राज्य विधानमंडल (State Legislature) – संरचना, शक्तियाँ और कार्य | Indian Constitution Notes

राज्य विधानमंडल (State Legislature) राज्य स्तर पर कानून निर्माण की सर्वोच्च संस्था है और यह राज्य की विधायी शक्ति का प्रयोग करता है। भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल होता है, जो या तो एकसदनीय (Unicameral) या द्विसदनीय (Bicameral) हो सकता है। एकसदनीय विधानमंडल में केवल विधानसभा (Legislative Assembly) होती है, जबकि द्विसदनीय विधानमंडल में विधानसभा और विधान परिषद (Legislative Council) दोनों शामिल होती हैं।

संविधान के अनुच्छेद 168 से 212 राज्य विधानमंडल से संबंधित प्रावधान करते हैं। राज्य विधानमंडल का प्रमुख कार्य राज्य सूची एवं समवर्ती सूची से संबंधित विषयों पर कानून बनाना, राज्य सरकार पर नियंत्रण रखना तथा वित्तीय मामलों को स्वीकृति देना है। इसके अतिरिक्त, यह राज्य की कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राज्य विधानमंडल (State Legislature)

राज्य विधानमंडल: गठन, संरचना और योग्यता

संविधान के भाग VI में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल के गठन, कार्यकाल और अधिकारियों का वर्णन है।

राज्य विधानमंडल की संरचना विधायी अंग विधानसभा (निम्न सदन) आयु: 25 वर्ष | कार्यकाल: 5 वर्ष प्रत्यक्ष चुनाव (जनता द्वारा) अधिकारी: अध्यक्ष विधान परिषद (उच्च सदन) आयु: 30 वर्ष | कार्यकाल: 6 वर्ष अप्रत्यक्ष चुनाव | स्थायी सदन अधिकारी: सभापति सामान्य योग्यताएँ (Art. 173) भारत का नागरिक | लाभ का पद न हो State Legislature Framework | pdfnotes.in | vikas singh

विधानमंडल का गठन (अनुच्छेद 168)

  • एकसदनीय (Unicameral): जहाँ केवल विधानसभा (Legislative Assembly) हो।
  • द्विसदनीय (Bicameral): जहाँ विधानसभा और विधान परिषद (Legislative Council) दोनों हों।
  • वर्तमान स्थिति: भारत के केवल 6 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में द्विसदनीय व्यवस्था है।

संरचना और कार्यकाल

विधानसभा (निम्न सदन / प्रत्यक्ष सदन)

  • सदस्य संख्या: अधिकतम 500 और न्यूनतम 60। (अपवाद: सिक्किम-32, गोवा-40)।
  • चुनाव: जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष चुनाव
  • कार्यकाल: सामान्यतः 5 वर्ष। राज्यपाल इसे समय से पूर्व भंग कर सकता है।

विधान परिषद (उच्च सदन / स्थायी सदन)

  • सदस्य संख्या: विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 1/3 से अधिक नहीं और न्यूनतम 40 से कम नहीं।
  • चुनाव: यह एक अप्रत्यक्ष चुनाव है। 5/6 सदस्य निर्वाचित और 1/6 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं।
  • कार्यकाल: यह एक स्थायी सदन है, इसे भंग नहीं किया जा सकता। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है और 1/3 सदस्य हर 2 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।

योग्यता और अर्हताएँ (अनुच्छेद 173)

विधानमंडल का सदस्य बनने के लिए आवश्यक शर्तें:

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. आयु: विधानसभा के लिए न्यूनतम 25 वर्ष और विधान परिषद के लिए न्यूनतम 30 वर्ष
  3. वह संसद द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताओं को पूरा करता हो।
  4. वह किसी ‘लाभ के पद’ पर न हो।

विधानमंडल के प्रमुख अधिकारी

विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (Speaker & Deputy Speaker)

  • इनका चुनाव विधानसभा के सदस्य अपने बीच से ही करते हैं।
  • शक्तियाँ: सदन की बैठकों की अध्यक्षता करना, मर्यादा बनाए रखना और ‘निर्णायक मत’ (Casting Vote) देना।
  • कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अध्यक्ष ही करता है।

