चीन की क्रांति (1911 और 1949) और माओवाद: महत्वपूर्ण One-liners | Chinese Revolution Notes

चीन की क्रांति और माओवाद 20वीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली घटनाक्रमों में से एक हैं।
इसने जुआनतंत्र (Dynastic Rule) और पूँजीवादी वास्‍तविकताओं को चुनौती दी और चीन को सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट राज्य में परिवर्तित किया।

माओ ज़ेडॉन्ग (Mao Zedong) के नेतृत्व में हुई यह क्रांति चीन में जनता के अधिकार, भूमि सुधार और साम्यवाद का आधार बनी। UPSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में यह विषय अक्सर कारण, माओवादी रणनीति, नेता और परिणाम के संदर्भ में पूछा जाता है।

चीन की क्रांति

🇨🇳 चीन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चीनी क्रांति (1911 और 1949) ने एशिया के सबसे बड़े साम्राज्य को एक आधुनिक जनवादी गणराज्य में बदल दिया।

19वीं और 20वीं सदी के प्रारंभ में चीन को “एशिया का बीमार आदमी” (Sick Man of Asia) कहा जाता था।

  • मंचू राजवंश (Manchu Dynasty): चीन पर 1644 से मंचू वंश का शासन था, जो अत्यंत भ्रष्ट और अयोग्य हो चुका था।
  • विदेशी हस्तक्षेप: अफीम युद्धों (Opium Wars) के बाद चीन “खरबूजे की तरह” विदेशी ताकतों (ब्रिटेन, फ्रांस, जापान) के बीच बँट गया था।
  • बंद दरवाज़े की नीति: चीन ने खुद को बाहरी दुनिया से अलग रखा था, लेकिन साम्राज्यवादी ताकतों ने इसे व्यापार के लिए जबरन खोला।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति

चीनी समाज गहरे असंतोष और अभाव के दौर से गुजर रहा था:

  • कृषक समाज: 90% से अधिक जनता किसान थी, जिनके पास अपनी जमीन नहीं थी। वे क्रूर जमींदारों और प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़ व अकाल) के शिकार थे।
  • मध्यम वर्ग का उदय: पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव से एक नया बुद्धिजीवी वर्ग पैदा हुआ, जो देश में आधुनिक लोकतंत्र चाहता था।
  • मजदूरों की दयनीय स्थिति: विदेशी मिलों में काम करने वाले मजदूरों का भारी शोषण हो रहा था।

चीन की क्रांति के मुख्य कारण

चीन की क्रांति के पीछे कई दशकों का संचित असंतोष था:

चीनी क्रांति के प्रमुख कारण राजनीतिक • मंचू वंश की अयोग्यता • सन यात-सेन का नेतृत्व • विदेशी हस्तक्षेप • जापानी आक्रमण 👥 सामाजिक • सामंती प्रथा का अंत • किसानों का दमन • वर्ग संघर्ष • पुरानी परंपराओं के प्रति विद्रोह आर्थिक • राजकोष का खाली होना • अकाल व भुखमरी • रेलवे का राष्ट्रीयकरण • विदेशी पूंजी का प्रभाव 📘 बौद्धिक • पाश्चात्य शिक्षा • राष्ट्रवाद की भावना • मार्क्सवाद का प्रसार • नई संस्कृति आंदोलन Chinese Revolution • vikas singh • pdfnotes.in

राजनीतिक कारण: मंचू वंश की विफलता

  • अयोग्य शासन: मंचू शासक न तो बाहरी आक्रमणों को रोक पाए और न ही आंतरिक विद्रोहों को।
  • ताइपिंग और बॉक्सर विद्रोह: इन शुरुआती विद्रोहों ने मंचू शासन की नींव हिला दी थी।
  • डॉ. सन यात-सेन का नेतृत्व: उन्होंने चीन को ‘तीन सिद्धांतों’ (राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और आजीविका) का मंत्र दिया, जिसने जनता को एकजुट किया।

