संसदीय व्यवस्था (Parliamentary System) – Complete Exam Oriented Notes,विशेषताएँ, तुलना, अनुच्छेद 74-75

भारतीय संविधान ने केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है। इसे ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ भी कहा जाता है क्योंकि यह ब्रिटिश प्रणाली से प्रेरित है। इस व्यवस्था में वास्तविक कार्यपालिका प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद होती है, जो लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।

अनुच्छेद 74 और 75 केंद्र में तथा अनुच्छेद 163 और 164 राज्यों में संसदीय व्यवस्था का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।

संसदीय व्यवस्था (Parliamentary System)

परिचय और विशेषताएं (Introduction & Features)

भारतीय संविधान के निर्माताओं ने अमेरिकी ‘अध्यक्षीय प्रणाली’ के बजाय ब्रिटिश ‘संसदीय प्रणाली’ को चुना। इसका मुख्य कारण था— उत्तरदायित्व (Accountability) और ‘शक्तियों के समन्वय’ (Cooperation of Powers)

मंत्रिपरिषद (PM + COM) वास्तविक कार्यपालिका संसद (लोकसभा) राष्ट्रपति सामूहिक उत्तरदायित्व व्यक्तिगत उत्तरदायित्व जनता निर्वाचन संसदीय शासन का कार्य तंत्र | By Vikas Singh | pdfnotes.in

संवैधानिक आधार और अर्थ

  • वेस्टमिंस्टर मॉडल: इसे ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ कहा जाता है क्योंकि यह लंदन के वेस्टमिंस्टर में स्थित ब्रिटिश संसद के स्वरूप पर आधारित है।
  • अनुच्छेद: केंद्र में संसदीय व्यवस्था अनुच्छेद 74 और 75 द्वारा, जबकि राज्यों में अनुच्छेद 163 और 164 द्वारा संचालित होती है।
  • मूल मंत्र: इसमें कार्यपालिका (सरकार) अपनी नीतियों और कार्यों के लिए विधायिका (संसद) के प्रति उत्तरदायी होती है।

💡  ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

संसदीय व्यवस्था ‘शक्तियों के समन्वय’ (Cooperation of Powers) पर टिकी है, न कि ‘शक्तियों के कठोर पृथक्करण’ पर। यहाँ विधायिका और कार्यपालिका एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं।

डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि हमने ‘स्थायित्व’ (Stability) की तुलना में ‘उत्तरदायित्व’ (Responsibility) को अधिक महत्व दिया है।

संसद (विधायिका) सामूहिक उत्तरदायित्व मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) नेतृत्व: प्रधानमंत्री (वास्तविक प्रमुख) सलाह एवं सहायता राष्ट्रपति (नाममात्र प्रमुख) संवैधानिक प्रमुख (De Jure) जनता निर्वाचन (LS) भारतीय संसदीय प्रणाली का सरल ढांचा | pdfnotes.in | By Vikas Singh

संसदीय प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)

भारतीय संसदीय व्यवस्था की वे बुनियादी पहचान जो इसे दुनिया की अन्य प्रणालियों से अलग बनाती हैं, निम्नलिखित हैं:

1. दोहरी कार्यपालिका (Dual Executive)

भारत में कार्यपालिका के दो प्रमुख होते हैं:

  • नाममात्र का प्रमुख (Nominal Head): राष्ट्रपति ‘राज्य का प्रमुख’ (Head of the State) होता है। उनकी शक्तियाँ केवल औपचारिक होती हैं।
  • वास्तविक प्रमुख (Real Head): प्रधानमंत्री ‘सरकार का प्रमुख’ (Head of the Government) होता है। वास्तविक सत्ता प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद में निहित होती है।

2. बहुमत प्राप्त दल का शासन (Majority Party Rule)

लोकसभा चुनाव के बाद जिस राजनीतिक दल को सबसे अधिक सीटें (बहुमत) प्राप्त होती हैं, राष्ट्रपति उसी दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। बहुमत न होने की स्थिति में ‘गठबंधन सरकार’ (Coalition Government) बनाई जाती है।

3. सामूहिक उत्तरदायित्व (Collective Responsibility)

यह संसदीय प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

“इसका अर्थ है कि सभी मंत्री एक साथ तैरते हैं और एक साथ डूबते हैं।” यदि लोकसभा सरकार के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ पारित कर दे, तो पूरे मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री सहित) को इस्तीफा देना पड़ता है।

