संसद (Parliament) – Part 3

I. संसदीय समितियों का परिचय और प्रकार

  1. संसद का कार्य बहुत विस्तृत और जटिल है, इसलिए इसकी सहायता के लिए संसदीय समितियाँ बनाई जाती हैं।
  2. संसदीय समितियाँ दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing Committees) और तदर्थ समितियाँ (Ad hoc Committees)।
  3. स्थायी समितियाँ निरंतर प्रकृति की होती हैं और प्रतिवर्ष चुनी जाती हैं।
  4. तदर्थ समितियाँ किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं और कार्य पूरा होने पर समाप्त हो जाती हैं।
  5. संसदीय समिति की शर्त: इसे सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित होना चाहिए।
  6. यह अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशन में कार्य करती है।
  7. यह अपनी रिपोर्ट सदन या अध्यक्ष/सभापति को प्रस्तुत करती है।
  8. इसका अपना एक सचिवालय होता है जो संसद द्वारा प्रदान किया जाता है।
  9. सलाहकार समितियाँ (Consultative Committees) तकनीकी रूप से संसदीय समितियाँ नहीं हैं।
  10. वित्तीय समितियाँ: ये सबसे महत्वपूर्ण समितियाँ हैं (PAC, Estimates, CoPU)।
  11. मंत्रियों को इन समितियों का सदस्य नहीं चुना जा सकता।
  12. यदि कोई सदस्य मंत्री बन जाता है, तो उसकी समिति की सदस्यता समाप्त हो जाती है।
  13. वित्तीय समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।

II. लोक लेखा समिति – PAC

  1. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee): इसकी स्थापना पहली बार 1921 में हुई थी।
  2. इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से)।
  3. सदस्यों का चुनाव ‘एकल संक्रमणीय मत’ द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व से होता है।
  4. सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।
  5. 1967 से यह परंपरा है कि समिति का अध्यक्ष विपक्ष से चुना जाता है।
  6. इसका मुख्य कार्य CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट की जांच करना है।
  7. यह सुनिश्चित करती है कि संसद द्वारा दिया गया धन उसी उद्देश्य के लिए खर्च हुआ है या नहीं।
  8. CAG को ‘लोक लेखा समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
  9. यह समिति केवल उन्हीं खर्चों की जांच कर सकती है जो हो चुके हैं (Post-mortem)।

III. प्राक्कलन समिति – Estimates Committee

  1. प्राक्कलन समिति: इसकी स्थापना 1950 में जॉन मथाई की सिफारिश पर हुई थी।
  2. इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी लोकसभा से होते हैं।
  3. राज्यसभा का इसमें कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता।
  4. यह संसद की सबसे बड़ी समिति है।
  5. इसका कार्य बजट में प्रस्तावित अनुमानों (Estimates) की जांच करना है।
  6. यह ‘मितव्ययिता’ (Economy) के सुझाव देती है, इसलिए इसे ‘सतत मितव्ययिता समिति’ भी कहते हैं।
  7. इसका अध्यक्ष हमेशा सत्ताधारी दल से होता है।

IV. सार्वजनिक उपक्रम समिति – CoPU

  1. सार्वजनिक उपक्रम समिति: इसकी स्थापना 1964 में कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर हुई थी।
  2. इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से)।
  3. यह LIC, Air India और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के खातों की जांच करती है।
  4. विभागीय स्थायी समितियाँ (DRSCs): वर्तमान में कुल 24 ऐसी समितियाँ हैं।
  5. प्रत्येक विभागीय समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।
  6. इनका मुख्य कार्य संबंधित मंत्रालयों की अनुदान मांगों और विधेयकों की जांच करना है।
  7. विशेषाधिकार समिति: यह सदन और उसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन के मामलों की जांच करती है।
  8. याचिका समिति: यह सदन को दी गई याचिकाओं पर विचार करती है।
  9. संसदीय समितियाँ विधायिका का प्रशासन पर नियंत्रण सुनिश्चित करती हैं।
  10. इन समितियों की बैठकें बंद कमरे में (Confidential) होती हैं।
  11. ये समितियाँ “लघु संसद” की तरह कार्य करती हैं।

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