विधान परिषद के सभापति और उपसभापति (Chairman & Deputy Chairman)

  • इनका चुनाव परिषद के सदस्य अपने बीच से करते हैं।
  • सभापति के पास परिषद के संचालन की वैसी ही शक्तियाँ होती हैं जैसी विधानसभा अध्यक्ष के पास।

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

अनुच्छेद 169 : इसके तहत संसद को किसी राज्य में विधान परिषद का गठन या उत्सादन (Abolition) करने की शक्ति प्राप्त है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा इसका संकल्प पारित करे।”

विधायी प्रक्रिया (Legislative Procedure)

राज्य विधानमंडल में विधेयक (Bill) पारित होने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि सदन एकसदनीय है या द्विसदनीय।

विधायी प्रक्रिया (कानून निर्माण) विधेयक (Bill) विधेयक की प्रस्तुति साधारण: किसी भी सदन में | धन: केवल वि.स. विधानसभा (LA) तीन वाचन और बहुमत से पारित विधान परिषद (LC) साधारण: अधिकतम 4 माह रोक अंतिम स्वीकृति (Art. 200) राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ‘अधिनियम’ Legislative Process Analysis | pdfnotes.in | vikas singh

साधारण विधेयक (Ordinary Bills)

  1. प्रस्तुति: यह किसी भी सदन (जहाँ द्विसदनीय हो) में पेश किया जा सकता है।
  2. प्रथम सदन: विधेयक तीन चरणों (वाचनों) से गुजरता है और बहुमत से पारित होकर दूसरे सदन को भेजा जाता है।
  3. द्वितीय सदन (विधान परिषद) की शक्ति: यहाँ विधान परिषद की शक्तियाँ राज्यसभा से कम हैं। परिषद विधेयक को:
    • पहली बार में: अधिकतम 3 माह तक रोक सकती है।
    • दूसरी बार में: यदि विधानसभा उसे दोबारा पारित कर भेजती है, तो परिषद केवल 1 माह और रोक सकती है।
    • निष्कर्ष: विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को कुल 4 माह से अधिक नहीं रोक सकती। इसके बाद वह स्वतः पारित मान लिया जाता है। (यहाँ संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है)।

धन विधेयक (Money Bills) – अनुच्छेद 198

  • प्रस्तुति: केवल विधानसभा में और राज्यपाल की पूर्व सहमति से।
  • परिषद की शक्ति: विधान परिषद धन विधेयक को केवल 14 दिनों तक रोक सकती है। यदि वह इस दौरान कोई सुझाव देती है, तो उसे मानना या न मानना विधानसभा की इच्छा पर निर्भर है।

विधानमंडल की शक्तियाँ (Powers)

  1. विधायी शक्तियाँ: राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) के विषयों पर कानून बनाना। (समवर्ती सूची पर केंद्र का कानून प्रभावी रहता है)।
  2. वित्तीय शक्तियाँ: राज्य के बजट को पारित करना और कर (Tax) लगाने या उनमें बदलाव करने का अधिकार। विधानसभा का बजट पर पूर्ण नियंत्रण होता है।
  3. कार्यकारी शक्तियाँ: मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद अपने कार्यों के लिए सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। प्रश्नकाल और स्थगन प्रस्तावों के माध्यम से उन पर नियंत्रण रखा जाता है।
  4. निर्वाचन संबंधी शक्तियाँ: विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव और राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में भाग लेते हैं।

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

संसद में डेडलॉक होने पर संयुक्त बैठक (Joint Sitting) होती है, लेकिन राज्य विधानमंडल में साधारण विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ विधानसभा की इच्छा ही सर्वोपरि होती है।”