सामाजिक कारण: सामंती शोषण

  • वर्ग भेद: समाज कुलीन जमींदारों और गरीब किसानों में बँटा था। जमींदार निजी सेनाएँ (Warlords) रखते थे जो जनता को प्रताड़ित करती थीं।
  • रूढ़िवादिता: चीन की पुरानी परीक्षा प्रणाली और सामाजिक प्रथाएँ आधुनिक समय के साथ मेल नहीं खा रही थीं।

आर्थिक कारण: आर्थिक शोषण

  • विदेशी ऋण का बोझ: चीन पर विदेशी युद्धों का भारी हर्जाना और ऋण था।
  • मुद्रास्फीति: बढ़ती कीमतों और अकाल ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया था।
  • रेलवे का राष्ट्रीयकरण: 1911 की क्रांति का तात्कालिक कारण रेलवे लाइनों का राष्ट्रीयकरण था, जिसका चीन के पूंजीपतियों ने विरोध किया।

बौद्धिक कारण: नए विचारों का उदय

  • पश्चिमी शिक्षा: विदेशों में पढ़कर आए छात्रों ने लोकतंत्र, स्वतंत्रता और साम्यवाद के विचारों को चीन में फैलाया।
  • नई संस्कृति आंदोलन: बौद्धिकों ने पुरानी कन्फ्यूशियसवादी परंपराओं को छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
  • मार्क्सवाद का प्रभाव: 1917 की रूसी क्रांति की सफलता ने चीनी युवाओं को साम्यवाद की ओर आकर्षित किया।

🇨🇳 चीन की क्रांति: प्रमुख घटनाक्रम (1921–1949)

चीनी क्रांति (1911-1949) का घटनाक्रम विश्व इतिहास की सबसे लंबी और जटिल संघर्ष गाथाओं में से एक है। चीन में राजशाही के अंत के बाद असली संघर्ष दो विचारधाराओं—कुओमिन्तांग (KMT) और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP)—के बीच शुरू हुआ।

🇨🇳 चीनी क्रांति : मुख्य घटनाक्रम 1921 CCP स्थापना 1927 नागरिक युद्ध 1934-35 लॉन्ग मार्च 1937-45 जापानी युद्ध 1949 PRC स्थापना Responsive Timeline • vikas singh • pdfnotes.in

1. प्रारंभिक संघर्ष और CCP की स्थापना (1921)

  • स्थापना: 1921 में शंघाई में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की नींव पड़ी।
  • प्रथम संयुक्त मोर्चा: शुरुआत में कुओमिन्तांग (डॉ. सन यात-सेन के नेतृत्व में) और कम्युनिस्टों ने मिलकर विदेशी ताकतों और स्थानीय युद्ध-सरदारों (Warlords) के खिलाफ गठबंधन किया।

2. नागरिक युद्ध की शुरुआत (1927–1949)

  • शंघाई नरसंहार (1927): सन यात-सेन की मृत्यु के बाद चियांग काई-शेक ने सत्ता संभाली और कम्युनिस्टों का दमन शुरू किया। यहीं से खूनी नागरिक युद्ध शुरू हुआ।
  • माओ का उदय: दमन के बीच माओ ज़ेदोंग (Mao Zedong) ने महसूस किया कि क्रांति का आधार शहर नहीं, बल्कि गाँव और किसान होने चाहिए।

3. लंबी मार्च / लॉन्ग मार्च (The Long March, 1934–1935)

यह चीनी क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण ‘टर्निंग पॉइंट’ था।

  • घटना: चियांग काई-शेक के घेरे से बचने के लिए माओ के नेतृत्व में कम्युनिस्ट सेना ने लगभग 6,000 मील (10,000 किमी) की पैदल यात्रा की।
  • महत्व: इस यात्रा के दौरान माओ पार्टी के निर्विवाद नेता बनकर उभरे और उन्होंने ग्रामीण इलाकों में किसानों का दिल जीत लिया।

4. जापान के खिलाफ संघर्ष (1937–1945)