4. दोहरी सदस्यता (Double Membership)

इस प्रणाली में एक मंत्री अनिवार्य रूप से विधायिका (संसद) और कार्यपालिका (सरकार) दोनों का सदस्य होता है।

  • यदि कोई व्यक्ति संसद सदस्य नहीं है और उसे मंत्री बनाया जाता है, तो उसे 6 महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) की सदस्यता लेनी अनिवार्य है।

5. प्रधानमंत्री का नेतृत्व (Leadership of PM)

प्रधानमंत्री इस पूरी शासन व्यवस्था का केंद्र बिंदु होता है। वह मंत्रिपरिषद का नेता, सदन का नेता और सत्ताधारी दल का नेता होता है। मंत्रियों के चयन से लेकर विभागों के बँटवारे तक, अंतिम शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है।

6. निचले सदन का विघटन (Dissolution of Lower House)

संसदीय व्यवस्था में कार्यपालिका के पास यह शक्ति होती है कि वह कार्यकाल पूरा होने से पहले लोकसभा को भंग करवा सके। प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति लोकसभा को विघटित कर सकते हैं और नए चुनावों की घोषणा की जा सकती है।

7. गोपनीयता (Secrecy)

प्रत्येक मंत्री को अपना पद संभालने से पहले ‘गोपनीयता की शपथ’ लेनी पड़ती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की रणनीतियाँ और महत्वपूर्ण निर्णय समय से पहले सार्वजनिक न हों।

विशेषताविवरण
नाममात्र का प्रमुखराष्ट्रपति
वास्तविक प्रमुखप्रधानमंत्री
उत्तरदायित्वकेवल लोकसभा के प्रति
नेतृत्वप्रधानमंत्री द्वारा
विपक्ष की भूमिकाअत्यंत महत्वपूर्ण (वैकल्पिक सरकार की व्यवस्था)
संसदीय व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं संसदीय प्रणाली 1. दोहरी कार्यपालिका (राष्ट्रपति vs PM) 2. बहुमत दल का शासन (Majority Party) 3. सामूहिक उत्तरदायित्व (Art 75 – लोकसभा) 4. दोहरी सदस्यता (विधायिका + कार्यपालिका) 5. PM का नेतृत्व (Power Center) 6. लोकसभा का विघटन (Dissolution) 7. गोपनीयता (Secrecy) (पद की शपथ) Visual Highlights by Vikas Singh | pdfnotes.in

रिवीजन टेबल (Quick Glance)

विशेषतामुख्य अर्थसंबंधित अनुच्छेद
नाममात्र प्रमुखराष्ट्रपति केवल सलाह पर कार्य करता है74
सामूहिक जवाबदेहीसरकार लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है75
नेतृत्वप्रधानमंत्री वास्तविक शक्तियों का केंद्र है75
विघटनलोकसभा को समय से पहले भंग किया जा सकता है85

राष्ट्रपति शासन बनाम संसदीय प्रणाली (Presidential vs Parliamentary System)

दुनिया में लोकतांत्रिक सरकारों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। भारत ने ब्रिटेन की ‘संसदीय प्रणाली’ को अपनाया है, जबकि अमेरिका में ‘राष्ट्रपति प्रणाली’ (अध्यक्षीय शासन) प्रचलित है।

1. प्रमुख अंतर: आधारभूत सिद्धांत

संसदीय व्यवस्था ‘शक्तियों के समन्वय और सहयोग’ (Cooperation) पर आधारित है, जबकि राष्ट्रपति व्यवस्था ‘शक्तियों के कठोर पृथक्करण’ (Strict Separation of Powers) पर आधारित है।

तुलनात्मक तालिका (Comparative Table)

आधारसंसदीय प्रणाली (भारत)राष्ट्रपति प्रणाली (अमेरिका)
कार्यपालिकादोहरी (नाममात्र और वास्तविक)एकल (राष्ट्रपति ही दोनों है)
उत्तरदायित्वकार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेहजवाबदेही का अभाव (विधायिका से स्वतंत्र)
सदस्यतामंत्री अनिवार्य रूप से संसद का सदस्यमंत्री विधायिका के सदस्य नहीं होते
कार्यकालअनिश्चित (विश्वास मत पर निर्भर)निश्चित (आसानी से नहीं हटाया जा सकता)
नेतृत्वप्रधानमंत्री का नेतृत्वराष्ट्रपति का नेतृत्व
विघटननिचले सदन (LS) को भंग किया जा सकता हैविधायिका (Congress) को भंग नहीं किया जा सकता
शक्तियाँशक्तियों का संलयन (Fusion)शक्तियों का पृथक्करण (Separation)

2. हमने संसदीय प्रणाली को ही क्यों चुना?