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गठन और संरचना

  1. संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल का वर्णन है।
  2. अधिकांश राज्यों में एक-सदनीय (Unicameral) व्यवस्था है, जहाँ केवल विधानसभा होती है।
  3. वर्तमान में भारत के केवल 6 राज्यों में द्विसदनीय (Bicameral) व्यवस्था है।
  4. द्विसदनीय राज्यों के नाम: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
  5. अनुच्छेद 169: संसद को किसी राज्य में विधान परिषद बनाने या समाप्त करने का अधिकार है।
  6. यदि संबंधित राज्य की विधानसभा ‘विशेष बहुमत’ से इस आशय का प्रस्ताव पारित करे, तभी संसद ऐसा कर सकती है।
  7. विधानसभा (Legislative Assembly): इसे ‘निचला सदन’ या ‘लोकप्रिय सदन’ कहा जाता है।
  8. विधानसभा की अधिकतम संख्या 500 और न्यूनतम 60 निर्धारित है।
  9. अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गोवा जैसे छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम संख्या 30 तय की गई है।
  10. विधानसभा के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं।
  11. विधान परिषद (Legislative Council): इसे ‘उच्च सदन’ या ‘द्वितीय सदन’ कहा जाता है।
  12. विधान परिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 1/3 होती है।
  13. विधान परिषद की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं हो सकती।
  14. विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
  15. परिषद के 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों (नगरपालिका, जिला बोर्ड) द्वारा चुने जाते हैं।
  16. परिषद के 1/12 सदस्य स्नातकों (3 वर्ष पहले स्नातक) द्वारा चुने जाते हैं।
  17. परिषद के 1/12 सदस्य शिक्षकों (3 वर्ष का अनुभव) द्वारा चुने जाते हैं।
  18. परिषद के 1/3 सदस्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।
  19. शेष 1/6 सदस्यों को राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।
  20. मनोनयन का आधार: साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा।

कार्यकाल, योग्यता और अधिकारी

  1. विधानसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
  2. राज्यपाल इसे 5 वर्ष से पहले भी भंग कर सकता है।
  3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान विधानसभा का कार्यकाल एक बार में 1 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  4. विधान परिषद एक स्थायी सदन है, इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता।
  5. विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
  6. इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
  7. योग्यता: वह भारत का नागरिक हो।
  8. विधानसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।
  9. विधान परिषद के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।
  10. दलबदल के आधार पर अयोग्यता का फैसला सदन का अध्यक्ष या सभापति करता है।
  11. विधानसभा के पीठासीन अधिकारी को अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष कहा जाता है।
  12. विधान परिषद के पीठासीन अधिकारी को सभापति (Chairman) और उप-सभापति कहा जाता है।
  13. अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को सौंपता है।
  14. सभापति अपना त्यागपत्र उप-सभापति को सौंपता है।
  15. कोरम (गणपूर्ति): सदन की बैठक के लिए कुल सदस्यों का 1/10 या 10 सदस्य (जो भी अधिक हो) उपस्थित होना अनिवार्य है।

विधायी प्रक्रिया और शक्तियाँ

  1. साधारण विधेयक किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
  2. विधानसभा और विधान परिषद के बीच गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।
  3. यदि विधान परिषद विधेयक को अस्वीकार कर दे, तो विधानसभा उसे दोबारा पारित कर परिषद की इच्छा के विरुद्ध कानून बना सकती है।
  4. विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को अधिकतम 4 महीने (पहली बार 3 महीने, दूसरी बार 1 महीना) तक रोक सकती है।
  5. धन विधेयक: केवल विधानसभा में राज्यपाल की पूर्व अनुमति से पेश किया जा सकता है।
  6. विधान परिषद धन विधेयक को केवल 14 दिनों तक रोक सकती है।
  7. मुख्यमंत्री और मंत्री किसी भी सदन में बोल सकते हैं, लेकिन वोट केवल उसी सदन में देंगे जिसके वे सदस्य हैं।
  8. विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।
  9. विधान परिषद के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते।
  10. राज्य विधानमंडल राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बना सकता है।
  11. बजट सबसे पहले विधानसभा में पेश किया जाता है।
  12. राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  13. विधान परिषद का अस्तित्व पूरी तरह विधानसभा की इच्छा पर निर्भर है (Art 169)।
  14. राज्यपाल विधानसभा के सत्र को आहूत (Summon) और सत्रावसान (Prorogue) करता है।

