गया। अंततः 1949 में सोवियत संघ को नाकेबंदी हटानी पड़ी।
सैन्य गठबंधनों का निर्माण (Formation of Alliances)
दोनों महाशक्तियों ने अपनी सुरक्षा और प्रभाव बढ़ाने के लिए दुनिया को सैनिक गुटों में बाँट दिया:
- NATO (1949): अमेरिका के नेतृत्व में बना गठबंधन। इसका सिद्धांत था— “किसी एक सदस्य पर हमला, सब पर हमला माना जाएगा।”
- SEATO और CENTO: अमेरिका ने एशिया में साम्यवाद रोकने के लिए ये संगठन बनाए।
- WARSAW PACT (1955): नाटो के जवाब में सोवियत संघ ने पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ मिलकर यह संधि की।
कोरियाई युद्ध (Korean War, 1950-53)
यह शीत युद्ध का पहला “प्रॉक्सि युद्ध” (Proxy War) था जहाँ महाशक्तियाँ सीधे नहीं बल्कि दूसरों के जरिए लड़ीं।
- विभाजन: कोरिया 38वीं समानांतर रेखा (38th Parallel) द्वारा उत्तर (साम्यवादी) और दक्षिण (पूँजीवादी) में विभाजित था।
- युद्ध: उत्तर कोरिया ने दक्षिण पर हमला किया। अमेरिका ने दक्षिण का साथ दिया और चीन/रूस ने उत्तर का।
- परिणाम: भारी जनहानि के बाद युद्ध ‘यथास्थिति’ पर समाप्त हुआ और कोरिया आज भी विभाजित है।
क्यूबा मिसाइल संकट (Cuban Missile Crisis, 1962)
इसे शीत युद्ध का “सबसे खतरनाक मोड़” कहा जाता है।
- तनाव: सोवियत संघ ने अमेरिका के करीब स्थित क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दीं।
- प्रतिक्रिया: अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने क्यूबा की समुद्री नाकेबंदी कर दी और सोवियत जहाजों को रोकने की चेतावनी दी।
- नतीजा: 13 दिनों तक दुनिया परमाणु विनाश के डर में रही। अंततः सोवियत नेता ख्रुश्चेव मिसाइलें हटाने को तैयार हुए और युद्ध टल गया।
“Exam-Focus”
अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में “हॉट लाइन” (Hotline) के बारे में पूछा जाता है। क्यूबा मिसाइल संकट के बाद ही अमेरिका और सोवियत संघ के बीच सीधे संवाद के लिए ‘हॉट लाइन’ की स्थापना की गई थी ताकि भविष्य में गलतफहमी के कारण युद्ध न हो।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) और भारत की भूमिका
शीत युद्ध के दौर में जहाँ दुनिया दो ध्रुवों में बँटी हुई थी, भारत ने अपनी एक स्वतंत्र राह चुनी जिसे गुटनिरपेक्षता कहा गया। वहीं, 1991 में सोवियत संघ के पतन ने इस लंबे वैचारिक संघर्ष का अंत कर दिया।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का अर्थ किसी भी महाशक्ति के सैन्य गुट (NATO या Warsaw Pact) में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना था।
भारत की मुख्य भूमिका:
- आधारशिला: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार थे। 1955 के बांडुंग सम्मेलन ने इसकी जमीन तैयार की।
- बेलग्रेड शिखर सम्मेलन (1961): यहाँ NAM का पहला आधिकारिक सम्मेलन हुआ, जिसमें नेहरू (भारत), नासिर (मिस्र), टीटो (यूगोस्लाविया), सुकर्णो (इंडोनेशिया) और नक्रुमा (घाना) ने नेतृत्व किया।
- पंचशील सिद्धांत: भारत ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के 5 सिद्धांतों को NAM का वैचारिक आधार बनाया।
- तीसरी दुनिया की आवाज़: भारत ने एशिया और अफ्रीका के नए स्वतंत्र देशों को महाशक्तियों के मोहरे बनने से बचाया और उनके हितों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज़ उठाई।
- शांतिदूत: कोरियाई युद्ध और स्वेज नहर संकट के दौरान भारत ने एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में युद्ध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शीत युद्ध का अंत और सोवियत संघ का विघटन (1991)
