भारत का उच्चतम न्यायालय: संरचना, शक्तियाँ और क्षेत्राधिकार | Supreme Court Notes in Hindi

“भारतीय संविधान के भाग V में अनुच्छेद 124 से 147 तक उच्चतम न्यायालय के गठन, स्वतंत्रता, अधिकार क्षेत्र और शक्तियों का वर्णन किया गया है। भारत ने एक ‘एकीकृत न्यायपालिका’ (Integrated Judiciary) को अपनाया है, जिसमें उच्चतम न्यायालय सबसे ऊपर है। इसका उद्घाटन 28 जनवरी, 1950 को हुआ था। यह भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय है और इसे ‘संविधान का व्याख्याकार’ (Interpreter of the Constitution) भी कहा जाता है।”

भउच्चतम न्यायालय शक्तियाँ और क्षेत्राधिकार
उच्चतम न्यायालय:(Art. 124-147) संविधान का रक्षक मूल क्षेत्राधिकार (केंद्र-राज्य विवाद | Art. 131) सलाहकारी क्षेत्राधिकार (राष्ट्रपति को सलाह | Art. 143) रिट क्षेत्राधिकार (मौलिक अधिकार | Art. 32) अपीलीय क्षेत्राधिकार (HC के विरुद्ध अपील) अभिलेख न्यायालय (निर्णय सुरक्षित साक्ष्य | Art. 129) Supreme Court Framework | pdfnotes.in | vikas singh

संरचना और नियुक्ति (Composition & Appointment)

भारत का उच्चतम न्यायालय विश्व के सबसे शक्तिशाली न्यायालयों में से एक है। इसकी संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया इसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

न्यायाधीशों की संख्या (Strength)

  • संवैधानिक प्रावधान: मूल संविधान में केवल 8 न्यायाधीश (1 मुख्य न्यायाधीश + 7 अन्य) थे।
  • वर्तमान स्थिति: संसद द्वारा पारित ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019’ के अनुसार, वर्तमान में कुल 34 न्यायाधीश (1 मुख्य न्यायाधीश + 33 अन्य न्यायाधीश) निर्धारित हैं।
  • शक्ति: न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की शक्ति केवल संसद के पास है।

नियुक्ति की प्रक्रिया (Appointment Process)

उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

  • मुख्य न्यायाधीश (CJI): राष्ट्रपति अन्य न्यायाधीशों (SC और HC के) की सलाह के बाद CJI की नियुक्ति करते हैं। आमतौर पर वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही CJI बनाया जाता है।
  • अन्य न्यायाधीश: इनकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति कोलेजियम (CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश) की सलाह पर कार्य करते हैं।
  • कोलेजियम प्रणाली (Collegium System): यह प्रणाली किसी संवैधानिक अनुच्छेद में नहीं है, बल्कि ‘थ्री जजेज केस’ (1993-98) के माध्यम से विकसित हुई है।

न्यायाधीशों की योग्यता (Qualifications)

संविधान के अनुच्छेद 124(3) के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए:

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. वह किसी उच्च न्यायालय (या एक से अधिक) में कम से कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो, अथवा
  3. वह किसी उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता (वकील) रहा हो, अथवा
  4. वह राष्ट्रपति की राय में एक ‘पारंगत विधिवेत्ता’ (Distinguished Jurist) हो।

नोट: संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कोई न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं की गई है।

SC न्यायाधीश: नियुक्ति प्रक्रिया कोलेजियम (Collegium) CJI + 4 वरिष्ठ न्यायाधीश नामों की सिफारिश करना (न्यायापालिका का प्रभुत्व) राष्ट्रपति (औपचारिक नियुक्ति) SC न्यायाधीश (नियुक्त एवं आधिकारिक) Appointment Framework | pdfnotes.in | vikas singh

कार्यकाल और निष्कासन (Tenure and Removal)

न्यायाधीशों का निष्कासन (Removal Process) भारतीय संविधान की सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक है। इसे ‘महाभियोग जैसी प्रक्रिया’ कहा जाता है, ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहे और कोई भी सरकार आसानी से न्यायाधीशों को हटा न सके।

कार्यकाल (Tenure)

  • आयु सीमा: उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद पर बना रहता है।
  • त्यागपत्र: वह किसी भी समय अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को लिखित रूप में दे सकता है।
  • विवाद: न्यायाधीश की आयु के संबंध में किसी भी प्रश्न का निर्णय संसद द्वारा निर्धारित प्राधिकारी द्वारा किया जाता है।

