वस्तु एवं सेवा कर परिषद भारत की कर-प्रणाली में सहकारी संघवाद (Co-operative Federalism) का सबसे प्रमुख उदाहरण है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे एकीकृत अप्रत्यक्ष कर को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर समन्वय, परामर्श और सहमति आवश्यक थी। इसी उद्देश्य से भारतीय संविधान में GST परिषद की स्थापना की गई, ताकि कर-नीति से जुड़े निर्णय एकतरफा नहीं बल्कि सामूहिक सहमति से लिए जा सकें।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279A के अंतर्गत गठित GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है। परिषद GST की दरें, छूट, स्लैब, कानून, प्रक्रिया और कर-वितरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सिफारिश करती है। यद्यपि परिषद की सिफारिशें कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, फिर भी व्यवहार में उन्होंने भारत की कर-व्यवस्था को एकरूपता और स्थिरता प्रदान की है।
1️⃣ संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 279A: GST परिषद की स्थापना, संरचना और कार्य
- परिषद का उद्देश्य: केंद्र और राज्यों के बीच कर-नीति पर सहमति बनाना
- यह अनुच्छेद 101वें संविधान संशोधन (GST Amendment) का अभिन्न हिस्सा है
2️⃣ संरचना (Composition)
GST परिषद की संरचना संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित है:
- अध्यक्ष (Chairperson): केंद्रीय वित्त मंत्री
- केंद्रीय प्रतिनिधि: केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री (या राजस्व)
- राज्य प्रतिनिधि: प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (विधानसभा वाले) का वित्त मंत्री
👉 इस संरचना से सुनिश्चित होता है कि केंद्र और सभी राज्यों की भागीदारी निर्णय-निर्माण में बनी रहे।
3️⃣ मतदान प्रणाली (Voting Pattern)
GST परिषद की एक विशिष्ट और परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मतदान प्रणाली है:
- केंद्र सरकार का भार: 1/3 (33%)
- सभी राज्यों का संयुक्त भार: 2/3 (67%)
- किसी भी निर्णय के लिए कम से कम 3/4 (75%) बहुमत आवश्यक
यह प्रणाली केंद्र-राज्य संतुलन को बनाए रखते हुए सहमति-आधारित निर्णय को प्रोत्साहित करती है।
4️⃣ शक्तियाँ (Powers)
GST परिषद की शक्तियाँ मुख्यतः सलाहकारी (Recommendatory) हैं, पर व्यवहार में अत्यंत प्रभावी:
- GST दरों और स्लैब पर सिफारिश
- छूट और अपवर्जन (Exemptions)
- कानूनों और प्रक्रियाओं में बदलाव
- विशेष परिस्थितियों (आपदा, महामारी) में राहत उपाय
👉 परिषद स्वयं कर नहीं लगाती, बल्कि नीतिगत दिशा प्रदान करती है।
5️⃣ कार्य (Functions)
अनुच्छेद 279A(4) के अंतर्गत GST परिषद के प्रमुख कार्य:
🔹 (1) कर-ढाँचे से जुड़े निर्णय
- केंद्रीय GST (CGST), राज्य GST (SGST) और एकीकृत GST (IGST)
- कर-आधार और कर-दरें
🔹 (2) कानून और प्रक्रियाएँ
- GST कानूनों का सामंजस्य
- रिटर्न, पंजीकरण और अनुपालन
🔹 (3) संघीय समन्वय
- केंद्र और राज्यों के बीच विवाद समाधान
- कर-प्रशासन में एकरूपता
🔹 (4) विशेष राहत
- प्राकृतिक आपदा/आर्थिक संकट में दरों में अस्थायी बदलाव
6️⃣ GST परिषद का महत्व (Significance)
- एक राष्ट्र–एक कर की अवधारणा को सुदृढ़ करना
- कर-व्यवस्था में सरलता और पारदर्शिता
- कर-प्रतिस्पर्धा को सहयोग में बदलना
- संघीय ढाँचे में संवाद-आधारित शासन
7️⃣ प्रमुख मुद्दे और चुनौतियाँ (Issues & Challenges)
🔴 (1) केंद्र का प्रभाव
- 1/3 भार के कारण केंद्र को प्रभावी वीटो
- कुछ राज्यों द्वारा असंतोष
🔴 (2) राज्यों की राजस्व स्वायत्तता
- दरों पर स्वतंत्र निर्णय का अभाव
- मुआवज़ा (Compensation) से जुड़े विवाद
🔴 (3) निर्णयों की बाध्यकारी प्रकृति
- सिफारिशें बाध्यकारी नहीं, फिर भी व्यवहार में दबाव
🔴 (4) बार-बार दर परिवर्तन
- व्यापार और निवेश के लिए अनिश्चितता
8️⃣ सर्वोच्च न्यायालय के दृष्टिकोण (Supreme Court Views)
Union of India v. Mohit Minerals (2022) केस में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की:
- GST परिषद की सिफारिशें कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं
- केंद्र और राज्य दोनों स्वतंत्र विधायी शक्तियाँ रखते हैं
- सहकारी संघवाद का अर्थ है संवाद और सहमति, न कि अधीनता
निष्कर्ष
GST परिषद भारत के संघीय ढाँचे में वित्तीय सहयोग का संस्थागत प्रतीक है। अनुच्छेद 279A के अंतर्गत इसकी स्थापना ने कर-नीति को एकतरफा निर्णयों से निकालकर सहमति-आधारित मंच पर लाया है। हालाँकि, शक्तियों के संतुलन और राजस्व स्वायत्तता से जुड़े प्रश्न बने हुए हैं, फिर भी GST परिषद भारतीय संघवाद को व्यावहारिक और संवादात्मक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। UPSC और State PCS परीक्षाओं में यह अध्याय अत्यंत स्कोरिंग और समसामयिक है।