  • द्वितीय संयुक्त मोर्चा: जापानी आक्रमण के कारण दोनों दुश्मन दलों (KMT और CCP) को मजबूरन फिर से हाथ मिलाना पड़ा।
  • कम्युनिस्टों की बढ़त: युद्ध के दौरान कम्युनिस्टों ने छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) में महारत हासिल की, जिससे उनकी लोकप्रियता और सैन्य शक्ति दोनों बढ़ी।

5. सशस्त्र संघर्ष का अंतिम चरण (1945–1949)

  • पूर्ण विजय: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गृहयुद्ध फिर शुरू हुआ। भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट के कारण चियांग काई-शेक की लोकप्रियता गिर गई।
  • लाल सेना का कब्जा: 1949 तक कम्युनिस्टों ने पूरे मुख्य भूमि चीन पर कब्जा कर लिया।
  • परिणाम: 1 अक्टूबर 1949 को माओ ने ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ (PRC) की घोषणा की और चियांग काई-शेक भागकर ताइवान चले गए।

चीनी क्रांति के प्रमुख नेता

  1. माओ ज़ेदोंग (Mao Zedong): आधुनिक चीन के संस्थापक और CCP के सर्वोच्च नेता। उन्होंने मार्क्सवाद को चीनी परिस्थितियों (किसानों पर केंद्रित) के अनुसार ढाला।
  2. चाऊ एन-लाई (Zhou Enlai): चीन के पहले प्रधानमंत्री और एक कुशल कूटनीतिज्ञ। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की छवि बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
  3. झू दे (Zhu De): ‘लाल सेना’ (Red Army) के संस्थापक और मुख्य रणनीतिकार। उन्होंने लॉन्ग मार्च और जापानी युद्ध में सैन्य नेतृत्व किया।
  4. डॉ. सन यात-सेन: उन्हें ‘आधुनिक चीन का पिता’ कहा जाता है। हालाँकि 1949 की क्रांति से पहले उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनके ‘तीन सिद्धांतों’ ने ही क्रांति की वैचारिक नींव रखी थी।

माओवाद (Maoism) के मुख्य सिद्धांत

माओवाद, मार्क्सवाद-लेनिनवाद का ही एक रूप है, लेकिन इसकी कुछ अपनी अनूठी विशेषताएँ हैं:

☭ माओवाद (Maoism) चार प्रमुख स्तंभ 🌾 किसान शक्ति क्रांति का मुख्य आधार किसान और गाँव। ⚔️ छापामार युद्ध Guerrilla रणनीति जनता के बीच संघर्ष। 🔄 निरंतर क्रांति सत्ता प्राप्ति के बाद भी वैचारिक संघर्ष जारी। 👥 जन-रेखा जनता से सीखो, जनता को सिखाओ। Responsive Educational Infographic • vikas singh • pdfnotes.in
  • किसानों की शक्ति: माओ का मानना था कि क्रांति का मुख्य आधार ‘मजदूर’ नहीं बल्कि ‘किसान’ होने चाहिए (रूस की क्रांति से अलग)।
  • निरंतर क्रांति (Continuous Revolution): सत्ता प्राप्ति के बाद भी समाज में सुधार के लिए निरंतर संघर्ष आवश्यक है।
  • छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare): “दुश्मन आगे बढ़े, हम पीछे हटें; दुश्मन रुके, हम उसे परेशान करें; दुश्मन थके, हम हमला करें।”
  • गाँव द्वारा शहरों की घेराबंदी: माओ की रणनीति थी कि पहले ग्रामीण इलाकों पर कब्जा करो, फिर धीरे-धीरे शहरों को घेर लो।

चीनी क्रांति के परिणाम (Detailed Impact)