निष्कासन की प्रक्रिया (Removal Process – Art. 124(4))

न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए ‘महाभियोग’ (Impeachment) जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • आधार: केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है—
    1. सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
    2. अक्षमता (Incapacity)
  • अधिकार: हटाने का अंतिम आदेश राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाता है, लेकिन इसके लिए संसद की सिफारिश अनिवार्य है।

निष्कासन के चरण (Steps in Parliament):

  1. प्रस्ताव पेश करना: लोकसभा के कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा के 50 सदस्य हस्ताक्षर करके प्रस्ताव अध्यक्ष/सभापति को देते हैं।
  2. जाँच समिति: अध्यक्ष/सभापति आरोपों की जाँच के लिए 3 सदस्यीय समिति गठित करते हैं (इसमें एक SC न्यायाधीश, एक HC मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता होता है)।
  3. विशेष बहुमत: यदि समिति दोषी पाती है, तो संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित एवं मतदान करने वालों का 2/3) से प्रस्ताव पारित होना चाहिए।
  4. राष्ट्रपति की मंजूरी: दोनों सदनों से पारित होने के बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जो निष्कासन का आदेश जारी करते हैं।
न्यायाधीश निष्कासन प्रक्रिया (Art. 124) 1. प्रस्ताव (Motion) लोकसभा: 100 सदस्य या राज्यसभा: 50 सदस्य 2. जाँच (Inquiry) 3-सदस्यीय समिति आरोपों की सत्यता की जाँच 3. विशेष बहुमत संसद के दोनों सदन 2/3 बहुमत से पारित करें 4. निष्कासन राष्ट्रपति आदेश जारी करते हैं नोट: अब तक किसी भी SC जज को हटाया नहीं गया है। Ref: न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968 | pdfnotes.in | vikas singh

महत्वपूर्ण तथ्य: अब तक भारत के इतिहास में उच्चतम न्यायालय के किसी भी न्यायाधीश को इस प्रक्रिया द्वारा हटाया नहीं गया है। (वी. रामास्वामी पहले ऐसे न्यायाधीश थे जिनके खिलाफ यह प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन प्रस्ताव पारित नहीं हो सका)।

उच्चतम न्यायालय की शक्तियाँ और क्षेत्राधिकार (Powers & Jurisdiction)

भारत का उच्चतम न्यायालय न केवल एक संघीय न्यायालय है, बल्कि यह ब्रिटिश प्रिवी काउंसिल के स्थान पर अपील का अंतिम न्यायालय और संविधान का व्याख्याता भी है।

मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) – अनुच्छेद 131

यह उन मामलों से संबंधित है जो सीधे उच्चतम न्यायालय में आते हैं (निचली अदालतों से होकर नहीं)।

  • केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद।
  • केंद्र और कोई राज्य एक तरफ और एक या अधिक राज्य दूसरी तरफ।
  • दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद।

रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) – अनुच्छेद 32

संविधान द्वारा उच्चतम न्यायालय को ‘मौलिक अधिकारों का रक्षक’ बनाया गया है।

  • किसी नागरिक के मौलिक अधिकार का हनन होने पर SC पाँच प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश आदि) जारी कर सकता है।
  • नोट: इसका रिट क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) से संकीर्ण है क्योंकि SC केवल मौलिक अधिकारों के लिए रिट जारी करता है।

अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction) – अनुच्छेद 132-136

SC भारत का अंतिम अपीलीय न्यायालय है। यह चार प्रकार की अपील सुनता है:

  1. संवैधानिक मामले: यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करे कि मामले में संविधान की व्याख्या का प्रश्न है।
  2. दीवानी मामले (Civil Cases): कानून के किसी महत्वपूर्ण प्रश्न पर।
  3. आपराधिक मामले (Criminal Cases): यदि HC ने किसी की सजा को मौत की सजा में बदल दिया हो।
  4. विशेष अनुमति याचिका (SLP – Art. 136): SC अपने विवेक से किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सुनने की अनुमति दे सकता है।

सलाहकारी क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction) – अनुच्छेद 143

राष्ट्रपति निम्नलिखित मामलों में उच्चतम न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं:

  • सार्वजनिक महत्व के किसी कानून या तथ्य के प्रश्न पर।
  • किसी पूर्व-संवैधानिक संधि या समझौते पर विवाद।

