नगर निगम / नगरपालिकाएँ (Municipalities) – 74वाँ संविधान संशोधन, संरचना और शक्तियाँ

भारतीय संविधान में निहित नगर पालिकाएं/नगर निगम (Municipalities) भारत में शहरी स्थानीय स्वशासन (Urban Local Self-Government) की आधारशिला हैं। बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या विस्तार और नागरिक सुविधाओं की बढ़ती माँग को देखते हुए नगरपालिकाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत—ये सभी शहरी क्षेत्रों में प्रशासन, विकास और जनकल्याण का दायित्व निभाते हैं।

नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा प्रदान किया गया, जिसके तहत संविधान में भाग IX-A (अनुच्छेद 243P से 243ZG) और 12वीं अनुसूची जोड़ी गई। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, नियमित चुनाव, आरक्षण, वित्तीय स्वायत्तता और स्थानीय स्तर पर उत्तरदायी शासन को सुनिश्चित करना था। नगरपालिकाओं को शहरी नियोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता, सड़क, आवास और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए।

I. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास

  1. शहरी स्थानीय स्वशासन का अर्थ है—शहरी क्षेत्रों के लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन।
  2. भारत में पहले नगर निगम की स्थापना 1688 में मद्रास में हुई थी।
  3. इसके बाद 1726 में बंबई और कलकत्ता में नगर निगम स्थापित किए गए।
  4. लॉर्ड रिपन के 1882 के संकल्प को स्थानीय स्वशासन का ‘मैग्नाकार्टा’ कहा जाता है।
  5. केंद्र स्तर पर ‘शहरी स्थानीय शासन’ का विषय तीन मंत्रालयों (आवास एवं शहरी मामले, रक्षा और गृह मंत्रालय) के पास है।
  6. 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992: इसके द्वारा नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
  7. यह अधिनियम 1 जून 1993 से प्रभावी हुआ।
  8. इस संशोधन द्वारा संविधान में एक नया भाग 9-A जोड़ा गया।
  9. इसका शीर्षक ‘नगर पालिकाएं’ (The Municipalities) रखा गया।
  10. इसके द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।
  11. 12वीं अनुसूची में नगर पालिकाओं के कार्य के लिए 18 विषय दिए गए हैं।
  12. अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक नगर पालिकाओं का वर्णन है।

II. संरचना और 74वां संशोधन

  1. अधिनियम तीन प्रकार की नगर पालिकाओं की व्यवस्था करता है:
  2. नगर पंचायत: ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए।
  3. नगर पालिका परिषद: छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए।
  4. नगर निगम: बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए।
  5. नगर पालिका के सभी सदस्य सीधे क्षेत्र की जनता द्वारा चुने जाते हैं।
  6. प्रत्येक नगर पालिका क्षेत्र को वार्डों में बांटा जाता है।
  7. वार्ड समितियां (Art 243S): 3 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में इनका गठन अनिवार्य है।
  8. आरक्षण (Art 243T): SC और ST को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित हैं।
  9. महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (1/3) सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है।
  10. पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का निर्णय राज्य विधानमंडल पर छोड़ा गया है।
  11. कार्यकाल (Art 243U): नगर पालिकाओं का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
  12. यदि कोई नगर पालिका समय से पहले भंग होती है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
  13. चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए।
  14. शक्तियां (Art 243W): राज्य विधानमंडल नगर पालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएं बनाने की शक्ति देता है।

