लोकपाल एवं लोकायुक्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारतीय लोकतंत्र का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच माना जाता है। यह संस्था ‘ओम्बुड्समैन’ (Ombudsman) की अवधारणा पर आधारित है, जिसकी मांग भारत में दशकों तक की गई थी।
I. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गठन
- ‘ओम्बुड्समैन’ संस्था की शुरुआत सबसे पहले 1809 में स्वीडन में हुई थी।
- भारत में ‘लोकपाल’ शब्द का प्रतिपादन डॉ. एल.एम. सिंघवी ने 1963 में किया था।
- प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) ने लोकपाल और लोकायुक्त की स्थापना की सिफारिश की थी।
- लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013: इसी कानून के माध्यम से केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का प्रावधान किया गया।
- यह अधिनियम 16 जनवरी 2014 से प्रभावी हुआ।
- लोकपाल एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
II. लोकपाल की संरचना और नियुक्ति
- संरचना: लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होते हैं।
- इन 8 सदस्यों में से 50% न्यायिक सदस्य होने चाहिए।
- साथ ही, कुल सदस्यों में से 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक और महिला वर्ग से होने चाहिए।
- अध्यक्ष की योग्यता: वह भारत का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (CJI) या सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त जज या कोई विशिष्ट व्यक्ति होना चाहिए।
- चयन समिति: लोकपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।
- समिति के सदस्य: प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष का नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामित जज) और एक प्रतिष्ठित न्यायविद।
- कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक होता है।
III. अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ
- अधिकार क्षेत्र: लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और केंद्र सरकार के समूह A, B, C, D के अधिकारी शामिल हैं।
- प्रधानमंत्री पर सीमा: प्रधानमंत्री के विरुद्ध जांच के लिए लोकपाल की पूर्ण पीठ के 2/3 सदस्यों की सहमति अनिवार्य है और यह जांच बंद कमरे में होनी चाहिए।
- लोकपाल को भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की शक्ति प्राप्त है।
- इसके पास CBI और अन्य जांच एजेंसियों को निर्देश देने और उनके ऊपर अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति है।
- लोकपाल के पास अपनी एक ‘जांच शाखा’ (Inquiry Wing) और ‘अभियोजन शाखा’ (Prosecution Wing) होती है।
- लोकायुक्त: अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य को अपने यहाँ एक वर्ष के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करना अनिवार्य है।
- महाराष्ट्र (1971) लोकायुक्त की स्थापना करने वाला भारत का पहला राज्य था।
- लोकपाल की सफलता इसके राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होने पर निर्भर करती है।
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