भारतीय संसद का कार्य बहुत विशाल और जटिल है, जिसे सदन के सीमित समय में पूरा करना संभव नहीं है। अतः, संसद अपने कार्यों के निष्पादन के लिए विभिन्न समितियों की सहायता लेती है। संसदीय समितियाँ वे निकाय हैं जो सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित की जाती हैं और अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशानुसार कार्य करती हैं। ये समितियाँ ‘मिनी पार्लियामेंट’ की तरह कार्य करती हैं और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम हैं। संसदीय समितियाँ वे सूक्ष्म निकाय हैं जो संसद के जटिल और विस्तृत कार्यों को सरल और प्रभावी बनाती हैं।
I. समितियों का परिचय और गठन
- भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में संसदीय समितियों का उल्लेख है, लेकिन उनके गठन और कार्य का विस्तार से वर्णन नहीं है।
- संसदीय समितियों का मुख्य उद्देश्य विधायी कार्यों में विशेषज्ञता और गहन जांच लाना है।
- ये समितियाँ अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशन में कार्य करती हैं।
- संसदीय समितियाँ दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing Committees) और तदर्थ समितियाँ (Ad hoc Committees)।
- स्थायी समितियाँ: ये निरंतर प्रकृति की होती हैं और हर साल या समय-समय पर चुनी जाती हैं।
- तदर्थ समितियाँ: ये किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं और कार्य पूरा होने पर समाप्त हो जाती हैं।
- अनुच्छेद 105: सांसदों के विशेषाधिकारों के साथ समितियों की शक्तियों का भी उल्लेख करता है।
- अनुच्छेद 118: संसद को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम बनाने की शक्ति देता है, जिसमें समितियाँ शामिल हैं।
- किसी भी मंत्री को इन समितियों का सदस्य नहीं नियुक्त किया जा सकता।
- यदि कोई सदस्य नियुक्त होने के बाद मंत्री बन जाता है, तो उसकी समिति की सदस्यता उसी दिन समाप्त हो जाती है।
- समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति द्वारा की जाती है।
- यदि लोकसभा अध्यक्ष स्वयं किसी समिति के सदस्य हैं, तो वे ही उसके अध्यक्ष होते हैं।
- संसदीय समितियों का अपना सचिवालय होता है जो लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय द्वारा प्रदान किया जाता है।
- सलाहकार समितियाँ (Consultative Committees) तकनीकी रूप से ‘संसदीय समितियाँ’ नहीं हैं।
II. वित्तीय समितियाँ – सबसे महत्वपूर्ण
- वित्तीय समितियाँ तीन हैं: लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति।
- लोक लेखा समिति (PAC): इसकी स्थापना 1921 में (1919 के अधिनियम के तहत) हुई थी।
- PAC में कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
- PAC के सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।
- 1967 से यह परंपरा है कि PAC का अध्यक्ष विपक्ष से चुना जाता है।
- PAC का मुख्य कार्य CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करना है।
- CAG को PAC का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
- प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): इसकी स्थापना 1950 में जॉन मथाई की सिफारिश पर हुई थी।
- इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी लोकसभा से होते हैं।
- यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।
- इसे ‘सतत मितव्ययिता समिति’ (Continuous Economy Committee) भी कहा जाता है।
- इसका अध्यक्ष हमेशा सत्ताधारी दल से होता है।
- सार्वजनिक उपक्रम समिति (CoPU): इसकी स्थापना 1964 में कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर हुई थी।
- इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
- यह LIC, FCI, SAIL जैसे सार्वजनिक संस्थानों के खातों और रिपोर्टों की जांच करती है।
III. अन्य महत्वपूर्ण समितियाँ
- विभागीय स्थायी समितियाँ (DRSCs): इनकी कुल संख्या 24 है।
- प्रत्येक विभागीय समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।
- इनका मुख्य कार्य बजट की अनुदान मांगों की गहन जांच करना है।
- विशेषाधिकार समिति: यह सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन के मामलों की जांच करती है।
- सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति: यह मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए वादों और आश्वासनों के पूरा होने की जांच करती है।
- कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee): यह सदन की समय-सारणी और विधायी कार्यों का कार्यक्रम तय करती है।
- लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति में 15 सदस्य होते हैं और इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष स्वयं करते हैं।
- नियम समिति: यह सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों पर विचार करती है।
- अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति: इसमें 30 सदस्य (20 LS + 10 RS) होते हैं।
- ग्रंथालय समिति: इसमें 9 सदस्य (6 LS + 3 RS) होते हैं।
- संसदीय समितियाँ कार्यपालिका पर विधायी नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपकरण हैं।
FAQ (महत्वपूर्ण प्रश्न)
प्रश्न 1: क्या कोई मंत्री संसदीय समिति का सदस्य बन सकता है?
उत्तर: नहीं, वित्तीय समितियों (PAC, Estimates, PSU) में किसी भी मंत्री को सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 2: प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) में राज्यसभा के कितने सदस्य होते हैं?
उत्तर: प्राक्कलन समिति में राज्यसभा का कोई सदस्य नहीं होता; इसके सभी 30 सदस्य लोकसभा से होते हैं।
प्रश्न 3: लोक लेखा समिति का ‘मित्र और मार्गदर्शक’ किसे कहा जाता है?
उत्तर: CAG (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) को लोक लेखा समिति का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
प्रश्न 4: विभागीय स्थायी समितियों (DRSCs) की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर: वर्तमान में कुल 24 विभागीय स्थायी समितियाँ हैं (16 लोकसभा के तहत और 8 राज्यसभा के तहत)।
प्रश्न 5: संसदीय समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
उत्तर: लोकसभा के तहत आने वाली समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
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