विशेष: न तो SC सलाह देने के लिए बाध्य है (संधि मामलों को छोड़कर), और न ही राष्ट्रपति सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।

अभिलेख न्यायालय (Court of Record) – अनुच्छेद 129

  • उच्चतम न्यायालय के सभी निर्णय और कार्यवाही साक्ष्य (Evidence) के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।
  • इन्हें किसी भी अन्य न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। इसे अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड देने की भी शक्ति है।
SC क्षेत्राधिकार: शक्तियाँ व अनुच्छेद क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) मूल क्षेत्राधिकार केंद्र-राज्य विवाद (Art. 131) सलाहकारी राष्ट्रपति को सलाह (Art. 143) रिट क्षेत्राधिकार मौलिक अधिकार (Art. 32) अपीलीय HC के विरुद्ध अपील (Art. 132) अभिलेख न्यायालय अवमानना हेतु दंड (Art. 129) Master Polity Series | pdfnotes.in | विकास सिंह

💡‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

अनुच्छेद 137 (न्यायिक पुनर्विलोकन): इसके तहत SC अपने ही पुराने फैसलों की समीक्षा कर सकता है और उन्हें बदल सकता है।”

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

गठन, नियुक्ति और अर्हताएँ

  1. भारत में एकीकृत न्यायिक व्यवस्था (Integrated Judicial System) को अपनाया गया है।
  2. उच्चतम न्यायालय (SC) इस व्यवस्था के शिखर पर स्थित है।
  3. संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 124 से 147 तक उच्चतम न्यायालय का वर्णन है।
  4. उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ था।
  5. इसने ब्रिटेन की ‘प्रिवी काउंसिल’ का स्थान लिया, जो पहले सर्वोच्च अपील अदालत थी।
  6. अनुच्छेद 124: भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा।
  7. मूल संविधान में जजों की कुल संख्या 8 (1 CJI + 7 जज) थी।
  8. वर्तमान में जजों की संख्या 34 (1 मुख्य न्यायाधीश + 33 अन्य जज) है।
  9. उच्चतम न्यायालय में जजों की संख्या बढ़ाने की शक्ति केवल संसद के पास है।
  10. नियुक्ति: उच्चतम न्यायालय के सभी जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  11. मुख्य न्यायाधीश (CJI) की नियुक्ति में राष्ट्रपति SC और HC के ऐसे जजों से सलाह लेता है जिन्हें वह उचित समझे।
  12. अन्य जजों की नियुक्ति में CJI की सलाह लेना अनिवार्य है।
  13. कोलेजियम प्रणाली: जजों की नियुक्ति ‘कोलेजियम’ की सिफारिश पर होती है (CJI + 4 वरिष्ठतम जज)।
  14. कोलेजियम प्रणाली का विकास ‘थ्री जजेस केसेज’ (Three Judges Cases) के माध्यम से हुआ।
  15. 99वां संविधान संशोधन (2014): इसके द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाया गया था।
  16. सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में NJAC को असंवैधानिक घोषित कर दिया और कोलेजियम को बहाल रखा।
  17. अर्हताएँ: वह भारत का नागरिक हो।
  18. वह कम से कम 5 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय का जज रहा हो।
  19. या वह 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में वकील रहा हो।
  20. या वह राष्ट्रपति की दृष्टि में एक सम्मानित विधिवेत्ता (Distinguished Jurist) हो।
  21. ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए संविधान में न्यूनतम आयु का कोई उल्लेख नहीं है।
  22. शपथ: जजों को शपथ राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति दिलाता है।
  23. पदावधि: सुप्रीम कोर्ट का जज 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकता है।
  24. वह राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा लिखित रूप में कभी भी दे सकता है।
  25. निष्कासन: जजों को ‘सिद्ध कदाचार’ (Proved misbehaviour) या ‘अक्षमता’ के आधार पर हटाया जा सकता है।
  26. हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए।
  27. जज की जांच के लिए ‘न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968’ की प्रक्रिया का पालन होता है।
  28. निष्कासन प्रस्ताव पर लोकसभा के 100 या राज्यसभा के 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  29. अब तक किसी भी जज को महाभियोग द्वारा हटाया नहीं गया है।
  30. वी. रामास्वामी पहले जज थे जिनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी (लेकिन पारित नहीं हुई)।
  31. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश: राष्ट्रपति किसी जज को कार्यवाहक CJI नियुक्त कर सकता है यदि पद खाली हो।
  32. तदर्थ न्यायाधीश (Ad hoc Judges): कोरम पूरा न होने पर CJI किसी HC के जज को तदर्थ जज बना सकता है।
  33. तदर्थ जज की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है।
  34. सेवानिवृत्त न्यायाधीश: CJI राष्ट्रपति की अनुमति से सेवानिवृत्त जजों को बैठने और कार्य करने का अनुरोध कर सकता है।
  35. SC का स्थान: संविधान ने दिल्ली को सुप्रीम कोर्ट का स्थान घोषित किया है।
  36. CJI राष्ट्रपति की अनुमति से दिल्ली के अलावा कहीं और भी बैठक बुला सकता है।
  37. सुप्रीम कोर्ट के जजों का वेतन और भत्ते संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
  38. कार्यकाल के दौरान जजों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जा सकती (वित्तीय आपातकाल को छोड़कर)।
  39. जजों का वेतन संचित निधि पर भारित होता है, जिस पर संसद में मतदान नहीं होता।
  40. सेवानिवृत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट का जज भारत के किसी भी कोर्ट में वकालत नहीं कर सकता