🇨🇳 चीनी क्रांति के परिणाम Detailed Impact of the Chinese Revolution 🏛️ राजनीतिक प्रभाव साम्यवादी शासन की स्थापना हुई। माओ सर्वोच्च नेता बने। 🌾 सामाजिक बदलाव जमींदारी प्रथा का अंत किया गया। किसानों को अधिकार मिले। 💰 आर्थिक प्रभाव उद्योगों और भूमि का राष्ट्रीयकरण हुआ। योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था शुरू। 🌍 वैश्विक प्रभाव विश्व राजनीति में चीन की शक्ति बढ़ी। शीत युद्ध पर असर पड़ा। vikas singh • pdfnotes.in

1. राजनीतिक परिणाम

  • जनवादी गणराज्य (PRC) की स्थापना: 1 अक्टूबर 1949 को चीन एक कम्युनिस्ट राष्ट्र बना।
  • एकदलीय शासन: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का पूर्ण वर्चस्व स्थापित हुआ।
  • ताइवान का मुद्दा: कुओमिन्तांग सरकार भागकर ताइवान चली गई, जिससे ‘दो चीन’ का विवाद पैदा हुआ जो आज भी जारी है।

2. सामाजिक परिणाम

  • सामंतवाद का अंत: सदियों पुरानी जमींदारी प्रथा को समाप्त कर दिया गया।
  • महिला अधिकार: महिलाओं को संपत्ति में अधिकार मिला और ‘पैरों को बांधने’ (Foot binding) जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगी।
  • शिक्षा व स्वास्थ्य: साक्षरता दर बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए और ‘बेयरफुट डॉक्टर्स’ के माध्यम से गाँवों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाई गईं।

3. आर्थिक परिणाम

  • भूमि सुधार: जमींदारों की ज़मीन छीनकर गरीब किसानों में बाँट दी गई।
  • नियोजित विकास: रूस की तरह चीन ने भी पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू कीं।
  • ग्रेट लीप फॉरवर्ड (1958): चीन को तेजी से एक औद्योगिक शक्ति बनाने के लिए माओ द्वारा शुरू किया गया महत्वाकांक्षी (परंतु विवादास्पद) कार्यक्रम।

क्रांति का वैश्विक प्रभाव

चीनी क्रांति ने शीत युद्ध (Cold War) की दिशा बदल दी:

🌍 क्रांति का वैश्विक प्रभाव Global Impact of the Revolution साम्यवाद का प्रसार एशिया और अन्य देशों में साम्यवादी विचार फैले। ⚔️ शीत युद्ध पर प्रभाव अमेरिका और सोवियत प्रतिस्पर्धा तेज हुई। 🇨🇳 चीन का उदय चीन एक शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरा। 🌏 एशियाई आंदोलनों पर असर वियतनाम और कोरिया जैसे आंदोलनों को प्रेरणा मिली। vikas singh • pdfnotes.in
  1. एशिया में साम्यवाद: वियतनाम और कोरिया जैसे देशों में साम्यवादी आंदोलनों को भारी बल मिला।
  2. तीसरी दुनिया का नेतृत्व: चीन उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ने वाले अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए एक नया ‘रोल मॉडल’ बन गया।
  3. भारत पर प्रभाव: 1949 की क्रांति ने भारत में भी वामपंथी विचारधारा को प्रभावित किया, जिसका असर बाद में ‘नक्सलवादी आंदोलन’ (माओवादी विचारधारा से प्रेरित) के रूप में दिखा।

Conclusion

चीन की क्रांति और माओवाद ने 20वीं सदी में चीन की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया।
माओवाद ने किसानों और मजदूरों के अधिकार, भूमि सुधार और समाजवाद को लागू किया और चीन को आधुनिक विश्व में एक प्रमुख शक्ति बनाया।
UPSC, SSC और विश्व इतिहास में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🇨🇳 चीन की क्रांति: महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)