📊 GST Council vs Finance Commission
| आधार | GST परिषद | वित्त आयोग |
|---|---|---|
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 279A | अनुच्छेद 280 |
| प्रकृति | स्थायी संवैधानिक निकाय | अस्थायी (हर 5 वर्ष) |
| फोकस | GST दरें, कानून, प्रक्रियाएँ | कर-हस्तांतरण, अनुदान |
| अध्यक्ष | केंद्रीय वित्त मंत्री | विशेषज्ञ अध्यक्ष |
| भूमिका | कर-नीति समन्वय | संसाधन वितरण |
| प्रकृति की शक्ति | सलाहकारी (नीतिगत) | सलाहकारी (वित्तीय) |
📌 Prelims Tip:
GST Council ≠ Finance Commission (different articles, different mandates)
PYQ-Based
I. गठन और संवैधानिक आधार
- GST परिषद एक संवैधानिक निकाय है।
- इसे 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा संविधान में जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 279-A: राष्ट्रपति को GST परिषद गठित करने की शक्ति देता है।
- इस संशोधन के लागू होने के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति ने इस परिषद का गठन किया।
- परिषद का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है।
- केंद्रीय राजस्व सचिव परिषद के पदेन सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
- संरचना: यह केंद्र और राज्यों का एक संयुक्त मंच है।
- अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री (Union Finance Minister) इसके अध्यक्ष होते हैं।
- सदस्य (केंद्र): केंद्रीय राज्य मंत्री (राजस्व या वित्त प्रभारी) इसके सदस्य होते हैं।
- सदस्य (राज्य): प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामित वित्त या कराधान मंत्री या कोई अन्य मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
- परिषद के सदस्य अपने बीच से एक उपाध्यक्ष चुनते हैं।
II. कार्य और कार्यप्रणाली
- परिषद का मुख्य कार्य GST से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र और राज्यों को सिफारिशें करना है।
- यह उन करों, उपकरों (Cess) और अधिभारों (Surcharge) का निर्धारण करती है जिन्हें GST में शामिल किया जाना है।
- यह उन वस्तुओं और सेवाओं का निर्णय लेती है जिन्हें GST से छूट दी जानी है।
- मॉडल GST कानून और कर की दरों (Tax Slabs) का निर्धारण करना।
- टर्नओवर की वह सीमा तय करना जिससे नीचे GST से छूट प्राप्त होगी।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान करना।
- वोटिंग (मतदान): परिषद के निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के तीन-चौथाई (3/4) बहुमत से लिए जाते हैं।
- केंद्र सरकार के वोट का वेटेज (भारांक) कुल मतों का एक-तिहाई (1/3) होता है।
- सभी राज्य सरकारों के वोटों का कुल वेटेज दो-तिहाई (2/3) होता है।
- कोरम (गणपूर्ति): बैठक के लिए परिषद के कुल सदस्यों के आधे (50%) सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।
III. महत्वपूर्ण तथ्य और विवाद समाधान
- परिषद किसी भी राज्य को प्राकृतिक आपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए विशेष दर की अनुमति दे सकती है।
- पेट्रोलियम उत्पादों (कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, जेट ईंधन, प्राकृतिक गैस) पर GST कब से लागू होगा, इसका निर्णय परिषद ही करेगी।
- विवाद समाधान: केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के आपसी विवादों के निपटारे के लिए परिषद एक तंत्र स्थापित करती है।
- परिषद का कोई भी निर्णय या कार्य केवल इस आधार पर अमान्य नहीं होगा कि इसमें कोई रिक्ति (Vacancy) थी।
- GST परिषद ‘एक राष्ट्र, एक कर’ के सपने को लागू करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
- GST परिषद क्या है?
GST से जुड़े निर्णयों हेतु केंद्र-राज्य का संवैधानिक मंच। - संवैधानिक आधार?
अनुच्छेद 279A। - GST परिषद का अध्यक्ष कौन होता है?
केंद्रीय वित्त मंत्री। - मतदान में राज्यों का भार कितना है?
2/3 (67%)। - केंद्र का मतदान भार?
1/3 (33%)। - निर्णय के लिए कितना बहुमत चाहिए?
3/4 (75%)। - क्या GST परिषद कर लगाती है?
नहीं, यह केवल सिफारिश करती है। - GST परिषद की सिफारिशें बाध्यकारी हैं?
कानूनी रूप से नहीं। - सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सिफारिशें बाध्यकारी नहीं, केवल प्रेरक। - GST परिषद का महत्व क्या है?
सहकारी संघवाद को मजबूत करना। - राज्य किस बात पर असंतोष जताते हैं?
राजस्व स्वायत्तता और मुआवज़े पर। - Finance Commission से अंतर?
GST परिषद कर-नीति; FC संसाधन वितरण। - GST परिषद में UTs का प्रतिनिधित्व?
विधानसभा वाले UTs शामिल होते हैं।
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