संविधान सभा में इस पर लंबी बहस हुई थी। अंततः निम्नलिखित कारणों से संसदीय व्यवस्था को चुना गया:

  1. व्यवस्था से परिचय: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत इस व्यवस्था से पहले ही परिचित हो चुका था।
  2. उत्तरदायित्व को वरीयता: डॉ. अंबेडकर के अनुसार, हमने ‘स्थायित्व’ (Stability) की तुलना में ‘दैनिक उत्तरदायित्व’ (Daily Accountability) को अधिक महत्व दिया।
  3. विधायिका-कार्यपालिका संघर्ष से बचाव: राष्ट्रपति प्रणाली में अक्सर राष्ट्रपति और विधायिका के बीच गतिरोध (Deadlock) पैदा होता है, जिससे संसदीय प्रणाली बचती है।
  4. भारतीय समाज की विविधता: भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने के लिए संसदीय व्यवस्था अधिक उपयुक्त है।
संसदीय (संलयन) विधायिका कार्यपालिका कार्यपालिका विधायिका का हिस्सा हैराष्ट्रपति (पृथक्करण) विधायिका कार्यपालिका दोनों स्वतंत्र और अलग हैंComparison Guide | By Vikas Singh | pdfnotes.in

संसदीय प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ (Features Table)

विशेषताविवरण
दोहरी कार्यपालिकाराष्ट्रपति (नाममात्र), प्रधानमंत्री (वास्तविक)
सामूहिक उत्तरदायित्वमंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी
बहुमत का शासनलोकसभा में बहुमत वाला दल सरकार बनाता
राजनीतिक एकरूपतासामान्यतः एक ही दल के मंत्री
द्वैध सदस्यतामंत्री = विधायिका + कार्यपालिका सदस्य
लोकसभा विघटनराष्ट्रपति PM की सलाह पर
गोपनीयताशपथ द्वारा
दैनिक उत्तरदायित्वप्रश्नकाल, शून्यकाल

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

संसदीय व्यवस्था में सरकार का अस्तित्व विधायिका के विश्वास पर टिका होता है, इसलिए इसे ‘अस्थायी’ माना जा सकता है (जैसे गठबंधन सरकारें)। वहीं, राष्ट्रपति व्यवस्था में कार्यकाल निश्चित होता है, इसलिए वह ‘स्थायी’ होती है लेकिन वहां सरकार की जवाबदेही कम हो जाती है।

संसदीय बनाम राष्ट्रपति प्रणाली – Comparative Table

आधारसंसदीय प्रणाली (भारत)राष्ट्रपति प्रणाली (अमेरिका)
कार्यपालिका का चयनविधायिका सेसीधे जनता से
उत्तरदायित्वविधायिका के प्रतिविधायिका के प्रति नहीं
कार्यकालअनिश्चित (विश्वास पर निर्भर)निश्चित
शक्तियों का सिद्धांतशक्तियों का समन्वयकठोर पृथक्करण
मंत्रियों की स्थितिसंसद सदस्यसंसद सदस्य नहीं
विघटन शक्तिलोकसभा भंग संभवकांग्रेस भंग नहीं
स्थायित्वकम (गठबंधन में)अधिक
नियंत्रणदैनिकसंस्थागत

भारतीय बनाम ब्रिटिश मॉडल और तकनीकी तथ्य

यद्यपि भारत ने ब्रिटिश ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ को अपनाया है, लेकिन भारतीय संसद ब्रिटिश संसद की कार्बन कॉपी नहीं है। यहाँ मुख्य अंतर दिए गए हैं:

1. भारत बनाम ब्रिटेन: प्रमुख अंतर

आधारभारतीय मॉडलब्रिटिश मॉडल
राज्य का प्रमुखगणतंत्र (Republic): यहाँ प्रमुख (राष्ट्रपति) निर्वाचित होता है।राजशाही (Monarchy): यहाँ प्रमुख (राजा/रानी) वंशानुगत होते हैं।
संसद की शक्तिसीमित: लिखित संविधान और ‘न्यायिक समीक्षा’ के कारण संसद की शक्ति सीमित है।संप्रभु (Sovereign): ब्रिटिश संसद सर्वोच्च है; वह कोई भी कानून बना सकती है।
प्रधानमंत्रीPM संसद के किसी भी सदन (LS या RS) का सदस्य हो सकता है।PM अनिवार्य रूप से निचले सदन (House of Commons) का होना चाहिए।
Shadow Cabinetभारत में ऐसी कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है।विपक्ष द्वारा ‘छाया मंत्रिमंडल’ (Shadow Cabinet) बनाया जाता है।
कानूनी जिम्मेदारीभारत में मंत्रियों की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं होती।ब्रिटेन में मंत्रियों की आधिकारिक कार्यों के लिए कानूनी जिम्मेदारी होती है।

2. महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य (Exam Facts)

  • अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य है (42वें और 44वें संशोधन के बाद)।
  • किचन कैबिनेट: यह एक अनौपचारिक संस्था है जिसमें प्रधानमंत्री के कुछ विश्वसनीय मंत्री और मित्र शामिल होते हैं, जो मुख्य निर्णय लेते हैं।
  • अविश्वास प्रस्ताव: यह केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है। यदि यह पारित हो जाए, तो मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

संसदीय व्यवस्था के गुण और दोष (Merits & Demerits)

किसी भी शासन प्रणाली की तरह, संसदीय व्यवस्था के भी अपने सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष हैं:

संसदीय व्यवस्था के गुण (Merits)

  1. विधायिका और कार्यपालिका के बीच सामंजस्य: चूंकि कार्यपालिका विधायिका का हिस्सा है, इसलिए कानूनों को पारित करने और नीतियों को लागू करने में टकराव कम होता है।
  2. उत्तरदायी सरकार: सरकार संसद के प्रति जवाबदेह रहती है। प्रश्नकाल, स्थगन प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरकार पर नियंत्रण रहता है।
  3. निरंकुशता पर रोक: शक्तियाँ एक व्यक्ति (जैसे राष्ट्रपति प्रणाली में) के बजाय पूरे मंत्रिपरिषद में विभाजित होती हैं, जिससे तानाशाही का खतरा कम होता है।
  4. वैकल्पिक सरकार की व्यवस्था: यदि सत्ताधारी दल बहुमत खो देता है, तो विपक्ष बिना नए चुनाव के सरकार बनाने का विकल्प पेश कर सकता है।

संसदीय व्यवस्था के दोष (Demerits)

  1. अस्थायी सरकार: सरकार का अस्तित्व लोकसभा के विश्वास पर निर्भर है। गठबंधन की राजनीति में सरकारें अक्सर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पातीं।
  2. नीतियों की निरंतरता का अभाव: सरकार बदलने के साथ ही पिछली सरकार की दीर्घकालिक योजनाएँ बदल दी जाती हैं।
  3. कैबिनेट की तानाशाही: यदि किसी दल को संसद में भारी बहुमत प्राप्त है, तो कैबिनेट (विशेषकर प्रधानमंत्री) बहुत अधिक शक्तिशाली हो जाता है।
  4. अविशेषज्ञों का शासन: मंत्री योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक लोकप्रियता के आधार पर चुने जाते हैं। अक्सर मंत्रियों को अपने विभाग की तकनीकी जानकारी नहीं होती।

💡 ‘एग्जाम अलर्ट’ (Exam Alert):

संसदीय व्यवस्था भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए वरदान साबित हुई है। भले ही इसमें ‘अस्थायित्व’ का जोखिम हो, लेकिन ‘जवाबदेही’ और ‘प्रतिनिधित्व’ के मामले में यह सर्वश्रेष्ठ है। स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने भी पुष्टि की थी कि भारत के लिए संसदीय प्रणाली ही सबसे उपयुक्त है।

भारत बनाम ब्रिटेन: संसदीय मॉडल में अंतर विशेषता भारतीय मॉडल (गणतंत्र) ब्रिटिश मॉडल (राजशाही) राज्य का प्रमुख निर्वाचित (राष्ट्रपति) वंशानुगत (राजा/रानी) संसद की स्थिति सीमित (लिखित संविधान) संप्रभु (सर्वोच्च) PM की सदस्यता LS या RS किसी से भी केवल निचला सदन Shadow Cabinet अस्तित्व में नहीं है विपक्ष की मुख्य पहचान Exam Quick Summary | pdfnotes.in | By Vikas Singh