  1. चीन की पहली क्रांति कब हुई थी? – 1911 में (मंचू वंश का अंत)।
  2. चीन के अंतिम सम्राट कौन थे? – पु यी (Pu Yi)।
  3. ‘आधुनिक चीन का पिता’ किसे कहा जाता है? – डॉ. सन यात-सेन।
  4. सन यात-सेन ने किस दल की स्थापना की थी? – कुओमिन्तांग (KMT)।
  5. सन यात-सेन के तीन सिद्धांत क्या थे? – राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय (आजीविका)।
  6. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की स्थापना कब हुई? – 1921 में (शंघाई में)।
  7. चीन को “एशिया का बीमार आदमी” (Sick Man of Asia) क्यों कहा जाता था? – विदेशी हस्तक्षेप और आंतरिक कमजोरी के कारण।
  8. अफीम युद्ध (Opium Wars) किनके बीच हुए? – चीन और ब्रिटेन।
  9. सन यात-सेन के बाद कुओमिन्तांग का नेतृत्व किसने किया? – चियांग काई-शेक।
  10. चीन में गृहयुद्ध (Civil War) कब शुरू हुआ? – 1927 में।
  11. लॉन्ग मार्च (Long March) कब शुरू हुआ? – 1934 में।
  12. लॉन्ग मार्च की दूरी कितनी थी? – लगभग 6,000 मील (10,000 किमी)।
  13. लॉन्ग मार्च का मुख्य उद्देश्य क्या था? – चियांग काई-शेक के घेरे से कम्युनिस्ट सेना को बचाना।
  14. चीन का ‘लाल सेना’ (Red Army) का संस्थापक कौन था? – झू दे (Zhu De)।
  15. माओ ज़ेदोंग ने अपनी शक्ति का आधार किसे बनाया? – किसानों को (शहरों के बजाय गाँव)।
  16. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की घोषणा कब हुई? – 1 अक्टूबर, 1949।
  17. माओ ज़ेदोंग ने यह घोषणा कहाँ से की थी? – थियानमेन स्क्वायर (पेकिंग/बीजिंग)।
  18. चीन में ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ (1958) का क्या लक्ष्य था? – तीव्र औद्योगिक और कृषि विकास।
  19. चीन की ‘सांस्कृतिक क्रांति’ (1966-76) किसने शुरू की? – माओ ज़ेदोंग।
  20. माओ की प्रसिद्ध पुस्तक का क्या नाम है? – लिटिल रेड बुक (Quotations from Chairman Mao)।
  21. छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का सिद्धांत किसने दिया? – माओ ज़ेदोंग।
  22. ‘नई संस्कृति आंदोलन’ (New Culture Movement) कब शुरू हुआ? – 1910 के दशक के मध्य में।
  23. चीन के पहले प्रधानमंत्री कौन थे? – चाऊ एन-लाई (Zhou Enlai)।
  24. चियांग काई-शेक हारने के बाद कहाँ चले गए थे? – ताइवान (फॉर्मोसा)।
  25. बॉक्सर विद्रोह (1900) का क्या उद्देश्य था? – चीन से विदेशियों को बाहर निकालना।
  26. चीन में मंचू वंश का शासन कितने वर्षों तक रहा? – 1644 से 1911 तक।
  27. किसने कहा था “क्रांति एक डिनर पार्टी नहीं है”? – माओ ज़ेदोंग।
  28. 1911 की क्रांति का तात्कालिक कारण क्या था? – रेलवे का राष्ट्रीयकरण विवाद।
  29. चीन में साम्यवाद का प्रसार किस क्रांति से प्रेरित था? – 1917 की रूसी क्रांति।
  30. मंचू वंश को और किस नाम से जाना जाता था? – किंग राजवंश (Qing Dynasty)।
  31. जापान ने चीन के मंचूरिया पर कब हमला किया? – 1931 में।
  32. 1911 की क्रांति के बाद चीन का अस्थाई राष्ट्रपति कौन बना? – डॉ. सन यात-सेन।
  33. चियांग काई-शेक ने अपनी राजधानी कहाँ बनाई थी? – नानजिंग (Nanking)।
  34. चीन में ‘मई चौथा आंदोलन’ (May Fourth Movement) कब हुआ? – 1919 में।
  35. पंचशील समझौते पर किन नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे? – जवाहरलाल नेहरू और चाऊ एन-लाई (1954)।
  36. माओ के अनुसार “शक्ति बंदूक की नली से निकलती है”, यह किससे संबंधित है? – सैन्य संघर्ष की महत्ता।
  37. चीन में ‘खुले द्वार की नीति’ (Open Door Policy) किसने सुझाई थी? – अमेरिका (जॉन हे)।
  38. कम्युनिस्टों ने लॉन्ग मार्च कहाँ समाप्त किया था? – येनान (Shensi प्रान्त)।
  39. चीन में कम्युनिस्टों और राष्ट्रवादियों ने जापान के खिलाफ मिलकर कब संघर्ष किया? – 1937 से 1945 तक।
  40. चीनी क्रांति ने किस भारतीय आंदोलन को प्रभावित किया? – नक्सलवादी आंदोलन।
  41. चीन में सामंती प्रथा का अंत कब हुआ? – 1949 की क्रांति के बाद।
  42. चीन का ‘लाल सितारा’ (Red Star) किसका प्रतीक है? – कम्युनिस्ट पार्टी और एकता का।
  43. माओवाद का ‘जन-रेखा’ (Mass Line) सिद्धांत क्या है? – जनता से सीखना और जनता को संगठित करना।
  44. चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे? – जवाहरलाल नेहरू।
  45. चीन को राष्ट्रसंघ (UN) में वीटो पावर कब मिली? – 1971 में (ताइवान की जगह)।
  46. लॉन्ग मार्च के दौरान माओ ने किस सम्मेलन में नेतृत्व संभाला? – ज़ुनई सम्मेलन (Zunyi Conference, 1935)।
  47. ‘तीन सिद्धांतों’ में राष्ट्रवाद का क्या अर्थ था? – मंचू शासन और विदेशी प्रभुत्व का अंत।
  48. चियांग काई-शेक की पार्टी KMT का पूरा नाम क्या था? – कोमिंगतांग (Kuo-min-tang)।
  49. ‘द ग्रेट वॉल’ के देश चीन में लोकतंत्र की पहली कोशिश कब हुई? – 1911 में।
  50. चीनी क्रांति का वैश्विक महत्व क्या है? – एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रेरणा।