1991 में सोवियत संघ (USSR) का टूटना 20वीं सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना थी, जिसने शीत युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।
विघटन के प्रमुख कारण:
- गोर्बाचेव के सुधार: मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत व्यवस्था को सुधारने के लिए दो नीतियाँ पेश कीं, जो उलटी पड़ गईं:
- ग्लासनोस्त (Glasnost): राजनीतिक खुलापन और बोलने की आजादी।
- पेरेस्त्रोइका (Perestroika): आर्थिक और प्रशासनिक पुनर्गठन।
- आर्थिक विफलता: सोवियत संघ ने अपनी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हथियारों की होड़ में झोंक दिया था, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी हो गई।
- राष्ट्रवाद का प्रसार: सोवियत संघ के भीतर शामिल रूस, यूक्रेन, जॉर्जिया और बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) में अपनी अलग पहचान और स्वतंत्रता की मांग तेज हो गई।
- बर्लिन की दीवार का गिरना (1989): यह घटना साम्यवाद के पतन का प्रतीक बनी और पूर्वी यूरोप से सोवियत नियंत्रण खत्म होने लगा।
विघटन का परिणाम:
- 25 दिसंबर 1991: सोवियत संघ आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया और 15 स्वतंत्र गणराज्यों में विभाजित हो गया।
- रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी बना और उसे UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिली।
- इसी के साथ ‘एकध्रुवीय विश्व’ (Unipolar World) की शुरुआत हुई जिसमें अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बचा।
शीत युद्ध और गुटनिरपेक्ष आंदोलन महत्वपूर्ण One-Liners
शीत युद्ध: अर्थ और उदय
- ‘शीत युद्ध’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया? – बर्नार्ड बारूक।
- शीत युद्ध को लोकप्रिय बनाने वाला विद्वान कौन था? – वाल्टर लिपमैन।
- शीत युद्ध किन दो महाशक्तियों के बीच था? – संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR)।
- शीत युद्ध की वैचारिक लड़ाई क्या थी? – पूँजीवाद बनाम साम्यवाद।
- ‘आयरन कर्टन’ (लौह आवरण) का नारा किसने दिया? – विंस्टन चर्चिल (फुल्टन भाषण)।
- ट्रूमैन सिद्धांत (1947) का मुख्य उद्देश्य क्या था? – साम्यवाद के प्रसार को रोकना (Containment)।
- मार्शल योजना का संबंध किस महाद्वीप से था? – यूरोप के आर्थिक पुनरुद्धार से।
- नाटो (NATO) की स्थापना कब हुई? – 4 अप्रैल, 1949।
- नाटो का मुख्यालय कहाँ स्थित है? – ब्रुसेल्स (बेल्जियम)।
- सोवियत संघ ने नाटो के जवाब में कौन सा संगठन बनाया? – वारसा पैक्ट (1955)।
- बर्लिन की नाकेबंदी किस वर्ष हुई थी? – 1948।
- बर्लिन की दीवार (शीत युद्ध का प्रतीक) कब बनी? – 1961।
- शीत युद्ध का ‘अखाड़ा’ किसे कहा जाता है? – यूरोप को।
- कोरियाई युद्ध (1950-53) में कौन सी सीमा रेखा बनी? – 38वीं समानांतर रेखा।
- SEATO (1954) का मुख्य उद्देश्य क्या था? – दक्षिण-पूर्व एशिया में साम्यवाद को रोकना।
- CENTO को पहले किस नाम से जाना जाता था? – बगदाद पैक्ट।
- सोवियत संघ ने पहला परमाणु परीक्षण कब किया? – 1949।
- U-2 जासूसी विमान कांड कब हुआ? – 1960।
- किस संधि ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने का प्रयास किया? – NPT (1968)।
- हॉट लाइन सेवा (1963) किनके बीच स्थापित हुई? – वाशिंगटन और मॉस्को।