संसद बनाम राज्य विधानमंडल:

विशेषता / आधारसंसद (Parliament)राज्य विधानमंडल (State Legislature)
संविधान का भागभाग 5 (अनुच्छेद 79-122)।भाग 6 (अनुच्छेद 168-212)।
अंग (Components)राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा।राज्यपाल + विधानसभा (+ विधान परिषद, यदि है)।
उच्च सदनराज्यसभा: यह एक स्थायी सदन है, इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता।विधान परिषद: यह भी स्थायी है, लेकिन संसद इसे समाप्त (Abolish) कर सकती है।
निम्न सदनलोकसभा: कार्यकाल 5 वर्ष, सीधे जनता द्वारा निर्वाचित।विधानसभा: कार्यकाल 5 वर्ष, सीधे जनता द्वारा निर्वाचित।
संयुक्त बैठकगतिरोध होने पर अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक का प्रावधान है।सदनों के बीच गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है।
विधेयक पर शक्तिराज्यसभा साधारण विधेयक को अधिकतम 6 महीने रोक सकती है।विधान परिषद साधारण विधेयक को अधिकतम 4 महीने ही रोक सकती है।
धन विधेयककेवल लोकसभा में पेश होता है; राज्यसभा 14 दिन रोक सकती है।केवल विधानसभा में पेश होता है; विधान परिषद 14 दिन रोक सकती है।
अध्यक्ष की नियुक्तिलोकसभा अध्यक्ष का चुनाव सदस्य स्वयं करते हैं।विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव सदस्य स्वयं करते हैं।
सदन की समाप्तिराज्यसभा को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।विधान परिषद को संसद अनुच्छेद 169 के तहत पूरी तरह समाप्त कर सकती है।
क्षेत्राधिकारसंघ सूची, समवर्ती सूची और अवशिष्ट शक्तियों पर कानून।राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून।

याद रखने योग्य महत्वपूर्ण अंतर:

  1. शक्ति का संतुलन: केंद्र में राज्यसभा की शक्तियां (साधारण विधेयक के मामले में) लोकसभा के लगभग बराबर हैं, लेकिन राज्य में विधान परिषद विधानसभा की तुलना में बहुत कमजोर है।
  2. संयुक्त बैठक: यदि संसद के दोनों सदनों में झगड़ा हो तो राष्ट्रपति दोनों को साथ बिठा सकता है, लेकिन राज्य में ऐसा नहीं होता; यहाँ विधानसभा की मर्जी ही अंतिम होती है।
  3. मनोनयन: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत करता है, जबकि राज्यपाल विधान परिषद में कुल सदस्यों का 1/6 भाग मनोनीत करता है।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)

ये प्रश्न विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों (UPPSC, BPSC, MPPSC) और SSC परीक्षाओं से संकलित हैं:

1. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्य में ‘विधान परिषद’ के गठन या उत्सादन (Abolition) का प्रावधान है?

उत्तर: (B) अनुच्छेद 169 (संसद संबंधित राज्य की विधानसभा के संकल्प पर ऐसा कर सकती है)।

2. विधान परिषद के सदस्यों की न्यूनतम संख्या कितनी होनी अनिवार्य है? (SSC CGL)

उत्तर: (B) 40 (अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सीटों का 1/3 हो सकती है)।

3. विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?

उत्तर: (C) 25 वर्ष (विधान परिषद के लिए यह 30 वर्ष है)।

4. कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ है या नहीं, इसका निर्णय राज्य विधानसभा में कौन करता है? (UPPSC)

उत्तर: विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)।

5. विधान परिषद किसी साधारण विधेयक को पहली बार में अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है?

उत्तर: (C) 3 माह (दूसरी बार भेजने पर 1 माह और, यानी कुल 4 माह)।

6. वर्तमान में भारत के कितने राज्यों में द्विसदनीय (Bicameral) विधानमंडल है?