PYQs (Previous Year Questions)

  • UPSC: डॉ. सन यात-सेन के ‘तीन सिद्धांतों’ (Three Principles of the People) की व्याख्या कीजिए और चीनी क्रांति में उनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और आजीविका/सामाजिक न्याय

  • SSC CGL: चीन में ‘लॉन्ग मार्च’ (1934-35) का नेतृत्व किस नेता ने किया था?

उत्तर: माओ ज़ेदोंग

  • State PCS: चीन की 1911 की क्रांति के परिणामस्वरूप किस राजवंश का पतन हुआ?

उत्तर: मंचू या किंग राजवंश

  • UPSC (History Optional): माओवाद और मार्क्सवाद-लेनिनवाद के बीच मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: मार्क्सवाद मजदूरों पर केंद्रित है, जबकि माओवाद किसानों को क्रांति का आधार मानता है

  • SSC CHSL: किस वर्ष माओ ज़ेदोंग ने ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ की स्थापना की घोषणा की?

उत्तर: 1 अक्टूबर, 1949

  • NDA: ‘खुलने द्वार की नीति’ (Open Door Policy) किस देश से संबंधित थी?

उत्तर: चीन

  • UPSC: ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ (Great Leap Forward) अभियान चीन के किस नेता द्वारा शुरू किया गया था?

उत्तर: माओ ज़ेदोंग, 1958

  • State PCS: चीन में कुओमिन्तांग (KMT) पार्टी के संस्थापक कौन थे?

उत्तर: डॉ. सन यात-सेन

  • SSC Steno: ‘बॉक्सर विद्रोह’ (Boxer Rebellion) किस देश में हुआ था?

उत्तर: चीन, 1900

  • CDS: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चीनी गृहयुद्ध में चियांग काई-शेक की हार का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर: भारी भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और कम्युनिस्टों द्वारा किसानों का समर्थन

Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।