निष्कर्ष (Conclusion)

भारतीय संसदीय प्रणाली केवल ब्रिटेन की नकल नहीं है, बल्कि इसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाला गया है। यह व्यवस्था पिछले सात दशकों से भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में लोकतंत्र की सफलता का आधार रही है।

निष्कर्ष के मुख्य बिंदु:

  • उत्तरदायित्व का संतुलन: यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि सरकार निरंकुश न हो और हर छोटे-बड़े निर्णय के लिए जनता (लोकसभा के माध्यम से) के प्रति जवाबदेह रहे।
  • संवैधानिक सर्वोच्चता: ब्रिटेन के विपरीत, भारत में संसद नहीं बल्कि ‘संविधान सर्वोच्च’ है, जिसे न्यायपालिका का संरक्षण प्राप्त है।
  • लचीलापन और स्थिरता: गठबंधन सरकारों के दौर में भले ही इसमें कुछ ‘अस्थिरता’ दिखी हो, लेकिन इसने हमेशा संकट के समय ‘वैकल्पिक सरकार’ का मार्ग प्रशस्त किया है।
  • अंतिम विचार: डॉ. बी.आर. अंबेडकर के शब्दों में, भारत ने ‘स्थायित्व’ से अधिक ‘उत्तरदायित्व’ को वरीयता दी। आज यह प्रणाली भारत की राजनीतिक संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुकी है, जो ‘चर्चा और विमर्श’ के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है।

“एक शिक्षक के तौर पर मेरा यह मानना है कि संसदीय प्रणाली की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका ‘दैनिक जवाबदेही’ (Daily Accountability) का गुण है। प्रश्नकाल और अविश्वास प्रस्ताव जैसे उपकरण सरकार को हमेशा सचेत रखते हैं, जो एक जीवंत लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है।”

अति महत्वपूर्ण वन-लाइनर्स

संवैधानिक आधार और परिचय

  1. भारत में केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है।
  2. केंद्र के लिए संसदीय व्यवस्था का प्रावधान अनुच्छेद 74 और 75 में है।
  3. राज्यों के लिए संसदीय व्यवस्था का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 163 और 164 है।
  4. संसदीय सरकार को कैबिनेट सरकार या ‘उत्तरदायी सरकार’ भी कहा जाता है।
  5. इसे ब्रिटिश मॉडल के आधार पर सरकार का ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ भी कहते हैं।
  6. संसदीय व्यवस्था में कार्यपालिका अपनी नीतियों के लिए विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है।
  7. भारतीय प्रणाली में दोहरी कार्यपालिका (नाममात्र और वास्तविक) होती है।
  8. राष्ट्रपति भारत का नाममात्र का कार्यकारी (De jure executive) होता है।
  9. प्रधानमंत्री भारत का वास्तविक कार्यकारी (De facto executive) होता है।
  10. राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है।

प्रमुख विशेषताएँ और कार्यप्रणाली

  1. संसदीय व्यवस्था की मुख्य विशेषता बहुमत प्राप्त दल का शासन है।
  2. बहुमत न मिलने पर गठबंधन सरकार का गठन किया जाता है।
  3. इस प्रणाली का मुख्य आधार सामूहिक उत्तरदायित्व (Collective Responsibility) है।
  4. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75)।
  5. सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है—”सभी मंत्री एक साथ तैरते हैं और एक साथ डूबते हैं।”
  6. मंत्रियों का व्यक्तिगत उत्तरदायित्व राष्ट्रपति के प्रति होता है।
  7. संसदीय व्यवस्था में मंत्रियों के बीच राजनीतिक एकरूपता पाई जाती है।
  8. इसमें दोहरी सदस्यता होती है—मंत्री विधायिका और कार्यपालिका दोनों का सदस्य होता है।
  9. कोई व्यक्ति बिना सांसद बने अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है।
  10. सरकार का वास्तविक नेतृत्व प्रधानमंत्री के हाथों में होता है।
  11. प्रधानमंत्री को अन्य मंत्रियों के बीच ‘समानों में प्रथम’ (Primus Inter Pares) कहा जाता है।
  12. प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकते हैं।
  13. मंत्री कार्यभार संभालने से पहले राष्ट्रपति के समक्ष गोपनीयता की शपथ लेते हैं।
  14. यह व्यवस्था ‘शक्तियों के समन्वय’ (Cooperation of Powers) के सिद्धांत पर आधारित है।
  15. कैबिनेट को संसदीय सरकार का ‘शक्ति केंद्र’ माना जाता है।
  16. डॉ. अंबेडकर के अनुसार, संसदीय व्यवस्था दैनिक आधार पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।
  17. अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को समय से पहले हटाया जा सकता है।
  18. प्रश्नकाल और शून्यकाल के माध्यम से विधायिका मंत्रियों पर नियंत्रण रखती है।
  19. शून्यकाल (Zero Hour) संसदीय प्रणाली में एक ‘भारतीय नवाचार’ है।
  20. विश्वास प्रस्ताव (Confidence Motion) भी भारतीय संसदीय परंपरा की ही देन है।