प्रमुख संकट और अंतरिक्ष दौड़
- क्यूबा मिसाइल संकट कब हुआ? – 1962।
- क्यूबा संकट के समय अमेरिका के राष्ट्रपति कौन थे? – जॉन एफ. कैनेडी।
- अंतरिक्ष में जाने वाला पहला उपग्रह कौन सा था? – स्पुतनिक (सोवियत संघ)।
- चाँद पर उतरने वाला पहला व्यक्ति कौन था? – नील आर्मस्ट्रांग (1969)।
- वियतनाम युद्ध (1955-75) में किस महाशक्ति को हार झेलनी पड़ी? – अमेरिका।
- हंगेरियन क्रांति (1956) को किसने कुचला? – सोवियत संघ की सेना ने।
- स्वेज नहर संकट किस वर्ष हुआ? – 1956।
- ‘दितांत’ (Detente) का अर्थ क्या है? – तनाव में शिथिलता या ढील।
- SALT-I संधि (1972) पर हस्ताक्षर किनके बीच हुए? – निक्सन और ब्रेझनेव।
- अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप कब हुआ? – 1979।
- अमेरिका ने वियतनाम से अपनी सेना कब वापस बुलाई? – 1973।
- ‘स्टार वार्स’ (SDI) प्रोजेक्ट किस अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुरू किया? – रोनाल्ड रीगन।
- सोवियत संघ का ‘वियतनाम’ किसे कहा जाता है? – अफगान युद्ध को।
- बर्लिन की दीवार कब गिराई गई? – 9 नवंबर, 1989।
- जर्मनी का एकीकरण किस वर्ष हुआ? – 3 अक्टूबर, 1990।
- मिखाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ के नेता कब बने? – 1985।
- ‘ग्लासनोस्त’ का अर्थ क्या है? – राजनीतिक खुलापन।
- ‘पेरेस्त्रोइका’ का अर्थ क्या है? – आर्थिक पुनर्गठन।
- सोवियत संघ का आधिकारिक विघटन कब हुआ? – 25 दिसंबर, 1991।
- विघटन के बाद रूस के पहले राष्ट्रपति कौन बने? – बोरिस येल्तसिन।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की नींव कब रखी गई? – 1955 (बांडुंग सम्मेलन)।
- NAM का पहला शिखर सम्मेलन कहाँ हुआ? – बेलग्रेड (1961)।
- NAM के मुख्य वास्तुकार भारत के कौन से नेता थे? – जवाहरलाल नेहरू।
- ‘पंचशील’ सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार किसने बनाया? – भारत और चीन ने।
- NAM के संस्थापक ‘पाँच नेता’ कौन थे? – नेहरू, टीटो, नासिर, सुकर्णो और नक्रुमा।
- गमाल अब्दुल नासिर किस देश के नेता थे? – मिस्र।
- जोसेफ ब्रोज टीटो का संबंध किस देश से था? – यूगोस्लाविया।
- सुकर्णो कहाँ के राष्ट्रपति थे? – इंडोनेशिया।
- वामे नक्रुमा किस अफ्रीकी देश के नेता थे? – घाना।
- NAM का मुख्य उद्देश्य क्या था? – महाशक्तियों के सैन्य गुटों से दूर रहना।
- NAM का 7वाँ शिखर सम्मेलन भारत में कब हुआ? – 1983 (नई दिल्ली)।
- ‘नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था’ (NIEO) की मांग किसने की? – गुटनिरपेक्ष देशों ने।
- NAM में वर्तमान में कितने सदस्य देश हैं? – 120।
- ‘बांडुंग सम्मेलन’ कहाँ आयोजित हुआ था? – इंडोनेशिया।
- NAM की प्रासंगिकता पर सवाल कब उठे? – शीत युद्ध की समाप्ति के बाद।
- किस सम्मेलन को ‘अफ्रीकी-एशियाई एकता’ का प्रतीक माना जाता है? – बांडुंग सम्मेलन।
- भारत की विदेश नीति का ‘मूल मंत्र’ क्या है? – गुटनिरपेक्षता।
- NAM का मुख्यालय कहाँ है? – इसका कोई स्थायी मुख्यालय नहीं है (समन्वय ब्यूरो द्वारा संचालित)।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) का समर्थन किसने किया? – NAM ने।
- कौमी एकता (National Integration) के लिए नेहरू ने NAM का सहारा लिया। (तथ्य)
विविध और तकनीकी तथ्य
- ‘तीसरी दुनिया’ (Third World) शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ? – विकासशील गुटनिरपेक्ष देशों के लिए।
