संसदीय समितियाँ: प्रकार, कार्य और लोक लेखा समिति | Parliamentary Committees in Hindi

भारतीय संसद का कार्य बहुत विशाल और जटिल है, जिसे सदन के सीमित समय में पूरा करना संभव नहीं है। अतः, संसद अपने कार्यों के निष्पादन के लिए विभिन्न समितियों की सहायता लेती है। संसदीय समितियाँ वे निकाय हैं जो सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित की जाती हैं और अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशानुसार कार्य करती हैं।

वित्तीय समितियाँ: तुलनात्मक विश्लेषण लोक लेखा समिति (PAC) सदस्य: 22 (15 LS + 7 RS) • CAG की रिपोर्ट की जाँच • विपक्ष का नेता अध्यक्ष • 1921 में स्थापना “संसद की प्रहरी” प्राक्कलन समिति सदस्य: 30 (केवल लोकसभा) • सबसे बड़ी समिति • मितव्ययिता के सुझाव • अध्यक्ष: सत्ताधारी दल से “सतत मितव्ययिता समिति” सार्वजनिक उपक्रम समिति सदस्य: 22 (15 LS + 7 RS) • PSUs के खातों की जाँच • LIC, SAIL आदि की रिपोर्ट • कृष्ण मेनन सिफारिश “सरकारी कंपनियों की जाँच” © 2026 | pdfnotes.in | VIKAS SINGH

संसदीय समितियाँ – प्रकार, कार्य और महत्व (Parliamentary Committees)

भारतीय संसद का कार्य अत्यंत विशाल और तकनीकी प्रकृति का होता है। सदन के पास सीमित समय होने के कारण, प्रत्येक विषय पर गहन चर्चा करना संभव नहीं हो पाता। अतः, संसद अपने कार्यों के सुचारू निष्पादन के लिए ‘लघु संसद’ यानी संसदीय समितियों की सहायता लेती है।

संसदीय समितियाँ क्या हैं?

संसदीय समितियाँ वे निकाय हैं जो सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित की जाती हैं और जो अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशानुसार कार्य करती हैं। ये समितियाँ सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और विधायी कार्यों में विशेषज्ञता लाने का मुख्य साधन हैं।

समितियों का परिचय और संरचना

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 (विशेषाधिकार) और अनुच्छेद 118 (प्रक्रिया नियम) में इन समितियों का आधार मिलता है।

  • ये दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing) और तदर्थ समितियाँ (Ad hoc)।
  • विशेष नियम: कोई भी मंत्री इन समितियों का सदस्य नहीं बन सकता ताकि कार्यपालिका पर निष्पक्ष नियंत्रण बना रहे।
  • प्रकृति: ये समितियाँ सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित की जाती हैं।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 105 (विशेषाधिकार) और अनुच्छेद 118 (प्रक्रिया नियम) इनके अस्तित्व का आधार हैं।
  • मंत्री की सदस्यता: कोई भी मंत्री इन समितियों का सदस्य नहीं हो सकता। (यह सरकार पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए है)।
  • अध्यक्षता: यदि लोकसभा अध्यक्ष स्वयं किसी समिति के सदस्य हैं, तो वे ही उसके अध्यक्ष होते हैं।

वित्तीय समितियाँ (PAC, Estimates, PSU)

ये संसद की सबसे महत्वपूर्ण समितियाँ हैं जो जनता के पैसे (Public Money) के खर्च और वित्तीय पारदर्शिता पर कड़ी नज़र रखती हैं।:

  • सार्वजनिक उपक्रम समिति (CoPU): यह सरकारी कंपनियों (जैसे LIC, SAIL) के प्रबंधन और खातों की जाँच करती है।
  • लोक लेखा समिति (PAC): इसमें 22 सदस्य (15 LS + 7 RS) होते हैं। इसका मुख्य कार्य CAG की रिपोर्ट की जाँच करना है। परंपरा के अनुसार इसका अध्यक्ष विपक्ष से होता है।
  • प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): इसमें 30 सदस्य होते हैं और सभी लोकसभा से होते हैं। यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।
समिति का नामसदस्य संख्यामुख्य कार्यविशेष तथ्य
लोक लेखा समिति (PAC)22 (15 LS + 7 RS)CAG की रिपोर्ट की जाँच करना।अध्यक्ष हमेशा विपक्ष से होता है।
प्राक्कलन समिति30 (केवल लोकसभा)सरकारी खर्च में ‘मितव्ययिता’ के सुझाव देना।यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।
सार्वजनिक उपक्रम समिति22 (15 LS + 7 RS)PSUs (LIC, SAIL आदि) के खातों की जाँच।कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर गठित।

विभागीय स्थायी समितियाँ (DRSCs)

वर्तमान में कुल 24 विभागीय समितियाँ हैं। प्रत्येक समिति में 31 सदस्य (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा) होते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों की ‘अनुदान मांगों’ (Demands for Grants) की बारीकी से जाँच करना है ताकि बजट का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

संसदीय समितियों का महत्व

  • गहन जाँच: ये जटिल विधेयकों और नीतिगत मुद्दों का सूक्ष्म विश्लेषण करती हैं।
  • सरकार पर नियंत्रण: समितियों के माध्यम से संसद कार्यपालिका की वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही तय करती है।
  • दलगत राजनीति से ऊपर: इन समितियों की बैठकें बंद कमरों में होती हैं, जिससे सदस्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विशेषज्ञ सलाह दे पाते हैं।
  • मर्यादा: समितियों की कार्यवाही गोपनीय होती है और इनकी रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती है।
  • CAG का रोल: सीएजी (CAG) को लोक लेखा समिति का ‘मित्र और दार्शनिक’ कहा जाता है।
  • अध्यक्ष: यदि लोकसभा अध्यक्ष किसी समिति के सदस्य बनते हैं, तो वे स्वतः ही उसके अध्यक्ष हो जाते हैं।