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अधिकार क्षेत्र

  1. सुप्रीम कोर्ट संविधान का अंतिम व्याख्याता और रक्षक है।
  2. सुरक्षा की गारंटी: जजों का कार्यकाल सुरक्षित है; उन्हें मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता।
  3. जजों के आचरण पर संसद या विधानमंडल में चर्चा नहीं की जा सकती (सिवाय महाभियोग के)।
  4. सुप्रीम कोर्ट अपने स्टाफ की नियुक्ति स्वयं करता है, इसमें सरकार का हस्तक्षेप नहीं होता।
  5. सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां संसद द्वारा कम नहीं की जा सकतीं।
  6. कार्यपालिका से पृथक्करण: राज्य को न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग रखना चाहिए (अनुच्छेद 50)।
  7. मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): केंद्र और राज्यों के बीच विवाद केवल SC सुनता है।
  8. राज्यों के बीच आपसी विवाद भी मूल क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आते हैं।
  9. नदी जल विवाद मूल क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं हैं (Art 262)।
  10. वित्त आयोग के मामलों को मूल क्षेत्राधिकार से बाहर रखा गया है।
  11. रिट क्षेत्राधिकार (Art 32): मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर SC 5 तरह की रिट जारी करता है।
  12. बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)।
  13. SC का रिट क्षेत्राधिकार केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित है।
  14. HC का रिट क्षेत्राधिकार (Art 226) SC से विस्तृत है क्योंकि वह अन्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
  15. अपीलीय क्षेत्राधिकार: SC भारत का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है।
  16. संवैधानिक मामलों में अपील: यदि HC प्रमाणित करे कि मामले में संविधान की व्याख्या शामिल है।
  17. दीवानी मामलों में अपील: यदि मामला सार्वजनिक महत्व के कानून से जुड़ा हो।
  18. आपराधिक मामलों में अपील: यदि HC ने निचली अदालत के बरी किए गए व्यक्ति को मृत्युदंड दिया हो।
  19. विशेष अनुमति याचिका (SLP): अनुच्छेद 136 के तहत SC किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सुनने की शक्ति रखता है।
  20. SLP सैन्य अदालतों के फैसलों पर लागू नहीं होती।
  21. सलाहकारी क्षेत्राधिकार (Art 143): राष्ट्रपति किसी भी कानून या तथ्य पर SC की सलाह मांग सकता है।
  22. राष्ट्रपति SC की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है।
  23. SC भी सलाह देने के लिए बाध्य नहीं है (सिवाय पूर्व-संवैधानिक समझौतों के)।
  24. अभिलेख न्यायालय (Court of Record): सुप्रीम कोर्ट के फैसले भविष्य के लिए साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।
  25. SC को अपनी अवमानना (Contempt) के लिए दंड देने की शक्ति प्राप्त है (Art 129)।
  26. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): विधायी अधिनियमों और कार्यपालिका के आदेशों की संवैधानिकता की जांच करना।
  27. यदि कोई कानून संविधान का उल्लंघन करता है, तो SC उसे शून्य घोषित कर सकता है।
  28. पुनरावलोकन शक्ति: सुप्रीम कोर्ट अपने स्वयं के पूर्व फैसलों को बदलने या समीक्षा करने की शक्ति रखता है (Art 137)।
  29. संविधान का व्याख्याकार: SC संविधान के विभिन्न प्रावधानों का अंतिम अर्थ स्पष्ट करता है।
  30. आनुषंगिक शक्तियां (Ancillary Powers): संसद SC को ऐसी शक्तियां दे सकती है जो उसके कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी हों।
  31. SC के सभी आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं।
  32. SC को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव विवाद सुलझाने की विशेष शक्ति है।
  33. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों के आचरण की जांच SC ही करता है।
  34. सुप्रीम कोर्ट नागरिक अधिकारों का ‘गारंटर’ है।
  35. स्व-नियमन: सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के अनुमोदन से अपने स्वयं के नियम बनाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य और न्यायिक सिद्धांत