- MAD (Mutually Assured Destruction) सिद्धांत क्या है? – दोनों पक्षों के पास पूर्ण विनाश की शक्ति होना।
- CIA का पूर्ण रूप क्या है? – सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (USA)।
- KGB किस देश की जासूसी संस्था थी? – सोवियत संघ।
- ‘शॉक थेरेपी’ का संबंध किससे है? – साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर संक्रमण (1990 के बाद)।
- CIS (स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल) कब बना? – 1991 (सोवियत संघ के पतन के बाद)।
- बर्लिन एयरलिफ्ट क्या था? – हवाई मार्ग से बर्लिन को रसद पहुँचाना (1948)।
- चीन-सोवियत दरार कब पैदा हुई? – 1960 के दशक के मध्य।
- अमेरिका ने चीन के साथ संबंधों में सुधार कब किया? – 1970 के दशक (पिंग-पोंग डिप्लोमेसी)।
- वारसा पैक्ट कब आधिकारिक रूप से समाप्त हुआ? – 1 जुलाई, 1991।
- ‘एंड ऑफ हिस्ट्री’ पुस्तक के लेखक कौन हैं? – फ्रांसिस फुकुयामा।
- बाल्टिक गणराज्य कौन से हैं? – एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया।
- START-I संधि कब हुई? – 1991 (हथियारों में कटौती)।
- शीत युद्ध के बाद दुनिया कैसी बनी? – एकध्रुवीय (Unipolar)।
- यूक्रेन सोवियत संघ से कब अलग हुआ? – 1991।
- ‘प्रग स्प्रिंग’ की घटना कहाँ हुई थी? – चेकोस्लोवाकिया (1968)।
- हेलसिंकी समझौता (1975) किससे संबंधित था? – यूरोप में सुरक्षा और सहयोग से।
- शीत युद्ध को ‘स्नायु युद्ध’ किसने कहा? – के.पी.एस. मेनन।
- NAM के किस नेता ने ‘तीसरे रास्ते’ की बात की? – टीटो।
- शीत युद्ध की औपचारिक समाप्ति की घोषणा कहाँ हुई? – माल्टा शिखर सम्मेलन (1989)।
महत्वपूर्ण PYQs (UPSC/SSC/State PCS)
- UPSC: ‘गुटनिरपेक्षता’ की नीति ने शीत युद्ध के दौरान भारत के राष्ट्रीय हितों को कैसे सुरक्षित किया?(उत्तर: भारत दोनों गुटों से आर्थिक और सैन्य मदद लेने में सक्षम रहा और अपनी स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति बनाए रखी)
- SSC CGL: नाटो (NATO) का गठन किस वर्ष हुआ था?(उत्तर: 1949)
- NDA/CDS: ‘बर्लिन की दीवार’ का गिरना किस वर्ष की घटना है?(उत्तर: 1989)
- State PCS: सोवियत संघ के विघटन के लिए जिम्मेदार ‘ग्लासनोस्त’ और ‘पेरेस्त्रोइका’ नीतियाँ किसने पेश की थीं?(उत्तर: मिखाइल गोर्बाचेव)
- UPSC: 1962 का ‘क्यूबा मिसाइल संकट’ किन दो देशों के बीच तनाव का चरम बिंदु था?(उत्तर: अमेरिका और सोवियत संघ)
- SSC: ‘मार्शल योजना’ (Marshall Plan) का प्राथमिक उद्देश्य क्या था?(उत्तर: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी यूरोप की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करना)
- BPSC: गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का प्रथम शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था?(उत्तर: बेलग्रेड, यूगोस्लाविया)
- Railway RRB: वारसा पैक्ट (Warsaw Pact) किस देश के नेतृत्व में बना एक सैन्य गठबंधन था?(उत्तर: सोवियत संघ)
- UPSC Mains: क्या आप मानते हैं कि शीत युद्ध की समाप्ति के बाद गुटनिरपेक्ष आंदोलन अपनी प्रासंगिकता खो चुका है? तर्क दें।(उत्तर: नहीं, आज भी यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विकासशील देशों की आवाज बुलंद करने के लिए प्रासंगिक है)
- SSC CHSL: भारत में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का शिखर सम्मेलन किस वर्ष आयोजित किया गया था?(उत्तर: 1983)