उत्तर: 6 राज्यों में (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना)।

7. राज्य विधानसभा के ‘सत्रावसान’ (Prorogation) का आदेश किसके द्वारा दिया जाता है?

उत्तर: राज्यपाल द्वारा (अध्यक्ष केवल ‘स्थगन’ करता है)।

8. विधानसभा में ‘निर्णायक मत’ (Casting Vote) देने का अधिकार किसे है?

उत्तर: विधानसभा अध्यक्ष को (जब मत बराबर हों)।

9. विधान परिषद के कितने सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं? (BPSC)

उत्तर: (B) कुल सदस्यों का 1/6।

10. राज्य विधानमंडल का ‘उच्च सदन’ किसे कहा जाता है?

उत्तर: विधान परिषद को (यह एक स्थायी सदन है जिसे भंग नहीं किया जा सकता)।

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. राज्य विधानमंडल (State Legislature) क्या है?

राज्य विधानमंडल राज्य स्तर पर कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्था है, जो राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग करती है।

2. भारतीय संविधान में राज्य विधानमंडल का उल्लेख किन अनुच्छेदों में है?

राज्य विधानमंडल से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 168 से 212 में दिए गए हैं।

3. राज्य विधानमंडल कितने प्रकार का हो सकता है?

राज्य विधानमंडल दो प्रकार का हो सकता है:

  • एकसदनीय (Unicameral) – केवल विधानसभा
  • द्विसदनीय (Bicameral) – विधानसभा और विधान परिषद

4. किन राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है?

वर्तमान में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में द्विसदनीय विधानमंडल है।

5. राज्य विधानसभा (Legislative Assembly) क्या है?

राज्य विधानसभा राज्य विधानमंडल का निम्न सदन है, जिसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं।

6. राज्य विधान परिषद (Legislative Council) क्या है?

विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन है, जिसके सदस्य आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से नामित होते हैं।

7. राज्य विधान परिषद के सदस्यों का चयन कैसे होता है?

विधान परिषद के सदस्यों का चयन:

  • स्थानीय निकायों
  • विधानसभा
  • स्नातकों व शिक्षकों
  • राज्यपाल द्वारा नामांकन
    के माध्यम से होता है।

8. क्या राज्य विधान परिषद को समाप्त या पुनः स्थापित किया जा सकता है?

हाँ, अनुच्छेद 169 के तहत संसद राज्य विधानसभा के प्रस्ताव के आधार पर विधान परिषद को समाप्त या पुनः स्थापित कर सकती है।

9. राज्य विधानमंडल की प्रमुख शक्तियाँ क्या हैं?

राज्य विधानमंडल की प्रमुख शक्तियाँ हैं:

  • कानून निर्माण
  • वित्तीय नियंत्रण
  • कार्यपालिका पर नियंत्रण
  • संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया में भागीदारी

10. क्या राज्य विधानमंडल वित्तीय मामलों पर नियंत्रण रखता है?

हाँ, वित्त विधेयक और बजट पहले विधानसभा में प्रस्तुत किए जाते हैं और विधानसभा की स्वीकृति आवश्यक होती है।

11. क्या विधान परिषद धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है?

नहीं, विधान परिषद धन विधेयक को न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही संशोधित कर सकती है; वह केवल विलंब कर सकती है।

12. राज्य विधानमंडल और राज्यपाल के बीच क्या संबंध है?

राज्यपाल राज्य विधानमंडल का अविभाज्य अंग होता है और विधेयकों को स्वीकृति देना उसका संवैधानिक कार्य है।

13. क्या राज्य विधानमंडल कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाता है?

हाँ, प्रश्नकाल, अविश्वास प्रस्ताव और चर्चाओं के माध्यम से राज्य विधानमंडल कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाता है।

14. एकसदनीय और द्विसदनीय विधानमंडल में मुख्य अंतर क्या है?

  • एकसदनीय में केवल विधानसभा होती है
  • द्विसदनीय में विधानसभा + विधान परिषद होती है
  • द्विसदनीय व्यवस्था में विधायी पुनर्विचार (Revising role) की सुविधा होती है

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।