संसदीय बनाम राष्ट्रपति प्रणाली (तुलना)

  1. राष्ट्रपति प्रणाली (Presidential System) मुख्य रूप से अमेरिका में प्रचलित है।
  2. राष्ट्रपति प्रणाली ‘शक्तियों के कठोर पृथक्करण’ के सिद्धांत पर आधारित है।
  3. राष्ट्रपति प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी नहीं होती।
  4. राष्ट्रपति शासन में राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित होता है।
  5. अमेरिका में राष्ट्रपति अपने मंत्रियों (Kitchen Cabinet) का चयन कहीं से भी कर सकता है।
  6. राष्ट्रपति प्रणाली में मंत्री विधायिका (Congress) के सदस्य नहीं होते।
  7. संसदीय प्रणाली में अस्थायित्व का डर रहता है, जबकि राष्ट्रपति प्रणाली अधिक स्थायी है।
  8. राष्ट्रपति प्रणाली को ‘अउत्तरदायी सरकार’ भी कहा जाता है।
  9. संसदीय व्यवस्था में ‘तानाशाही’ की संभावना कम होती है।
  10. राष्ट्रपति प्रणाली में शक्तियां एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित होती हैं।
  11. संसदीय प्रणाली में निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
  12. राष्ट्रपति प्रणाली में राष्ट्रपति विधायिका को भंग नहीं कर सकता।
  13. भारत में स्वर्ण सिंह समिति ने संसदीय व्यवस्था को जारी रखने की सिफारिश की थी।

भारतीय बनाम ब्रिटिश मॉडल

  1. ब्रिटेन में राजशाही (वंशानुगत) है, जबकि भारत में गणतंत्र (निर्वाचित प्रमुख) है।
  2. ब्रिटिश संसद ‘संप्रभु’ है, जबकि भारतीय संसद की शक्तियां लिखित संविधान द्वारा सीमित हैं।
  3. ब्रिटेन में PM अनिवार्य रूप से निचले सदन का होना चाहिए, भारत में वह किसी भी सदन का हो सकता है।
  4. इन्दिरा गांधी और मनमोहन सिंह राज्यसभा सदस्य रहते हुए प्रधानमंत्री बने थे।
  5. ब्रिटेन में मंत्रियों की कानूनी जिम्मेदारी होती है, भारत में नहीं।
  6. ‘Shadow Cabinet’ (छाया मंत्रिमंडल) की व्यवस्था केवल ब्रिटेन में है, भारत में नहीं।
  7. भारत में कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है।
  8. अनुच्छेद 74 के तहत मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई सलाह की न्यायालय में जांच नहीं हो सकती।
  9. भारत में ‘प्रधानमंत्री’ का पद सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पद है।