  1. एच.जे. कनिया भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे।
  2. फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश थीं।
  3. अभी तक भारत में कोई भी महिला मुख्य न्यायाधीश (CJI) नहीं बनी है।
  4. सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही केवल अंग्रेजी भाषा में होती है।
  5. जजों के वेतन पर संसद में मतदान नहीं होता क्योंकि वे ‘प्रभारित व्यय’ (Charged Expenditure) हैं।
  6. SC को प्राप्त दंड देने की शक्ति ‘दीवानी’ और ‘आपराधिक’ दोनों अवमानना पर लागू होती है।
  7. कौशल विकास मामला: सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले को पूर्ण न्याय करने के लिए (Art 142) विशेष आदेश देने की शक्ति है।
  8. केशवानंद भारती मामला (1973): इसमें SC ने ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) का सिद्धांत दिया।
  9. मिनर्वा मिल्स मामला (1980): इसमें न्यायिक समीक्षा को मूल ढांचा घोषित किया गया।
  10. SC का क्षेत्राधिकार संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है लेकिन कम नहीं किया जा सकता।
  11. सुप्रीम कोर्ट केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखता है।
  12. जनहित याचिका (PIL): SC ने ही PIL के माध्यम से न्याय को आम जनता तक पहुँचाया।
  13. जजों की नियुक्ति के लिए ‘NJAC’ को रद्द करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बड़ा उदाहरण है।
  14. SC के जज सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल या अन्य सरकारी पदों पर नियुक्त हो सकते हैं (संविधान में मनाही नहीं है)।
  15. अनुच्छेद 141 के अनुसार, SC द्वारा घोषित कानून भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी है।
  16. संविधान की व्याख्या करने के लिए कम से कम 5 जजों की बेंच (Constitutional Bench) होनी चाहिए।
  17. सुप्रीम कोर्ट ‘शक्ति के पृथक्करण’ के सिद्धांत का पालन करता है।
  18. प्रमाणपत्र: HC से SC में अपील के लिए आमतौर पर HC के प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।
  19. सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के लिए जेल या जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
  20. अनुच्छेद 131: यह केवल केंद्र और राज्यों के बीच ‘विधिक’ (Legal) विवादों की बात करता है, ‘राजनैतिक’ नहीं।
  21. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तुलना में भारतीय SC का अपीलीय क्षेत्र अधिक विस्तृत है।
  22. भारतीय SC ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ और ‘विधि की उचित प्रक्रिया’ दोनों का उपयोग करता है।
  23. जस्टिस पी.एन. भगवती को भारत में जनहित याचिका का जनक माना जाता है।
  24. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया बहुत जटिल है ताकि वे बिना डर के कार्य कर सकें।
  25. सुप्रीम कोर्ट भारतीय संविधान का सबसे शक्तिशाली अंग और लोकतंत्र का प्रहरी है।

PYQ ( महत्वपूर्ण प्रश्न)

प्रश्न 1: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है?

उत्तर: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रह सकते हैं।

प्रश्न 2: न्यायाधीशों को उनके पद से कैसे हटाया जा सकता है?

उत्तर: उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

प्रश्न 3: कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) क्या है?

उत्तर: यह न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की एक प्रणाली है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

प्रश्न 4: क्या उच्चतम न्यायालय अपने स्वयं के निर्णयों की समीक्षा कर सकता है?

उत्तर: हाँ, अनुच्छेद 137 के तहत उच्चतम न्यायालय को अपने पूर्व में दिए गए किसी भी निर्णय या आदेश की समीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है।

प्रश्न 5: भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे?

उत्तर: भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश एच. जे. कनिया (H. J. Kania) थे।

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।