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) में राज्यसभा का एक भी सदस्य नहीं होता। यह अक्सर ‘कथन और कारण’ वाले प्रश्नों में पूछा जाता है।”

    परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

    समितियों का परिचय और गठन

    1. भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में संसदीय समितियों का उल्लेख है, लेकिन उनके गठन और कार्य का विस्तार से वर्णन नहीं है।
    2. संसदीय समितियों का मुख्य उद्देश्य विधायी कार्यों में विशेषज्ञता और गहन जांच लाना है।
    3. ये समितियाँ अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशन में कार्य करती हैं।
    4. संसदीय समितियाँ दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing Committees) और तदर्थ समितियाँ (Ad hoc Committees)।
    5. स्थायी समितियाँ: ये निरंतर प्रकृति की होती हैं और हर साल या समय-समय पर चुनी जाती हैं।
    6. तदर्थ समितियाँ: ये किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं और कार्य पूरा होने पर समाप्त हो जाती हैं।
    7. अनुच्छेद 105: सांसदों के विशेषाधिकारों के साथ समितियों की शक्तियों का भी उल्लेख करता है।
    8. अनुच्छेद 118: संसद को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम बनाने की शक्ति देता है, जिसमें समितियाँ शामिल हैं।
    9. किसी भी मंत्री को इन समितियों का सदस्य नहीं नियुक्त किया जा सकता।
    10. यदि कोई सदस्य नियुक्त होने के बाद मंत्री बन जाता है, तो उसकी समिति की सदस्यता उसी दिन समाप्त हो जाती है।
    11. समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति द्वारा की जाती है।
    12. यदि लोकसभा अध्यक्ष स्वयं किसी समिति के सदस्य हैं, तो वे ही उसके अध्यक्ष होते हैं।
    13. संसदीय समितियों का अपना सचिवालय होता है जो लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय द्वारा प्रदान किया जाता है।
    14. सलाहकार समितियाँ (Consultative Committees) तकनीकी रूप से ‘संसदीय समितियाँ’ नहीं हैं।

    वित्तीय समितियाँ –

    1. वित्तीय समितियाँ तीन हैं: लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति
    2. लोक लेखा समिति (PAC): इसकी स्थापना 1921 में (1919 के अधिनियम के तहत) हुई थी।
    3. PAC में कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
    4. PAC के सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।
    5. 1967 से यह परंपरा है कि PAC का अध्यक्ष विपक्ष से चुना जाता है।
    6. PAC का मुख्य कार्य CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की ऑडिट रिपोर्ट की जांच करना है।
    7. CAG को PAC का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
    8. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): इसकी स्थापना 1950 में जॉन मथाई की सिफारिश पर हुई थी।
    9. इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी लोकसभा से होते हैं।
    10. यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।
    11. इसे ‘सतत मितव्ययिता समिति’ (Continuous Economy Committee) भी कहा जाता है।
    12. इसका अध्यक्ष हमेशा सत्ताधारी दल से होता है।
    13. सार्वजनिक उपक्रम समिति (CoPU): इसकी स्थापना 1964 में कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर हुई थी।
    14. इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
    15. यह LIC, FCI, SAIL जैसे सार्वजनिक संस्थानों के खातों और रिपोर्टों की जांच करती है।

    अन्य महत्वपूर्ण समितियाँ

    1. विभागीय स्थायी समितियाँ (DRSCs): इनकी कुल संख्या 24 है।
    2. प्रत्येक विभागीय समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।
    3. इनका मुख्य कार्य बजट की अनुदान मांगों की गहन जांच करना है।
    4. विशेषाधिकार समिति: यह सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन के मामलों की जांच करती है।
    5. सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति: यह मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए वादों और आश्वासनों के पूरा होने की जांच करती है।
    6. कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee): यह सदन की समय-सारणी और विधायी कार्यों का कार्यक्रम तय करती है।
    7. लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति में 15 सदस्य होते हैं और इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष स्वयं करते हैं।
    8. नियम समिति: यह सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों पर विचार करती है।
    9. अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति: इसमें 30 सदस्य (20 LS + 10 RS) होते हैं।
    10. ग्रंथालय समिति: इसमें 9 सदस्य (6 LS + 3 RS) होते हैं।
    11. संसदीय समितियाँ कार्यपालिका पर विधायी नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपकरण हैं।

    PYQ (महत्वपूर्ण प्रश्न)

    प्रश्न 1: क्या कोई मंत्री संसदीय समिति का सदस्य बन सकता है?

    उत्तर: नहीं, वित्तीय समितियों (PAC, Estimates, PSU) में किसी भी मंत्री को सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता।

    प्रश्न 2: प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) में राज्यसभा के कितने सदस्य होते हैं?

    उत्तर: प्राक्कलन समिति में राज्यसभा का कोई सदस्य नहीं होता; इसके सभी 30 सदस्य लोकसभा से होते हैं।

    प्रश्न 3: लोक लेखा समिति का ‘मित्र और मार्गदर्शक’ किसे कहा जाता है?

    उत्तर: CAG (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) को लोक लेखा समिति का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।

    प्रश्न 4: विभागीय स्थायी समितियों (DRSCs) की कुल संख्या कितनी है?

    उत्तर: वर्तमान में कुल 24 विभागीय स्थायी समितियाँ हैं (16 लोकसभा के तहत और 8 राज्यसभा के तहत)।

    प्रश्न 5: संसदीय समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?

    उत्तर: लोकसभा के तहत आने वाली समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।

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    Vikas Singh

    लेखक: विकास सिंह

    विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।