संसदीय नियंत्रण और प्रक्रियाएं

  1. राज्यपाल राज्यों में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
  2. मुख्यमंत्री राज्यों में वास्तविक कार्यकारी होता है।
  3. लोकसभा जनता की इच्छा का और राज्यसभा राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
  4. अनुच्छेद 266 के अनुसार, बिना संसद की अनुमति के संचित निधि से पैसा खर्च नहीं किया जा सकता।
  5. लोक लेखा समिति (PAC) सरकार के खर्चों की जांच करने वाली मुख्य समिति है।
  6. दलबदल विरोधी कानून (52वां संशोधन) संसदीय व्यवस्था के स्थायित्व के लिए लाया गया।
  7. ‘गैलोटिन’ (Guillotine) का प्रयोग बजट चर्चा को अचानक समाप्त करने के लिए होता है।
  8. भारतीय संसदीय विशेषाधिकार अनुच्छेद 105 में दिए गए हैं।
  9. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
  10. राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है।
  11. राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकता।
  12. अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति एक आपातकालीन व्यवस्था है।
  13. अध्यादेश को संसद सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर अनुमोदित होना चाहिए।
  14. कैबिनेट सचिव भारत का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है।
  15. स्थायी कार्यपालिका (IAS/IPS) नीतियों को लागू करने में मंत्रियों की सहायता करती है।
  16. ‘प्रदत्त विधायन’ (Delegated Legislation) का अर्थ है कार्यपालिका द्वारा नियमों का विवरण भरना।
  17. अविश्वास प्रस्ताव के लिए कारण बताना आवश्यक नहीं है।
  18. निंदा प्रस्ताव किसी एक मंत्री या पूरे मंत्रिपरिषद के खिलाफ लाया जा सकता है।
  19. स्थगन प्रस्ताव किसी गंभीर और अविलंबनीय लोक महत्व के मामले पर चर्चा के लिए होता है।
  20. क्षेत्रीय दलों के उदय ने गठबंधन राजनीति में प्रधानमंत्री की शक्तियों को प्रभावित किया है।
  21. राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की भावी नीतियों का दस्तावेज होता है।
  22. धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) का गिरना सरकार का गिरना माना जाता है।
  23. बहुमत न होने पर ही राष्ट्रपति अपनी विवेकाधीन शक्तियों से प्रधानमंत्री चुनता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य

  1. भारत में संसदीय व्यवस्था का इतिहास 1853 के चार्टर एक्ट से शुरू माना जाता है।
  2. 1919 और 1935 के अधिनियमों ने भारत में संसदीय आधार को मजबूत किया।
  3. ब्रिटेन में PM को ‘तारों के बीच चंद्रमा’ कहा गया है।
  4. भारतीय संसदीय प्रणाली में ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) का प्रावधान है।
  5. संसदीय प्रणाली विविधतापूर्ण भारतीय समाज में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है।
विषयअनुच्छेदविवरण
केंद्र में संसदीय प्रणाली74राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करेगा
मंत्रियों की नियुक्ति75सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति
राज्यों में संसदीय प्रणाली163राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करेगा
मंत्रियों की नियुक्ति (राज्य)164सामूहिक उत्तरदायित्व विधानसभा के प्रति
संसद के विशेषाधिकार105संसदीय विशेषाधिकार
धन विधेयक110केवल लोकसभा में प्रस्तुत
अध्यादेश123राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति

Previous Year Questions (PYQ)

🔹 Q1. भारत में संसदीय प्रणाली की मुख्य विशेषता क्या है?(UPSC Prelims 2017)

(a) शक्तियों का कठोर पृथक्करण
(b) कार्यपालिका की विधायिका के प्रति उत्तरदायित्व
(c) राष्ट्रपति का प्रत्यक्ष निर्वाचन
(d) निश्चित कार्यकाल

उत्तर: (b)


🔹 Q2. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी है? (UPSC Prelims 2018)

(a) राष्ट्रपति
(b) लोकसभा
(c) राज्यसभा
(d) सुप्रीम कोर्ट

उत्तर: (b)


🔹 Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा संसदीय प्रणाली की विशेषता है? (UPPCS)

  1. दोहरी कार्यपालिका
  2. सामूहिक उत्तरदायित्व
  3. निश्चित कार्यकाल

(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


🔹 Q4. प्रधानमंत्री को ‘Primus Inter Pares’ क्यों कहा जाता है?(BPSC)

(a) वह राष्ट्रपति से ऊपर है
(b) वह मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष है
(c) वह समान मंत्रियों में प्रथम है
(d) वह संसद का प्रमुख है

उत्तर: (c)


🔹 Q5. भारत में संसदीय प्रणाली किस देश से प्रेरित है? (MPPSC)

(a) अमेरिका
(b) फ्रांस
(c) ब्रिटेन
(d) कनाडा

उत्तर: (c)

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Vikas Singh

लेखक: विकास सिंह

विकास सिंह 15+ वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले General Studies (GS) शिक्षक हैं। उन्होंने GS Faculty के रूप में कार्य किया है तथा दो बार UPSC Mains परीक्षा में सम्मिलित हो चुके हैं। वे भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, भूगोल और सामान्य विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में वे वाराणसी में अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और अपने YouTube चैनल Study2Study के माध्यम से शिक्षा जगत में योगदान दे रहे हैं।