III. महत्वपूर्ण निकाय और तकनीकी तथ्य

  1. राज्य निर्वाचन आयोग (Art 243ZA): नगर पालिकाओं के चुनावों का संचालन और मतदाता सूची तैयार करता है।
  2. राज्य वित्त आयोग (Art 243Y): नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
  3. जिला योजना समिति (DPC) – Art 243ZD: जिले की पूरी योजना का मसौदा तैयार करने के लिए।
  4. DPC के 4/5 सदस्य जिला पंचायत और नगर पालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।
  5. महानगर योजना समिति (MPC) – Art 243ZE: महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना बनाने हेतु।
  6. MPC के 2/3 सदस्य नगर पालिकाओं के सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा चुने जाते हैं।
  7. नगर निगम का प्रमुख: इसे ‘महापौर’ या मेयर (Mayor) कहा जाता है।
  8. मेयर का चुनाव कई राज्यों में प्रत्यक्ष तो कई में अप्रत्यक्ष होता है।
  9. नगर निगम का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) होता है, जो सामान्यतः IAS अधिकारी होता है।
  10. ‘छावनी बोर्ड’ (Cantonment Board) रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में कार्य करता है।
  11. ‘पोर्ट ट्रस्ट’ (Port Trust) बंदरगाहों के प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के लिए बनाए जाते हैं।
  12. ‘टाउनशिप’ (Township) बड़े सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए बसाई जाती है।
  13. नगर पालिकाओं के खातों का ऑडिट राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होता है।
  14. शहरी निकाय आधुनिक भारत के विकास के इंजन हैं।

❓ Frequently Asked Questions (FAQs)

1. नगरपालिकाएँ (Municipalities) क्या हैं?

नगरपालिकाएँ भारत में शहरी स्थानीय स्वशासन (Urban Local Self-Government) की संस्थाएँ हैं, जो शहरी क्षेत्रों में प्रशासन, विकास और नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन करती हैं।


2. नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा कब मिला?

नगरपालिकाओं को 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा मिला, जो 1 जून 1993 से लागू हुआ।


3. नगरपालिकाओं से संबंधित संवैधानिक प्रावधान कहाँ दिए गए हैं?

नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधान भाग IX-A (अनुच्छेद 243P से 243ZG) में दिए गए हैं।


4. शहरी स्थानीय निकायों के प्रकार कौन-से हैं?

शहरी स्थानीय निकाय तीन प्रकार के होते हैं:

  • नगर निगम (Municipal Corporation)
  • नगर पालिका परिषद (Municipal Council)
  • नगर पंचायत (Nagar Panchayat)

5. नगर निगम और नगर पालिका में क्या अंतर है?

नगर निगम बड़े शहरी क्षेत्रों/महानगरों के लिए होता है, जबकि नगर पालिका मध्यम आकार के शहरों के लिए गठित की जाती है।


6. 12वीं अनुसूची का क्या महत्व है?

12वीं अनुसूची में 18 विषय शामिल हैं, जिन्हें नगरपालिकाओं को सौंपा जा सकता है, जैसे शहरी नियोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य।


7. नगरपालिकाओं का कार्यकाल कितना होता है?

नगरपालिकाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।


8. नगरपालिकाओं के चुनाव कौन कराता है?

नगरपालिकाओं के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) द्वारा कराए जाते हैं।


9. नगरपालिकाओं में आरक्षण का क्या प्रावधान है?

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण किया गया है, जिसमें महिलाओं के लिए कम से कम 33% आरक्षण अनिवार्य है।


10. महापौर (Mayor) की भूमिका क्या होती है?

महापौर नगर निगम का औपचारिक प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक प्रशासनिक शक्तियाँ आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होती हैं।


11. नगरपालिकाओं की आय के प्रमुख स्रोत क्या हैं?

नगरपालिकाओं की आय के स्रोत हैं:

  • कर (Property Tax, Advertisement Tax आदि)
  • अनुदान
  • शुल्क और जुर्माने

12. राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) की नगरपालिकाओं में क्या भूमिका है?

राज्य वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और संसाधनों के वितरण की सिफारिश करता है।


13. नगरपालिकाओं की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?

प्रमुख समस्याएँ हैं:

  • वित्तीय संसाधनों की कमी
  • प्रशासनिक नियंत्रण
  • कमजोर क्षमता और योजना
  • तेजी से बढ़ता शहरीकरण

14. नगरपालिकाएँ और पंचायती राज में मुख्य अंतर क्या है?

नगरपालिकाएँ शहरी क्षेत्रों के लिए हैं, जबकि पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होती है।

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